एट्रीयल फिब्रिलेशन के लिए मेडिकेशंस में किन दवाओं का किया जाता है इस्तेमाल?

    एट्रीयल फिब्रिलेशन के लिए मेडिकेशंस में किन दवाओं का किया जाता है इस्तेमाल?

    हमारे शरीर में हार्ट का अहम योगदान होता है। अगर हार्ट ठीक प्रकार से काम करता है, तो हार्टबीट भी नॉर्मल होती है। किन्ही कारणों से अगर कोई समस्या हो गई है, तो हार्टबीट नॉर्मल न रहकर एब्नॉर्मल हो जाती है। एट्रीयल फिब्रिलेशन एरिथमिया का कॉमन टाइप माना जाता है। एरिथमिया की समस्या में हार्ट रिदम एब्नॉर्मल हो जाती है। सीडीसी की माने तो इस समस्या से करीब 12.1 मिलियन से अधिक लोग आने वाले वर्षों में ग्रसित हो जाएंगे। इस बीमारी से बचने के लिए बीमारी का सही समय पर डायग्नोस और ट्रीटमेंट बहुत जरूरी है। आज इस आर्टिकल के माध्यम से हम आपको एट्रीयल फिब्रिलेशन के लिए मेडिकेशंस (Common Medications For Atrial Fibrillation) के बारे में जानकारी देंगे और साथ ही इससे संबंधित अहम जानकारी भी देंगे। आइए जानते हैं पहले एट्रीयल फिब्रिलेशन के बारे में।

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    एट्रीयल फिब्रिलेशन (Atrial Fibrillation) क्या होता है?

    हमारा हार्ट चार्ट चेंबर से मिलकर बना होता है। ऊपर के दो चेंबर्स को एट्रिया कहते हैं। वहीं नीचे के 2 चेंबर को वेंट्रीकल्स कहा जाता है। हार्ट के चारों चेंबर बहुत ही महत्वपूर्ण होते हैं। हार्ट में कुछ कोशिकाएं ऐसी भी होती हैं, जो हृदय की धड़कन के लिए जिम्मेदार होती हैं। अगर यह किन्हीं कारणों से सही से काम नहीं करती हैं या फिर इनमें कुछ परेशानी आ जाती है, तो एट्रिया के अंदर का खून जम जाता है। जिसके कारण बहुत सारा खून जमा हो जाता है या खून के थक्के बन जाते हैं। खून के थक्के बनने की वजह से रुकावट आ जाती है और इस कारण से हार्टबीट भी अनियमित हो जाती है। यही कारण से हार्ट को भी ज्यादा काम करना पड़ता है।

    एट्रीयल फिब्रिलेशन के एक नहीं बल्कि कई कारण हो सकते हैं। कुछ दिल की बीमारियों के कारण, बढ़े हुए ब्लड प्रेशर के कारण, हार्ट फेलियर के कारण या फिर किसी फेफड़े की बीमारी के कारण, डायबिटीज, मोटापा या बढ़े हुए थायरॉइड के कारण भी एट्रीयल फिब्रिलेशन की समस्या हो सकती है। जो लोग अधिक मात्रा में कैफीन का सेवन करते हैं या शराब का सेवन करते हैं या जिनका ब्लड प्रेशर हमेशा अधिक रहता है, उनमें भी इस बीमारी के लक्षण देखने को मिल सकते हैं। अगर आपका ब्लड प्रेशर बढ़ा हुआ रहता है, तो आपको इसकी जांच करानी चाहिए। अगर आपको मोटापे की समस्या है, तो भी आपको डॉक्टर से जरूर जांच करानी चाहिए। समय पर बीमारी का ट्रीटमेंट कराने पर आप बड़ी बीमारी से बच सकते हैं। जानिए एट्रीयल फिब्रिलेशन के लिए मेडिकेशंस ( Common Medications For Atrial Fibrillation) में किन दवाओं का इस्तेमाल किया जाता है।

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    एट्रीयल फिब्रिलेशन के लिए मेडिकेशंस (Common Medications For Atrial Fibrillation)

    एट्रीयल फिब्रिलेशन के लिए मेडिकेशंस

    एट्रीयल फिब्रिलेशन के लिए मेडिकेशंस ( Common Medications For Atrial Fibrillation) हार्टबीट को रिदम में करने में मदद कर सकती हैं। कुछ मेडिकेशन इस बीमारी से बचा तो नहीं सकती है लेकिन इनके लक्षणों को कम करने में मदद करती हैं। एट्रीयल फिब्रिलेशन के लिए मेडिकेशंस में कुछ दवाएं हाय ब्लड प्रेशर को नॉर्मल करती हैं। अगर आप यह दवाएं ले रहे हैं, तो आपको ब्लड थिनर्स का इस्तेमाल करना पड़ सकता है क्योंकि ये ब्लड क्वॉट से बचाने का काम करती हैं। डॉक्टर जांच के बाद ही तय करते हैं कि आपको कौन सी मेडिसिंस देनी हैं।

    एट्रीयल फिब्रिलेशन के लिए मेडिकेशंस: हार्ट रेट मेडिकेशन

    अगर आपकी हार्टबीट बहुत ज्यादा है, तो ऐसे में आपको हार्टरेट मेडिकेशंस दी जाएंगी। यह दवाएं हार्ट रेट को कंट्रोल करने का काम करती है और साथ ही हार्ट रिदम को मैनेज करती हैं। इनमें कुछ दवाएं बीटा ब्लॉकर्स (Beta-blocker) जैसे कि एटेनोलोल, बेटैक्सोलोल, लेबेटालोल (ट्रेंडेट),बिसोप्रोलोल (जेबेटा) , कैलशियम चैनल ब्लॉकर्स (calcium channel blockers) जैसे कि वेरापामिल हाइड्रोक्लोराइड (verapamil hydrochloride) डिल्टियाजेम हाइड्रोक्लोराइड (diltiazem hydrochloride) ,डिजिटलिस ग्लाइकोसाइड (digoxin) आदि को शामिल किया जाता है।

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    एट्रीयल फिब्रिलेशन के लिए मेडिकेशंस: हार्ट रिदम के लिए दवाएं

    एट्रीयल फिब्रिलेशन इलेक्ट्रिकल प्रॉब्लम है, जो कि हार्टबीट की अनियमितता का कारण बनती है। इस बीमारी के कारण इलेक्ट्रिकल करंट पैटर्न को फॉलो नहीं कर पाता है और हार्ट कांपने लगता है और अनियमित रूप से धड़कता है। हार्ट रिदम को प्रॉपर करने के लिए एंटीएरिथमिया ड्रग का इस्तेमाल किया जाता है। इसमें सोडियम चैनल ब्लॉकर्स (sodium channel blockers) जैसे कि डिसोपाइरामाइड, मेक्सिलेटिन, क्विनिडाइन, प्रोकेनामाइड आदि का इस्तेमाल किया जाता है।
    वहीं पोटेशियम चैनल ब्लॉकर्स (potassium channel blockers) जैसे कि अमियोडेरोन (कॉर्डारोन, पैकरोन), ड्रोनडेरोन (मल्टीक), सोटालोल का इस्तेमाल किया जाता है। आप इस बारे में डॉक्टर से अधिक जानकारी ले सकते हैं।

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    ब्लड क्लॉट और स्ट्रोक को रोकने के लिए ब्लड थिनर (Blood thinners to prevent clots and stroke)

    जैसा कि मैं आपको पहले भी बताया कि एट्रीयल फिब्रिलेशन के कारण ब्लड एट्रिया में जमा होता रहता है और बाहर नहीं निकल पाता है। इस कारण से खून के थक्के बनने लगते हैं। सप्लाई भी इस कारण से ठीक प्रकार से नहीं हो पाती है। ब्लड क्लॉट के कारण स्ट्रोक की समस्या भी हो सकती है। ब्लड क्लॉट्स ना जमा हो, इसके लिए ब्लड थिनर्स मेडिसिंस का यूज किया जाता है, जो कि रक्त के थक्के को जमने से रोकने का काम करती है। ये मुख्य रूप से दो प्रकार की होती हैं। इनमें एंटीप्लेटलेट दवाएं और
    एंटीकॉग्युलेंट दवाएं शामिल होती हैं।

    एट्रीयल फिब्रिलेशन के लिए मेडिकेशंस: एंटीप्लेटलेट ड्रग्स (Antiplatelet drugs)

    एंटीप्लेटलेट ड्रग्स का इस्तेमाल ब्लड स्ट्रीम में प्लेटलेट के एक्शन में इंटरफेयर के लिए किया जाता है। प्लेटलेट्स ब्लड सेल्स होती है, जो ब्लीडिंग को रोकने का काम करती है और ब्लड क्लॉट बनाने का काम करती हैं। एंटीप्लेटलेट ड्रग्स (Antiplatelet drugs) में एंटीप्लेटलेट ड्रग्स (Antiplatelet drugs) एनाग्रेलाइड, एस्पिरिन (aspirin),क्लोपिडोग्रेल (Plavix), प्रसुग्रेल (prasugrel),ब्रिलिंटा (Brilinta) आदि शामिल हैं।

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    क्या एट्रीयल फिब्रिलेशन के लिए मेडिकेशंस लेने के बाद हो सकते हैं दुष्प्रभाव?

    एट्रीयल फिब्रिलेशन के लिए मेडिकेशंस ( Common Medications For Atrial Fibrillation) का इस्तेमाल करने से शरीर को फायदा पहुंचता है लेकिन साथ ही दुष्प्रभाव भी देखने को मिल सकते हैं। ऐसा जरूरी नहीं है कि आपको सभी दुष्प्रभाव का सामना करना पड़े, लेकिन कुछ साइड इफेक्ट दिखाई दे सकते हैं। जैसे कि सिर दर्द होना, थकान का एहसास, कब्ज की समस्या, पैरों में सूजन आ जाना, थकान अधिक लगना, कमजोरी का एहसास, मसूड़े से ब्लीडिंग होना, यूरिन में ब्लड आना, नाक से खून निकलना आदि समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। अगर आपको किसी भी प्रकार की समस्या का सामना करना पड़ रहा है, तो आप तुरंत इस बारे में डॉक्टर को बताएं और इसका समाधान करें। आप अपने डॉक्टर से विभिन्न प्रकार के दवाओं से होने वाले साइड इफेक्ट के बारे में जानकारी ले सकते हैं। कई बार दवाओं के अधिक साइड इफेक्ट भी दिखाई पड़ते हैं, तो इसलिए आपको पहले से ही इस बारे में जानकारी लेनी चाहिए।

    एट्रीयल फिब्रिलेशन के लक्षण जैसे कि सांस लेने में परेशानी होना, अचानक से बेहोशी आ जाना, सीने में दर्द होना, जल्दी थकान का एहसास होना आदि लक्षण दिखने पर आपको तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। अगर बीमारी को सही समय पर डायग्नोज कर लिया जाता है, तो डॉक्टर मेडिसिंस की मदद से बीमारी को कंट्रोल में रख सकते हैं। अगर आप सही समय पर डॉक्टर को नहीं दिखाएंगे, तो बीमारी बहुत अधिक बढ़ जाती है और स्ट्रोक का खतरा भी अधिक बढ़ जाता है। इस कारण से व्यक्ति की मृत्यु भी हो सकती है। आपको इस बारे में डॉक्टर से अधिक जानकारी लेनी चाहिए।

    इस आर्टिकल में हमने आपको एट्रीयल फिब्रिलेशन के लिए मेडिकेशंस ( Common Medications For Atrial Fibrillation) को लेकर जानकारी दी है। उम्मीद है आपको हैलो हेल्थ की दी हुई जानकारियां पसंद आई होंगी। अगर आपको इस संबंध में अधिक जानकारी चाहिए, तो हमसे जरूर पूछें। हम आपके सवालों के जवाब मेडिकल एक्स्पर्ट्स द्वारा दिलाने की कोशिश करेंगे।

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    लेखक की तस्वीर badge
    Bhawana Awasthi द्वारा लिखित आखिरी अपडेट 28/01/2022 को
    डॉ. प्रणाली पाटील के द्वारा मेडिकली रिव्यूड