बेबी ब्लूज और पोस्टपार्टम डिप्रेशन का कारण और इलाज

चिकित्सक द्वारा समीक्षित | द्वारा

अपडेट डेट सितम्बर 11, 2020 . 4 मिनट में पढ़ें
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मां बनने के बाद एक महिला की जिम्मेदारियां अधिक बढ़ जाती है। लोगों को लगता है कि मां बनने के बाद एक औरत को वास्तविक खुशी मिलती है, ऐसा होता भी है। लेकिन, अगर हम आपसे कहें कि मां बनने के बाद कई औरतें डिप्रेशन में चली जाती हैं, तो शायद आपको हैरानी होगी। जी हां, कई महिलाओं को गर्भावस्था के बाद बेबी ब्लूज और पोस्टपार्टम डिप्रेशन (Postpartum Depression) हो जाता है। वहीं, तीन से दस दिनों के अंदर महिलाओं में एक अन्य तरह की मानसिक स्थिति देखी जाती है, जिसे बेबी ब्लूज (Baby Blues) कहते हैं। आज हैलो हेल्थ के इस आर्टिकल में हम डिलिवरी के बाद डिप्रेशन यानी पोस्टपार्टम डिप्रेशन के बारे में बात करेंगे। जानेंगे कि ये क्यों होता है और इसका इलाज करना किस तरह से संभव है। साथ ही जानेंगे कि क्या बेबी ब्लूज और डिलिवरी के बाद डिप्रेशन एक ही चीज है या दोनों में अंतर है। आइए जानते हैं इन दोनों समस्याओं के बारे में विस्तार से।

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क्या बेबी ब्लूज (Baby Blues) और पोस्टपार्टम डिप्रेशन (Postpartum Depression) एक है?

वाराणसी स्थित सर सुंदरलाल हॉस्पिटल (BHU) के मनोचिकित्सक डॉ. जयसिंह यादव ने हैलो स्वास्थ्य को बताया कि “बेबी ब्लूज और पोस्टपार्टम डिप्रेशन एक चीज नहीं है। लोग अक्सर इन दोनों को एक ही मानसिक बीमारी समझ लेते हैं। लेकिन, दोनों अलग मानसिक स्थिति है। बेबी ब्लूज पोस्टपार्टम डिप्रेशन की शुरुआती स्थिति को कहा जाता है। बेबी ब्लूज में महिला में मूड स्विंग, उदासी, बच्चे को संभालने की चिंता, चिड़चिड़ापन आदि होते है। वहीं, आगे चलकर बेबी ब्लूज बढ़ते-बढ़ते पोस्टपार्टम डिप्रेशन का रूप ले लेता है। इसमें बेबी ब्लूज की तरह ही मूड स्विंग, रोने की इच्छा, भूख न लगना और नींद न आना, आत्महत्या का ख्याल आना आदि होता है।“

बेबी ब्लूज (Baby Blues) के लक्षण क्या हैं?

20 से 80 फीसदी महिलाओं को बेबी ब्लूज की शिकायत होती है। अगर इसके लक्षणों को पहचान कर मां का इलाज समय से करा दिया जाता है तो अच्छा होता है। बेबी ब्लूज के होने का कारण है प्रसव के तुरंत बाद होने वाला हॉर्मोनल बदलाव। तेजी से होने वाले हॉर्मोनल बदलाव के कारण मां का मूड स्विंग हो जाता है।

  • चंद पल में खुशमिजाज से उदासी का हावी होना। खुद पर गर्व करना और पल भर बाद कोसने लगना।
  • खुद की परवाह करना छोड़ देना।
  • चिंतित, थकान, चिड़चिड़ापन महसूस होना।

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डिलिवरी के बाद डिप्रेशन (पोस्टपार्टम डिप्रेशन) के लक्षण क्या हैं?

बेबी ब्लूज आगे चल कर पोस्टपार्टम डिप्रेशन यानी डिलिवरी के बाद डिप्रेशन का रूप ले लेता है। इसके लक्षण बेबी ब्लूज से भी ज्यादा खतरनाक होते है। नीचे हम आपको डिलिवरी के बाद डिप्रेशन के कुछ लक्षण बता रहे हैं :

  • महिला उदास, निराशा, अकेला महसूस करती है। जिस वजह से वह प्रायः रोने भी लगती है।
  • महिला को लगता है कि वह एक अच्छी मां नहीं है।
  • महिला को लगता है कि वह बच्चे के साथ जुड़ाव महसूस नहीं कर रही है।
  • महिला उदासीनता के कारण न तो खाना खाती है, न ही सोती है। साथ ही अपने बच्चे का ध्यान भी नहीं रखती है।
  • महिला को पैनिक अटैक भी आ सकते है। इसके अलावा उसके मन में आत्महत्या जैसे भी ख्याल आते है।

बेबी ब्लूज (Baby Blues) का इलाज कैसे करें?

बेबी ब्लूज आगे चलकर बड़ी समस्या न बने, इसके लिए जरूरी है कि इलाज समय रहते कर लिया जाए। नीचे हम आपको बेबी ब्लूज का इलाज करने के कुछ तरीके बता रहे हैं, जो केवल मां खुद ही कर सकती है :

  • बेबी ब्लूज का पहला इलाज मां के पास ही है। मां को खुद से बेहतर महसूस करने की कोशिश करनी चाहिए।
  • जब बच्चा सो रहा हो तो मां को भी अपनी नींद पूरी करनी चाहिए। नींद पूरी होने से मां अपनी भावनाओं पर नियंत्रण रख सकेगी।
  • मां के लिए जो सही हो, वह खाना उसे अच्छी तरह खाने के लिए दें। अच्छा खाना भी उसे बेबी ब्लूज से बाहर आने में मदद करेगा।
  • मां को टहलने जाना चाहिए। ताजी हवा में एक्सरसाइज करनी चाहिए। ऐसा करने से मां को अच्छा महसूस होने लगेगा।
  • परेशानी होने पर दूसरों की मदद जरूर लेनी चाहिए। ऐसे समय में दूसरों का साथ बेहतर महसूस करा सकता है।
  • ज्यादा से ज्यादा आराम करें और अपना व बच्चे का ध्यान रखें।

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डिलिवरी के बाद डिप्रेशन (Postpartum Depression) का इलाज कैसे करें?

डॉ. जयसिंह ने बताया कि डिलिवरी के बाद डिप्रेशन हॉर्मोनल बदलाव के कारण होते है। डिलिवरी के बाद मां के शरीर में एस्ट्रोजन, प्रोजेस्ट्रॉन, टेस्टोस्टेरॉन जैसे हार्मोंस में बदलाव आता है। इसका सीधा असर मां के व्यवहार पर पड़ता है। इसके अलावा बेटा पैदा होने की इच्छा का ना पूरा होना भी डिप्रेशन की वजह बनती है।

  • डिलिवरी के बाद डिप्रेशन से पीड़ित महिला को अपनी बात अपने परिजनों के सामने खुल कर रखनी चाहिए।
  • अगर मां को ऐसा लगता है कि वह अवसाद में है, तो उसे अपने डॉक्टर से जरूर मिलना चाहिए।
  • पोस्टपार्टम डिप्रेशन एक भयावह स्थिति है, इसलिए जब मां डॉक्टर से मिलती है तो डॉक्टर मरीज को हॉर्मोंस को नियंत्रित करने के लिए दवाएं देते हैं। इसके अलावा मरीज की काउंसलिंग भी करते हैं।

भारत में है जागरूकता की कमी

बेबी ब्लूज और डिलिवरी के बाद डिप्रेशन को लेकर भारत में जागरूकता की बहुत कमी है। डॉ. जयसिंह ने बताया कि, “डिलिवरी के तुरंत बाद जब महिला बेबी ब्लूज या पोस्टपार्टम डिप्रेशन से ग्रसित होती है, तो लोगों को लगता है कि भूत-प्रेत का मामला है। ऐसे में लोग डॉक्टर के पास आने के बजाए तांत्रिक के पास जाना पसंद करते हैं। अज्ञानतावश तंत्र-मंत्र का सहारा लेकर महिला की स्थिति को और भी क्रिटिकल कर देते हैं।”

बेबी ब्लूज और डिलिवरी के बाद डिप्रेशन का सही इलाज है जागरूकता। महिला जब गर्भवती हो तभी उसे इनके लक्षणों के बारे में बताना चाहिए। ऐसा करने से डिलिवरी के बाद महिला इस बात को समझ सकती है और अपना इलाज खुद कर सकती है। शिशु के जन्म के बाद डिप्रेशन की समस्या बचा जा सकता है। 

उम्मीद है आपको हमारा ये आर्टिकल पसंद आएगा और आप इस समस्या से बाहर निकलने के लिए ऊपर बताए गए तरीके अपनाएंगे, ताकि आप इस समस्या से बाहर निकल सकें। ध्यान रहे कि प्रेग्न आपको हमारा ये आर्टिकल कैसा लगा, हमारे साथ अपनी प्रतिक्रिया जरूर शेयर करें।

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