जानिए क्या है प्रेग्नेंसी में एलोवेरा के फायदे और नुकसान?

चिकित्सक द्वारा समीक्षित | द्वारा

अपडेट डेट जनवरी 21, 2020 . 4 मिनट में पढ़ें
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प्रेग्नेंसी में एलोवेरा जूस के सेवन से क्यों बचना चाहिए?

एलोवेरा पौधे की एक प्रजाति है जिसमें कई औषधीय और पोषण संबंधी गुण पाए जाते हैं। इस पौधे में जेल से भरे पत्ते होते हैं। बहुत से लोग जलने और घावों के इलाज के लिए इस जेल का उपयोग करते हैं। इसमें विटामिन सी से लेकर नैचुरल लैक्सेटिव पाया जाता है। एलोवेरा जूस कई नैचुरल फूड स्टोर और सुपर मार्केट में आसानी से मिल जाता है। प्रेग्नेंसी में एलोवेरा  का सेवन करना चाहिए या नहीं जानना जरूरी है।

प्रेग्नेंसी में एलोवेरा का सेवन करना चाहिए?

एलोवेरा में विटामिन और मिनरल की प्रचुर मात्रा गर्भवती महिलाओं के लिए फायदेमंद होती है। इसलिए गर्भावस्था में इसके जूस का सेवन किया जा सकता है। एलोवेरा जूस के सेवन से गर्भावस्था में होने वाली पेट से संबंधित परेशानी, मूड स्विंग या मॉर्निंग सिकनेस दूर होती है, लेकिन जब हैलो स्वास्थ्य ने कंसल्टिंग होमियोपैथ और क्लीनिकल न्यूट्रिशनिस्ट श्रुति श्रीधर से बात की तो उन्होंने बताया कि, ‘प्रेग्नेंसी में एलोवेरा जूस गर्भावस्था के दौरान शरीर में हो रहे बदलाव के कारण  एलर्जी का खतरा शुरू कर सकता है। कभी-कभी इसके सेवन से गर्भाशय सिकुड़ने (uterine contractions) लगता है। इसलिए इसके सेवन से पहले डॉक्टर से जानकरी अवश्य लें।’

गर्भावस्था के दौरान एलोवेरा जेल सूखी त्वचा के लिए एक प्राकृतिक मॉश्चराइजर के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। प्रेग्नेंसी में एलोवेरा नियमित रूप से लगाने से त्वचा सॉफ्ट होती है।

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प्रेग्नेंसी में एलोवेरा जूस के सेवन से होने वाले नुकसान

प्रेग्नेंसी में एलोवेरा जूस क्यों है खतरनाक?

एलोवेरा जूस सेहत के लिए फायदेमंद है, लेकिन प्रेग्नेंसी में एलोवेरा का जूस नुकसानदायक हो सकता है। इसके निम्नलिखित कारण हो सकते हैं।

  • प्रेग्नेंसी में एलोवेरा जूस के सेवन से गर्भाशय सिकुड़ सकता है
  • गर्भावस्था में एलोवेरा के सेवन से गर्भ में पल रहे शिशु को भविष्य में डायजेशन की परेशानी
  • प्रेग्नेंसी में एलोवेरा जूस के सेवन से सिरदर्द की समस्या हो सकती है
  • प्रेग्नेंसी में एलोवेरा जूस के सेवन से शरीर का संतुलन बिगड़ सकता है

इन परेशानियों के साथ-साथ अन्य परेशानी भी हो सकती है। यही नहीं जो महिला स्तनपान करवाती हैं उन्हें भी एलोवेरा जूस का सेवन डॉक्टर से परामर्श के बाद ही करना चाहिए क्योंकि इससे शिशु को डायजेशन की परेशानी हो सकती है।

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कितना सुरक्षित है प्रेग्नेंसी में एलोवेरा का सेवन?

प्रेग्नेंसी में या सामान्य महिला अगर एलोवेरा जेल का इस्तेमाल कॉस्मेटिक या दवा के तौर पर रहे हैं तो यह सुरक्षित हो सकता है। हेल्थ एक्सपर्ट के अनुसार प्रेग्नेंसी में एलोवेरा का सेवन कम वक्त के लिए सेवन सुरक्षित हो सकता है। आप चाहें तो रोजाना 15 मिलीग्राम एलोवेरा का जूस ले सकते हैं। शोधकर्ताओं के मुताबिक, इसका सेवन रोजाना नहीं करना चाहिए। साथ ही, 50% एलोवेरा जेल युक्त घोल को 4 सप्ताह तक दिन में दो बार लिया जा सकता है। एक खास जेल कॉम्प्लेक्स (एलो क्यूडीएम कॉम्प्लेक्स यूनीवेरा इंक) को 8 सप्ताह तक रोजाना लगभग 600 मिलीग्राम की लेना सुरक्षित माना गया है। एलोवेरा लैटेक्स को किसी भी मात्रा में लेना असुरक्षित माना गया है। इसके साथ ही अगर आप एलोवेरा लैटेक्स की ज्यादा मात्रा लेते हैं तो भी यह आपके लिए असुरक्षित हो सकता है लेकिन, प्रेग्नेंसी में एलोवेरा के जूस के सेवन से बचना चाहिए।

ऐलोवेरा का इस्तेमाल करने से पहले बरतें ये सावधानियां

प्रेगनेंसी या स्तनपान के दौरान : 

ऐलोवेरा  जैल या लैटेक्स का इस्तेमाल गर्भावस्था  के दौरान सुरक्षित नहीं माना गया है। शोध के मुताबिक, ऐलोवेरा का इस्तेमाल करने से गर्भपात का खतरा बढ़ जाता है ।इसलिए इस दौरान प्रेग्नेंसी में एलोवेरा के सेवन से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लें।

बच्चों के लिएः

बच्चों की त्वचा पर ऐलोवेरा जैल का इस्तेमाल करना सही है। लेकिन, अगर आप ऐलोवेरा लैटेक्स और ऐलोवेरा के पत्तों का अर्क 12 साल से छोटे बच्चे पर करते हैं तो उन्हें पेट में दर्द, ऐंठन और दस्त की समस्या हो सकती है।

डायबिटीज:

शोध में यह बात सामने आई है कि ऐलोवेरा का सेवन करने से ब्लड शुगर लेवल को कम किया जा सकता है। अगर आप भी डायबिटीज के मरीज हैं और ऐलोवेरा का इस्तेमाल ब्लड शुगर लेवल को कम करने के लिए करना चाहते हैं, तो एक बार सभी पहलूओं पर बारिकी से जांच करें।

क्रोहन रोग:

अल्सरेटिव कोलाइटिस में से अगर आपको कोई भी समस्या हो तो ऐलोवेरा लैटेक्स का प्रयोग बिल्कुल भी न करें। कई बार ऐलोवेरा लैटेक्स लेने से आंत में जलन की समस्या हो सकती है। इसका इस्तेमाल करते वक्त इस बात का भी ध्यान रखें कि ऐलोवेरा के पत्तों से बने उत्पादों में कुछ ऐलोवेरा लैटेक्स शामिल होंगे।

बवासीर:

बवासीर होने पर ऐलोवेरा लैटेक्स न लें। इससे हालत और खराब हो सकती है।

किडनीः

किडनी की समस्या होने पर ऐलोवेरा का अधिक सेवन न करें, क्योंकि इससे किडनी फेल भी हो सकती है।

सर्जरीः

सर्जरी के वक्त या सर्जरी के बाद ऐलेवोरा लेने से यह ब्लड शुगर लेवल को प्रभावित कर सकता है। अगर आपने हाल ही में कोई सर्जरी करवाई है, तो कम से कम दो सप्ताह तक ऐलोवेरा का इस्तेमाल न करें।

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 जानिए ऐलोवेरा कैसे काम करता है लेकिन, प्रेग्नेंसी में एलोवेरा के सेवन से बचना चाहिए

हर्बल सप्लीमेंट के उपयोग से जुड़े नियम,अंग्रजी दवाओं के नियमों जितने सख्त नहीं होते हैं। इनकी उपयोगिता और सुरक्षा से जुड़े नियमों के लिए अभी और शोध की जरूरत है। इस हर्बल सप्लीमेंट के इस्तेमाल से पहले इसके फायदे और नुकसान की तुलना करना जरूरी है। इस बारे में और अधिक जानकारी के लिए किसी हर्बल विशेषज्ञ या आयुर्वेदिक डॉक्टर से संपर्क करें।

एलोवेरा जैल त्वचा के लिए फायदेमंद है और इसका इस्तेमाल त्वचा संबंधित कई समस्याओं के उपचार के तौर पर किया जाता है। इसका इस्तेमाल स्किन पर होने वाली सोरायसिस जैसी बीमारियों से राहत पाने के लिए भी काफी प्रभावकारी है।

ऐलोवेरा पर हुए शोध में यह बात सामने आई है कि इसमें कुछ ऐसे घटक पाए जाते हैं, जो कुछ प्रकार के बैक्टीरिया और कवक के लिए हानिकारक हो सकते हैं। एलोवेरा लैटेक्स में कुछ ऐसे रसायन मौजूद होते हैं, जोकि एक विरेचक औषधि (laxative) के रूप में काम करते हैं।

प्रेग्नेंसी में एलोवेरा जेल से त्वचा की खूबसूरती बढ़ाई जा सकती है और बालों के झड़ने से बचाया जा सकता लेकिन, अगर आप प्रेग्नेंसी में एलोवेरा के सेवन से जुड़े किसी तरह के कोई सवाल का जवाब जानना चाहते हैं तो विशेषज्ञों से समझना बेहतर होगा। हैलो हेल्थ ग्रुप किसी भी तरह की मेडिकल एडवाइस, इलाज और जांच की सलाह नहीं देता है।

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