जब ब्लोटिंग से पेट की गाड़ी का सिग्नल हो जाए जाम, तो ऐसे दिखाएं हरी झंडी!

चिकित्सक द्वारा समीक्षित | द्वारा

अपडेट डेट February 6, 2021 . 6 मिनट में पढ़ें
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क्या आपको सुबह-सुबह मोशन हो जाने के बाद भी वो पेट टाइट लगता है? खाना खाने के बाद पेट फूलता है? हमेशा पेट भरा-भरा सा लगता है? और क्या मोशन हो जाने के बाद भी पेट का खालीपन महसूस नहीं होता? अगर इन सभी सवालों का जवाब ‘हां’ है न मेरे दोस्त, तो आज इसी वक्त ये मान लीजिये कि आपको कब्ज (constipation) की शिकायत है। और… सिर्फ कब्ज ही नहीं, इसके साथ-साथ आप हो गए हैं ब्लोटिंग के शिकार, जो आपको सुकून से बैठने नहीं देगा। अब आप कहेंगे कब्ज तो पता है, पर ये ब्लोटिंग (Bloating) क्या बला है? तो जनाब, आपको बता दें कि ब्लोटिंग की शुरुआत भी कब्ज से ही होती है। इसे अच्छी तरह समझाया जाए, तो जब आप कब्ज से परेशान रहते हैं, तो पॉटी (stool) के अटकने के कारण इंटेस्टाइन (intestine) में सूजन आने लगती है। इसकी वजह से शरीर में बनने वाली गैस (gas), स्टूल की वजह से इंटेस्टाइन में ही रह जाती है और आपको पेट फूला हुआ महसूस होता है, जिसे हम ब्लोटिंग के नाम से जानते हैं।

कहीं इस बात को सुन कर आप परेशान तो नहीं हो गए! अरे भाई! इसमें परेशान होने वाली कोई बात नहीं है? कहते हैं न कि अगर मुसीबत है, तो उसका हल भी जरूर होगा, तो बस ये बात यहां भी लागू होती है, लेकिन जरूरी क्या है जानते हैं? इस मुसीबत का जल्द से जल्द हल निकालना क्योंकि हम जानते हैं आप रोजाना के ऑफिस वर्क और टार्गेट्स पूरे करने के बीच कब्ज की परेशानी (Constipation problem) का लोड नहीं ले सकते। इसलिए जरूरी है कि हम मिलकर इस तकलीफ का जितना जल्दी हो सके हल निकाल लें, तो देर किस बात की? चलिए आपको बताते हैं कि ये तकलीफ आपकी जिंदगी से कैसे अलविदा कहेगी! 

और पढ़ें: कब्ज के कारण गैस्ट्रिक प्रॉब्लम से अटक कर रह गई जान? तो, ‘अब की बार, गैरेंटीड रिलीफ की पुकार!’

कॉन्स्टिपेशन और ब्लोटिंग (Constipation and Bloating) – एक ही गाड़ी में सवार दो राही

कब्ज से छुटकारा

आगे बढ़ने से पहले जरा ये जान लीजिए कि कब्ज और ब्लोटिंग (पेट फूलने की समस्या) एक-दूसरे से कैसे जुड़े हुए हैं। दरअसल, ये दोनों एक ही थाली के चट्टे-बट्टे हैं। मतलब ये है कि अगर आपको कॉन्स्टिपेशन है, तो ब्लोटिंग की तकलीफ होकर रहेगी, क्योंकि इनकी दोस्ती कभी न टूटने वाली गहरी दोस्ती है। इसलिए आपके लिए जरूरी है कि आप इन दोनों दोस्तों को एक साथ बाहर का रास्ता दिखा दें। आइए जानते हैं इसके बारे में कुछ और बातें.. 

जॉन्स हॉपकिंस मेडिसिन्स के मुताबिक, ‘ब्लोटिंग का कारण कॉस्टिपेशन होता है। कई लोगों को ये तक पता नहीं होता कि वे कॉन्स्टिपेड हैं। आपको ये बात जानना भी जरूरी है कि यदि रोजाना आपका मोशन सही तरीके से हो जाता है, तब भी आप कॉस्टिपेशन के शिकार बन सकते हैं। जब कॉन्स्टिपेशन की वजह से स्टूल पेट से बाहर ठीक से नहीं निकल पाता, तो पेट में गैस बनने लगती है। जिसके कारण पेट फूलता है और आपको पूरा दिन डिस्कम्फर्ट महसूस होता है। इस तरह कब्ज और ब्लोटिंग (Constipation and Bloating) की दिक्कत एक-दूसरे से पूरी तरह से जुड़ी हुई मानी जाती है। साथ ही साथ पेट में जितने लंबे समय तक स्टूल जमा रहता है, उतनी देर तक पेट में मौजूद बैक्टीरिया उसे फर्मेंट करते रहते हैं। जिसके कारण आप समय के साथ-साथ और भी ब्लोटेड महसूस करते हैं।’ 

तो अब आप समझे, कैसे ब्लोटिंग, कॉन्स्टिपेशन की वजह से आपके शरीर में दस्तक देती है और फिर धीरे-धीरे वहीं अपना घर बना लेती है! अब आप सोच रहे होंगे कि इसका क्या इलाज है? इलाज भी बेहद आसान है, अपने कब्ज का इलाज करिए, ब्लोटिंग अपने आप उसके साथ हो लेगी। वैसे कब्ज (constipation) ठीक करने के लिए भी हमारे पास एक तरीका है! जानना नहीं चाहेंगे? इस इलाज का नाम है लैक्सेटिव। वैसे तो लैक्सेटिव के भी कई प्रकार होते हैं, लेकिन स्टिम्युलेंट लैक्सेटिव इन सभी में सबसे ज्यादा कारगर होता है। स्टिम्युलेंट लैक्सेटिव में आप बिसाकोडिल (Bisacodyl) पर भरोसा कर सकते हैं। जो एक ही रात में आपको कब्ज से गैरेंटीड राहत दे देता है, लेकिन इसके बारे में आगे जानने से पहले हम ये जान लेते हैं कि कब्ज के साथ ब्लोटिंग (पेट फूलने की समस्या) की दिक्कत आपके लिए कितनी खतरनाक साबित हो सकती है!  

और पढ़े : Digestive Disorder: जानिए क्या है पाचन संबंधी विकार और लक्षण?

कब्ज के साथ ब्लोटिंग (Bloating along with Constipation) – खतरे की घंटी है भाई साहब! 

कब्ज से तुरंत राहत

अगर आप ये सोचते हैं कि कब्ज और ब्लोटिंग की तकलीफ आपको ज्यादा नुकसान नहीं पहुंचाएगी, तो आप गलत सोच रहे हैं क्योंकि अगर लंबे समय तक आप कब्ज और ब्लोटिंग (पेट फूलने की समस्या) के चंगुल में फंसे रहते हैं, तो आपको बड़ी सी बड़ी दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। इन दिक्कतों में बवासीर और  फिशर जैसी बड़ी बीमारियों का नाम पहले आता है। इसे और बेहतर समझने के लिए किसी एक्सपर्ट की सलाह बेहद जरूरी है। इसलिए इस तकलीफ के बारे में हमने बात की मुंबई के फॉर्टिस हॉस्पिटल की गेस्ट्रोएंटरोलॉजिस्ट कंसल्टेंट डॉ नूतन देसाई से, जिन्होंने बताया,”खाने के बाद पेट फूलने की तकलीफ लोगों में बेहद आम बात हो चली है। ये कई कारणों से हो सकती है, जैसे कि गलत डायट, एसिडिटी, कॉन्स्टिपेशन और क्रॉनिक पेन्क्रियाटाइटिस। खास तौर पर ब्लोटिंग और कॉन्स्टिपेशन की तकलीफ आपको इसलिए ज्यादा नुकसान पहुंचा सकती है, क्योंकि ब्लोटिंग की वजह से आपकी डायट पर असर पड़ता है। ब्लोटिंग की वजह से आपका फूड इनटेक कम हो जाता है, जिसकी वजह से आपको पेट दर्द, वॉमटिंग, वेट लॉस, अपच जैसे लक्षण भी दिखाई देते हैं।”

डॉ नूतन ने आगे बताया कि, “इससे बचने के लिए आपको अपने बॉवेल मूवमेंट पर ध्यान देना होगा। कुछ खास तरह की चीजें आपकी ब्लोटिंग को बढ़ा सकती है, जैसे बीन्स, पत्तागोभी, ब्रोकली, कच्ची प्याज, आलू और कॉर्न। इसके अलावा आर्टिफिशियल स्वीटनर, सोडा, डेयरी प्रोडक्ट, दूध और फिजी ड्रिंक भी आपकी ब्लोटिंग की तकलीफ को बढ़ा सकती है, इसलिए इन चीजों से परहेज कर हम कॉन्स्टिपेशन के कारण होने वाली ब्लोटिंग से छुटकारा पा सकते हैं।”

देखिए,कब्ज और ब्लोटिंग (पेट फूलने की समस्या) से जुड़ी तकलीफों के बारे में सिर्फ हम नहीं, एक्सपर्ट भी एक ही बात कह रहे हैं कि आपको जल्द से जल्द इसका हल ढूंढना चाहिए। वैसे इस तकलीफ के हल की बात हो ही रही है, तो हम आपको अपनी तरफ से कुछ और पहलूओं के बारे में बताना चाहते हैं। वो क्या है जानते हैं? नहीं? चलिए आगे पढ़ते हैं! 

और पढ़ें: लॉकडाउन और क्वारंटीन के समय कब्ज की समस्या से परेशान हैं? इन उपायों से पाएं छुटकारा

क्या करें जब पेट के दंगल में ब्लोटिंग (Bloating) दे दे आपको पटखनी?  

पेट फूलने के कारण

जैसा कि हम पहले आपको बता चुके हैं, तकलीफ है, तो उसका हल भी जरूर होगा। ये हल क्या है जानते हैं? आपका खाना। जी हां! आपका खाना, जो आप रोज खाते हैं। अगर आप सही डायट लेते हैं, तो काफी हद तक कब्ज और ब्लोटिंग की तकलीफ से राहत पा सकते हैं। जॉन्स हॉपकिंस मेडिसिन्स के मुताबिक, कब्ज और ब्लोटिंग का इलाज काफी हद तक आप अपने खाने में बदलाव लाकर भी कर सकते हैं। लो फर्मेंटेबल ऑलिगोसेकेराइड्स, डायसेकेराइड्स, मोनोसैकराइड्स और पॉलीओल्स कुछ ऐसी डायट्स हैं, जो गैस और ब्लोटिंग को बढ़ा सकती हैं। इन सभी डायट (diet) में ऐसे तत्व होते हैं, जो खाने को फर्मेंट करने के बाद गैस पैदा करते हैं और ब्लोटिंग की तकलीफ होती है।’ इसलिए इस डायट में कौन-कौन से फूड आयटम्स शामिल होते हैं, ये भी तो जानना जरूरी है! 

  • ऑलिगोसेकेराइड्स तत्व गेहूं, प्याज, लहसुन, फलियों और बीन्स में पाए जाते हैं। 
  • डायसेकेराइड्स, दूध में मौजूद लैक्टोज (lactose), योगर्ट (yoghurt) और आइसक्रीम में पाया जाता है। 
  • मोनोसैकराइड्स, सभी तरह के फ्रुक्टोज में पाया जाता है, जिसमें शहद, सेब और पियर्स खास तौर पर पाए जाते हैं।
  • पॉलीओल्स, एप्रिकॉट्स, प्लम्स और फूलगोभी में पाया जाता है।

हमारा पेट इन सभी कार्बोहाइड्रेट्स (carbohydrates) को सोख नहीं पाता और इसे वेस्ट मटेरियल के साथ आगे भेज दिया जाता है। जहां पेट में मौजूद बैक्टेरिया इन तत्वों को फर्मेंट करते हैं और गैस पैदा करते हैं। इसलिए आपको इन फूड आयटम्स से कुछ समय के लिए दूरी बनानी चाहिए। वहीं अगर आप अपने पेट को कब्ज और ब्लोटिंग से राहत दिलाना चाहते हैं, तो आपको फाइबर से भरपूर खाना, पानी (water) और लिक्विड फूड (semi-liquid food) का इंटेक बढ़ाना चाहिए। साथ ही रोजाना एक्सरसाइज करके आप अपने बॉवेल मूवमेंट (bowel movement) को बेहतर बना सकते हैं।

भले ही ये सभी तरीके कब्ज और ब्लोटिंग में कुछ हद तक आपकी मदद करें, लेकिन ये पूरी तरह से इस तकलीफ का इलाज नहीं कर सकते। इसलिए जरूरी है कि आप अपने कब्ज का पुख्ता इंतजाम करें और वो कैसे मुमकिन है? जैसा कि हम आपको पहले बता चुके हैं- लैक्सेटिव इसका जवाब है। लेकिन ये लैक्सेटिव होता क्या है? आइए जान लेते हैं।

और पढ़ें: कॉन्स्टिपेशन से हैं परेशान, तो ‘स्लीप लाइक अ बेबी’ पॉलिसी को अपनाना हो सकता है आपके लिए पॉजिटिव

लैक्सेटिव (Laxative) – एक सुकून भरी रात की कीमत तुम क्या जानो रमेश बाबू!

अगर आपको याद हो, तो हम पहले आपके साथ स्टिम्युलेंट लैक्सेटिव (Stimulant Laxatives) का जिक्र कर चुके हैं। ये लैक्सेटिव कब्ज की दिक्कत के लिए काफी फायदेमंद होता है। यह आपकी आंतों में कॉन्ट्रैक्शन बढ़ाता है और उसमें से पॉटी के बाहर निकलने का रास्ता आसान बनाता है। स्टिम्युलेंट लैक्सेटिव के रूप में सबसे अच्छा ऑप्शन बिसाकोडिल हो सकता है। जो रात में एक बार लेने से सुबह-सुबह पूरी तरह आपका पेट साफ हो जाता है और आप कब्ज से आजादी पा जाते हैं, लेकिन लैक्सेटिव में सिर्फ स्टिम्युलेंट लैक्सेटिव ही एक टाइप नहीं है बल्कि इसके अलावा तीन और मेन टाइप हैं। आइए, थोड़ा उनके बारे में भी जान लेते हैं।

  • ल्यूब्रिकेंट लैक्सेटिव (Lubricant Laxative) पेट में पॉटी (potty) पर चिकनी परत बनाकर उसकी नमी खोने से बचाता है। जिससे वह आसानी से शरीर से बाहर निकल जाती है।
  • स्टूल सॉफ्टर्नस लैक्सेटिव (Stool Softner Laxative) पेट में मौजूद फ्लूइड की मदद से स्टूल को मुलायम बनाता है और कब्ज की परेशानी से राहत मिलती है।
  • ऑस्मोटिक लैक्सेटिव (Osmotic Laxative) शरीर में मौजूद फ्लूइड को पेट में लाकर पॉटी को मुलायम बनाने में मदद करता है। जिससे पेट साफ होने में आसानी हो जाती है।

गैस

और पढ़े: आप भी कब्ज के लिए करते हैं घरेलू उपायों पर भरोसा? देखिए कहीं हो ना जाए धोखा!

तो भाई, जब आपके पास रात भर में राहत पाने का गैरेंटीड इलाज बिसाकोडिल है, तो आपको कब्ज और ब्लोटिंग (पेट फूलने की समस्या) की दिक्कत से डरने की क्या जरूरत है। आपको तो बस रात को बिसाकोडिल (Bisacodyl) लेना है जो आपके सोकर उठने के बाद पेट के रास्ते हमेशा के लिए साफ कर देगा। जब आपके पास इतना आसान इलाज है, तो क्या जरूरत है कि आप दर-दर की ठोकरें खाएं! क्यों न एक ही रात में इसका इलाज पाएं।

हैलो हेल्थ ग्रुप चिकित्सा सलाह, निदान या उपचार प्रदान नहीं करता है

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