मैं रोजाना की तरह ही अपनी बेटी को स्कूल छोड़ने गई थी लेकिन वो दिन कुछ अलग था मेरे लिए। जब मैंने अपनी बेटी को स्कूल के गेट के पास छोड़ा, तो देखा कि सामने ऑटिज्म से पीड़ित एक बच्ची खड़ी थी। वो बच्ची खेल नहीं रही थी, पेड़ पर किसी चीज को लगातार देखे जा रही थी। कुछ पल के लिए उसने मुझे देखा और फिर नजरे घुमा लीं। शायद उसके मन में ख्याल आया होगा कि मैं उसे भला क्यों इतने ध्यान से उसे देख रही हूं? वो क्या सोच रही थी, ये मेरे लिए जान पाना मुश्किल था लेकिन जिस तरह से आप और मैं सामने वाले व्यक्ति के असामान्य व्यवहार से कुछ विचलित हो जाते हैं, ऑटिज्म से पीड़ित बच्चों को भी तो ठीक वैसा ही महसूस होता होगा? मेरे मन में ये ख्याल आया कि आखिर ऑटिज्म की बीमारी होने पर बच्चे को कैसा महसूस होता होगा जब उनसे कोई अजीब या खराब व्यवहार करें? आपने ऑटिज्म (Autism) से संबंधित खबरे जरूर पढ़ी होंगी लेकिन आज हम आपको उन भावनाओं के बारे में बताएंगे, जो ऑटिज्म से पीड़ित एक बच्चा अक्सर महसूस करता है। हम दूसरों से क्या चाहते हैं, ये हमारे लिए बताना और समझाना आसान होता है लेकिन ऑटिस्टिक बच्चे (Autistic child) के नजरिये से उन्हें क्या चाहिए या फिर वो कैसा व्यवहार चाहते हैं, इस बारे में कम ही लोग सोचते हैं।
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बस प्यार और हमदर्दी ही तो चाहिए हमें!
एक ही सूरज है सबके लिए,
वही धूप देता है, वहीं छांव करता है
अगर आप धूप में हैं तो इन बच्चों पर छांव कीजिए
और आप छांव में हैं तो इन बच्चों को धूप आने दीजिए
ये विकलांग बच्चे, मोहताज नहीं, जरूरतमंद हैं
हमदर्दी और प्यार के
सूरज की पहली रोशनी…आरुषि यही करती है।
गुलजार साहब की ये पंक्तियां बहुत कुछ कह देती है, जो अक्सर हमारे समाज के लोग नहीं सोच पाते हैं। गुलजार साहब ऑटिज्म एनजीओ से जुड़े हैं और अक्सर ऐसे बच्चों की मन की बातों को शायरी के माध्यम से व्यक्त करते हैं। भले ही कोई हम धन दौलत न दें लेकिन दो चार प्यार के बोल बोलता है, तो मन को सुकून मिलता है। ऑटिस्टिक बच्चे (Autistic child) भी हमसे ये उम्मीद करते हैं कि जब भी वो अचानक आपके सामने आएं, तो उन्हें छुआछूत का रोगी समझ कर दूर न भागा जाए और न ही खुद के बच्चे को दूर किया जाए बल्कि उन्हें प्यार करें और दुलारे ताकि वो भी नॉर्मल बच्चे की तरह महसूस कर सकें। थोड़ा सा प्यार और हमदर्दी उस दवा का काम करती है, जो डॉक्टर पर्चे पर नहीं लिख पाते हैं।
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आपको पता होना चाहिए बीमारी के बारे में (Autism)
ऑटिस्टिक बच्चे आपसे उम्मीद करते हैं कि आपको उनकी बीमारी के बारे में जानकारी होनी चाहिए। ये बात इसलिए भी जरूरी हो जाती है ताकि जब आपका नॉर्मल बच्चा ऑटिस्टिक बच्चे (Autistic child) के साथ पढ़े, तो आपको किसी तरह की दिक्कत महसूस न हो। ऐसे बच्चों को प्यार की जरूरत होती है न कि लोगों द्वारा किए गए बुरे व्यवहार और भेदभाव की। डॉ. जिनाल उनाडकट शाह बच्चों की डॉक्टर (Pediatrician) हैं। हैलो स्वास्थ्य से बात करते हुए डॉ. जिनाल उनाडकट ने कहा, “अगर आपके घर में ऑटिस्टिक बच्चा है, तो आपको उसके साथ बेहत प्यार से रहना चाहिए और अच्छा व्यवहार करना चाहिए। ऑटिस्टिक बच्चे (Autistic child) का वैसा विकास नहीं हो पाता है, जैसा कि होना चाहिए। यानी उम्र के साथ विकास न हो पाना इस बीमारी का लक्षण है। ऑटिज्म अवेयरनेस सभी के लिए जरूरी है। ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर (Autism Spectrum Disorder) बच्चों में भिन्न हो सकता है।” अगर आप बीमारी के बारे में जानते हैं, तो जब अगली बार आप ऑटिस्टिक बच्चे से मिलेंगे, तो आपके मन में भेदभाव वाला व्यवहार नहीं आएगा और आप उसे भी अन्य बच्चे की तरह ही प्यार करेंगे।
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हम एक बार बोलें या दो बार, प्लीज समझिए!
मान लीजिए कि आपका गला बैठ गया है और आपको अपनी बात बताने के लिए कई बार बोलना पड़ रहा है। अगर ऐसे में सामने वाला उठ कर चला जाए या आपकी बात ही न सुने, तो कैसा लगेगा? यकीनन बहुत बुरा लेगा और आप खुद को कुछ ही पलों में अकेला समझने लगेंगे। ऑटिस्टिक बच्चों के साथ भी ऐसा ही होता है। ऑटिस्टिक बच्चे (Autistic child) को स्पीच डिसऑर्डर (Speech disorder) की समस्या होती है, जिसके कारण वो एक या दो बार में अपनी बात नहीं समझा पाते हैं। वो आपसे चाहते हैं कि आप उनकी बात को तब तक सुनें, जब तक वो उसे सही से कह न पाएं। हम जानते हैं कि इसके लिए धैर्य की जरूरत होती है लेकिन आप और हम ही तो हैं, जो ऐसे बच्चों की हिम्मत बढ़ा सकते हैं और उन्हें अकेलेपन से दूर कर सकते हैं।
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हममें काबिलियत है, दीन हीन न समझें!
ऑटिज्म से पीड़ित बच्चे को देखकर अक्सर लोगों के मन में ये विचार आता है कि ये भविष्य में कुछ कर नहीं पाएगा, या फिर इसके अंदर कोई काबलियत नहीं है। ऑटिस्टिक बच्चे आपसे उम्मीद करते हैं कि आप उन्हें देखकर ऐसे विचार मन में बिल्कुल न लाएं। सभी ऑटिस्टिक बच्चों में अलग प्रतिभा होती है। जिस तरह से नॉर्मल बच्चे की प्रतिभा को पहचान कर उसे निखारा जाता है, ठीक वैसे ही ऑटिस्टिक बच्चों (Autistic children) को मार्गदर्शन की जरूरत पड़ती है। आप उन्हें कमजोर न समझें बल्कि उनके साथ समय बिताएं और समझे कि आखिर उनके अंदर किस चीज को लेकर रुचि है। आप उनकी काबलियत देखकर दंग भी रह सकते हैं। आपको उनके साथ ज्यादा मेहनत करनी पड़ सकती है लेकिन परिणाम आपको खुशी से भर देंगे। बस आपको उम्मीद किसी भी कीमत में नहीं छोड़नी है।
घुलने मिलने के लिए हमें थोड़ा समय दें
आम बच्चों की तरह ऑटिज्म से पीड़ित बच्चे को लोगों के साथ घुलने मिलने में थोड़ा समय लग सकता है। अगर आप ये उम्मीद करते हैं कि आप उनसे एक बार मिल लें और अगली बार वो आपसे पूरी तरह से घुल मिल जाए, तो मुश्किल है। ऐसा इसलिए होता है, क्योंकि ऐसे बच्चों को मेल मिलाप के लिए अधिक समय की जरूरत होती है। अगर आप उनसे प्यार से व्यवहार करेंगे और उनसे बात करने के साथ ही उन्हें कुछ दिखाएंगे भी, तो वो आपकी बातों को समझने में थोड़ा कम समय लगाएंगे। ऐसे बच्चों को उम्मीद रहती है कि सामने वाला व्यक्ति बार-बार उनसे मिले और उनकी भावनाओं को समझे। तो अब अगली बार जब भी आप ऐसे बच्चों से मिलें, तो पूरी तैयारी कर लें ताकि उनके चेहरी की मुस्कुराहट का कारण आप बन सकें।
बस हमारा काम करने का ढंग है थोड़ा अलग
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