ब्रेस्ट कैंसर का जोखिम कम करता है स्तनपान, जानें कैसे

चिकित्सक द्वारा समीक्षित | द्वारा

अपडेट डेट जुलाई 21, 2020 . 4 मिनट में पढ़ें
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आपने सुना होगा कि बच्चे के लिए मां का दूध बहुत जरूरी होता है। लेकिन, कभी  क्या आपने ये सुना है कि मां के लिए उसका खुद का दूध भी फायदेमंद होता है। है न चौंकाने वाली बात! ये सच है कि स्तनपान (Breastfeeding) कराने वाली महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर का जोखिम कम होता है। जी हां, इस बात को कई डॉक्टर भी मान चुके हैं कि स्तनपान कराने से ब्रेस्ट कैंसर का खतरा कम होता है।

हैलो स्वास्थ्य ने इस संबंध में वाराणसी के काशी मेडिकेयर की स्त्री रोग एवं प्रसूति विशेषज्ञ डॉ. शिप्रा धर से भी बात की। इस बारे में बात करते हुए डॉक्टर शिप्रा धर ने बताया कि स्तनपान कराने वाली महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर का जोखिम बहुत हद तक कम हो जाता है। ब्रेस्ट फीडिंग के दौरान एस्ट्रोजन और प्रोजेस्ट्रॉन हार्मोन स्रावित होते हैं, जो ब्रेस्ट कैंसर का जोखिम कम करते हैं। इसके अलावा, स्तनपान बर्थ कंट्रोल के लिए प्रभावकारी है।

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ब्रेस्ट कैंसर (Breast Cancer) क्या है?

स्तनों में गांठ, त्वचा में बदलाव, निप्पल के आकार में बदलाव, स्तनों का सख्त होना, स्तन के आस-पास गांठ होना, निप्पल से रक्त या तरल पदार्थ का आना या स्तन में दर्द महसूस होना  आदि ब्रेस्ट कैंसर का खतरा हो सकता है। ऐसा एल्कोहॉल या सिगरेट का सेवन करना, पहले गर्भ धारण में देरी होना, बच्चों को स्तनपान न करवाना, शरीर का वजन अत्यधिक बढ़ना, गर्भनिरोधक दवाइयों का सेवन करना या आनुवंशिक कारणों से हो भी ये बीमारी हो सकती  है। घबराइए मत, कैंसर से लड़ना संभव है अगर वक्त पर इलाज शुरू किया जाए। आइए पहले जानते हैं कि ब्रेस्ट कैंसर किन कारणों से हो सकता है।

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ब्रेस्ट कैंसर (Breast Cancer) के किन कारणों से हो सकता हैं?

ब्रेस्ट कैंसर के कई कारण हो सकते हैं, जिनके बारे में हम नीचे बताने जा रहे हैं। आइए जानते हैं ब्रेस्ट कैंसर किन कारणों से हो सकता है :

  • अस्त-व्यस्त दिनचर्या और असंतुलित खानपान की वजह से महिलाओं में तेजी से ब्रेस्ट कैंसर बढ़ रहा है। असंतुलित खानपान और जीवनशैली भी ब्रेस्ट कैंसर का एक कारण माना गया है।
  • वहीं, अगर परिवार में किसी को ब्रेस्ट कैंसर हुआ हो, उम्र बढ़ना, कम उम्र में पीरियड्स शुरू हो जाना आदि बातें ब्रेस्ट कैंसर का जोखिम और बढ़ा देती हैं।
  • शराब या सिगरेट का सेवन करना, पहली प्रेग्नेंसी में देरी होना, बच्चों को स्तनपान न करवाना, शरीर का वजन अत्यधिक बढ़ना, बर्थ कंट्रोल पिल्स (birth control pills) का सेवन करना, हार्मोनल बदलाव आदि ब्रेस्ट कैंसर का जोखिम बढ़ा देते हैं।
  • मोनोपॉज के बाद हॉर्मोन रिप्लेसमेंट (hormone replacement) कराने वाली महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर का जोखिम 20 गुना ज्यादा होता है।
  • इसलिए, अगर ऐसी कोई स्थिति है तो ब्रेस्ट कैंसर की पहचान के लिए ब्रेस्ट सेल्फ एग्जामिनेशन जरूरी होता है। इसका मतलब ये कि आप खुद से जांच करके भी ब्रेस्ट कैंसर का पता लगा सकती हैं।

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क्या कहती है रिसर्च?

कोलंबिया यूनिवर्सिटी के मेलमैन स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ के शोधकर्ताओं ने ब्रेस्ट कैंसर और स्तनपान पर रिसर्च किया। जिसमें वैज्ञानिकों ने ये पाया कि स्तनपान कराने से एस्ट्रोजन रिसेप्टर (ER) और प्रोजेस्ट्रोन रिसेप्टर निगेटिव (PR) ब्रेस्ट कैंसर का जोखिम कम करता है। 

ब्रेस्ट कैंसर का जोखिम कैसे कम करता है स्तनपान?

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मुताबिक शिशु को लगभग छह माह तक स्तनपान कराना बहुत जरूरी है।  मां के दूध में ऐसे एंटीबॉडिज होते हैं जो बच्चे के इम्यून सिस्टम का विकास करते हैं। इसलिए डिलिवरी के तुरंत बाद मां का पहला पीला गाढ़ा दूध बच्चे को पिलाया जाता है। जिससे गर्भाशय से निकलने के बाद बच्चे को बाहरी वातावरण के साथ तालमेल बिठाने की शक्ति मिलती है। इसी के साथ ही मां का भी स्वास्थ्य ठीक रहता है।

कम से कम 6 महीने तक कराएं स्तनपान

अमेरिकन इंस्टीट्यूट फॉर कैंसर रिसर्च और विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मुताबिक बच्चे को कम से कम छह महीने की उम्र तक स्तनपान कराना चाहिए। क्योंकि बच्चा छह माह तक कुछ भी खा-पी नहीं सकता है। इसलिए बच्चे को सारे पोषक तत्व मां के दूध से ही मिलते हैं। साथ ही स्तनपान के दौरान मां के शरीर में स्रावित होने वाले हार्मोन उसमें ब्रेस्ट कैंसर का जोखिम कम करता है। वहीं, अगर मां छह महीने से ज्यादा समय तक स्तनपान कराती हैं तो उसे ओवेरियन कैंसर का भी खतरा लगभग 4 फीसदी तक कम हो जाता है। 

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मां ही नहीं बच्चे को भी कैंसर से बचाता है स्तनपान

स्तनपान कराने से मां ही नहीं बल्कि, बच्चा भी कैंसर से बच सकता है। मां के दूध में पाए जाने वाले एंटीबॉडीज बच्चे में कैंसर के जोखिम को कम करते हैं। इसके अलावा, अन्य कई रोगों से बचाने में भी मददगार साबित होते हैं। साथ ही मां का दूध बच्चे में मोटापे के जोखिम को भी कम करता है।

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स्तनपान कराने से मां को नहीं होती हैं अन्य घातक बीमारियां

स्तनपान कराने से महिला ब्रेस्ट कैंसर के अलावा कई तरह की घातक बीमारियों से बच जाती है। स्तनपान कराने से मां को टाइप-2 डायबिटीज, ओवरियन कैंसर जैसी घातक बीमारियां होने का खतरा 25 फीसदी कम हो जाता है। स्तनपान कराने से ऑस्टियोपोरोसिस (Osteoporosis) होने का खतरा भी कम होता है। ऑस्टियोपोरोसिस एक ऐसी बीमारी है जिसमें हड्डियों के अंदर छेद हो जाते हैं और फ्रैक्चर होने का खतरा रहता है।

और पढ़ें : स्तनपान करवाते समय न करें यह गलतियां

बच्चे को स्तनपान कराने से न सिर्फ बच्चा बल्कि मां भी स्वस्थ रहती है। इसलिए डॉ. शिप्रा धर से स्तनपान कराने वाली मां को सलाह दी है कि “वे बच्चे को लगभग डेढ़ से दो साल तक स्तनपान कराती रहें।”

ब्रेस्ट कैंसर के खतरे को कम करने के अन्य उपाय

अगर आप इन तरीकों को अपनाएंगे तो ब्रेस्ट कैंसर का जोखिम को कम किया जा सकता है, जानिए ये उपाय :

शारीरिक गतिविधियों में शामिल हों

रिसर्च के अनुसार जो महिलाएं शारीरिक गतिविधियों में शामिल होती हैं, उनमें ब्रेस्ट कैंसर होने की संभावना 30 प्रतिशत तक कम होती है। इसलिए शारीरिक गतिविधियों को नियमित अपने दिनचर्या में शामिल करें।

एल्कोहॉल का सेवन न करें

एल्कोहॉल के सेवन से ब्रेस्ट कैंसर समेत अन्य बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए एल्कोहॉल का सेवन न करें।

हरी सब्जी और फलों का सेवन करें

पौष्टिक आहार स्तन कैंसर के खतरे को कम करने में मदद कर सकता है। रोजाना फल और हरी सब्जियों का सेवन करें।

वजन संतुलित रखें

जरूरत से ज्यादा बढ़ता वजन स्तन कैंसर के साथ-साथ अन्य बीमारियों को दस्तक देने के लिए काफी है। इसलिए वजन संतुलित बनाए रखें (वजन कम करने में योग है सहायक)।

तो आपने इस आर्टिकल में जाना कि किस तरह स्तनपान ब्रेस्ट कैंसर का जोखिम कम करने में मदद कर सकता है। साथ ही, ब्रेस्ट कैंसर का जोखिम न हो, इसके लिए हमने आपको कुछ टिप्स भी दिए हैं, जो आपके काम आएंगे। अधिक जानकारी के लिए एक्सपर्ट से संपर्क करें।

हैलो हेल्थ ग्रुप चिकित्सा सलाह, निदान या उपचार प्रदान नहीं करता है

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