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पेरेंट्स कैसे करें ऑटिस्टिक बच्चे की देखभाल?

पेरेंट्स कैसे करें ऑटिस्टिक बच्चे की देखभाल?

ऑटिस्टिक चाइल्ड (Autistic Child) की पहचान करने में मुश्किल हो सकती है। इसलिए बच्चों के व्यवहार को कभी नजर अंदाज न करें। बच्चे की देखभाल करना पेरेंट्स के लिए काफी मुश्किल होता है, लेकिन ऑटिस्टिक बच्चे की देखभाल (Take care of Autistic Child) करना इससे भी बड़ी चुनौती होती है। ऑटिज्म के लक्षण को आप आसानी से पहचान सकते हैं। ऐसे बच्चे किसी भी बात को समझने के लिए ज्यादा समय लेते हैं। ऐसे बच्चे रिजर्व रहते हैं और किसी से भी बात करना पसंद नहीं करते हैं। अगर आपको इस बात की जानकारी है कि आपका बच्चा ऑटिज्म से ग्रसित है तो आपको कई प्रकार की सावधानी रखने की जरूरत होती है। इस आर्टिकल के माध्यम से जानिए कि अगर आपके बच्चे को ऑटिज्म की बीमारी है तो आपको किन बातों पर विशेष ध्यान देना चाहिए है।

ऑटिस्टिक बच्चे की देखभाल कैसे करें? (Take care of Autistic Child)

सकारात्मक सोच (Positive thinking) अपनाएं

हर बच्चे की तरह ऑटिस्टिक बच्चा (Autistic Child) सकारात्मक व्यवहार पर प्रतिक्रिया देगा। इसलिए अपने बच्चे की स्थिति को लेकर निराश न हों और सकारात्मक सोच बनाए रखें। ऑटिस्टिक बच्चे की देखभाल (Take care of Autistic Child) के क्रम में आपके सहारे से उसे कुछ हद तक ठीक होने और विकास में मदद मिलेगी। उसकी अच्छी चीजों के बारे में सोचें, जब वो कुछ अच्छा करें तो उसे गिफ्ट दें। अगर वो कोई गलती कर दे तो भूलकर भी न डाटें। याद रखें सफलता की सबसे बड़ी कुंजी है प्यार।

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अपने बच्चे को बातचीत करना सिखाएं

ऑटिस्टिक बच्चे की देखभाल (Babies take care) में बच्चा सोशल होने से डरता है। ऐसे बच्चे सामाजिक व्यवहार और बातचीत से डरते और झिझकते हैं। कई बार वे समझ नहीं पाते कि आप क्या कहना चाह रहे हैं तो कई बार वे बता नहीं पाते कि उन्हें किस चीज की जरूरत है। ऐसे में हमेशा उसे बातचीत का तरीका और अपनी भावनाएं व्यक्त करना सिखाएं। पहले आप खुद उससे छोटे-छोटे वाक्यों की मदद से बात करें। ध्यान रखें कि कुछ भी कहने से पहले बच्चे का नाम जरूर लें। आप उससे सवालों का जवाब देकर या उससे सवाल पूछकर उसे प्रोत्साहित कर सकते हैं। हमेशा बच्चे को जवाब देने का समय दें। हमेशा फेस-टू-फेस (Face to face) बातचीत करें और उसे भी आंख में आंख डालकर बातचीत करने के लिए प्रोत्साहित करें। हो सकता है कि आपका बच्चा आपको कभी नकारात्मक रिस्पॉन्स (Negative response) दें, लेकिन आपको परेशान होने की जरूरत नहीं है। अगर आप उसके साथ रोजाना ऐसा प्रयास करेंगी तो सफलता जरूरी मिलेगी।

बच्चे को अपने साथ लेकर बाहर जाएं

अगर संभव हो तो बच्चे को अपने ऑफिस, शॉपिंग (Shopping), पार्क आदि जगहों पर साथ लेकर जाएं। इसके बाद आप देख सकते हैं कि वो नए माहौल में कैसी प्रतिक्रिया देता है। इससे उसकी व्यवहार के बारे में और चीजें पता चल सकेंगी। ऑटिस्टिक बच्चे की देखभाल (Take care of Autistic Child) में उसे बाहर घूमाना एक अहम काम साबित होगा।

ऑटिस्टिक बच्चे की देखभाल (Take care of Autistic Child) में सब्र से लें काम

अक्सर बच्चे को समझ ना आने पर पेरेंट्स गुस्सा दिखाने लगते हैं, लेकिन ऐसा ना करें क्योंकि इससे बच्चों के दिमाग (Brain) पर ज्यादा बुरा असर पड़ सकता है। ऐसे में जरूरी है कि ऑटिस्टिक बच्चे की देखभाल करते समय आप अपने बच्चे से प्यार से बात करें।

ऑटिस्टिक बच्चे की देखभाल करने के लिए दूसरों की मदद लें

आप ऐसे मामलों में मदद करने वाले सपोर्ट ग्रुप (Support group) की भी मदद ले सकते हैं। इसमें अन्य ऑटिज्म ग्रस्त परिवार भी जुड़े होते हैं। वे आपकी समस्या को आसानी से समझेंगे। आप किसी विषय पर उनसे मदद ले सकते हैं और वे भी आपको अच्छी सलाह दे सकते हैं। इसके अलावा आप किसी काउंसलर की भी मदद ले सकते हैं।

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ऑटिस्टिक बच्चे की देखभाल (Take care of Autistic Child) में बाहरी ट्रेनिंग को करें शामिल

ऑटिस्टक बच्चों की मदद के लिए अब एनजीओ भी कई तरह के ट्रेनिंग प्रोग्राम चला रहे हैं। अगर आपको किसी तरह की मदद नहीं मिल पा रही हो तो अपने नजदीकी एनजीओ से संपर्क करें।

ऑटिस्टिक शिशु की देखभाल करते समय आपको कई तरह की मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा, इसके लिए आप धैर्य बनाए रखें और निराश न हों। क्योंकि ऑटिस्टिक बच्चे की देखभाल करते वक्त आपका संयम ही बच्चे को आम बच्चों की तरह एक सामान्य जिंदगी जीने का सहारा देगा। ऑटिस्टिक बच्चे किसी से दोस्ती नहीं कर पाते हैं, इसके लिए नीचे बताए गए टिप्स को अपनाएं और ऑटिस्टिक बच्चे से दोस्ती आसानी से करें।

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ऑटिस्टिक बच्चे के लिए बढ़ाएं दोस्ती का हाथ

ऑटिस्टिक बच्चों को ऐसे लोग बहुत जल्दी पसंद आते हैं जो उनकी सहायता करते हैं और उनके अलग होने के बावजूद भी उनसे बात करने की कोशिश करते हैं। दोस्ती (Friendship) का आधार केवल पसंद, अच्छा व्यवहार और आपसी समझ होता है।

जाहिर सी बात है कि ऑटिस्टिक दोस्त (Autistic friend) आपके बाकी दोस्तों से अलग ही होगा। हालांकि, वह अपनी तरफ से पूरी कोशिश करेगा कि आपकी बातों को समझे, लेकिन अगर कोई गड़बड़ होती है या फिर आपके अनुसार व्यवहार नहीं हो पा रहा तो शांत रहे। गुस्सा करने के बजाय उससे शांति से बात करें और उसे अपनी बात समझाने की कोशिश करें। वह जैसा है, उसे वैसा ही अपनाने की कोशिश करें क्योंकि आपके हिसाब से बनना उसके लिए मुश्किल होगा और इससे आपके संबंध खराब हो सकते हैं।

मैसेज वाली भाषा में बात न करें, साफ शब्दों में बात करें जिससे आपका दोस्त आसानी से समझ पाए। अगर आपने कोई सवाल पूछा है तो तुरंत जवाब न मांगे उसे सोचने और समझने के लिए बाकी दोस्तों की अपेक्षा थोड़ा अधिक समय दें।

घूमना फिरना सबको पसंद होता है इसलिए अपने दोस्त के साथ फिल्म, पिकनिक आदि का प्लान बनाएं। ऑटिस्टिक बच्चे दूसरे बच्चों में शामिल होना चाहते हैं, लेकिन साफ तौर पर जाहिर न कर पाने के कारण ऐसा करना मुश्किल होता है। अगर आप रोजाना उसके साथ कुछ समय बिताते हैं तो भी आपकी दोस्ती गहरी हो सकती है।

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ऑटिस्टिक चाइल्ड केयर: बच्चों में हो सकता है डर

अक्सर ऑटिज्म से पीड़ित बच्चों में किसी रंग, आवाज या फिर महक को लेकर डर होता है। इस डर का ख्याल रखें और इसे लेकर उसे न चिढ़ाएं क्योंकि इससे आपकी दोस्ती टूट सकती है। अकसर ये बच्चे मैथ्स या संगीत जैसे विषयों में कुशलता रखते हैं इसलिए इन्हें कम न समझें।

ऑटिस्टिक बच्चे आम बच्चों जैसा ही व्यव्हार चाहते हैं। वह भी आपके साथ खेलना चाहते हैं, मस्ती करना चाहते हैं इसलिए उनके साथ अलग व्यवहार न करें। किसी आम दोस्त के जैसे ही उसके साथी बने और हर परेशानी में उसका साथ दें।

ऑटिस्टिक चाइल्ड केयर: नहीं बोल पा रहा है बच्चा तो करें उसकी मदद

ऑटिज्म से पीड़ित बच्चों को किसी भी भाषा को सीखने में दिक्कत हो सकती है। अगर आपको लगता है कि आपका बच्चा किसी भी चीज को जल्दी क्यों नहीं सीख रहा है या फिर वो बोलते समय रुक क्यों जाता है, तो आपको परेशान होने की जरूरत नहीं है क्योंकि ऑटिज्म से पीड़ित बच्चों को इस प्रकार की समस्या होती है। वो किसी भाषा में पकड़ बनाने के लिए अपेक्षाकृत अधिक समय लेते हैं। ऑटिज्म से पीड़ित बच्चा अगर छह से साल साल की उम्र में भी सही से बोल नहीं पा रहा है तो आपको डॉक्टर से जरूर बात करनी चाहिए।

ऑटिस्टिक चाइल्ट केयर: स्टडी को लेकर न हो परेशान

डॉक्टर का मानना है कि अगर ऑटिज्म से पीड़ित बच्चे नॉर्मल बच्चों के साथ समय व्यतीत करते हैं तो ये उनके लिए अच्छी बात है। अगर आपके ऑटिज्म से पीड़ित बच्चे को नॉर्मल बच्चे के साथ एडमिशन नहीं मिल पाया है तो आपको परेशान नहीं होना चाहिए। स्पेशल बच्चों को स्पेशल केयर की जरूरत होती है। अगर आप बच्चे को स्पेशल केयर दे रही हैं तो वो स्कूल (School) में अच्छा परफॉर्म (Better performance) करेगा, फिर इस बात से फर्क नहीं पड़ेगा कि वो कौन से स्कूल में जा रहा है। मेंटली वीक बच्चों के लिए स्पेशल स्कूल होते हैं, जहां उन्हें स्पेशल एज्युकेशन (Special education) दी जाती है। आप निराश न हो। आप अपने बच्चे का स्पेशल स्कूल में एडमिशन करा सकती है ताकि बच्चा अन्य बच्चों से मेलजोल बढ़ाए और साथ ही स्टडी में भी ध्यान दें।

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उपरोक्त जानकारी चिकित्सा सलाह का विकल्प नहीं है। अगर आपको ऑटिज्म से पीड़ित बच्चों के बारे में अधिक जानकारी चाहिए तो बेहतर होगा कि आप डॉक्टर से संपर्क करें। अधिक जानकारी के लिए आप हैलो स्वास्थ्य की वेबसाइट पर विजिट करें।

हैलो हेल्थ ग्रुप हेल्थ सलाह, निदान और इलाज इत्यादि सेवाएं नहीं देता।

सूत्र

Welcome To Forum For Autism/https://www.forumforautism.org/Accessed on 05/07/2021

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Screening and Diagnosis of Autism Spectrum Disorder for Healthcare Providers https://www.cdc.gov/ncbddd/autism/hcp-screening.html Accessed 5/2/2020

 

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Piyush Singh Rajput द्वारा लिखित आखिरी अपडेट 05/07/2021 को
डॉ. हेमाक्षी जत्तानी के द्वारा मेडिकली रिव्यूड
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