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पोर्टल हायपरटेंशन : कहीं इस हाय ब्लड प्रेशर का कारण लिवर की समस्याएं तो नहीं?

पोर्टल हायपरटेंशन : कहीं इस हाय ब्लड प्रेशर का कारण लिवर की समस्याएं तो नहीं?

पोर्टल वेन्स उन नसों को कहा जाता है जो पेट, पैंक्रियास और अन्य डायजेस्टिव ऑर्गन्स से लिवर तक खून को कैरी करती हैं। यह उन अन्य नसों से अलग होती हैं, जो हार्ट तक ब्लड को ले जाती हैं। वहीं हमारा लिवर ब्लड सर्कुलेशन में महत्वपूर्ण रोल निभाता है। यह हानिकारक चीजों और अन्य वेस्ट मटेरियल को फिल्टर करता है जो पाचन अंगों द्वारा ब्लडस्ट्रीम में जमा किया होता है। जब पोर्टल वेंन्स में ब्लड प्रेशर बहुत अधिक हो जाता है, तो उससे पोर्टल हायपरटेंशन (Portal Hypertension) की समस्या हो सकती है। पोर्टल हायपरटेंशन का मतलब है हिपेटिक पोर्टल सिस्टम में ब्लड प्रेशर का बढ़ना। यह समस्या गंभीर हो सकती है। हालांकि, अगर समय पर इनका निदान हो जाए, तो इसका उपचार संभव है। लेकिन इसका निदान भी इतना आसान नहीं होता। आइए जानते हैं पोर्टल हायपरटेंशन (Portal Hypertension) के बारे में और शुरुआत करते हैं इसके लक्षणों से।

पोर्टल हायपरटेंशन के लक्षण क्या हैं? (Symptoms of Portal Hypertension)

पोर्टल हायपरटेंशन (Portal Hypertension) की शुरुआत हमेशा उन खास लक्षणों से जुड़ी नहीं होती है जो यह पहचानते हैं कि लिवर में क्या हो रहा है। लेकिन, अगर आपको लीवर संबंधी कोई बीमारी है, जो सिरोसिस का कारण बनती है, तो पोर्टल हायपरटेंशन विकसित होने की संभावना अधिक होती है। पोर्टल हायपरटेंशन (Portal Hypertension) के मुख्य लक्षण और जटिलताएं इस प्रकार हैं :

व्हाइट ब्लड सेल काउंट (White Blood Cell Count) या प्लेटलेट का लेवल कम होना भी इस समस्या के लक्षण है। अब जानिए पोर्टल हायपरटेंशन (Portal Hypertension) के कारण क्या हैं?

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पोर्टल हायपरटेंशन के कारण (Causes of Portal Hypertension)

पोर्टल हायपरटेंशन (Portal Hypertension) एक दुर्लभ बीमार और इसकी संभावना बुजुर्गों को होने की अधिक संभावना होता है। इसका मुख्य कारण है सिरोसिस (Cirrhosis)। यह लिवर में होने वाली समस्या है। यह समस्या हेपेटाइटिस (Hepatitis) या अधिक शराब का सेवन करने जैसी कई स्थितियों के परिणामस्वरूप हो सकती है। इस रोग के अन्य कारण इस प्रकार हैं:

  • लिवर की ऑटोइम्यून डिजीज (Autoimmune Diseases) जैसे ऑटोइम्यून हेपेटाइटिस (Autoimmune Hepatitis), प्रायमरी स्क्लेरोसिंग कोलिन्जाइटिस (Primary Sclerosing Cholangitis) भी सिरोसिस और पोर्टल हायपरटेंशन (Portal Hypertension) का कारण बन सकती है।
  • जब लिवर को नुकसान होता है तो यह खुद हील करने की कोशिश करता है। इसके कारण स्कार टिश्यू (Scar Tissue) बन सकते हैं। बहुत अधिक स्कारिंग के कारण लिवर को अपना काम करने में मुश्किल होती है।

सिरॉसिस के अन्य कारण इस प्रकार हैं

  • नॉनएल्कोहॉलिक फैटी लिवर डिजीज (Nonalcoholic Fatty Liver Disease)
  • शरीर में आयरन बिल्डअप (Iron Buildup in Body)
  • सिस्टिक फाइब्रोसिस (Cystic Fibrosis)
  • लिवर इन्फेक्शन (Liver Infections)
  • कुछ खास दवाइयों से रिएक्शन होना जैसे मेथोट्रेक्सेट (Methotrexate)

सिरोसिस के कारण पोर्टल वेन की सामान्य रूप से स्मूथ इनर वाल्स (Smooth Inner Walls) अनियमित हो सकती हैं। इससे ब्लड फ्लो का रेजिस्टेंस बढ़ सकता है। नतीजतन, पोर्टल वेन्स में ब्लड प्रेशर बढ़ जाता है। पोर्टल हायपरटेंशन (Portal Hypertension) के कारण होने वाले रिस्क फैक्टर्स इस प्रकार हैं।

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पोर्टल हायपरटेंशन के रिस्क फैक्टर्स (Risk Factors of Portal Hypertension)

जिन लोगों को सिरोसिस की समस्या होती है उनमें पोर्टल हायपरटेंशन (Portal Hypertension) का खतरा बढ़ जाता है। यदि कोई व्यक्ति लम्बे समय से शराब का आदि है, तो उसे सिरोसिस का अधिक खतरा होता है। इसके अलावा इन स्थितियों में भी पोर्टल हायपरटेंशन का खतरा बढ़ सकता है:

  • अगर कोई ड्रग्स को इंजेक्ट करने के लिए नीडल का प्रयोग करता है
  • अगर अस्वच्छ स्थितियों में टैटू या पियर्सिंग कराई जाती है
  • अगर कोई व्यक्ति ऐसी जगह काम करता है जहां उसे इन्फेक्टेड नीडल्स या इंफेक्टेड ब्लड के संपर्क में आना पड़ता है
  • अगर किसी की मां को हेपेटाइटिस हो
  • अगर किसी व्यक्ति के कई पार्टनर्स के साथ असुरक्षित शारीरिक संबंध हों

अगर आपको इस समस्या का कोई भी लक्षण नजर आता है तो डॉक्टर की सलाह लें ताकि समय पर उपचार हो सके। अब जानते हैं कि किस तरह से होता है इस परेशानी का निदान?

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पोर्टल हायपरटेंशन का निदान कैसे किया जाता है? (Diagnosis of Portal Hypertension)

क्योंकि, पोर्टल हायपरटेंशन (Portal Hypertension) के लक्षण स्पष्ट नहीं होते हैं। ऐसे में इसका निदान करना भी आसान नहीं है। इसके लिए डॉप्लर अल्ट्रासाउंड (Doppler Ultrasound) मददगार साबित हो सकता है। पोर्टल वेन और खून इन नसों के माध्यम से कैसे फ्लो हो सकता है इसके बारे में अल्ट्रासाउंड बता सकता है। अगर अल्ट्रासाउंड के बाद भी कोई सही परिणाम नहीं आता है, तो सीटी स्कैन (CT Scan) कराया जाता है। इस समस्या के निदान के लिए जो दूसरे स्क्रीनिंग मेथड प्रयोग किए जाते हैं। वो है लिवर की इलास्टिसिटी (Elasticity of Liver) और इसके आसपास के टिश्यू को मापना। इस टेस्ट को इलास्टोग्राफी (Elastography) कहा जाता है।

अगर किसी व्यक्ति को गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल ब्लीडिंग (Gastrointestinal Bleeding) की समस्या होती है, तो रोगी को एंडोस्कोपिक टेस्ट (Endoscopic Test) से गुजरना पड़ सकता है। इस टेस्ट पतले और फ्लेक्सिबल डिवाइस का प्रयोग किया जाता है। जिसके एक सिरे पर कैमरा होता है ताकि डॉक्टर इंटरनल ऑर्गन्स को देख सकें।

पोर्टल वेन ब्लड प्रेशर को कैथेटर को इन्सर्ट कर के भी जांचा जा सकता है। जो ब्लड प्रेशर मॉनिटर (Blood Pressure Monitor) के साथ फिट होता है। इसे लिवर में वेंन में इन्सर्ट किया जाता है और मेज़रमेंट लिया जाता है। अब जानते हैं इस बीमारी के उपचार के बारे में।

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पोर्टल हायपरटेंशन का उपचार कैसे संभव है? (Treatment of Portal Hypertension)

पोर्टल हायपरटेंशन के प्रभावों को सही डायट (Right Diet), दवाइयों (Medications) , एंडोस्कोपिक थेरेपी (Endoscopic Therapy), सर्जरी (Surgery) या रेडियोलॉजी (Radiology) के माध्यम से मैनेज किया जा सकता है। एक बार जब ब्लीडिंग एपिसोड स्टेब्लाइज्ड हो जाता है, तो रोगी में लक्षणों की गंभीरता और लिवर कितने अच्छे तरीके से काम कर रहा है, इन के अनुसार ट्रीटमेंट विकल्पों की सलाह दी जा सकती है। जानिए इसके बारे में विस्तार से:

ट्रीटमेंट का पहला लेवल (First Level of Treatment)

अगर कोई व्यक्ति में वेरेसियल ब्लीडिंग (Variceal Bleeding) का निदान होता है, जो इस समस्या का एक लक्षण है। तो उसका उपचार एंडोस्कोपिक थेरेपी (Endoscopic Therapy) या दवाइयों से किया जा सकता है। इसके साथ ही रोगी के लिए खानपान और लाइफस्टाइल में बदलाव भी जरूरी है।

एंडोस्कोपिक थेरेपी (Endoscopic Therapy)

एंडोस्कोपिक थेरेपी में स्क्लेरोथेरेपी (Sclerotherapy) या बैंडिंग (Banding) शामिल है। स्क्लेरोथेरेपी वो प्रोसीजर है जिसमे एक सलूशन को ब्लीडिंग वेरिसिस में इंजेक्ट किया जाता है, ताकि ब्लीडिंग के जोखिम को कंट्रोल किया जा सके। बेन्डिंग वो प्रक्रिया है, जिसमें डॉक्टर रबर बैंड्स का प्रयोग करते हैं, ताकि हर एक वैरिक्स (Varix) जो एन्लार्जड वैन्स होती हैं, से ब्लड सप्लाई को ब्लॉक किया जा सके।

दवाइयां (Medication)

  • दवाइयां जैसे बीटा ब्लॉकर्स (Beta blockers) या नाइट्रेट्स (Nitrates ) को अकेले या अन्य दवाइयों के साथ कॉम्बिनेशन में या एंडोस्कोपिक थेरेपी के साथ दिया जा सकता है। ताकि वेरिक्स में दबाव को कम किया जा सके और रीकरंट ब्लीडिंग का जोखिम कम हो सके।
  • इसके साथ ही अन्य दवाइयों जैसे प्रोप्रानोलोल (Propranolol) और आइसोसोरबाइड (Isosorbide) पोर्टल वैन्स में प्रेशर को कम करने और रीकरंट ब्लीडिंग का जोखिम कम करने के लिए प्रयोग किया जाता है।
  • ड्रग लैकट्यूलोज (Drug Lactulose) का प्रयोग एन्सेफैलोपैथी (Encephalopathy) से जुड़े भ्रम और अन्य मेंटल बदलावों के उपचार के लिए प्रयोग की जाती है। इस दवा में रोगी में बोवेल मूवमेंट को बढ़ाने की क्षमता होती है।

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लाइफस्टाइल में बदलाव (Lifestyle Changes)

सही न्यूट्रिशनल हैबिट्स को मेंटेन करके और हेल्दी लाइफस्टाइल को बनाए रखने से लिवर फंक्शन को सही से काम करने में मदद मिल सकती है जिससे पोर्टल हायपरटेंशन (Portal Hypertension) का जोखिम कम हो सकता है। इन तरीकों को अपनाकर आप लिवर के फंक्शन को सुधार सकते हैं।

  • डॉक्टर की सलाह के बिना किसी भी दवा का सेवन न करें। क्योंकि, कुछ दवाइयां लिवर डिजीज को बदतर बना सकती हैं और रोगी द्वारा ली जाने वाली प्रिस्क्रिप्शन मेडिकेशन के सकारात्मक प्रभावों में हस्तक्षेप कर सकती हैं।
  • डॉक्टर के बताए अनुसार ही आहार का सेवन करें। अपने आहार में सोडियम यानी नमक का कम सेवन करें। एक डायटिशन आपका आपकी सही डायट के बारे में सही मार्गदर्शन कर सकते हैं।

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ट्रीटमेंट का सेकंड लेवल (Second Level of Treatment)

अगर ट्रीटमेंट के पहले लेवल में वेरेसियल ब्लीडिंग (variceal Bleeding) कंट्रोल नहीं होती है, तो इन नसों में दबाव को कम करने के लिए इन में से एक डीकंप्रेशन प्रक्रिया (Decompression Procedures) की आवश्यकता हो सकती है:

  • ट्रांसजुगुलर इंट्राहेपेटिक पोर्टोसिस्टमिक शंट (Transjugular Intrahepatic Portosystemic Shunt ): इस प्रक्रिया को TIPS के नाम से जाना जाता है। जो एक रेडियोलॉजिकल प्रक्रिया है। जिसमे स्टेंट जो एक ट्यूबूलर डिवाइस है,को लीवर के बीच में प्लेस किया जाता है।
  • डिस्टल स्प्लेनोरेनल शंट (Distal Splenorenal Shunt) : डिस्टल स्प्लेनोरेनल शंट को DSRS भी कहा जाता है। यह एक सर्जिकल प्रक्रिया है जो स्प्लेनिक वेंन (Splenic vain) को लेफ्ट किडनी से जोड़ती है। ताकि वेरेसेस में प्रेशर को कम किया जा सके और ब्लीडिंग को कंट्रोल किया जा सके।

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पोर्टल हायपरटेंशन के उपचार के लिए अन्य प्रक्रियाएं कौन सी हैं?

पोर्टल हायपरटेंशन (Portal Hypertension) के उपचार कुछ अन्य प्रोसेसेज का प्रयोग भी किया जा सकता है, जो इस प्रकार हैं:

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यह तो थी पोर्टल हायपरटेंशन (Portal Hypertension) के बारे में पूरी जानकारी। पोर्टल हायपरटेंशन लिवर हेल्थ में गिरावट के कारण होता है, लेकिन अगर रोगी स्वस्थ जीवनशैली विकल्पों का पालन करता है, तो वो पूरी तरह से रिकवर हो सकता है। इसके लिए रोगी का हेल्दी डायट लेना, सीमित मात्रा में शराब का सेवन, पर्याप्त नींद लेना, रोजाना व्यायाम, तनाव से बचाव आदि शामिल हैं। इसके साथ ही डॉक्टर द्वारा बताई दवाइयों का सेवन और डॉक्टर की सलाह का पूरी तरह से पालन करना भी अनिवार्य है। ताकि रोगी बिना किसी समस्या के क्वालिटी लाइफ जी सके।

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AnuSharma द्वारा लिखित आखिरी अपडेट 30/06/2021 को
डॉ. प्रणाली पाटील के द्वारा मेडिकली रिव्यूड