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कार्डियोमायोपैथी में बीटा ब्लॉकर्स : इस तरह से है फायदेमंद, लेकिन डॉक्टर की सलाह के बिना लेने की न सोचें

कार्डियोमायोपैथी में बीटा ब्लॉकर्स : इस तरह से है फायदेमंद, लेकिन डॉक्टर की सलाह के बिना लेने की न सोचें

कार्डियोमायोपैथी हार्ट डिजीज से संबंधित एक ऐसी समस्या है जिसमें हार्ट के लिए शरीर के अन्य हिस्से तक ब्लड पंप करना मुश्किल हो जाता है। जिसके कारण आपको थकावट, सांस लेने में समस्या या हार्ट पैल्पिटेशन (Heart Palpitations) आदि हो सकती है। कार्डियोमायोपैथी समय के साथ बदतर हो सकती है और हार्ट फेलियर का कारण बन सकती है। यह बीमारी कई प्रकार की होती है जैसे डायलेटेड (Dilated ), हायपरट्रॉफिक (Hypertrophic) और रिस्ट्रिक्टिव कार्डियोमायोपैथी (Restrictive Cardiomyopathy)। यह एक गंभीर समस्या है जिसके उपचार में दवाईयां, सर्जरी और जीवनशैली में बदलाव आदि शामिल हैं। आज हम बात करने वाले हैं कार्डियोमायोपैथी में बीटा ब्लॉकर्स (Beta blockers in Cardiomyopathy) के बारे में। जानिए क्या हैं कार्डियोमायोपैथी में बीटा ब्लॉकर्स (Beta blockers in Cardiomyopathy) और कैसे किया जाता है इनका प्रयोग? सबसे पहले कार्डियोमायोपैथी के लक्षणों के बारे में जान लेते हैं।

कार्डियोमायोपैथी के लक्षण (Symptoms of Cardiomyopathy)

कार्डियोमायोपैथी की शुरुआती स्टेज में हो सकता है कि आपको कोई लक्षण नजर ना आएं, लेकिन इस स्थिति के एडवांस होने पर निम्नलिखित लक्षण नजर आ सकते हैं, जैसे:

अगर इस समस्या का उपचार न किया जाए तो इसके लक्षण बदतर हो सकते हैं। कुछ लोगों की स्थिति बहुत जल्दी बदतर हो सकती है। जबकि अन्य लोगों में इसके लक्षण समय के साथ खराब हो सकते हैं। इनमें से कोई भी लक्षण नजर आने पर डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है। अब जानते हैं कार्डियोमायोपैथी में बीटा-ब्लॉकर्स के बारे में।

और पढ़ें : कार्डियोमायोपैथी : इन तरीकों से बचाव संभव है इस हार्ट डिजीज से!

कार्डियोमायोपैथी में बीटा ब्लॉकर्स क्या हैं? (Beta blockers)

बीटा ब्लॉकर्स (Beta Blockers) को क्रॉनिक हार्ट फेलियर के उपचार के लिए सबसे बेहतरीन दवाई माना जाता है। अगर किसी को हार्ट अटैक हुआ हो तो डॉक्टर तुरंत बीटा ब्लॉकर्स (Beta Blockers) दे सकते हैं। इसके अलावा कार्डियोमायोपैथी में भी यह दवाई दी जा सकती है। अन्य स्थितियों में भी इसकी सलाह दी जा सकती है, जैसे:

बीटा ब्लॉकर्स (Beta Blockers) वो ड्रग्स हैं, जो हार्ट रेट को स्लो कर सकते हैं और इसे अधिक काम करने से बचाते हैं। वे हार्ट को एड्रेनालीन (Adrenaline) जैसे स्ट्रेस हॉर्मोन के प्रभाव को भी रोकते हैं। समय के साथ बीटा ब्लॉकर्स हार्ट पंप के काम को अच्छे से करने में मदद करते हैं। कार्डियोमायोपैथी में बीटा ब्लॉकर्स (Beta blockers in Cardiomyopathy) की सलाह कई अन्य स्थितियों में भी दी जा सकती है। डॉक्टर अन्य दवाईयों के साथ भी बीटा ब्लॉकर्स (Beta Blockers) को लेने के लिए कह सकते हैं ताकि हार्ट फेलियर के लक्षणों को सुधारा जा सके, जैसे एल्डोस्टेरॉन एंटागोनिस्ट्स (Aldosterone Antagonists), एंजियोटेंसिन रिसेप्टर नेप्रिलिसिन इंबिहिटर (Angiotensin receptor neprilysin inhibitor), एसजीएलटी2 इनहिबिटर्स (SGLT2 inhibitors) आदि। यह दवाईयां हार्ट डिजीज या फेलियर के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं और इससे कार्डियोवैस्क्युलर डिजीज (cardiovascular disease) की संभावना को कम किया जा सकता है।

और पढ़ें : बीटा ब्लॉकर्स (Beta Blockers) : जानिए, हार्ट फेलियर के ट्रीटमेंट में कैसे काम करती है यह दवाईयां?

कार्डियोमायोपैथी में बीटा ब्लॉकर्स (Beta blockers in Cardiomyopathy)

कार्डियोमायोपैथी में बीटा ब्लॉकर्स (Beta blockers in Cardiomyopathy) हार्ट को अधिक धीमे से और कम फोर्स से बीट करने का कारण बनती हैं। जिससे ब्लड प्रेशर कम होता है। बीटा ब्लॉकर्स वेन्स और आर्टरीज को खोलने में भी मदद करती हैं ताकि ब्लड फ्लो सही से हो सके। इससे भी हार्ट अच्छे से काम कर पाता है। कुछ बीटा ब्लॉकर्स (Beta Blockers) अधिकतर हार्ट को प्रभावित करते हैं, जबकि अन्य बीटा ब्लॉकर्स हार्ट और ब्लड वेसल्स दोनों को प्रभावित करते हैं। डॉक्टर रोगी की हेल्थ कंडिशंस (Health condition) के अनुसार ही उसे सही बीटा ब्लॉकर्स की सलाह दे सकते हैं। कार्डियोमायोपैथी में बीटा ब्लॉकर्स (Beta blockers in Cardiomyopathy) का उदाहरण इस प्रकार हैं:

  • एटेनोलोल (Atenolol) जो ब्रांड नेम टेनोर्मिन (Tenormin) से बाजार में उपलब्ध हैं।
  • एसेबुटोलोल (Acebutolol) को ब्रांड नेम सेक्टरल (Sectral) से जाना जाता है।
  • बीटाक्सोलोल (Betaxolol) जिसका ब्रांड नेम करलोन (Kerlone) है।
  • प्रोप्रानोलोल (Propranolol) को कई ब्रांड नेम्स जैसे हेमेंजियोल (Hemangeol) ,इंडरल एलए (Inderal LA), इंडरल (Inderal) आदि से जाना जाता है।
  • नेबिवोलोल (Nebivolol), ब्रांड नेम बायस्टोलिक (Bystolic) से बाजार में उपलब्ध है।
  • नेडोलोल (Nadolol) जिसका ब्रांड नेम कॉर्गार्ड (Corgard) है।

यह तो थे कार्डियोमायोपैथी में बीटा ब्लॉकर्स (Beta blockers in Cardiomyopathy) के कुछ उदाहरण हैं। लेकिन, इनका प्रयोग तभी करें जब डॉक्टर ने इनकी सलाह दी हों। अपनी मर्जी से इनका सेवन करना आपके लिए हानिकारक हो सकता है। इसके साथ ही इन्हें किस मात्रा में और किसी तरह से लेना है, जिस बारे में जानना भी बेहद जरूरी है। अब जानिए कि इन दवाईयों को कैसे लेना चाहिए?

और पढ़ें : डायलेटेड कार्डियोमायोपैथी में डिगोक्सिन का उपयोग बचा सकता है हार्ट फेलियर से!

कार्डियोमायोपैथी में बीटा ब्लॉकर्स का प्रयोग कैसे करना चाहिए?

डॉक्टर की सलाह के अनुसार ही इन दवाईयों को लें। आमतौर पर इन दवाईयों को आहार के साथ, सोते समय या सुबह लेनी की सलाह दी जा सकती है। लेकिन, आहार शरीर की बीटा ब्लॉकर्स (Beta Blockers) को एब्सॉर्ब करने की क्षमता को कम कर सकता है। इसके साथ ही इसके कुछ साइड-इफेक्ट भी हो सकते हैं। दवाई के लेबल पर दी डायरेक्शंस को फॉलो करें। बीटा ब्लॉकर्स का सेवन तब भी न करें जब आपका ब्लड प्रेशर बहुत लो हो या आपकी पल्स स्लो हो। पल्स स्लो होने से आपको जी मचलना और चक्कर आना जैसी समस्याएं हो सकती हैं। अगर आपको गंभीर लंग कंजेशन की समस्या है, तो डॉक्टर बीटा ब्लॉकर्स (Beta Blockers) की सलाह देने से पहले इस कंजेशन का उपचार करेंगे।

जब आप बीटा ब्लॉकर्स (Beta Blockers) ले रहे हों तो डॉक्टर आपको रोजाना आपकी पल्स रिकॉर्ड लेने की सलाह देंगे। अगर आपको पल्स सामान्य से कम हो या ब्लड प्रेशर लो हो तो तुरंत डॉक्टर की सलाह लें। डॉक्टर किस सलाह के बिना इस दवाई को लेना भी न छोड़ें चाहे अगर आपको पता भी हो कि आपको इससे कोई लाभ नहीं हो रहा है। जब आपने कार्डियोमायोपैथी में बीटा ब्लॉकर्स (Beta blockers in Cardiomyopathy) को लेना शुरू किया है तो आप हार्ट फेलियर के लक्षणों को अधिक बदतर महसूस कर सकते हैं। ऐसा होना सामान्य है क्योंकि हार्ट को इस दवाई के साथ एडजस्ट होने में कुछ समय लग सकता है। लेकिन अगर आप बहुत अधिक थकावट महसूस कर रहे हों तो तुरंत डॉक्टर की सलाह लें। आइए जानते हैं कार्डियोमायोपैथी में बीटा ब्लॉकर्स (Beta blockers in Cardiomyopathy) के साइड इफेक्ट्स के बारे में।

और पढ़ें : Alpha-beta blockers: जानिए हायपरटेंशन में अल्फा-बीटा ब्लॉकर्स के फायदे और नुकसान

कार्डियोमायोपैथी में बीटा ब्लॉकर्स के साइड इफेक्ट्स क्या हैं? (Side effects of Beta blockers)

कार्डियोमायोपैथी में बीटा ब्लॉकर्स (Beta blockers in Cardiomyopathy) को बेहद सुरक्षित और प्रभावी माना गया हैं। यही कारण है कि हार्ट डिजीज में इसकी सलाह दी जाती है। लेकिन, अन्य दवाईयों की तरह इसके भी कुछ साइड इफेक्ट्स हो सकते हैं। इसके सामान्य साइड इफेक्ट्स इस प्रकार हो सकते हैं:

थकावट और चक्कर आना (Fatigue and dizziness)

बीटा ब्लॉकर्स (Beta Blockers) हार्ट रेट को कम करते हैं। इससे लो ब्लड प्रेशर से जुड़े लक्षण भी बढ़ सकते हैं।

पुअर सर्क्युलेशन (Poor circulation)

जब कोई व्यक्ति बीटा ब्लॉकर्स (Beta Blockers) लेता है तो उसका हार्ट अधिक धीमे से बीट करता है। इससे ब्लड को निर्धारित अंग तक पहुंचने में मुश्किल होती है। इसके साथ ही आप अपने हाथों और पैरों का ठंडा होना और उनमें झुनझुनी भी महसूस कर सकते है।

गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल लक्षण (Gastrointestinal symptoms)

इन लक्षणों में पेट का खराब होना, जी मचलना, डायरिया या कब्ज आदि शामिल हैं। बीटा ब्लॉकर्स (Beta Blockers) को आहार के साथ लेने से पेट के लक्षणों में आराम मिल सकता है।

सेक्शुअल डिसफंक्शन (Sexual dysfunction)

कुछ लोग बीटा-ब्लॉकर्स को लेने के बाद इरेक्टाइल डिसफंक्शन (Erectile dysfunction) की समस्या का अनुभव कर सकते हैं। इस दवा का सबसे सामान्य दुष्प्रभाव यह है कि इससे ब्लड प्रेशर लो होता है।

कार्डियोमायोपैथी में बीटा ब्लॉकर्स (Beta blockers in Cardiomyopathy)

और पढ़ें : हायपरटेंशन में इस तरह से करें बीटा ब्लॉकर्स (Beta Blockers) का इस्तेमाल!

वजन का बढ़ना (Weight gain)

यह साइड इफेक्ट कुछ नॉनसेलेक्टिव बीटा ब्लॉकर्स (Beta Blockers) के कारण हो सकते हैं। हालांकि, डॉक्टर इस बारे में नहीं जानते हैं कि ऐसा क्यों होता है। लेकिन, ऐसा माना जाता है कि जब बीटा ब्लॉकर्स मेटाबोलिज्म को प्रभावित करता है तो वजन बढ़ सकता है।

कार्डियोमायोपैथी में बीटा ब्लॉकर्स (Beta blockers in Cardiomyopathy) के लेस कॉमन साइड इफेक्ट्स इस प्रकार हैं:

लेकिन कुछ स्थितियों में आपको तुरंत मेडिकल हेल्प कि जरूरत हो सकती है। यह साइड इफेक्ट्स इस प्रकार हैं:

  • हार्ट डिजीज या प्रॉब्लम के लक्षण : जैसे सांस लेने में समस्या, खांसी जो व्यायाम करने पर बदतर हो जाए, चेस्ट पेन, असामान्य हार्टबीट, टांगों या एड़ियों में सूजन
  • लंग प्रॉब्लम के लक्षण : जैसे सांस लेने में समस्या, छाती में कसाव, व्हीजिंग
  • लिवर प्रॉब्लम के लक्षण : जैसे पीलिया

बीटा ब्लॉकर्स (Beta Blockers) कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड्स लेवल (Triglyceride Levels) को प्रभावित करती हैं। इससे ट्राइग्लिसराइड्स लेवल (Triglyceride levels) बढ़ सकता है, जो ब्लड में फैट का एक प्रकार है। इससे गुड कोलेस्ट्रॉल लेवल में भी कमी आ सकती है। हालांकि यह बदलाव अस्थायी होते हैं। यू.एस. फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (U.S. Food and Drug Administration) के अनुसार बीटा ब्लॉकर्स को लेने के बाद इन लक्षणों के नजर आने पर डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है जैसे छाती में दर्द, सांस लेने में समस्या, हार्ट बीट का स्लो या असामान्य होना या हाथ, पैरों, टांगों में सूजन होना

और पढ़ें : हायपरट्रॉफिक कार्डियोमायोपैथी: हार्ट से जुड़ी इस समस्या के बारे में जानते हैं आप?

बीटा ब्लॉकर्स को लेते हुए किन चीजों का ध्यान रखना चाहिए?

कार्डियोमायोपैथी में बीटा ब्लॉकर्स (Beta blockers in Cardiomyopathy) को अन्य दवाईयों के साथ लिया जा सकता है जैसे डाययुरेटिक (Diuretic), ACE इन्हीबिटर (ACE inhibitor), एंजियोटेंसिन रिसेप्टर ब्लॉकर (Angiotensin receptor blocker) आदि। अगर आपको इस दवाई को लेते हुए कोई भी साइड इफेक्ट्स नजर आते हैं तो तुरंत मेडिकल हेल्प लें। बीटा ब्लॉकर्स (Beta Blockers) को लेते हुए इन चीजों का ध्यान रखना चाहिए:

  • डॉक्टर को पहले ही उन दवाईयों के बारे में बता दें जो आप पहले से ही ले रहे हैं। क्योंकि, हो सकता है कि कुछ दवाईयां बीटा ब्लॉकर्स (Beta Blockers) के साथ इंटरैक्ट करें।
  • यही नहीं कोई भी नई दवा, हर्ब्स या सप्लिमेंट्स को लेने से पहले भी डॉक्टर की सलाह लें।
  • आपको अपने स्वास्थ्य और मेडिकल कंडिशन के बारे में भी डॉक्टर को बता देना चाहिए, ताकि नेगेटिव साइड इफेक्ट्स से बचने में मदद मिल सके।
  • अगर आप प्रेग्नेंट हैं या ब्रेस्टफीडिंग करा रही हैं तो भी डॉक्टर को पहले ही बता दें
  • एल्कोहॉल, तंबाकू या अन्य कुछ ड्रग्स के साथ ही यह दवा इंटरैक्ट कर सकती हैं। ऐसे में अगर आप इनका सेवन भी करते हैं तो डॉक्टर को बता दें।

और पढ़ें : डायलेटेड कार्डियोमायोपैथी के उपचार में एवाब्राडीन के प्रयोग के बारे में जानें!

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उम्मीद है कि आप कार्डियोमायोपैथी में बीटा ब्लॉकर्स (Beta blockers in Cardiomyopathy) के बारे में सब जान गए होंगे। लेकिन, इन दवाईयों को कभी भी अपनी मर्जी से न लें। बल्कि, इन्हें तभी लें जब डॉक्टर ने सलाह दी हो। याद रखें कि यह दवाईयां उपचार का केवल एक हिस्सा हैं। इसलिए इसके साथ ही डॉक्टर की सलाह का पालन करना और अपनी जीवनशैली में बदलाव करना भी जरूरी है। जैसे हार्ट हेल्दी डायट का सेवन, नियमित व्यायाम, एल्कोहॉल को सीमित मात्रा में लें, तनाव से बचें आदि। इसके साथ ही नियमित जांच भी जरुरी है। यही नहीं अगर आपको बीटा ब्लॉकर्स (Beta Blockers) को लेने के बाद कोई साइड इफेक्ट नजर आता है तो देर न करें और तुरंत डॉक्टर की सलाह लें।

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सूत्र

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AnuSharma द्वारा लिखित आखिरी अपडेट 02/08/2021 को
डॉ. हेमाक्षी जत्तानी के द्वारा मेडिकली रिव्यूड
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