Normal vs Dangerous Heart Rate: नॉर्मल और डेंजर हार्ट रेट में फर्क क्या होता है, जानिए यहां!

    Normal vs Dangerous Heart Rate: नॉर्मल और डेंजर हार्ट रेट में फर्क क्या होता है, जानिए यहां!

    नॉर्मल और डेंजर हार्ट रेट में फर्क (Normal vs Dangerous Heart Rate) क्या होता है, ये प्रश्न अक्सर आपके मन में आता होगा। हार्ट हमारे शरीर का महत्वपूर्ण ऑर्गन माना जाता है। हृदय की मदद से ब्लड पंपिंग की प्रक्रिया पूरी होती है। ब्लड में न्यूट्रिएंट्स होते हैं, जो शरीर के विभिन्न भागों में पंपिंग की प्रक्रिया से पहुंचते हैं। अगर पंपिंग की प्रक्रिया धीमी या फिर तेज होती है, तो इससे पूरा शरीर प्रभावित होता है। हार्ट रेट से मतलब दिल की धड़कन की संख्या से होता है। हार्ट रेट हमेशा एक जैसी नहीं होती है। कभी ये कम होता है या फिर कभी यह ज्यादा भी हो जाती है। ऐसा शारीरिक गतिविधियों, इमोशन में बदलाव आदि के कारण भी हो सकता है। अगर आपका हृदय तेज गति से ज्यादातर समय धड़कता है, तो यह बीमारी के संकेत की ओर इशारा करता है। आज इस आर्टिकल में हम आपको नॉर्मल और डेंजर हार्ट रेट में फर्क बताएंगे। जानिए क्या हार्ट रेट में फर्क हमेशा बीमारी की ओर इशारा करता है।

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    नॉर्मल और डेंजर हार्ट रेट में फर्क (Normal vs Dangerous Heart Rate) क्या होता है?

    नॉर्मल और डेंजर हार्टरेट में फर्क (Normal vs Dangerous Heart Rate)

    जब आप तेज गति से चलते हैं या फिर भागते हैं तो आपने महसूस किया होगा कि आप की हार्टबीट बढ़ जाती है। अगर कोई व्यक्ति रिलेक्स यानी कि आराम की अवस्था में है, तो भी हार्ट रेट को मेजर किया जाता है। इसे रेस्टिंग हार्ट रेट कहा जाता है। एडल्ट में रेस्टिंग हार्ट रेट 60 से 100 बीट पर मिनट होता है। सभी व्यक्तियों में हार्ट रेट अलग हो सकता है यानी कि ये जरूरी नहीं है कि सभी व्यक्तियों में हार्ट एक ही गति से धड़के। कुछ हार्ट रेट डेंजर माने जाते हैं। आपको नॉर्मल रेस्टिंग हार्ट रेट और डेंजर हार्ट रेट में फर्क समझना चाहिए। जानिए नॉर्मल रेस्टिंग हार्ट रेट से क्या मतलब है?

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    नॉर्मल और डेंजर हार्ट रेट में फर्क: नॉर्मल रेस्टिंग हार्ट रेट (Normal resting heart rate)?

    उम्र के बढ़ने के साथ-साथ हृदय की गति भी परिवर्तित होती जाती है। अगर आप आराम कर रहे होते हैं, तो समय आपके शरीर में धीमी गति से रक्त की पंपिंग होती है। वही जब आप काम करने लगते हैं, तो हार्टबीट बढ़ जाती है। जो लोग किसी खास कंडीशन की दवा ले रहे होते हैं, उन दवाओं का असर भी हार्ट रेट पर पड़ सकता है। कुछ बीमारियों के कारण भी हार्ट बीट नॉर्मल नहीं रह पाती है। आराम करते समय जो हार्टबीट होती है, उसे ही नॉर्मल रेस्टिंग हार्ट रेट (Normal resting heart rate) कहा जाता है।

    अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन के मुताबिक, नॉर्मल रेस्टिंग हार्ट रेट (Normal resting heart rate) की दर 60 और 100 बीपीएम के बीच होती है। लेकिन कुछ लोगों की नॉर्मल रेस्टिंग हार्ट रेट (Normal resting heart rate) की दर 60 बीपीएम से कम हो सकती है और इसे भी सामान्य माना जाता है।

    जैसे-जैसे बच्चे बड़े होते हैं, उनकी नॉर्मल रेस्टिंग हार्ट रेट (Normal resting heart rate) बदल जाती है।

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    रेस्टिंग हार्ट रेट को ये फैक्टर्स कर सकते हैं प्रभावित!

    एनीमिया- एनीमिया की समस्या में रेड ब्लड सेल्स का लेवल कम हो जाता है। आपके शरीर को ऑक्सीजन युक्त रक्त की आपूर्ति करने के लिए हार्ट को तेजी से काम करना पड़ता है।

    तापमान (Temperature)- तापमान के अधिक या फिर गर्म होने पर आपकी हृदय गति थोड़ी बढ़ सकती है।

    दवा के साइडइफेक्ट्स – बीटा-ब्लॉकर्स (beta-blockers) जैसी दवाएं हृदय गति को कम कर सकती हैं। अगर आप ऐसी दवाएं ले रहे हैं, तो बेहतर होगा कि हार्ट रेट की जांच समय पर कराते रहे।

    इमोशंस और हार्ट रेट- यदि आप चिंतित या अधिक उत्साहित होते हैं, तो भी आपकी हृदय गति बढ़ सकती है।

    वजन- मोटापे से ग्रस्त लोगों में ज्यादा आराम करने से हृदय गति अधिक हो सकती है। ऐसा इसलिए है क्योंकि बॉडी को ब्लड की आपूर्ति करने के लिए हार्ट को अधिक मेहनत करनी पड़ती है।

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    स्मोकिंग के कारण हार्ट रेट में परिवर्तन- धूम्रपान करने वालों लोगों में आम लोगों की तुलना में हार्ट रेट अधिक होता है। स्मोकिंग छोड़ने से हार्ट रेट नॉर्मल हो सकता है। लेकिन इसमें डॉक्टर की मदद की जरूरत पड़ सकती है। स्मोकिंग के कारण हार्ट संबंधी समस्याओं का अधिक सामना करना पड़ता है।

    एंडोक्राइन या हॉर्मोनल एब्नॉर्मलटीज- कुछ हॉर्मोन का लेवल बिगड़ने पर भी हृदय गति प्रभावित हो सकती है। उदाहरण के लिए, बहुत ज्यादा थायरॉइड हॉर्मोन (हाइपरथायरायडिज्म) हृदय गति को बढ़ा सकता है। जबकि बहुत कम थॉयराइड हर्मोन हृदय गति को कम कर सकता है।

    बॉडी पुजिशन- जब आप बैठने के बाद खड़े होने की स्थिति में आते हैं, तो हार्ट रेट अस्थायी रूप से बढ़ जाता है।

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    नॉर्मल और डेंजर हार्ट रेट में फर्क: जानिए मैक्सिमम हार्ट रेट क्या होता है?

    एक्सरसाइज के दौरान आईडियल हार्ट की जानकारी मिलती है। आयु को 220 से घटाकर मैक्सिमम हार्ट रेट के बारे में जानकारी आ जाती है। 35 वर्षीय व्यक्ति के लिए मैक्सिमम हार्ट रेट की जानकारी ऐसे ली जाती है।
    220 – 35 वर्ष = 185 बीपीएम

    टारगेट हार्ट रेट ( target heart rate) क्या है?

    मॉडरेट इंटेंसिटी एक्टिविटी ही टारगेट हार्ट रेट ( target heart rate) होता है। 35 साल के बच्चों के लिए टारगेट हार्ट रेट 93 और 157 बीपीएम के बीच है।

    डेंजरस रेट से क्या मतलब होता है?

    कई बार नॉर्मल हार्ट रेट से आपको हार्ट की गति कम या फिर अधिक महसूस हुई होगी। इसे ही डेंजरस हार्ट रेट कहा जाता है। इस प्रकार के बीपीएम असंतुलन को ठीक नहीं माना जाता है। अगर डॉक्टर निगरानी नहीं कर रहे हैं, तो ये आपके लिए खतरनाक भी हो सकती है। जब हार्ट रेट बहुत तेज होता है, तो इसे टैचीकार्डिया ( tachycardia) कहा जाता है। वयस्कों के लिए तेज हार्ट रेट 100 बीपीएम से ऊपर होता है। जब आपकी हृदय गति बहुत धीमी होती है, तो इसे ब्रैडीकार्डिया कहा जाता है। ब्रैडीकार्डिया को आमतौर पर 60 बीपीएम से कम हार्ट रेट कहलाता है। आप हार्ट रेट की जांच खुद कर सकते हैं। 30 सेकंड के लिए अपनी नाड़ी गिनें और फिर उस संख्या को 2 से गुणा करके जो संख्या प्राप्त होगी, उसे हार्ट बीट के बारे में जानकारी मिलती है। हम उम्मीद करते हैं कि आपको नॉर्मल और डेंजर हार्ट रेट में फर्क पता चल गया होगा। कोई भी लक्षण अगर आपको दिखें, तो डॉक्टर से जांच जरूर कराएं।

    इस आर्टिकल में हमने आपको नॉर्मल और डेंजर हार्ट रेट में फर्क (Normal vs Dangerous Heart Rate) को लेकर जानकारी दी है। उम्मीद है आपको हैलो हेल्थ की दी हुई जानकारियां पसंद आई होंगी। अगर आपको इस संबंध में अधिक जानकारी चाहिए, तो हमसे जरूर पूछें। हम आपके सवालों के जवाब मेडिकल एक्स्पर्ट्स द्वारा दिलाने की कोशिश करेंगे।

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    सूत्र

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    Bhawana Awasthi द्वारा लिखित आखिरी अपडेट 14/01/2022 को
    डॉ. प्रणाली पाटील के द्वारा मेडिकली रिव्यूड