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IBS Diet Guide : जानिए किन फूड्स को कहना है 'हां' और किनको 'ना'

IBS Diet Guide : जानिए किन फूड्स को कहना है 'हां' और किनको 'ना'

इरिटेबल बाउल सिंड्रोम की समस्या इंटेस्टाइन की कंडीशन है, जो स्टमक पेन, कॉन्स्टिपेशन, डायरिया (Diarrhea) आदि का कारण बनती है। इस कंडीशन के कारण बाउल मूवमेंट में बदलाव होते हैं। कुछ लोगों में डायरिया के लक्षण नजर आते हैं, तो कुछ लोगों का पेट ठीक से साफ नहीं हो पाता है। इस कारण से रोजाना की एक्टिविटी प्रभावित होती है। जैसा कि हम सभी जानते हैं कि किसी भी बीमारी में डायट की अहम भूमिका होती है, ठीक उसी तरह से आईबीएस की समस्या होने पर भी डायट में बदलाव बहुत जरूरी हो जाता है। डायट में बदलाव बीमारी के लक्षणों को कम करने का काम करता है। आज हम आपको इस आर्टिकल के माध्यम से आईबीएस डायट गाइड के बारे में जानकारी देंगे। जानिए खाने में किस तरह का बदलाव आपको इस समस्या से राहत दिलाने में मदद कर सकती है।

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आईबीएस डायट गाइड (IBS Diet Guide) के पहले जानिए इरिटेबल बाउल सिंड्रोम के बारे में

इरिटेबल बाउल सिंड्रोम इंटेस्टाइनल डिसऑर्डर (Intestinal disorder) है। मांसपेशियों में संकुचन के कारण स्टमक पेन, गैस की समस्या और आंतों में सूजन की समस्या हो जाती है। कभी-कभी बैक्टीरिया या वायरस का इंफेक्शन भी आंतों में सूजन की समस्या पैदा कर सकता है। अगर आईबीएस की समस्या के दौरान खानपान पर ध्यान न दिया जाए, तो आईबीएस के लक्षण अधिक गंभीर भी हो सकते हैं। यानी इरिटेबल बाउल सिंड्रोम की समस्या होने पर खानपान में बदलाव के साथ ही आपको लाइफस्टाइल में सुधार करने की भी जरूरत पड़ती है। जानिए क्या होनी चाहिए आईबीएस डायट गाइड (IBS Diet Guide) और किन बातों का रखना चाहिए ध्यान।

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खाने में शामिल करें अधिक फाइबर वाले फूड्स (High Fiber Foods)

फूड्स

अगर आपको कब्ज की समस्या परेशान कर रही है, तो खाने में फाइबर युक्त फूड्स को शामिल करें। खाने में फाइबर का सेवन करने से स्टूल में बल्क एड हो जाता है, जिसके कारण बाउल मूवमेंट होने में आसानी रहती है। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डायबिटीज एंड डाइजेस्टिव एंड किडनी डिजीज की माने, तो लोग प्रतिदिन 5 से 14 ग्राम फाइबर का सेवन करते हैं। रोजाना खाने में फल, सब्जियों के साथ ही व्होल ग्रेन और पानी का सेवन करना चाहिए। अगर खाने में सॉल्युबल फाइबर का इस्तेमाल किया जाए, तो बेहतर रहेगा। कुछ लोगों को अधिक फाइबर युक्त भोजन करने के कारण सूजन की समस्या हो जाती है। अगर खाने में सॉल्युबल फाइबर लिया जाए, तो इस समस्या से बचा जा सकता है।

ज्यादा न लें हाय फाइबर फूड्स (High Fiber Foods)

IBS डायट गाइड (IBS Diet Guide) में एक बात का ध्यान हमेशा रखना चाहिए। जिस तरह से आईबीएस की समस्या होने पर फाइबर युक्त फूड आपको लाभ पहुंचाते हैं, वहीं हाय फाइबर डायट आपको नुकसान भी पहुंचा सकती है। ऐसा नहीं है कि आपको अपनी डायट से फाइबर युक्त आहार को हटा देना चाहिए बल्कि आपको खाने में लो फाइबर वाले फूड्स जैसे कि सेब, जामुन, गाजर, और दलिया जैसे सॉल्युबल फाइबर युक्त खाने को आपको आहार में जरूर शामिल करना चाहिए। घुलनशील फाइबर आसानी से पानी में घुल जाता है। अघुलनशील फाइबर में व्होल ग्रेन्स, नट्स, ब्रोकली, किशमिश, गोभी आदि शामिल हैं। आपको खाने के करीब आधे घंटे पहले एंटी डायरियल मेडिसिन (Anti-diarrheal medicines) का सेवन करना चाहिए।

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ग्लूटेन (Gluten) को कहें ‘ना’

अगर आपको आईबीएस की समस्या है, तो आपको ग्लूटेन फ्री डायट (Gluten-free diet) लेनी चाहिए। ग्लूटेन मुख्य रूप से ब्रेड और पास्ता में पाया जाता है। ग्लूटेन एक प्रकार का प्रोटीन होता है, जो ग्लूटेन इंटोलरेंस की समस्या से जूझ रहे लोगों के लिए हानिकारक होता है। ये इंटेस्टान को नुकसान पहुंचाने का काम करता है। जिन लोगों को ग्लूटेन इंटोलरेंस की समस्या होती है, वो लोग आईबीएस के लक्षणों को महसूस कर सकते हैं। बेहतर होगा कि आप ऐसे फूड्स बिल्कुल भी न खाएं, जिनमें ग्लूटेन पाया जाता हो। आप इस बारे में अधिक जानकारी के लिए डॉक्टर से परामर्श कर सकते हैं।

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इन चीजों से थोड़ा बना लें दूरी (Elimination diet)

एलिमेशन डायट के तहत आपको खाने में उन फूड्स को अवायड करना चाहिए, जो आईबीएस के लक्षणों को बिगाड़ने का काम कर सकते हैं। ऐसा करने से आपको कुछ ही दिनों बाद आईबीएस के लक्षणों में सुधार दिखेगा। आपको कॉफी, चॉकलेट (Chocolate), अघुलनशील फाइबर, नट्स आदि से दूरी बनाकर रखनी चाहिए। आप किसी भी एक फूड को अपनी डायट से करीब 12 हफ्तों के लिए हटा सकते हैं। फिर अगली बार आप किसी दूसरे फूड को हटाकर आईबीएस के लक्षणों में सुधार कर सकते हैं। अगर आपको इस बारे में अधिक जानकारी चाहिए, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।

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लो FODMAP डायट (Low FODMAP diet)

लो FODMAP डायट से मतलब उन कार्बोहाइड्रेट से है, जो इंटेस्टाइन में ठीक तरह से डायजेस्ट नहीं हो पाते हैं। ये कार्ब्स अधिक मात्रा में बाउल से पानी का अवशोषण करते हैं, इसलिए इनका सेवन करने से आईबीएस के लक्षण अधिक गंभीर हो सकते हैं। ऐसे में अधिक गैस, सूजन और दस्त की समस्या हो सकती है। फरमंटेबल ऑलिगोसैकेराइड्स, मोनोसैकेराइड्स और पॉलियोल्स FODMAP डायट को प्रतिबंधित करते हैं और साथ ही आईबीएस के लक्षणों से राहत दिलाने में मदद करते हैं। सभी कार्बोहाइड्रेट FODMAP नहीं होते हैं। आपको खाने में निम्नलिखित फूड्स को अवॉयड करना चाहिए।

  • लैक्टोज (दूध, आइसक्रीम, पनीर, दही)
  • फूट्स जैसे कि आड़ू, तरबूज, नाशपाती, आम, सेब, प्लम आदि
  • फलियां
  • हाय फ्रक्टोज कॉर्न सिरप
  • स्वीटनर्स
  • गेहूं से बनी रोटी, अनाज, और पास्ता
  • काजू और पिस्ता
  • कुछ सब्जियां जैसे कि ब्रोकोली, प्याज, ब्रसेल्स स्प्राउट्स, फूलगोभी, मशरूम आदि

फैटी फूड्स बढ़ा सकते हैं कब्ज का खतरा

हाय फैट फूड्स का सेवन कई बीमारियों को अपने साथ लेकर आता है। हमारे शरीर के लिए फैट जरूरी होता है लेकिन अधिक मात्रा में फैट फूड्स का सेवन हेल्थ से संबंधित समस्याओं का कारण भी बन सकता है। हाय फैट फूट्स में कम मात्रा में फाइबर होती है, जो आईबीएस से संबंधित कब्ज को बढ़ाने का काम करती है। अगर आप इस बीमारी से जूझ रहे हैं, तो उच्च वसा वाले खाद्य पदार्थों का सेवन बिल्कुल बंद कर दें। साथ ही खाने में फ्राइड फूड्स और एनिमल फैट की जगह आप वेजीटेबल्स, ग्रेंस और लो फैट डेयरी प्रोडक्ट शामिल कर सकते हैं। आप अधिक जानकारी के लिए डॉक्टर से संपर्क कर सकते हैं।

आईबीएस के लक्षणों से राहत पाने के लिए आपको खानपान में सुधार के साथ ही अधिक मात्रा में पानी भी पीना चाहिए। कई बार पानी की कम मात्रा भी कब्ज का कारण बन जाती है। साथ ही आपको रोजाना एक्सरसाइज भी करना चाहिए। खानपान की गलत आदतें कई बीमारियों का कारण बन सकती हैं। अगर आप इन पर ध्यान नहीं देंगे, तो आपको सेहत पर बुरा असर पड़ना शुरू हो जाएगा। कुछ फूड्स से परहेज कर आप आईबीएस के लक्षणों में सुधार कर सकते हैं। अगर आपको दवाओं के सेवन के साथ ही डायट में सुधार करने के बाद भी बीमारी के लक्षणों से राहत नहीं मिल रही है, तो इस बारे में डॉक्टर को तुरंत बताएं। हम उम्मीद करते हैं कि आपको इस आर्टिकल के माध्यम से आईबीएस डायट गाइड के बारे में जानकारी मिल गई होगी। आप स्वास्थ्य संबंधी अधिक जानकारी के लिए हैलो स्वास्थ्य की वेबसाइट विजिट कर सकते हैं। अगर आपके मन में कोई प्रश्न है, तो हैलो स्वास्थ्य के फेसबुक पेज में आप कमेंट बॉक्स में प्रश्न पूछ सकते हैं और अन्य लोगों के साथ साझा कर सकते हैं।

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Bhawana Awasthi द्वारा लिखित आखिरी अपडेट 01/04/2021 को
डॉ. प्रणाली पाटील के द्वारा मेडिकली रिव्यूड