जानें दादा-दादी का साथ बच्चों के विकास के लिए क्यों है जरूरी?

By Medically reviewed by Dr. Abhishek Kanade

शिशु की पहली पाठशाला उसका घर होता है। वहीं अगर बात की जाए ग्रैंडपेरेंट्स के बारे में तो बच्चे अपने दादा-दादी से बहुत कुछ सीखते हैं। दादा-दादी के साथ रहना एक अनोखा एहसास है, वह न केवल बच्चे को जीवन की सीख देते हैं बल्कि, बच्चे को प्यार और खुशियां भी देते हैं। मुझे भी याद है कि जब मैं छोटा था तो मेरी दादी ने मुझे खेल-खेल में गणित का पहाड़ा याद कराया था। वहीं रात में सोने से पहले दादा जी कोई न कोई शिक्षाप्रद कहानियां भी सुनाते थे। कई बच्चे ऐसे हैं जिनका दादा-दादी के साथ एक दोस्त जैसा रिश्ता होता है। बच्चे अपने दिल की बातें अपने पेरेंट्स से शेयर ना करें, लेकिन दादा-दादी से जरूर शेयर करते हैं। 

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बच्चों के लिए क्यों जरूरी हैं दादा-दादी ? (Importance of Grand Parents)

इसमें दो राय नहीं है कि ग्रैंडपेरेंट्स का अनुभव पेरेंट्स से बेहतर होता हैं। उन्हें जीवन का भी काफी अनुभव होता है, जो वह अपने ग्रैंड-चिल्ड्रन के साथ समय-समय पर शेयर करते हैं। बच्चे भी अपने दादा-दादी से खुलकर बात करते हैं। दादा-दादी (Grand Parents) जिंदगी में बहुत कुछ देखे व समझे होते हैं। जिसके कारण वे मुश्किल चीजों का हल भी कई बार अपने अनुभव से चुटकियों में हल कर देते हैं। बच्चे भी उनसे वे सब चीजें सीखते हैं।

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बच्चों के लिए दादा-दादी हैं किताब जैसे 

जब बच्चे छोटे होते हैं, तो जीवन के बहुत से सबक के बारे में वह किसी किताब या प्री-स्कूल से नहीं बल्कि अपने दादा-दादी से ही सीखते हैं। बच्चे भगवान के आगे हाथ जोड़ना, बड़ों का सम्मान करना, छोटों को प्यार करना यह सब उनके बड़े ही उन्हें सिखाते हैं। इतना ही नहीं अपने रीति-रिवाज, परंपराओं और संस्कृति की जानकारी भी उन्हें दादा-दादी से ही मिलती है। 

बच्चे दादा-दादी से क्या सीखते हैं?

परिवार के बारे में 

अपने घर व परिवार के बारे में जितनी जानकारी दादा-दादी को होती हैं, उतना पेरेंट्स को नहीं होता। इसलिए वे बच्चो से उन सबके बारे में बात करते हैं, उन्हें सभी रिश्तेदारों व पुरखों के बारे में बताते हैं। जिससे बच्चे में रिश्तो की समझ बनती है।

संस्कार की सीख

सुबह उठकर बड़ों के पैर छूना, किसी से मिलने पर नमस्कार करना, भगवान को रोजाना प्रणाम करना, सबसे प्यार से बात करना ऐसी बहुत सी चीजें हैं, जो दादा-दादी बच्चो को बहुत अच्छे से सिखा सकते हैं। यह सब कुछ ऐसी बातें हैं, जिसे सीख कर बच्चे अच्छा बनने की कोशिश करते हैं।

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दादा-दादी से ही सीखते हैं धैर्य

आज जिस तरह से फास्ट लाइफ का चलन बढ़ा है, बच्चों में धैर्य (Patience) बहुत कम देखने को मिलता है। दुनिया भी टेक्नोलॉजी के कारण बहुत तेज हो गई है और सभी को हर चीज जल्दी ही चाहिए। ऐसे समय में हमारे ग्रैंडपेरेंट्स इसका सबसे अच्छा उदाहरण हैं कि कैसे वो किसी चीज में धैर्य बनाते हैं।

कविताएं व कहानियां

हम सबने बचपन में दादा-दादी से कई कहानियां और किस्से सुने होंगे। उनके पास कहानियों और कविताओं का अच्छा संग्रह होता है। इन कहानियों से बच्चे को नैतिक शिक्षा भी मिल जाती है। आपने महसूस किया होगा कि आपके ग्रैंडपेरेंट्स के पास कभी इन किस्सों का स्टॉक खत्म नहीं होता। इन किस्से-कहानियों से बच्चे की सोचने समझने की शक्ति तो बढ़ती ही है और वो खुद से भी नए-नए विचारों को सोच पाता है। भले ही आज इंटरनेट पर दादी-दादी की कहानियां टेक्स्ट में उपलब्ध हैं, लेकिन बच्चों को मजा तो उनकी गोद मे बैठ कर सुनने में ही आता है। जहां वे अपनी जिज्ञासाओं और सवालों को कई बार पूछ सकते हैं और दादा-दादी हर बार पहली बार की तरह उन्हें समझाते हैं।

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बच्चे पेरेंट्स से ज्यादा उन पर विश्वास करते हैं

बच्चों द्वारा कुछ गलत होने पर या कुछ बातो में बच्चे माता-पिता से बात करने में झिझकते हैं, लेकिन वही वे अपने दादा-दादी से आसानी से शेयर कर लेते हैं। इसका कारण ये होता है कि, उन्हें लगता है कि दादा-दादी उन्हें समझेंगे भी और उस समस्या का बिना डांट लगाए हल भी निकल देंगे। इससे बच्चो में शेयरिंग पॉवर भी बढ़ती हैं और उनकी समस्या भी हल हो जाती हैं। 

बच्चों के जीवन मे दादा-दादी के बिना बचपन अधूरा सा लगता है क्योंकि वे ही परिवार और संस्कारों की नींव बच्चों में रखते हैं। बच्चों के विकास में इन की सबसे बड़ी भूमिका होती है और हर बचपन को इनकी जरूरत होती हैं।

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रिव्यू की तारीख अक्टूबर 9, 2019 | आखिरी बार संशोधित किया गया अक्टूबर 11, 2019

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