स्ट्रेस और कॉन्स्टिपेशन – बॉडी और माइंड की क्लास लगा दे !

चिकित्सक द्वारा समीक्षित | द्वारा

अपडेट डेट February 25, 2021 . 6 मिनट में पढ़ें
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काम, काम, काम! मीटिंग्स, मीटिंग्स, मीटिंग्स! क्या आपके दिमाग में आज कल यही सब घूमता रहता है? अच्छा चलिए ये बताइये, जब आप सोने के लिए रात को आंखें बंद करते हैं, तो क्या आपके दिमाग में अगले दिन का ऑफिस स्केड्यूल आ जाता है? और.. तब आप अगले दिन के कामों के बारे में सोचने लगते हैं! तो मेरे दोस्त आप स्ट्रेस की उस सीढ़ी पर खड़े हैं, जहां से ऊपर तो जाया जा सकता है, लेकिन नीचे उतरना बेहद मुश्किल है! ऐसे में यही स्ट्रेस हर रात धीरे-धीरे आपके पूरे शरीर को अपनी गिरफ्त में लेता चला जाता है। जाहिर सी बात है, पेट भी हमारे शरीर का ही अंग है, तो भला ये स्ट्रेस के चंगुल से कैसे बच जाएगा?! बस फिर यहीं से शुरू होती है आपके पेट की तकलीफ, जो बढ़ते-बढ़ते कॉन्स्टिपेशन यानी कि कब्ज तक पहुंच जाती है। यानी स्ट्रेस और कॉन्स्टिपेशन (Stress and Constipation) में गहरा संबंध है।

अगर आपके साथ भी यही हो रहा है न, तो संभलिए, क्योंकि आज नहीं तो कल ये कब्ज, क्रॉनिक कॉन्स्टिपेशन (Chronic Constipation) में तब्दील हो जाएगा। जिसके बाद न तो रहेगा दिन का चैन और ना ही रहेगी सुकून भरी रातें। लेकिन क्या आपका स्ट्रेस इस तरह आपके बॉवेल मूवमेंट को बर्बाद कर सकता है? आपके इसी सवाल का जवाब अब हम देने जा रहे हैं। क्योंकि आपके लिए ये जानना बेहद जरूरी है कि स्ट्रेस का सीधा रास्ता कैसे आपके पेट से होकर गुजरता है यानी कब्ज और मानसिक स्वास्थ्य के बीच के कनेक्शन को आपके लिए जानना बेहद जरूरी है।  आइए समय ना गंवाते हुए कुछ खास बातें जान ली जाएं! 

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स्ट्रेस और कॉन्स्टिपेशन (Stress and Constipation) – हैं तो एक ही थाली के चट्टे-बट्टे!

स्ट्रेस और कॉन्स्टिपेशन का संबंध है गहरा
पेट के रोगों का मानसिक कनेक्शन

जब बात हो रही हो स्ट्रेस और कॉन्स्टिपेशन (कब्ज) के बीच रिश्ते की, तो एक बात साफ है, इनमें प्यार बहुत ज्यादा है। अगर आपका दिन स्ट्रेसफुल रहा है, तो आपको अगले दिन पेट से जुड़ी कोई न कोई दिक्कत तो होकर रहेगी। इसे ना हम थोड़ा आसानी से समझने की कोशिश करते हैं। समझिये कल आपका एक बहुत जरूरी इंटरव्यू है या आपका कोई क्लाइंट कॉल है या फिर ऑफिस में किसी से आपका झगड़ा हुआ है, ऐसी स्थिति में आपके पेट में होनेवाली वो नर्वसनेस की गुड़गुड़ याद है? अगर आपको अक्सर पेट में ऐसी फीलिंग होती है, तो समझ जाइये कि आपके दिमाग का आपके पेट के साथ गहरा रिश्ता है। अमेरिकन इंस्टीट्यूट ऑफ स्ट्रेस की एक रिसर्च के मुताबिक आपके पेट और दिमाग का सीधा तालमेल माना जाता है। जब आप स्ट्रेस में होते हैं, तो आपको नौशिया, पेट दर्द और डायजेस्टिव सिस्टम से जुड़ी और भी तकलीफें झेलनी पड़ सकती हैं। इन सभी तकलीफों में से कॉन्स्टिपेशन की तकलीफ आम तौर पर देखी गई है। इसे मेडिकल भाषा में समझें, तो जब आपका सायकोलॉजिकल स्ट्रेस फिजिकली दिक्कत देने लगे, तो उसे सोमैटिक सिम्प्टम का नाम दिया जाता है। 

अब आप सोच रहे होंगे कि ये स्ट्रेस ऐसा क्या करता है कि हमें कॉन्स्टिपेशन की तकलीफ हो जाती है? तो इसका जवाब है हमारे पास! इसके लिए हमने बात की एक्सपर्ट से! नानावटी सुपर स्पेशिलिटी हॉस्पिटल में कंसल्टेंट साइकियाट्रिस्ट डॉ. वाणी कुल्हाली ने बताया, “स्ट्रेस के कारण कॉन्स्टिपेशन हर उस व्यक्ति को हो सकता है, जो मेंटली हेल्दी ना हो। जैसा कि सभी जानते हैं स्ट्रेस सीधा बॉडी फंक्शन पर असर करता है, इसलिए कुछ स्थितियों में व्यक्ति को स्ट्रेस के कारण कॉन्स्टिपेशन की दिक्कत हो सकती है। जैसे, यदि स्ट्रेस के कारण आप अपने एक्सप्रेशन्स को दबाते हैं, तो इसका बुरा प्रभाव आपके बॉडी फंक्शन पर पड़ता है और आपको कॉन्स्टिपेशन की दिक्कत हो सकती है। साथ ही स्ट्रेस के कारण लोगों की डायट और एक्टिविटी लेवल कम होती चली जाती है, जिसका सीधा असर डायजेस्टिव हेल्थ पर पड़ता है। इसके अलावा जो लोग एंटीडिप्रेसेंट ले रहे होते हैं, उन्हें भी साइड इफेक्ट के तौर पर कॉन्स्टिपेशन की तकलीफ हो सकती है।”

इसे इस तरह भी समझा जा सकता है। स्ट्रेस की वजह से एड्रिनल ग्लैंड्स एपिनेफ्रीन (Epinephrine) नाम का हॉर्मोन रिलीज करती है, जो शरीर को लड़ो या मरो का मैसेज पहुंचाता है। इसकी वजह से शरीर का ब्लड फ्लो इंटेस्टाइन से हटकर आपके खास ऑर्गन्स यानी कि हार्ट, लंग्स और ब्रेन की तरफ होने लगता है। जिससे आपका डायजेस्टिव सिस्टम (Digestive System) धीरे काम करने लगता है और आपको कॉन्स्टिपेशन की तकलीफ हो जाती है। साथ ही जब आप स्ट्रेस में होते हैं, तो इसका सीधा असर आपके खान-पान (Food Intake), स्लीपिंग सायकल (Sleep) और पानी के इंटेक (Water Intake) पर पड़ता है। आगे चलकर ये सभी फैक्टर्स कॉन्स्टिपेशन का कारण बनते हैं। 

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तो अब आप समझे कि कैसे आपके दिमाग का फितूर आपके पेट की नैया डुबाता है? जी हां कब्ज और मानसिक स्वास्थ्य (Constipation and Mental Health) का रिश्ता गहरा है। अब ये जान लिया है, तो ये भी जान लीजिये कि हर दर्द की एक दवा होती है। इसका एक इलाज तो हाथों-हाथ हम आपको दे सकते हैं। वो क्या है जानते हैं? लैक्सेटिव! इसमें से एक है स्टिम्युलेंट लैक्सेटिव, जिसमें आप बिसाकोडिल (Bisacodyl) का इस्तेमाल कर सकते हैं। जी हां, रात को बिसाकोडिल लेकर सोएं और दूसरी सुबह पेट की भूलभुलैया का हर रास्ता ऐसा साफ मिलेगा कि आप उसपर शाही सवारी निकाल दें। 

हो सकता है आपको हमारी बात पर यकीन ना आए! तो इसका बंदोबस्त भी हमने कर रखा है! हमारे पास है एक्सपर्ट की राय, जो आपको इसी से जुड़ी खास जानकारी देगी। चलिए.. चलिए.. देर मत कीजिये!

हां भाई! एक्सपर्ट की राय के बिना आप हमारी बात क्यों मानोगे? 

पेट के रोगों का मानसिक कनेक्शन
कब्ज और मानसिक स्वास्थ्य

देखा सही कहा ना हमने! एक्सपर्ट की राय हर कोई मानता है। इसलिए हमने खास आपके लिए बात की दिल्ली, साकेत के मैक्स स्मार्ट सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल के सीनियर कंसल्टेंट साइकियाट्रिस्ट डॉ मधुसूदन सिंह सोलंकी से, जिन्होंने बताया, “हमारा दिमाग और गट (आंत) दोनों एक-दुसरे से पूरी तरह से जुड़े हुए हैं। यहां तक कि हमारे शरीर में गट और दिमाग दोनों में एक ही तरह के न्यूरोट्रांसमीटर्स होते हैं, इसलिए आपने लोगों को ‘गट फीलिंग’ शब्द का इस्तेमाल करते हुए सुना होगा। जाहिर है कि स्ट्रेस का सीधा असर सिर्फ दिमाग पर ही नहीं, बल्कि हमारे गट पर भी पड़ता है। जिससे हमें कॉन्स्टिपेशन के अलावा दूसरी गैस्ट्रिक तकलीफें, जैसे लूज मोशन और पेट दर्द देखे जा सकते हैं।” 

डॉ मधुसूदन सिंह सोलंकी ने आगे बताया, “जब आप स्ट्रेस में होते हैं, तो शरीर में कुछ न्यूरोकेमिकल और हॉर्मोन रिलीज होते हैं, जो गट के आसपास होनेवाले ब्लड फ्लो को शरीर के दूसरे जरूरी पार्ट तक ले जाते हैं, जिसकी वजह से कॉन्स्टिपेशन की तकलीफ बढ़ने लगती है। इसके अलावा सायकोलॉजिकल स्ट्रेस की वजह से आपको इर्रिटेबल बॉवेल सिंड्रोम की भी तकलीफ हो सकती है।” 

तो लीजिए अब तो एक्सपर्ट ने भी बता दिया कि स्ट्रेस और कॉन्स्टिपेशन (Stress and Constipation) के बीच कनेक्शन है अब तो आपको यकीन हो गया कि कैसे आपका स्ट्रेस आपके पीठ पीछे कितना नुकसान करता है! क्या आप ये तो नहीं सोच रहे कि इसका इलाज नहीं मिला, तो क्या होगा? अरे घबराइए मत! क्योंकि हम इसका इलाज अपने साथ लेकर आए हैं! वो इलाज क्या है जानते हैं? ऐसे नहीं भाई.. नए सिरे से शुरू करते हैं! 

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ऐसा इलाज – जो स्ट्रेस (Mental Stress) की सिट्टी-पिट्टी गुल कर देगा! 

क्या… यकीन नहीं हो रहा! अरे हम सच कह रहे हैं! हमारे पास इलाज है! मम्मी कसम! नाम क्या है जानते हैं? स्ट्रेस मैनेजमेंट। ये ऐसा सटीक इलाज है, जो आपको स्ट्रेस से आसानी से छुट्टी दिलाएगा, और फिर कॉन्स्टिपेशन का जब दोस्त ही नहीं रहेगा, तो भला वो क्यों टिकेगा? 

स्ट्रेस और कॉन्स्टिपेशन के सबंध को समझना है जरूरी
कब्ज और मानसिक स्वास्थ्य के कनेक्शन को समझें

जब हमने स्ट्रेस मैनेजमेंट को लेकर एक्सपर्ट से बात की, तो आप जानते हैं उन्होंने क्या कहा? आप खुद पढ़ लीजिये! इस टॉपिक पर बात करते हुए डॉ. मधुसूदन सिंह सोलंकी ने कहा, “जैसा कि हम पहले बता चुके हैं, स्ट्रेस आपके गट को सीधा अफेक्ट करता है। इसलिए स्ट्रेस मैनेजमेंट कर आप कॉन्स्टिपेशन से समय रहते छुटकारा पा सकते हैं। साथ ही ये इर्रिटेबल बॉवेल सिंड्रोम जैसी तकलीफ में भी बेहद कारगर माना जाता है। इसलिए आप एक्सरसाइज, मेडिटेशन, प्राणायाम, योग के साथ -साथ रोज के खाने में हाय फायबर डायट और पूरी नींद लेकर स्ट्रेस मैनेजमेंट कर सकते हैं। जिससे आपका गट हेल्दी बना रहता है और आप कॉन्स्टिपेशन की तकलीफ से बच जाते हैं।”

समझे! एक्सपर्ट क्या कहना चाहते हैं? आप इस तरह अपने स्ट्रेस को मैनेज करके कॉन्स्टिपेशन (Constipation) को बाहर का रास्ता दिखा सकते हैं और स्ट्रेस और कॉन्स्टिपेशन के बीच के रिश्ते को खत्म कर सकता है। इसी के साथ स्ट्रेस होने पर आपके पास कुछ उपाय और भी हैं, जैसे अपनी पसंदीदा किताब पढ़िए, अपना मनपसंद म्यूजिक सुनिए, अपने किसी दोस्त या परिवार के सदस्य के साथ बात करिये या फिर अपने प्यारे से पेट् डॉग या कैट के साथ खेलिए। देखिये फिर कैसे आपका स्ट्रेस दो मिनट में छूमंतर हो जाएगा। अगर ये करना आपको अच्छा नहीं लगता, तो फिर तो आपके पास एक ही इलाज है। ऐसे नहीं! आपको इलाज जानने के लिए आगे पढ़ना पड़ेगा। 

जब फंस जाएं कब्ज की धोखाधड़ी में, तो तुरंत हायर करें लैक्सेटिव (Laxative) नाम के लॉयर को.. 

कब्ज और मानसिक स्वास्थ्य

अब ये लैक्सेटिव क्या होते हैं? यही सोच रहे हैं न आप? रुको भाई… बताते हैं! दरअसल, लैक्सेटिव ऐसा कम्पोनेंट है, जो एक ही रात में आपके डायजेस्टिव सिस्टम की मरम्मत करता है और सुबह-सबेरे हो जाता है पूरा पेट साफ! लैक्सेटिव कई तरह के होते हैं, जैसे ल्यूब्रिकेंट लैक्सेटिव (Lubricant laxatives), ऑस्मोटिक लेक्सेटिव (Osmotic laxatives), स्टिम्युलेंट लैक्सेटिव (Stimulant laxatives) और स्टूल सॉफ्टनर्स (Stool softeners), लेकिन इसमें सबसे काम का लैक्सेटिव है स्टिम्युलेंट लैक्सेटिव, जिसमें से एक है बिसाकोडिल, जो आपके इंटेस्टाइन को स्टिम्युलेट करके पेट का सारा कचरा बाहर फेंक देता है। तो इस तरह ये बनता है कब्ज का एक गैरेंटीड इलाज! 

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ये सब जानने के बाद तो आप कब्ज के घरेलू नुस्खों में तो नहीं फंसे रहेंगे ना! भाई जब आपके सामने इतना बढ़िया इलाज है, तो ट्राय करने से पीछे क्यों हटना! अब भी देर नहीं हुई! आज ही इस उपाय को ट्राय कर लीजिये। आज का जो लाइफस्टाइल है न, उसे देखने के बाद कॉन्स्टिपेशन की तकलीफ होना बिलकुल ही आम बात है। तो आप ऐसा मत सोचिये कि आपके साथ कुछ अलग हो रहा है। ना ही आपको इसे लेकर निराश होने की जरूरत है। क्योंकि सही इलाज के साथ आप कॉन्स्टिपेशन को जड़ से हिला सकते हैं। तो देर मत कीजिये! क्योंकि पेट का ताला, इसी चाबी से खुलेगा दोस्त!  

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