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सिर्फ प्यार में नींद और चैन नहीं खोता, हर उम्र में हो सकती है ये बीमारी

सिर्फ प्यार में नींद और चैन नहीं खोता, हर उम्र में हो सकती है ये बीमारी

रातों की नींद उड़ गई है और दिन में भी चैन नहीं मिलता। यह समस्या किसी जवां दिल की नहीं, बल्कि किसी भी उम्र में हो सकती है। बच्चों से लेकर बुजुर्गों में नींद ना आने या कम सोने की समस्या आम है इनदिनों। नींद की कमी या नींद न आने की इस समस्या को ही इंसोम्निया (Insomnia) कहा जाता है। इंसोम्निया की बात करें तो इंसोम्निया के प्रकार होते हैं। यानी नींद न आने की समस्या लंबे वक्त से भी हो सकती है या हाल के दिनों में भी शुरू हो सकती है। नैशनल स्लीप फाउंडेशन की मानें तो 30% से 40% लोगों का कहना है कि उन्हें कभी-कभी इंसोम्निया (Insomnia) की समस्या होती है। वहीं, 10% से 15% लोग कहते हैं कि उन्हें हर समय नींद न आने की समस्या से जूझना पड़ता है। इंसोम्निया के कारण मानसिक (Mental) और शारीरिक (Physical) स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़ता है। अगर नींद की कमी ज्यादा दिनों तक बनी रहे, तो इंसान को हाय ब्लड प्रेशर (High Blood Pressure), हार्ट अटैक (Heart attack), इम्युनिटी पावर (Immunity Power), डायबिटीज (Diabetes) जैसी तमाम बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। इसलिए जरूरी है कि आप इंसोम्निया के प्रकार (Types of Insomnia) का पता लगाएं और इसी अनुरूप इसका इलाज करें।

इंसोम्निया के प्रकार (Types of Insomnia)

इंसोम्निया के प्रकार (Types of Insomnia)

एक्यूट इंसोम्निया (Acute insomnia)

इंसोम्निया के प्रकार (Types of Insomnia) में यह वह प्रकार है, जो कुछ दिनों से कुछ सप्ताह तक रहता है। एक्यूट इंसोम्निया (Acute insomnia) का मुख्य कारण हाल ही में उपजा मानसिक तनाव (Mental Illness), कोई दर्दनाक घटना या काम के तनाव आदि हो सकते हैं। इंसोम्निया का यह प्रकार जीवन में किसी प्रकार के फेरबदल जैसे बिस्तर या सोने की जगह बदलना, सोने लायक रोशनी का न होना आदि से भी हो सकते है। कभी-कभार बीमारी या शारीरिक दर्द (Body pain) आदि के कारण भी नींद न आने की परेशानी हो सकती है।

अनिद्रा के प्रकार: क्रोनिक इंसोम्निया (Chronic insomnia)

इंसोम्निया के प्रकार (Types of Insomnia) में क्रोनिक इंसोम्निया भी शामिल है। तीन महीने या उससे भी ज्यादा समय के लिए यदि किसी व्यक्ति को सोने में समस्या हो रही है, तो इसे क्रोनिक इंसोम्निया (Chronic insomnia) कहा जाता है। क्रोनिक इंसोम्निया के बहुत सारे कारण हो सकते हैं। स्लीप एप्निया (Sleep apnea), डायबिटीज (Diabetes), मानसिक तनाव (Tension), डिप्रेशन (Depression), हायपर एक्टिविटी डिसओर्डर (Hyperactive Disorder) आदि। क्रोनिक इंसोम्निया का एक बड़ा कारण खराब लाइफस्टाइल भी हो सकता है। लाइफस्टाइल में लगातार सफर पर रहना, अलग-अलग शिफ्ट में काम करना, शराब की लत और सोन-उठने या खाने-पीने के समय पर ध्यान न रखना भी इसकी वजह हो सकते हैं।

कमोरबिड इंसोम्निया (Comorbid Insomnia)

इंसोम्निया का यह प्रकार मुख्य तौर पर मानसिक कारणों से जुड़ा है। जैसे डिप्रेशन (Depression) या एंग्जायटी (Anxiety)। डिप्रेशन और एंग्जायटी के कारण नींद में दिक्कत होती है। अर्थराइटिस (Arthritis) या कमर दर्द (Back pain) आदि मेडिकल कंडिशन के कारण भी अनिद्रा की समस्या हो सकती है।

ऑनसेट इंसोम्निया (Onset Insomnia)

इंसोम्निया के प्रकार (Types of Insomnia) में ऑनसेट इंसोम्निया भी शामिल है। जब आप सोने चाहते हो और काफी देर तक नीदं न आए, इसे ऑनसेट इंसोम्निया (Onset Insomnia) कहते हैं। यह एक्यूट या क्रोनिक दोनों प्रकार का हो सकता है।

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मेंटिनेंस इंसोम्निया (Maintenance Insomnia)

इसमें लोगों को लगातार सोते रहने में दिक्कत होती है। ऐसे लोग नींद के बीच में उठ जाते हैं और इन्हें दुबारा सोने में दिक्कत होती है। गैस्ट्रोइसोफेजियल रिफ्लक्स डिसिस (Gastroesophageal Reflux Disease), स्लीप एप्निया (Sleep apnea), अस्थमा (Asthma) या अन्य सांस संबंधी बीमारियों के कारण भी नींद जल्दी टूट सकती है।

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व्यवहारिक इंसोम्निया या बिहेव्यरल इंसोम्निया ऑफ चाइल्डहुड (बीआईसी) (Behavioral Insomnia of Childhood)

बीआईसी 25 प्रतिशत बच्चों में देखा जा सकता है। इसे तीन भागों में बांटा गया है।

बीआइसी स्लीप -ऑनसेट (Sleep onset): यदि आप बच्चे को सुलाने के लिए हिलाते हैं या झूला झूलाते हैं तो, उसे इसकी आदत हो जाती है। यदि आप उसे नहीं झूला रहे तो, उसे नींद नहीं आती। बच्चे के सोने के समय टीवी चला रहता हो तो वह टीवी देखते-देखते ही सोने की आदत बना लेगा। यदि टीवी न चल रहा हो तो उसे नींद नहीं आएगी। इसी प्रकार की लत को बीआईसी स्लीप-ऑनसेट कहा जाता है।

बीआईसी लिमिट सेटिंग (Limit setting): जब बच्चा हर रोज बेड में न जाने के लिए बहाने ढूंढ़ रहा हो। जैसे जब भी आप उसे सोने के​ लिए कहें तो वह पानी पीने, टॉयलेट जाने आदि का बहाना बार-बार कर रहा हो।

बीआईसी कंबाइंड टाईप (Combined type): कंबाइंड टाईप बीआईसी स्लीप ऑनसेट और बीआईसी लिमिट सेटिंग दोनों तरह के बीआईसी का मिश्रण होता है। यह तब होता है, जब बच्चे को सोने में अच्छा न लगता हो या पेरेंट या केयर टेकर ने उसे किसी तरह की लत लगा दी हो।

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अनिद्रा के उपाय

पहले किसी डॉक्टर की मदद से या खुद से यह जानने की कोशिश करें कि आप किस तरह के इंसोम्निया (Insomnia) से प्रभावित हैं। इसके बाद ही दूसरा कदम उठाएं। यदि आपको एक्यूट इंसोम्निया (Acute insomnia) है, तो आप अपने लाइफस्टाइल में कुछ बदलाव कर इससे लड़ सकते हैं। यदि आपको क्रोनिक इंसोम्निया (Chronic insomnia) है, तो आपको किसी विशेषज्ञ से ही सलाह लेनी चाहिए। चूंकि क्रोनिक इंसोम्निया का वह प्रकार है, जो आपके लिए नुकसानदेह हो सकता है।

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  • सोने-उठने का समय तय करना। रात को यदि सही से नींद न आ रही हो तो दोपहर को न सोएं। इससे रात को नींद आने में दिक्कत होती है।
  • चादर, ताकिए का कवर यानी बिस्तर को साफ रखें।
  • शराब (Alcohol), कैफिन (Caffeine), निकोटिन (Nicotine) जैसे पदार्थों से सोने से पहले थोड़ा दूरी बना लें। शाम 4 बजे के बाद इनका सेवन न करें। कैफिन और निकोटिन जहां आपको सक्रिय कर देते हैं। वहीं शराब आपकी अच्छी और लंबी नींद में बाधा बन सकती है।
  • योगा और व्यायाम करें। नियमित रूप से योगासन या एक्सरसाइज करना अच्छा है पर सोने से करीब तीन या चार घंटे पहले एक्सरसाइज करें। सोने से तुरंत पहले यदि आप एक्सरसाइज करेंगे तो, नींद देरी से आएगी।
  • मोबाइल, टीवी आदि का उपयोग नींद लाने के लिए न करें।
  • सोने से पहले खुद को रिलेक्स करने के लिए गुनगुने पानी से नहाएं, या किताब पढ़ें या कोई रिलेक्सिंग म्यूजिक सुनें
  • लाइट जितनी कम हो, नींद उतनी अच्छी आती है। चूंकि मेलाटोनिन हॉर्मोन है, जो सोने में मदद करता है, वह कम लाइट में ज्यादा सक्रिय हो पाता है।

नींद न आना शरीर में किसी गंभीर समस्या को जन्म दे सकता है। इसलिए, जब आपको रात में ठीक से नींद नहीं आती तो, ये इंसोम्निया के लक्षण (Symptoms of Insomnia) हो सकते हैं। ऐसी स्थिति में डॉक्टर से परामर्श करना सही रहता है। यदि आप डॉक्टर के पास जाने से पहले खुद ही सुनिश्चित होना चाहते हैं, तो इंसोम्निया के प्रकारों (Types of Insomnia) के बारे में अच्छे से जान लें। खुद किए जाने वाले प्रयास नींद लाने में सफल न हो रहे हों तो डॉक्टर से जरूर मिलें।

इंसोम्निया का इलाज (Treatment for Insomnia)

इंसोम्निया के ट्रीटमेंट की बात करें तो यह इसके कारणों पर निर्भर करता है। यदि आप चाहें तो डाक्टरी सलाह लेकर एक्यूट इंसोम्निया का इलाज घर पर ही कर सकते हैं और ओवर द काउंटर दवा का सेवन कर बीमारी से बचा जा सकता है। इंसोम्निया का इलाज करने के दौरान एक्सपर्ट इसके कारणों की जांच कर इलाज करते हैं। कई मामलों में डॉक्टर मरीज को कॉग्निटिव बिहेवियर थेरिपी (Cognitive Behavioural Therapy) की सलाह देते हैं। यह इंसोम्निया सीबीटी 1 के केस में किया जाता है। यह दवा की तुलना में ज्यादा इफेक्टिव होता है।

इंसोम्निया का कैसे लगाया जाता है पता?

इंसोम्निया (Insomnia) का पता लगाने के लिए फिजिकल एग्जामिनेशन के साथ मरीज की मेडिकल हिस्ट्री (Medical history) के बारे में डॉक्टर पूछताछ करते हैं। वहीं उसी के आधार पर मरीज का इलाज करते हैं। मरीज से कई बार डॉक्टर उनके स्लीपिंग पैटर्न (Sleeping pattern) के बारे में भी जानकारी हासिल करते हैं। इसके लिए डॉक्टर मरीज को स्लीप स्टडी की सलाह दे सकते हैं ताकि स्लीपिंग डिसऑर्डर (Sleeping disorder) के बारे में पता लगाया जा सके।

जानें कब पड़ती है डॉक्टर को दिखाने की आवश्यकता?

इंसोम्निया की बीमारी से ग्रसित व्यक्ति यदि एक सप्ताह तक सामान्य नहीं हो पाता है, तो ऐसी स्थिति में उसे डॉक्टी सलाह लेनी चाहिए। यदि मरीज इस अवस्था तक ट्रीटमेंट नहीं कराता है, तो उसकी तबीयत और ज्यादा बिगड़ सकती है। एक्सपर्ट मरीज से बात कर इंसोम्निया के प्रकार (Types of Insomnia) की जानकारी देने के साथ इसका किस प्रकार से इलाज करना है उसके बारे में जानकारी दे सकते हैं। वहीं मरीज को उचित परामर्श भी दे सकते हैं।

अनिद्रा में ध्यान देने योग्य बातें

इंसोम्निया के प्रकार (Types of Insomnia) की बीमारी आपके रोजमर्रा के कामकाज को प्रभावित कर सकती है। एक्यूट इंसोम्निया (Acute insomnia) का इलाज घर पर ही हो सकता है। यदि सही समय पर इसका इलाज न करवाया गया तो उसके कारण क्रॉनिक इंसोम्निया (Chronic insomnia) की बीमारी हो सकती है। वहीं क्रॉनिक इंसोम्निया के कारण गंभीर डिप्रेशन (Depression) और उसके कारण अन्य गंभीर बीमारी हो सकती है। इसलिए जरूरी है कि मरीज को इस बीमारी के लक्षण दिखाई देने पर डॉक्टरी सलाह लेना चाहिए।

अगर आपको नींद आने में किसी प्रकार की समस्या हो रही है, तो इसे हल्के में न लें। आपको तुरंत अपने डॉक्टर से बात करने की जरूरत है। आप स्वास्थ्य संबंधी अधिक जानकारी के लिए हैलो स्वास्थ्य की वेबसाइट विजिट कर सकते हैं। अगर आपके मन में कोई प्रश्न है, तो हैलो स्वास्थ्य के फेसबुक पेज में आप कमेंट बॉक्स में प्रश्न पूछ सकते हैं और अन्य लोगों के साथ साझा कर सकते हैं।

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सूत्र

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Hema Dhoulakhandi द्वारा लिखित आखिरी अपडेट 03/05/2021 को
डॉ. हेमाक्षी जत्तानी के द्वारा मेडिकली रिव्यूड