Anal fissure: एनल फिशर क्या है? जानिए इसके कारण लक्षण और उपाय

चिकित्सक द्वारा समीक्षित | द्वारा

अपडेट डेट July 6, 2020 . 4 मिनट में पढ़ें
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एनल फिशर क्या है?

एनल फिशर निचले एनल (मलाशय) में एक छोटा सा कट हो जाता है, जिसकी वजह से मल त्यागने में परेशानी होती है। मल त्यागने के पहले, बाद में या फिर इस दौरान ब्लीडिंग, दर्द या बहुत तेज दर्द हो सकता है। शुरूआती दौर में एनल फिशर की समस्या होने पर एनल में हल्का कट होता है जो प्रायः जल्दी ठीक हो जाता है लेकिन, यही कट अगर ज्यादा दिनों तक ठीक न हो तो स्थिति गंभीर हो सकती है।

एनल फिशर की समस्या गंभीर नहीं है लेकिन इसे नजरअंदाज भी नहीं करना चाहिए। वैसे ज्यादातर मामलों में यह चार से छह सप्ताह में ठीक भी हो जाते हैं। कुछ एनल फिशर मामूली इलाज जैसे खाने में फाइबर की मात्रा बढ़ाने से और गर्म पानी में कुछ समय तक बैठने से ठीक भी हो सकते हैं। अगर ऐसा करने से 8 से 12 सप्ताह में क्रोनिक एनल फिशर ठीक नहीं होता है तो ऐसी स्थिति में सर्जरी और दवाओं से ठीक किया जा सकता है।

एनल फिशर कितना सामान्य है?

हेल्थ से जुड़ी यह समस्या सामान्य है। एनल फिशर उम्र के किसी भी पड़ाव पर हो सकता है। इसका इलाज ठीक तरह से करवाने पर संभव है। बेहतर होगा की जल्द से जल्द डॉक्टर से संपर्क किया जाए।

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एनल फिशर के लक्षण क्या हो सकते हैं ?

एनल फिशर के कुछ सामन्य कारण:

  • मल त्यागने के बाद ब्लड स्पॉट दिखाई देना। कई बार फिशर मल से अलग भी नजर आ सकते हैं।
  • मल त्यागने के दौरान पेट में दर्द होना।
  • मल त्यागने के बाद भी लंबे वक्त तक दर्द महसूस होना।
  • एनस के आस-पास दरार या खुजली होना।
  • एनस के पास हुए दरार को आसानी से देखा भी जा सकता है।
  • एनल फिशर होने पर उस जगह पर गांठ हो भी हो सकती है।

ऊपर दिए गए लक्षणों के अलावा और भी लक्षण हो सकते हैं। यदि आपको किसी लक्षण के बारे में कोई चिंता है, तो कृपया अपने चिकित्सक से परामर्श करें।

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हमें डॉक्टर से कब मिलना चाहिए ?

यदि आपको कोई संकेत या लक्षण नजर आते हैं, तो आपको डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। क्योंकि हर किसी का शरीर अलग तरह से कार्य करता है। इसलिए डॉक्टर से मिलना और बीमारी के बारे में सझना बेहतर होगा।

और पढ़ें – Pelvic Inflammatory Disease: पेल्विक इंफ्लेमेटरी डिजीज क्या है? जानें इसके कारण, लक्षण और उपाय

एनल फिशर किन कारणों से होता है?

एनल फिशर के सामान्य कारणों में शामिल हैं:

  • मोशन (मल) ठीक से नहीं होना या फिर परेशानी महसूस होना।
  • कब्ज होना
  • क्रोनिक डायरिया
  • एनोरेक्टल जगह पर सूजन या जलन।
  • क्रोहन रोग या एनोरेक्टल जगह पर परेशानी महसूस होना।
  • एनोरेक्टल जगह पर रक्त का प्रवाह कम होना।
  • एनल कैनाल पर परेशानी होना।

और पढ़ें- Anal Fistula : भगंदर क्या है? जानें इसके कारण, लक्षण और उपाय

एनल फिशर बढ़ने के कुछ खास कारण:

  • एनल कैंसर
  • एचआईवी
  • टुबर्क्युलोसिस
  • सिफलिस
  • हर्पीज

और पढ़ें –  Colon cancer: कोलन कैंसर क्या है?

किन कारणों से बढ़ सकता है एनल फिशर?

एनल फिशर बढ़ने के कारण:

निदान और उपचार

दी गई जानकारी किसी भी चिकित्सा सलाह का विकल्प नहीं है। इसलिए ज्यादा जानकारी के लिए हमेशा अपने चिकित्सक से संपर्क करें।

एनल फिशर का निदान कैसे किया जा सकता है?

आपके डॉक्टर आपसे बेहतर इलाज के लिए लक्षण समझकर एनल फिशर की जांच कर सकते हैं। डॉक्टर डिजिटल रेक्टल की मदद से एनल कैनाल की जांच कर इलाज शुरू कर सकते हैं। हालांकि इस जांच के दौरन अगर मरीज को ज्यादा दर्द या तकलीफ होती है तो डॉक्टर फिशर ठीक होना का इंतजार भी कर सकते हैं।

इस दौरान डॉक्टर यह भी ध्यान रखते हैं की मरीज किसी क्रोनिक बीमारी या फिर किसी और बीमारी से पीड़ित तो नहीं है।

फ्लेक्सिबल सिग्मोइडोस्कोपी: यह टेस्ट तब किया जा सकता है यदि आप 50 वर्ष से कम उम्र के हैं और आंतों के रोग या पेट का कैंसर हो।

क्लोनोस्कोपी: यह टेस्ट तब किया जा सकता है जब आपकी उम्र 50 वर्ष से अधिक हो या आपको पेट का कैंसर, अन्य स्थितियों के लक्षण या पेट दर्द या दस्त जैसे अन्य लक्षणों के होने पर।

एनल फिशर का इलाज कैसे किया जाता है?

एक्यूट एनल फिशर अक्सर आपके खाने की आदतों को बदलकर कुछ हफ्तों के भीतर ठीक हो सकता है, जैसे कि फाइबर और तरल पदार्थों का सेवन बढ़ाना। ऐसा करने से कब्ज की समस्या भी ठीक होगी। लेकिन, अगर आपके लक्षण बने रहते हैं, तो आपको आगे इलाज की आवश्यकता होगी:

  • नाइट्रोग्लिसरीन को बहरी हिस्से पर लगाना
  • टॉपिकल एनेस्थटिक क्रीम जैसे, लिडोकाइन हायड्रो ग्लिसराइएड
  • बोटोलियम टॉक्सिन इंजेक्शन
  • ब्लड प्रेशर की दवाएं
  • क्रोनिक एनल फिशर केस में ऊपर बताए गए तरीके से इलाज किया जाता है।

और पढ़ें – Glycogen Storage Disease Type II: ग्लाइकोजन स्टोरेज डिजीज प्रकार II क्या है?

रोकथाम

एनल फिशर को रोक पाना आसान नहीं है। हालांकि, आप चाहे तो इसके होने की आशंका को कम कर सकते हैं। इसके लिए निम्न प्रकार के परहेज अपनाएं –

  • गूदे के हिस्से को सूखा रखें
  • एनल भाग को कम केमिकल वाले साबुन और गुनगुने पानी से साफ किया करें
  •  निमियत रूप से तरल पदार्थ पिएं
  • बच्चों के डायपर तुरंत बदला करें
  • व्यायाम करें
  • फाइबर युक्त आहार खाएं
  • डायरिया, कब्ज के इलाज में देरी न करें

जीवनशैली में बदलाव या घरेलू उपचार

निम्नलिखित जीवनशैली और घरेलू उपचार आपको एनल फिशर से निपटने में मदद कर सकते हैं:

  • आपके भोजन में फाइबर वाले खाद्य पदार्थ उच्च मात्रा में होना चाहिए, जैसे कि फल, सब्जियां, बीन्स और साबुत अनाज।
  • नियमित रूप से एक्सरसाइज करें इससे शरीर में ब्लड फ्लो बढ़ता है और शरीर एक्टिव रहता है।
  • मल त्याग करते समय जोड़ लगना नहीं चाहिए।
  • एनल फिशर का इलाज करने के लिए मलाशय पर आइस पैक लगाएं। इससे दर्द से राहत पाई जा सकती है। मल त्यागने के बाद आप मलाशय पर आइस पैक लगा सकते हैं।
  • ऐलोवेरा हर घर में बहुत आसानी से पाया जाता है। बायोमेड रिसर्च इंटरनेशनल के शोध के अनुसार, ऐलोवेरा एनल फिशर के घावों को बहुत जल्दी भर सकता है। इसके गूदे को लगाने से बवासीर होने के कारण होने वाली जलन, खुजली और सूजन से राहत मिल सकती है। इसलिए एनल फिशर का इलाज के लिए एलोवेरा का प्रयोग किया जा सकता है। 
  • नारियल का तेल एक प्राकृतिक मॉश्चराइजर का काम करता है। नारियल का तेल लगाने से जलन और सूजन से राहत पाई जा सकती है।

इस आर्टिकल में हमने आपको एनल फिशर से संबंधित जरूरी बातों को बताने की कोशिश की है। उम्मीद है आपको हैलो हेल्थ की दी हुई जानकारियां पसंद आई होंगी। अगर आपको इस बीमारी से जुड़े किसी अन्य सवाल का जवाब जानना है, तो हमसे जरूर पूछें। हम आपके सवालों के जवाब मेडिकल एक्सर्ट्स द्वारा दिलाने की कोशिश करेंगे। अपना ध्यान रखिए और स्वस्थ रहिए।

अधिक जानकारी के लिए आप डॉक्टर से संपर्क कर सकते हैं।

हैलो हेल्थ ग्रुप चिकित्सा सलाह, निदान या उपचार प्रदान नहीं करता है

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