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स्पेशल चाइल्ड की पेरेंटिंग में ये 7 टिप्स करेंगे मदद

स्पेशल चाइल्ड की पेरेंटिंग में ये 7 टिप्स करेंगे मदद

माता-पिता बच्चों के जीवन में सबसे खास जगह रखते हैं। बच्चे जीवन के हर छोटे-बड़े पहलूओं के लिए पेरेंट्स की ओर ही देखते हैं। माता- पिता जो करते है वह काम दुनिया में सबसे ज्यादा डिमांडिग होने के साथ-साथ संतोषजनक भी है। पेरेंटिंग आसान नहीं है। वहीं कुछ पेरेंट्स हमेशा इसको लेकर डर और भ्रम में रहते हैं। बच्चे पैदा करते समय उनके दिमाग में सवालों की भरमार होती है। माता-पिता से हमेशा अलर्ट रहने की उम्मीद की जाती है। आज इस आर्टिकल में स्पेशल चाइल्ड (Special child) से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी आपसे शेयर करेंगे और स्पेशल चाइल्ड का ध्यान कैसे रखना चाहिए ये समझेंगे।

बच्चे हमेशा अपनी जरुरतों के बारे में बताए यह जरुरी नहीं होता और माता-पिता के लिए यह तनावपूर्ण हो सकता है। ये चिंता तब दोगुनी हो जाती है, जब बच्चा एक स्पेशल चाइल्ड (Special child) हो। स्पेशल चाइल्ड (Special child) को अपने विचारों को व्यक्त करने में परेशानियों का सामना करना पड़ता है और कई बार उनमें व्यवहार संबंधी समस्याएं भी देखी जाती हैं। यह माता-पिता की जिम्मेदारी बनती है कि वे बच्चे को समझने की कोशिश करें, उन्हें करीब से देखें उनकी खुशियों को समझें, जानें और पूरा करें। कभी-कभी बात संतोष के बारे में भी नहीं है, जरुरतों को समझने के बारे में होती है। एक स्पेशल चाइल्ड (Special child) को संभालना चुनौतीपूर्ण हो सकता है और यहां तक ​​कि कई बार माता-पिता अपना धैर्य और आत्मविश्वास (Self confidence) भी खो देते हैं। यहां हम ऐसे ही सात चुनौतियों के बारे में बात करेंगे, जो एक स्पेशल चाइल्ड का पालन-पोषण करते समय आती है और हम उनसे कैसे निपट सकते हैं?

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बच्चों से बात करने की कोशिश करें (Try to talk to children)

स्पेशल चाइल्ड (Special child)

एक बच्चे के विकास में अलग-अलग तरह की न्यूरोलॉजिकल समस्याएं (Neurological problem) आने की संभावनाएं रहती हैं। इसमें माता-पिता सबसे ज्यादा जिस परेशानी का सामना करते हैं, वो है बातचीत करने के लिए कुछ अलग और अनूठे तरीकों की कमी। बच्चे अपनी छोटी-छोटी जरुरतों को कई बार माता-पिता तक नहीं पहुंचा पाते हैं। इस समस्या को थेरेपी और परामर्श द्वारा सुधारा जा सकता है। इसके लिए माता-पिता अपने बच्चे से बात करने के लिए कुछ अलग कर सकते हैं। किसी प्रोफेशनल की मदद से और अपने अनुभव से इसे बेहतर बनाया जा सकता है।

सामाजिक दबावों को ना होने दे खुद पर हावी (Do not let social pressures dominate yourself)

हम एक कॉम्पटेटिव समाज में रहते हैं, जहां अधिकांश मामलों आपकी तुलना दूसरों से की जाती है। हालांकि अधिकांश लोग स्थिति को समझने की कोशिश करते हैं, लेकिन हर कोई इसको नहीं समझता। इन सभी सामाजिक दबावों से दूर रहकर एक स्पेशल चाइल्ड को सामान्य बचपन देने के लिए आवश्यक पहलुओं पर ध्यान देना जरुरी है। कभी भी अपने बच्चे पर किसी तरह का कोई दबाव न बनाएं। आप हर हाल में अपने बच्चे के साथ समझदारी दिखाएं। इससे न सिर्फ उसका मनोबल बढ़ेगा साथ ही खुश भी रहेगा।

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कैसे करें टाइम मैनेजमेंट? (Time management is necessary)

दूसरे बच्चे की तुलना में एक स्पेशल चाइल्ड (Special child) को हमेशा ध्यान और सर्पोट की ज्यादा जरुरत होती है। रोजमर्रा की जिंदगी में बहुत छोटी-छोटी चीजों के लिए भी उन्हें मदद की जरुरत हो सकती है। कई बार माता-पिता ये सब करने के बाद थका हुआ महसूस करते हैं, जो एक आम बात है। इस स्थिति को संभालने के लिए आप परिवार के किसी विश्वसनीय सदस्य के साथ बात करके उनके साथ इस काम को बांट सकते हैं। इससे आपकी तकलीफ थोड़ी कम हो जाएगी और बच्चे पर भी किसी तरह का कोई असर नहीं होगा।

खुद पर भरोसा रखें (Trust in yourself)

माता-पिता में अपने बच्चे को दी जाने वाली परवरिश को लेकर शक होना बहुत आम बात है। अगर बच्चा एक स्पेशल चाइल्ड (Special child) है, तो खुद पर यह भ्रम और बढ़ जाता है। हमेशा अपने आप पर भरोसा करना बेहतर है, लेकिन मन में खुद के लिए शक होने पर किसी से इसके बारे में बात करें और मदद लें। आपको यह कभी नहीं भूलना चाहिए कि पेरेंट्स (Parents) चाहें वह एक स्पेशल चाइल्ड (Special child) के माता-पिता हो या नहीं उन्हें अपने बच्चे का पालन-पोषण करने में बहुत सारी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।

भाई-बहनों के बीच घनिष्ठता

भाई-बहनों में हेल्दी प्रतिस्पर्धा होना एक सामान्य बात है। स्पेशल चाइल्ड (Special child) को इस स्थिति को समझना चुनौतीपूर्ण लग सकता है। यह माता-पिता (Parents) की जिम्मेदारी है कि वे उन्हें समझाएं और उन्हें हेल्दी कॉम्पटिशन के लिए प्रेरित करें। दोनों बच्चों में समानता का भाव लाने के लिए दोनों बच्चों को एक साथ समझाना चाहिए। इस स्थिति को आपसे अच्छा कोई नहीं हैंडल कर सकता। कभी भी अपने बच्चों में किसी भी चीज को लेकर अंतर न करें।

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खर्चों को मिलकर उठाएं

मां-बाप के लिए एक स्पेशल चाइल्ड (Special child) का खर्चा उठाना महंगा पड़ सकता है। दूसरे परिवारों की तरह ऐसे परिवार में दोनों माता-पिता का बाहर जाकर काम करना मुश्किल हो सकता है। साथ ही ऐसे घरों में स्पेशल चाइल्ड (Special child) का स्वास्थ्य बीमा कवर होना बेहद जरूरी है, क्योंकि इन बच्चों को अक्सर चोट (Injury) लगने और अस्पताल में भर्ती होने का खतरा बना रहता है। माता-पिता को ऐसे खर्चों से निपटने के लिए पार्ट टाइम या घर से काम करने वाली नौकरी का सहारा लेना चाहिए। इससे माता-पिता दोनों मिलकर बच्चों के साथ होने वाली किसी भी तरह की दुर्घटना के लिए तैयार रह सकते हैं। इसके लिए हमेशा अलग से सेविंग्स करके रखें। जिससे अचानक आई समस्या से आप आसानी से निपट सकें।

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बेहतर सर्पोट सिस्टम (Support system) बनाना है जरूरी

बेहतर सपोर्ट सिस्टम पेरेंटिंग के लिए एक महत्वपूर्ण पहलू है। सपोर्ट सिस्टम बनाने के लिए माता-पिता एक स्पेशल चाइल्ड (Special child) को पालने की चुनौतियों में मदद के लिए अपने दोस्तों और परिवार वालों की मदद ले सकते हैं।

यह याद रखना जरूरी है कि धैर्य और दृढ़ता एक स्पेशल चाइल्ड (Special child) की जरूरतों को संभालने की कुंजी है। बड़े पहलुओं पर ज्यादा सोचने से बेहतर है कि बच्चों की छोटी जीत पर खुश हो। हालांकि कई बार यह मुश्किल हो सकता है, लेकिन माता-पिता बच्चे द्वारा हासिल किए गए छोटी सफलताओं पर उन्हे शाबाशी दें और उन्हें जिंदगी में आगे बढ़ने की प्रेरणा दें।

हम आशा करते हैं आपको हमारा यह लेख पसंद आया होगा। हैलो हेल्थ के इस आर्टिकल में स्पेशल चाइल्ड (Special child) का कैसे ध्यान रखें इससे जुड़ी सभी जानकारी दी गई है। यदि आप इससे जुड़ी अन्य कोई जानकारी पाना चाहते हैं तो आप अपना सवाल हमसे कमेंट कर पूछ सकते हैं। आपको हमारा यह लेख कैसा लगा यह भी आप हमें कमेंट सेक्शन में बात सकते हैं। अपने करीबियों को इस जानकारी से अवगत कराने के लिए आप ये आर्टिकल जरूर शेयर करें।

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Nidhi Sinha द्वारा लिखित आखिरी अपडेट 14/07/2021 को
डॉ. प्रणाली पाटील के द्वारा मेडिकली रिव्यूड
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