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बेबी स्लीप रिग्रेशन: इस तरह से मैनेज करें बच्चों के इस स्लीप डिसऑर्डर को!

बेबी स्लीप रिग्रेशन: इस तरह से मैनेज करें बच्चों के इस स्लीप डिसऑर्डर को!

सही आहार, व्यायाम आदि के साथ ही हेल्दी रहने के लिए पर्याप्त नींद लेना भी आवश्यक है। सही से न सोने से हमें शारीरिक और मानसिक कई समस्याएं हो सकती हैं। बच्चों के लिए भी सही नींद लेना उतना ही महत्वपूर्ण है, जितना बड़ों के लिए। आपने नोट किया होगा कि जिस दिन आपके बच्चे की नींद पूरी नहीं होती, वो पूरा दिन चिड़चिड़ा रहता है। अगर आपका बच्चा नींद के बीच में बार-बार उठ जाता है या नींद में चलने लगता है, तो इसे स्लीप रिग्रेशन कहा जाता है। आइए जानें बेबी स्लीप रिग्रेशन (Baby Sleep Regression) के बारे में विस्तार से। बेबी स्लीप रिग्रेशन (Baby Sleep Regression) के कारणों और इसे मैनेज करने के तरीकों के बारे में भी जानिए।

बेबी स्लीप रिग्रेशन क्या है? (Baby Sleep Regression)

स्लीप रिग्रेशन की टर्म को समय के उस पीरियड के रूप में परिभाषित किया जाता है, जब आपका रात को आराम से सोने वाला शिशु, एकदम से लगातार उठना और नींद में चलना शुरू कर देता है। यही नहीं, उसे नैपिंग इश्यूज भी होने लगते हैं। आमतौर पर बेबी स्लीप रिग्रेशन (Baby Sleep Regression) की समस्या किसी भी समय हो समय शुरू हो सकती है, जब आपके शिशु के स्लीपिंग पैटर्न में परिवर्तन आता है। इस समस्या को माता-पिता आसानी से समझ सकते हैं। यानी जब बच्चा अच्छे से दिन में दो या अधिक बार नैपिंग करता हो, लेकिन अचानक इस के लिए मना कर दे या आपका बच्चा जो रात को एक या दो बार फीडिंग के लिए उठता है, वो हर दो घंटे में उठने लगे तो समझ जाएं कि आपके बच्चे को स्लीप रिग्रेशन की समस्या है।

बेबी स्लीप रिग्रेशन (Baby Sleep Regression) को डेवलपमेंट चैंजेज से जोड़ कर देखा जाता है। हालांकि, माता-पिता के लिए यह परिस्थिति थोड़ी मुश्किल हो सकती है, लेकिन यह बात आपके लिए जानना बेहद जरूरी है कि परेशानी यह शिशु के सही विकास का एक लक्षण है। यानी, इसका अर्थ है कि बच्चे की ग्रोथ सही से हो रही है। आइए जानते हैं बेबी स्लीप रिग्रेशन (Baby Sleep Regression) के लक्षणों के बारे में।

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बेबी स्लीप रिग्रेशन के लक्षण (Symptoms of Baby Sleep Regression)

बेबी स्लीप रिग्रेशन (Baby Sleep Regression) का मुख्य लक्षण यही है कि इसमें आपके बच्चे का स्लीपिंग पैटर्न बदतर होता है। स्लीप रिग्रेशन के लक्षण शिशु की स्लीप प्रॉब्लम्स के कारणों पर निर्भर करते हैं। इसके सामान्य लक्षण इस प्रकार हैं:

  • शिशु के डेटाइम नैप्स का शार्ट हो जाना।
  • बच्चे का ओवरनाईट अधिक उठना।
  • पुअर नैप्स और ओवरनाईट अधिक जागने के कारण बच्चे का अधिक थक जाना।
  • इस समस्या के कारण बच्चे का सोने और नेप के लिए मना करना।
  • बच्चे का चिड़चिड़ा और परेशान होना।

यह तो थी जानकारी बेबी स्लीप रिग्रेशन (Baby Sleep Regression) के लक्षणों की। अब जान लेते हैं इसके कारणों के बारे में।

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बेबी स्लीप रिग्रेशन के कारण (Causes of Baby Sleep Regression)

बेबी स्लीप रिग्रेशन (Baby Sleep Regression) का सबसे सामान्य कारण है बच्चे का एक डेवलपमेंट माइलस्टोन तक पहुंचना। इसके अलावा, इसके अन्य कारण इस प्रकार हैं:

  • ग्रोथ स्पर्ट्स (Growth spurt), जिससे बच्चे अतिरिक्त भूखे रहते हैं।
  • टीथिंग पेन (Teething pain)
  • उनकी रूटीन्स में परिवर्तन, जैसे आपका बच्चे को डे केयर में भेजना
  • ट्रैवेलिंग, जिसमें बच्चे को नए वातावरण में सोने में समस्या होती है।
  • कोई बीमारी जैसे कोल्ड या कान में इंफेक्शन आदि।

इसके अलावा भी इस स्लीप प्रॉब्लम के अन्य कई कारण हो सकते हैं। अब जानिए विभिन्न एज ग्रुप्स में बेबी स्लीप रिग्रेशन (Baby Sleep Regression) के बारे में।

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विभिन्न एज ग्रुप्स में बेबी स्लीप रिग्रेशन

बेबी स्लीप रिग्रेशन (Baby Sleep Regression) बच्चों को किसी भी उम्र में हो सकती है। इसे अनप्रेडिक्टेबल फैक्टर्स जैसे रूटीन में बदलाव और किसी बीमारी आदि से जोड़ा जाता है। लेकिन, कुछ ऐसे पीरियड्स भी होते हैं, जब यह समस्या ग्रोथ सपर्ट्स, टीथिंग और नए माइलस्टोन्स पर पहुंचने आदि के कारण अधिक होती है। पाएं जानकारी विभिन्न एज ग्रुप्स में बेबी स्लीप रिग्रेशन (Baby Sleep Regression) के बारे में।

3 से 4 महीने में बेबी स्लीप रिग्रेशन (3 to 4 months)

इस उम्र में बच्चे कई डेवलपमेंट बदलावों से गुजरता है और साथ ही नए स्लीपिंग पैटर्न्स को भी एडजस्ट करता है। 3 से 4 महीने के बच्चे में यह समस्या होना माता-पिता के लिए भी बेहद मुश्किल समय होता है। क्योंकि, इस उम्र में इस परेशानी की शुरुआत होती है। इस उम्र के बच्चों में स्लीप रिग्रेशन की समस्या के पीछे कई कारण होते हैं जैसे टीथिंग, ग्रोथ स्पर्ट्स से जुड़ी भूख आदि।

6 महीने (6 months)

6 महीने की उम्र के बच्चे भी कई अन्य ग्रोथ सपर्ट्स से गुजरते हैं। इस उम्र में बच्चे रात को अधिक सोते हैं और दिन में नैप लेते हैं। हालांकि, कुछ एक्सपर्ट्स का यह मानना है कि इस उम्र के बच्चों को आमतौर पर स्लीप रिग्रेशन नहीं होता है। लेकिन, 6 महीने के कुछ बच्चों को स्लीप प्रॉब्लम्स हो सकती हैं।

8 से 10 महीने (8 to 10 months)

8 से 10 महीने के अधिकतर बच्चे क्रॉल करना शुरू कर देते हैं। यही नहीं, कुछ बच्चे दस महीने की उम्र में खड़ा होना भी शुरू कर देते हैं। ऐसा माना जाता है कि इस उम्र में सेपरेशन एंग्जायटी (Separation anxiety) होना भी सामान्य है। ऐसे में, इस उम्र के शिशु रात में आपकी उपस्थिति को सुनिश्चित करने के लिए बार-बार जाग सकता है। इस दौरान बच्चे में कॉग्निटिव और फिजिकल एबिलिटीज दोनों में बढ़ोतरी होती है। इस उम्र में भी स्लीप रिग्रेशन का कारण बच्चे की ग्रोथ को माना जाता है। लेकिन, परेशानी की कोई बात नहीं है क्योंकि यह समस्या अधिकतर कुछ ही हफ़्तों तक ही बच्चों में रहती है।

बेबी स्लीप रिग्रेशन

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12 महीने (12 months)

9 से 12 महीनों की उम्र में शिशु खड़ा होना शुरू कर देते हैं। एक साल की उम्र में बच्चे धीरे-धीरे चलना भी शुरू कर देते हैं। इस बिग माइलस्टोन तक पहुंचने तक बच्चों में टेम्पररी स्लीप प्रॉब्लम्स हो सकती हैं। इस उम्र के बच्चे बहुत अधिक एक्टिव होते हैं। नया-नया चलना और बोलना उनके लिए एक नयी दुनिया में कदम रखने जैसा होता है। वो इस उम्र में अधिक उत्सुक रहते हैं। इस नयी दुनिया को एक्सप्लोर करने और अपनी अंडरस्टैंडिंग को बढ़ाने के कारण भी उन्हें कई समस्याएं हो सकती हैं। इन डेवलपमेंट्स को एडजस्ट करने से भी उन्हें स्लीप रिग्रेशन हो सकती है

18-महीने में बेबी स्लीप रिग्रेशन (18-Month)

जब बच्चा 18-महीने का हो जाता है, तो उसे दांत आना शुरू हो जाते हैं। यह सहज प्रक्रिया अक्सर स्लीप रिग्रेशन का कारण बनती है। इसमें बच्चे बहुत अधिक रेस्टलेस, एक्टिव और बेडटाइम और नैपटाइम को मना करने वाले हो जाते हैं। 18-24 महीने के बच्चे में बुरे सपने, अंधेरे का भय, सेपरेशन एंग्जायटी (Separation anxiety) आदि भी बेबी स्लीप रिग्रेशन (Baby Sleep Regression) का कारण बन सकते हैं।

2-साल (2 years)

इस उम्र में भी बेबी स्लीप रिग्रेशन (Baby Sleep Regression) होना सामान्य है। इस उम्र में भी बच्चा मेजर डेवलपमेंट माइलस्टोन से गुजरता है। जिसका बच्चों की स्लीप पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। यही नहीं, इस उम्र के बच्चों में सेपरेशन एंग्जायटी (Separation anxiety) भी पीक पर होती है। ऐसे में बच्चों को सोने में समस्या आदि है और वो नैप लेने से भी मना कर देते हैं। हालांकि, इस फेज में यह समस्या परेशानी भरी हो सकती है। लेकिन, इसके पास होने के बाद बच्चे का का स्लीप शेड्यूल स्ट्रांग हो जाता है। अब जानिए कुछ तरीके इस परेशानी को मैनेज करने के बारे में।

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बेबी स्लीप रिग्रेशन को कैसे मैनेज करें? (Management of Baby Sleep Regression)

बेबी स्लीप रिग्रेशन (Baby Sleep Regression) एक टेम्पररी कंडिशन है। इसे मैनेज करने का सबसे बेहतरीन तरीका है इस दौरान अपने बच्चे को कंफर्टेबल महसूस कराना। ऐसा बच्चे को रेगुलर स्लीप रूटीन से भटकने से रोकने के लिए भी जरूरी हैं। अपने बच्चे की स्लीप रूटीन को तब तक बनाए रखें , जब तक कि वह अपने सामान्य पैटर्न में वापस न आ जाए। याद रखें कि बेबी स्लीप रिग्रेशन (Baby Sleep Regression) केवल बच्चे की रेगुलर स्लीपिंग पैटर्न (Regular sleeping pattern) में बदलाव को कहा जाता है और इसे लेकर चिंता करने की कोई जरूरत नहीं है। लेकिन, इस समस्या से डील करना माता-पिता और बच्चों दोनों के लिए थोड़ा मुश्किल हो सकता है।

कई बार यह समस्या तीन हफ्तों या इससे अधिक समय तक भी रह सकती है। अगर ऐसा होता है तो डॉक्टर की सलाह लेना बेहद जरूरी है। इस समस्या को मैनेज करने के कुछ आसान तरीके इस प्रकार हैं:

जरूरत के अनुसार बदलाव करें (Make changes as needed)

अपने बच्चों की स्लीप रूटीन में उसकी स्लीप पैटर्न्स के अनुसार एडजस्ट करें। इसका अर्थ है कि आप उनकी नैप्स को छोटा कर दें। हालांकि, यह थोड़ा अटपटा लग सकता है, लेकिन आपके बच्चे को रात भर बिना जगाए अच्छी नींद लेने में मदद कर सकता है।

एक स्ट्रिक्ट स्लीप रूटीन को अपनाएं (Stick to strict routine)

एक स्ट्रिक्ट स्लीप रूटीन को अपनाने से आपको अपने बच्चे के नए स्लीप पैटर्न को एडजस्ट करने में मदद मिलेगी। लेकिन, इसमें अधिक बदलाव न करें जैसे उसकी नैप्स को स्किप करना। इसके साथ ही अपने बच्चे को तब बेड में सुलाएं जब वह पूरी तरह नींद में हो। इससे आपके बच्चे को यह सीखने में मदद मिलेगी कि कैसे अपने बिस्तर पर अकेले सोना है।

स्क्रीन टाइम को लिमिटेड कर दें (Limit screen time)

स्टडीज से यह बात साबित हुई है कि बच्चों का अधिक देर तक टीवी, मोबाइल या कंप्यूटर आदि का इस्तेमाल करने से मेलाटोनिन (Melatonin) स्प्रेस हो सकते हैं। मेलाटोनिन (Melatonin) ब्रेन के वो हॉर्मोन हैं, जो स्लीप को रेगुलेट करते हैं। जिससे बेबी स्लीप रिग्रेशन (Baby Sleep Regression) की समस्या बढ़ सकती है।

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यह तो थी बेबी स्लीप रिग्रेशन (Baby Sleep Regression) के बारे में जानकारी। हालांकि, यह समस्या आपके और आपके बच्चे के लिए परेशानी भरी हो सकती है। लेकिन, यह बात ध्यान रखें कि शिशु की ग्रोथ के दौरान यह समस्या कई बार होती हैं। यह एक सामान्य समस्या है। अगर आप अपने बच्चे की नींद या उनकी स्लीपलेस नाइट्स को कैसे हैंडल करें, इस बात को लेकर चिंतित हैं तो डॉक्टर से इसके बारे में बात करें। इसके अलावा अगर आपके बच्चे में यह समस्या कुछ दिनों तक सामान्य नहीं होती या उसे कोई और हेल्थ प्रॉब्लम भी है तो तुरंत मेडिकल हेल्प लें। आप हमारे फेसबुक पेज पर भी अपने सवालों को पूछ सकते हैं। हम आपके सभी सवालों के जवाब आपको कमेंट बॉक्स में देने की पूरी कोशिश करेंगे। अपने करीबियों को इस जानकारी से अवगत कराने के लिए आप ये आर्टिकल जरूर शेयर करें।

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AnuSharma द्वारा लिखित आखिरी अपडेट 23/12/2021 को
Sayali Chaudhari के द्वारा मेडिकली रिव्यूड