डिलिवरी के बाद नाइट नर्स क्यों रखना जरूरी है?

चिकित्सक द्वारा समीक्षित | द्वारा

अपडेट डेट जून 24, 2020 . 4 मिनट में पढ़ें
अब शेयर करें

अस्पताल में काम कर रही नर्स एक मां से कम नहीं होती है। इसका अंदाजा हमसभी आसानी से लगा सकते हैं जब हमारे घर का कोई सदस्य अस्पताल में भर्ती हो या कोई महिला बेबी डिलिवरी के लिए अस्पताल पहुंचती हैं। प्रेग्नेंसी के दौरान और शिशु के जन्म तक डॉक्टर और नर्स के संपर्क में रहना आवश्यक होता है लेकिन, क्या आपने कभी सोचा है डिलिवरी के बाद नाइट नर्स आपके लिए कितनी मददगार हो सकती हैं? पुणे की रहने वाली 33 वर्षीय प्राजक्ता देशमुख 1 महीने की एक छोटी सी बच्ची की मां हैं। जब प्राजक्ता से हमने नाइट नर्स की अहमियत जानने की कोशिश की तो प्राजक्ता कहती हैं “मेरे लिए और मेरी बेटी के लिए नाइट नर्स सिर्फ नर्स नहीं बल्कि घर की सदस्य की तरह हैं। वह देर शाम तक घर आ जाती हैं और सुबह 10 बजे तक हमारे साथ रहती हैं। इस दौरान वह मुझे ब्रेस्टफीडिंग करवाने में मदद करती हैं और रात के वक्त मेरी बेटी जब रोती है या उसे कोई परेशानी होती है, तो वह उसे बहुत अच्छे से संभाल लेती हैं। मेरे लिए डिलिवरी के बाद नाइट नर्स की जरूरत इसलिए भी ज्यादा थी क्योंकि मैं और मेरे हस्बैंड अकेले थें। कोरोना वायरस की वजह से हमारे पेरेंट्स नहीं आ पाए।” घर में किसी परिवार के सदस्य न होने की वजह से प्राजक्ता और उनके लाइफ पार्टनर ने रात में नर्स रखने का फैसला किया। डिलिवरी के बाद नाइट नर्स की अहमियत क्या है? और वह न्यूली बोर्न बेबी के घर में कितनी महत्वपूर्ण है यह जानने की कोशिश करेंगें।

डिलिवरी के बाद नाइट नर्स का होना क्यों आवश्यक है?

नाइट नर्स को बेबी नर्स भी कहा जाता है। नाइट नर्स सिर्फ बच्चे की देखरेख में ही एक्सपर्ट नहीं होती हैं बल्कि नाइट नर्स नवजात शिशु की देखभाल के लिए पूरी तरह से ट्रेनड होती हैं। इसका अंदाजा आप इस बात से लगा सकते हैं की अगर शिशु को CPR (कार्डियो पल्मोनरी रिससिटैशन) देने की भी नौबत आ जाए तो नाइट नर्स यह काम भी आसानी से कर सकती हैं।

यह भी पढ़ें: इस तरह नवजात शिशु को बचा सकते हैं इंफेक्शन से, फॉलो करें ये टिप्स

डिलिवरी के बाद नाइट नर्स क्या-क्या करती हैं?

डिलिवरी के बाद नर्स की निम्नलिखित अहम भूमिका होती है। जैसे:-

  • नवजात के डायपर की चेक करना और आवश्यकता अनुसार उसे बदलते रहना।
  • रात के वक्त बच्चे को टहलाना।
  • बच्चे को समय-समय पर ब्रेस्टफीडिंग करवाने के लिए मां के पास लाना।
  • ब्रेस्टफीडिंग के दौरान स्तनपान करवाने वाली महिला की मदद करना। अगर शिशु का जन्म सिजेरियन हुआ है तो ऐसे में नाइट नर्स उनकी काफी मदद करती हैं।
  • ब्रेस्ट पंप की क्लीनिंग पर ध्यान देना।
  • डिलिवरी के बाद नाइट नर्स आठ हफ्ते तक अहम भूमिका निभाती हैं, क्योंकि नॉर्मल डिलिवरी के बाद भी जन्म देने वाली महिला को फिजिकली फिट होने में छह से आठ हफ्ते तक का वक्त लग सकता है।
  • नवजात शिशु को कितने देर सोना चाहिए।

अगर सामान्य भाषा में नाइट नर्स की भूमिका को समझा जाए तो इसका अर्थ है नाइट नर्स शिशु का पूरा-पूरा ध्यान रखेगी लेकिन, इस दौरान वो घर के कामकाज नहीं करेगी।

यह भी पढ़ेंः क्या मैं फाइब्रॉएड्स के साथ प्रेग्नेंट हो सकती हूं?

किन-किन बातों को ध्यान में रखकर डिलिवरी के बाद नाइट नर्स का चयन करना चाहिए?

नाइट नर्स का चयन निम्नलिखित बातों को ध्यान में रखकर करना चाहिए। जैसे:-

  1. नाइट नर्स का स्वभाव फ्रेंडली होने के साथ ही जिम्मेदारी वाला होना चाहिए।
  2. वह कितनी एक्सपर्ट हैं नवजात को संभालने में?
  3. अभी तक कितने कितने नवजात बच्चों की देखरेख कर चुकी हैं?
  4. नर्स से जुड़ा उन्होंने कोई कोर्स किया है या नहीं?
  5. क्या उनके (नर्स) भी बच्चे छोटे हैं?
  6. वह कितनी छुट्टी लेगी?

ऊपर बताई गई इन 6 बातों के अलावा आप अपनी आवश्यकता अनुसार नाइट नर्स से सवाल कर सकती हैं। उनसे यह भी जान लें की उनके घर पर कौन-कौन हैं जो उनके बच्चों को संभालेगा। क्योंकि डिलिवरी के बाद तकरीबन एक से डेढ़ महीने तक नवजात की मां को नाइट नर्स की जरूरत पड़ सकती है।

यह भी पढ़ेंः प्रेग्नेंट महिलाएं विंटर में ऐसे रखें अपना ध्यान, फॉलो करें 11 प्रेग्नेंसी विंटर टिप्स

डिलिवरी के बाद नाइट नर्स किन लोगों को जरूर रखना चाहिए?

डिलिवरी के बाद नाइट नर्स निम्नलिखित बातों को ध्यान में रखकर करना चाहिए। जैसे:-

  1. नॉर्मल डिलिवरी के साथ-साथ अगर डिलिवरी सिजेरियन हुई तो भी नाइट नर्स बेहद मददगार ताबित होती हैं।
  2. कपल के साथ कोई और फैमली मेंबर न हो।
  3. घर में बुजुर्ग हों। क्योंकि उनकी देखरेख भी जरूरी होती है और वो बच्चों को संभालने के लिए रात को जागेंगे तो वह भी बीमार पड़ सकते हैं।
  4. डिलिवरी के बाद हेल्दी न हो।
  5. नवजात को कोई शारीरिक परेशानी हो।
  6. जन्म देने वाली ठीक से सो सकें, क्योंकि उनकी सेहत का असर शिशु पर पड़ना तय माना जाता है।

इन छह बातों को ध्यान में रखकर और अपनी जरूरत के अनुसार डिलिवरी के बाद नाइट नर्स को रख सकती हैं।

मुंबई की रहने वाली 31 वर्षीय शोभना यादव प्रेग्नेंट हैं। शोभना से जब हमने डिलिवरी के बाद नाइट नर्स की वो मदद लेंगी या नहीं सवाल पूछा तो शोभना कहती हैं कि “मुझे डिलिवरी के बाद नाइट नर्स की जानकारी नहीं थी लेकिन, मैं डौला की मदद लुंगी यह सोचा हैं।” अब शायद आपमें से कई लोग या कई महिलाएं यह सोच रहीं होंगे की डौला की मदद तो बेबी डिलिवरी के दौरान ली जाती है, तो क्या उनकी मदद डिलिवरी के बाद भी ली जा सकती है?

यह भी पढ़ेंः प्रेग्नेंट ना होने के उपाय जो आपको नैचुरली प्रेग्नेंसी से बचाता है

डौला (Doula) का क्या अर्थ है?

दरअसल डौला डिलिवरी के दौरान लेबर पेन, फिजिकल, इमोशनल और गर्भावस्था से जुड़ी हर एक जानकारी गर्भवती महिला को देतीं हैं,  जो गर्भवती महिला को जानना बेहद जरूरी होता है। दाई प्रोफेशनल लेबर एसिस्टेंट होती हैं और 2 अलग-अलग तरह की होती हैं।

1. ऐन्टिपार्टम डौला (Antepartum doulas)- ऐन्टिपार्टम डौला वैसी गर्भवती महिला के लिए सहायक होती हैं जिन्हें डॉक्टर कंप्लीट बेड रेस्ट या फिर हाई रिस्क प्रेग्नेंसी का डर होता है। ऐन्टिपार्टम डौला गर्भवती महिला को गर्भावस्था से जुड़ी सही जानकारी के साथ-साथ इमोशनल सपोर्ट देती हैं। प्रेग्नेंसी के दौरान होने वाले तनाव को भी कम करने में मदद करती हैं

2. पोस्टपार्टम डौला (Postpartum doulas)- पोस्टपार्टम डौला शिशु के जन्म से ही साथ रहती हैं। पोस्टपार्टम डौला शिशु के देखभाल कैसे की जानी चाहिए और नवजात को स्तनपान कैसे करवाना चाहिए इसकी जानकारी देती हैं। डौला फिजिकल सपोर्ट जैसे साफ-सफाई, खाना बनाना और नई बनी मां को अन्य सहयता के लिए रहती हैं। पोस्टपार्टम डौला नई मां को पूरी तरह से सहयोग देती हैं।

डौला के क्या हैं फायदे?

पोस्टपार्टम डौला नई बनी मां की हेल्पिंग हेंड की तरह होती हैं। घर में पोस्टपार्टम डौला होने से निम्नलिखित फायदे हो सकते हैं।

इसलिए डिलिवरी के वक्त दाई को अपने साथ जरूर रखें और आप अपनी आवश्यकता अनुसार नवजात के जन्म के बाद नाइट नर्स भी रख सकती हैं।

अगर आप भी डिलिवरी के बाद नाइट नर्स रखने की सोच रहीं हैं तो अपने एरिया के अनुसार जानकारी हासिल करें। वहीं अगर आप डिलिवरी के बाद नाइट नर्स से जुड़े किसी तरह के कोई सवाल का जवाब जानना चाहते हैं तो विशेषज्ञों से समझना बेहतर होगा। हैलो हेल्थ ग्रुप किसी भी तरह की मेडिकल एडवाइस, इलाज और जांच की सलाह नहीं देता है।

और पढ़ेंः-

जल्दी प्रेग्नेंट होने के टिप्स: आज से ही शुरू कर दें इन्हें अपनाना

प्रेग्नेंट होने से पहले मन में आते हैं कई सवाल, इस तरह से निकाल सकती हैं हल

Contraceptive Pills: क्या आप गर्भनिरोधक गोली लेने के बाद भी प्रेग्नेंट हो सकती हैं?

30 साल में होने जा रही हैं प्रेग्नेंट, तो जान लें ये बातें

हैलो हेल्थ ग्रुप चिकित्सा सलाह, निदान या उपचार प्रदान नहीं करता है

क्या यह आर्टिकल आपके लिए फायदेमंद था?
happy unhappy
सूत्र

शायद आपको यह भी अच्छा लगे

नवजात के लिए जरूरी टीके – जानें पूरी जानकारी

जैसे ही शिशु जन्म लेता है, वैसे ही उसे बीमारियां और इंफेक्शन होने का खतरा हो जाता है। एक्सपर्ट से जानते हैं कि, इन समस्याओं से बचाव के लिए शिशु को कौन-से टीके लगवाना जरूरी है। Vaccines for Newborns: Everything You Need To Know

के द्वारा लिखा गया Sanket Pevekar
वीडियो अगस्त 1, 2020 . 1 मिनट में पढ़ें

फूड सेंसिटिव बच्चे को ब्रेस्टफीडिंग कैसे कराएं? जानें इस बारे में सबकुछ

फूड सेंसिटिव बच्चे को ब्रेस्टफीडिंग कैसे कराएं, फूड सेंसिटिव बच्चे को ब्रेस्टफीडिंग टिप्स इन हिंदी, नवजात को फूड एलर्जी, food sensitivity child breastfeeding tips

चिकित्सक द्वारा समीक्षित Dr. Pranali Patil
के द्वारा लिखा गया Shayali Rekha
स्तनपान, पेरेंटिंग जुलाई 22, 2020 . 4 मिनट में पढ़ें

बच्चे का मल कैसे शिशु के सेहत के बारे में देता है संकेत

बच्चे का मल काला, हरा, लाल, सख्त, सॉफ्ट तो कभी पानी की तरह हो सकता है, हर मल की अपनी विशेषता है, जानें क्या करें व क्या नहीं, पढ़ें यह आर्टिकल।

चिकित्सक द्वारा समीक्षित Dr. Pooja Daphal
के द्वारा लिखा गया Satish singh
बच्चों की देखभाल, पेरेंटिंग जुलाई 17, 2020 . 9 मिनट में पढ़ें

नवजात शिशु का रोना इन 5 तरीकों से करें शांत

नवजात शिशु का रोना मां के साथ-साथ उसे आस-पास के लोगों के लिए भी सिरदर्द बन सकता है, लेकिन अगर आपका बच्चा बहुत ज्यादा रोता है, तो वह कालिक चाइल्ड हो सकता है।

चिकित्सक द्वारा समीक्षित Dr. Shruthi Shridhar
के द्वारा लिखा गया Kanchan Singh
बच्चों की देखभाल, पेरेंटिंग मई 19, 2020 . 4 मिनट में पढ़ें

Recommended for you

ब्रेस्टफीडिंग के 1000 दिन

जानें ब्रेस्टफीडिंग के 1000 दिन क्यों है बच्चे के जीवन के लिए जरूरी?

चिकित्सक द्वारा समीक्षित Dr. Pranali Patil
के द्वारा लिखा गया Shayali Rekha
प्रकाशित हुआ अगस्त 2, 2020 . 7 मिनट में पढ़ें
विभिन्न प्रसव प्रक्रिया का स्तनपान और रिश्ते पर प्रभाव - How do Different Birthing Practices Impact Breastfeeding and Bonding

विभिन्न प्रसव प्रक्रिया का स्तनपान और रिश्ते पर प्रभाव कैसा होता है

के द्वारा लिखा गया Sanket Pevekar
प्रकाशित हुआ अगस्त 2, 2020 . 1 मिनट में पढ़ें
How to Care for your Newborn during the First Month - नवजात की पहले महीने में देखभाल वीडियो

पहले महीने में नवजात को कैसी मिले देखभाल

के द्वारा लिखा गया Sanket Pevekar
प्रकाशित हुआ अगस्त 1, 2020 . 1 मिनट में पढ़ें
Common Breastfeeding Problems - स्तनपान से जुड़ी समस्याएं और रीलैक्टेशन इंड्यूस्ड लैक्टेशन

स्तनपान से जुड़ी समस्याएं और रीलैक्टेशन इंड्यूस्ड लैक्टेशन

के द्वारा लिखा गया Sanket Pevekar
प्रकाशित हुआ अगस्त 1, 2020 . 1 मिनट में पढ़ें