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हार्ट अटैक के रिस्क फैक्टर्स की इन 3 कैटेगरीज के बारे में जानते हैं आप?

    हार्ट अटैक के रिस्क फैक्टर्स की इन 3 कैटेगरीज के बारे में जानते हैं आप?

    आजकल हार्ट अटैक (Heart attack) से डेथ के मामले बढ़ते जा रहे हैं। अब हार्ट अटैक से मरने वालों की संख्या में सिर्फ बुजुर्ग नहीं है व्यस्क भी इसमें शामिल हो रहे हैं। हार्ट अटैक से बचने के लिए जरूरी है कि इसके रिस्क फैक्टर्स के बारे में जान लिया जाए और इनसे बचने का प्रयास किया जाए। इस लेख में आप हार्ट अटैक के रिस्क फैक्टर्स (Heart attack risk factors) के बारे में जानेंगे। बता दें कि किसी व्यक्ति के पास जितने अधिक जोखिम कारक होते हैं उनमें कोरोनरी आर्टरी डिजीज विकसित होने की संभावना उतनी ही अधिक होगी। यह हार्ट की आर्टरीज पर होने वाले बिल्ड अप के लिए उपयोग होने वाला टर्म है जो हार्ट अटैक का कारण बनता है।

    हार्ट अटैक के रिस्क फैक्टर्स (Heart attack risk factors)

    हार्ट अटैक के रिस्क फैक्टर्स को तीन कैटैगरी में समझा जा सकता है। जो निम्न प्रकार हैं।

    • मेजर रिस्क फैक्टर्स (Major risk factors) – रिसर्च के अनुसार ये फैक्टर्स हार्ट और ब्लड वेलस डिजीज के रिस्क को बढ़ाते हैं।
    • मॉडिफायबल रिस्क फैक्टर्स- कुछ रिस्क फैक्टर्स को दवाओं और लाइफस्टाइल में बदलाव करके संशोधित किया जा सकता है और नियंत्रित किया जा सकता है। उन्हें परिवर्तनीय जोखिम कारक (Modifiable risk factors) कह सकते हैं।
    • कंट्रिब्यूटिंग रिस्क फैक्टर्स (Contributing risk factors)- ये फैक्टर्स हार्ट डिजीज के बढ़ते जोखिम से जुड़े हैं, लेकिन उनका महत्व और व्यापकता अभी तक निर्धारित नहीं की गई है।

    अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन जीवन में जल्दी हृदय रोग की रोकथाम पर ध्यान केंद्रित करने की सलाह देता है। अपने जोखिम कारकों का आकलन करें और उन्हें कम रखने के लिए काम करें। जितनी जल्दी आप अपने जोखिम कारकों की पहचान और प्रबंधन करेंगे, आपके हार्ट हेल्दी लाइफ जीने की संभावना उतनी ही बेहतर होगी।

    चलिए अब हार्ट अटैक के रिस्क फैक्टर्स की तीनों कैटैगरीज को विस्तार से समझ लेते हैं।

    1.मेजर रिस्क फैक्टर्स जिन्हें बदला नहीं जा सकता

    व्यक्ति कुछ रिस्क फैक्टर्स के साथ जन्म लेता है जिन्हें बदला नहीं जा सकता। जितने ये रिस्क फैक्टर्स होंगे कोरोनरी हार्ट डिजीज के विकसित होने की आशंका उतनी ही बढ़ जाएगी। इन रिस्क फैक्टर्स को आप बदल नहीं सकते। इसलिए और जरूरी हो जाता है कि व्यक्ति उन रिस्क फैक्टर्स को मैनेज करे जिनमें बदलाव संभव है। हार्ट अटैक के रिस्क फैक्टर्स (Heart attack risk factors) जिन्हें में बदलाव नहीं किया जा सकता। वे निम्न हैं।

    उम्र बढ़ना (Aging)

    ज्यादातर लोग जो कोरोनरी हार्ट डिजीज से मरते हैं उनकी उम्र 65 या इससे ज्यादा होती है। महिला और पुरुष दोनों को हार्ट अटैक आ सकता है।

    हार्ट अटैक के रिस्क फैक्टर्स

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    मेल जेंडर (Male gender)

    पुरुषों में हार्ट अटैक का रिस्क महिलाओं की तुलना में ज्यादा होता है। वहीं पुरुषों को अटैक लाइफ की अर्ली स्टेज में आता है। जबकि महिलाओं में मेनोपॉज तक पहुंचने के बाद हार्ट डिजीज से होने वाली मौतों का आकंड़ा बढ़ता है।

    आनुवंशिकता (Heredity)

    जिन लोगों को हार्ट डिजीज होती हैं उनके बच्चों को इन बीमारियों को होने की संभावना और बढ़ जाती है। वहीं कुछ विशेष जातीयता के लोगों में हार्ट डिजीज होने का रिस्क ज्यादा होता है। जैसे कि अफ्रीकन अमेरिकन लोगों में हाय ब्लड प्रेशर और हार्ट डिजीज का रिस्क अधिक होता है। इसका कारण मोटापा और डायबिटीज की बीमारी है।

    2.हार्ट अटैक के रिस्क फैक्टर्स जिनको परिवर्तित, इलाज और कंट्रोल किया जा सकता है

    हृदय रोग के पारिवारिक इतिहास वाले अधिकांश लोगों में एक या अधिक अन्य रिस्क फैक्टर्स होते हैं। आप उम्र, जेंडर और नस्ल को नियंत्रित नहीं कर सकते, वैसे ही आप अपने परिवार के इतिहास को नियंत्रित नहीं कर सकते। इसलिए किसी भी परिवर्तनीय जोखिम कारकों का इलाज और नियंत्रण करना और भी महत्वपूर्ण है। जो निम्न हैं।

    हार्ट अटैक के रिस्क फैक्टर्स

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    धूम्रपान (Smoking)

    स्मोकिंग करने वाले लोगों में कोरोनरी हार्ट डिजीज का रिस्क स्मोकिंग न करने वालों की तुलना में अधिक है। कोरोनरी हार्ट डिजीज के मरीजों में अचानक कार्डिएक डेथ के लिए सिगरेट धूम्रपान एक शक्तिशाली स्वतंत्र जोखिम कारक है। कोरोनरी हार्ट डिजीज के जोखिम को बढ़ाने के लिए सिगरेट धूम्रपान अन्य जोखिम कारकों के साथ भी संपर्क करता है। अन्य लोगों के धुएं के संपर्क में आने से धूम्रपान न करने वालों के लिए भी हृदय रोग का खतरा बढ़ जाता है। यह हार्ट अटैक के रिस्क फैक्टर्स (Heart attack risk factors) में से प्रमुख है।

    हाय ब्लड कोलेस्ट्रॉल (Blood cholesterol)

    जैसे ही ब्लड कोलेस्ट्रॉल बढ़ता है वैसे ही कोरोनरी हार्ट डिजीज का रिस्क बढ़ता है। जब दूसरे रिस्क फैक्टर्स जैसे कि हाय ब्लड प्रेशर और स्मोकिंग पहले से होते हैं तो रिस्क और भी बढ़ जाता है। किसी व्यक्ति का कोलेस्ट्रॉल लेवल उम्र, सेक्स, अनुवांशिकता और डायट से प्रभावित होता है।

    टोटल कोलेस्ट्रॉल

    टोटल कोलेस्ट्रॉल का स्कोर HDL+LDL+20% ट्राइग्लिसराइड लेवल को कैल्क्युलेट करके निकाला जाता है।

    लो डेंसिटी लिपोप्रोटीन या बैड कोलेस्ट्रॉल

    कम एलडीएल कोलेस्ट्रॉल का स्तर हृदय स्वास्थ्य के लिए अच्छा माना जाता है। लाइफ स्टाइल फैक्टर्स जैसे कि डायट में हाय सैचुरेटेड और ट्रांस फैट का सेवन एलडीएल कोलेस्ट्रॉल को बढ़ा सकता है।

    और पढ़ें: ट्रोपोनिन लेवल्स टेस्ट बता सकता है हार्ट अटैक के बारे में!

    हाय डेंसिटी लिपोप्रोटीन या गुड कोलेस्ट्रॉल

    एचडीएल (अच्छे) कोलेस्ट्रॉल का उच्च स्तर आमतौर पर बेहतर होता है। कम एचडीएल कोलेस्ट्रॉल हृदय रोग के लिए उच्च जोखिम में डालता है। उच्च रक्त ट्राइग्लिसराइड्स वाले लोगों में आमतौर पर एचडीएल कोलेस्ट्रॉल भी कम होता है।

    ट्राइग्लिसराइड्स

    ट्राइग्लिसराइड्स शरीर में वसा का सबसे आम प्रकार है। कम एचडीएल कोलेस्ट्रॉल या उच्च एलडीएल कोलेस्ट्रॉल के साथ उच्च ट्राइग्लिसराइड स्तर एथेरोस्क्लेरोसिस का कारण बनता है। यह धमनी की दीवारों के अंदर फैटी डिपोजिट का बिल्डअप होता है जो हार्ट अटैक और स्ट्रोक के जोखिम को बढ़ाता है।

    हाय ब्लड प्रेशर (High Blood pressure)

    हार्ट अटैक के रिस्क फैक्टर्स जिनमें परिवर्तन किया जा सकता है उनमें से एक हाय ब्लड प्रेशर है। हाय ब्लड प्रशेर हृदय का वर्कलोड बढ़ा देता है। जिसकी वजह से हार्ट मसल्स मोटी और सख्त हो जाती हैं। हृदय की मांसपेशियों का सख्त होना सामान्य नहीं है और यह हृदय के असामान्य रूप से कार्य करने का कारण बनता है। यह स्ट्रोक, हार्ट अटैक, किडनी फेलियर और कंजेस्टिव हार्ट फेलियर के जोखिम को भी बढ़ाता है।

    शारीरिक रूप से निष्क्रिय रहना (Physically inactive)

    निष्क्रिय जीवनशैली कोरोनरी हार्ट डिजीज के लिए एक जोखिम कारक है। नियमित रूप से मध्यम से तेज शारीरिक गतिविधि हृदय रोग के जोखिम को कम करने में मदद करती है। शारीरिक गतिविधि रक्त कोलेस्ट्रॉल, मधुमेह और मोटापे को नियंत्रित करने में मदद कर सकती है। यह कुछ लोगों में रक्तचाप को कम करने में भी मदद कर सकती है। हार्ट अटैक के रिस्क फैक्टर्स (Heart attack risk factors) में से एक इस रिस्क फैक्टर को आसानी से कम किया जा सकता है।

    मोटापा (Obesity)

    हार्ट अटैक के रिस्क फैक्टर्स में मोटापा या ओवरवेट होना परेशानी को ज्यादा बढ़ा सकता है। खासकर अगर फैट कमर के आसपास हो। ऐसे में हार्ट डिजीज और स्ट्रोक का खतरा अधिक होता है। भले ही व्यक्ति के पास अन्य कोई जोखिम कारक ना हो। उच्च रक्तचाप, उच्च कोलेस्ट्रॉल या उच्च रक्त शर्करा जैसे हृदय रोग के जोखिम कारकों वाले अधिक वजन और मोटापे से ग्रस्त वयस्क वजन कम करने के लिए जीवनशैली में बदलाव कर सकते हैं और ट्राइग्लिसराइड्स, रक्त ग्लूकोज, एचबीए1सी के विकसित होने के रिस्क को कम कर सकते हैं।

    डायबिटीज (Diabetes)

    डायबिटीज गंभीर रूप से कार्डियोवैस्कुलर डिजीज के रिस्क को बढ़ाने का काम करती है। यहां तक कि जब ग्लूकोज का स्तर नियंत्रण में होता है, तब भी मधुमेह हृदय रोग और स्ट्रोक का खतरा बढ़ा देता है। यदि रक्त शर्करा को अच्छी तरह से नियंत्रित नहीं किया जाता है तो जोखिम और भी अधिक हो जाता है। हार्ट अटैक के रिस्क फैक्टर्स में डायबिटीज प्रमुख है।

    3.हार्ट डिजीज के रिस्क को बढ़ाने वाले दूसरे फैक्टर्स

    हार्ट अटैक के रिस्क फैक्टर्स

    हार्ट अटैक के रिस्क फैक्टर्स (Heart attack risk factors) जिनको मैनेज किया जा सकता है या जिनमें परिवर्तन किया जा सकता है उनके बारे में जानने के बाद उन कारकों के बारे में भी जान लें जो हार्ट अटैक के रिस्क को बढ़ाने में योगदान देते हैं:

    तनाव (Stress)

    तनाव के प्रति व्यक्तिगत प्रतिक्रिया हार्ट अटैक के लिए एक योगदान कारक हो सकती है। कुछ वैज्ञानिकों ने कोरोनरी हृदय रोग के जोखिम और किसी व्यक्ति के जीवन में तनाव के साथ-साथ उनके स्वास्थ्य व्यवहार और सामाजिक आर्थिक स्थिति के बीच संबंध का उल्लेख किया है। ये कारक स्थापित जोखिम कारकों को प्रभावित कर सकते हैं। उदाहरण के लिए, तनाव में रहने वाले लोग जरूरत से ज्यादा खा सकते हैं, धूम्रपान करना शुरू कर सकते हैं।

    शराब (Alcohol)

    हार्ट अटैक के रिस्क फैक्टर्स में अन्य योगदान देने वाले फैक्टर्स में शराब का उपयोग शामिल है। बहुत अधिक शराब पीने से रक्तचाप बढ़ सकता है और कार्डियोमायोपैथी, स्ट्रोक, कैंसर और अन्य बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। यह उच्च ट्राइग्लिसराइड्स में भी योगदान दे सकता है, और अनियमित दिल की धड़कन पैदा कर सकता है। इसके अतिरिक्त, अत्यधिक शराब का सेवन मोटापे, शराब, आत्महत्या और दुर्घटनाओं में योगदान देता है।

    और पढ़ें: Tips to follow after Heart Attack: जानिए हार्ट अटैक के बाद सावधानी बरतने के लिए किन 6 बातों का रखना ख्याल!

    डायट और न्यूट्रिशन (Diet and Nutrition)

    कार्डियोवैस्कुलर डिजीज से लड़ने के लिए हेल्दी डायट सबसे अच्छा हथियार है। पोषक तत्वों से भरपूर खाद्य पदार्थ चुनें, जिनमें विटामिन, खनिज, फायबर और अन्य पोषक तत्व हों, लेकिन पोषक तत्वों की कमी वाले खाद्य पदार्थों की तुलना में कैलोरी में कम हों। ऐसा आहार चुनें जो सब्जियों, फलों और साबुत अनाज का उपयोग किया गया हो। एक हार्ट हेल्दी डायट में कम वसा वाले डेयरी प्रोडक्ट, चिकन, मछली, फलियां, नट और नॉनट्रापिकल वेजिटेबल ऑयल भी शामिल हैं। मिठाई, मीठे पेय और रेड मीट का सेवन सीमित करना सुनिश्चित करें। जिस प्रकार हेल्दी डायट हार्ट को हेल्दी रखने में मदद करती है वैसे ही अनहेल्दी डायट इसके कार्य को मुश्किल बनाती है और हार्ट अटैक के रिस्क को बढ़ाती है।

    उम्मीद करते हैं कि आपको हार्ट अटैक के रिस्क फैक्टर्स (Heart attack risk factors) से संबंधित जरूरी जानकारियां मिल गई होंगी। अधिक जानकारी के लिए एक्सपर्ट से सलाह जरूर लें। अगर आपके मन में हार्ट अटैक के रिस्क फैक्टर्स के बारे में अन्य कोई सवाल हैं तो आप हमारे फेसबुक पेज पर पूछ सकते हैं। हम आपके सभी सवालों के जवाब आपको कमेंट बॉक्स में देने की पूरी कोशिश करेंगे।

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    सूत्र

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    Manjari Khare द्वारा लिखित आखिरी अपडेट 20/06/2022 को
    डॉ. प्रणाली पाटील के द्वारा मेडिकली रिव्यूड
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