Colonoscopy: कोलॉनोस्कोपी सर्जरी क्या है?

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अपडेट डेट सितम्बर 17, 2020 . 5 मिनट में पढ़ें
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परिचय

कोलॉनोस्कोपी (colonoscopy) क्या है ?

कोलॉनोस्कोपी एक ऐसी प्रक्रिया है कि जिसमें बड़ी आंत की जांच की जाती है। ये जांच पेट व आंत रोग विशेषज्ञ यानी कि गेस्ट्रोएंट्रोलॉजिस्ट (gastroenterologist) द्वारा किया जाता है। कोलॉनोस्कोपी करने का उद्देश्य बड़ी आंत, कोलन (बड़ी आंत और रेक्टम के बीच का हिस्सा) और मलाशय (Rectum) में होने वाली समस्याओं को जानना और उसकी जांच करना है।

कोलॉनोस्कोपी (colonoscopy) की जरूरत कब होती है ?

आपका डॉक्टर आपको कोलॉनोस्कोपी कराने के लिए तब कहता है जब :

  • जब आपको पेट दर्द, रेक्टल ब्लीडिंग, क्रॉनिक कॉन्स्टिपेशन, क्रॉनिक डायरिया और आंत से जुड़ी अन्य समस्याएं होती हैं तो डॉक्टर रोगों के बारे में जानने के लिए कोलॉनोस्कोपी कराने को कहते हैं।
  • अगर आपकी उम्र 50 साल के ऊपर है तो आपके डॉक्टर कोलॉनोस्कोपी कराने के लिए कह सकते हैं। क्योंकि, कोलन कैंसर के खतरे को जानने के लिए कोलॉनोस्कोपी मददगार साबित होता है। यूं तो डॉक्टर दस साल के अंतर पर कोलॉनोस्कोपी कराने के लिए कहते हैं। लेकिन, किसी तरह की समस्या होने पर इसे तय समय से पहले भी करा सकते हैं।
  • बड़ी आंत, कोलन या रेक्टम में पॉलिप (मस्से जैसा उभार) हो जाता है। जिसे हटाने के लिए डॉक्टर कोलॉनोस्कोपी कराने के लिए कहते हैं। 

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जोखिम

कोलॉनोस्कोपी (colonoscopy) करवाने से पहले मुझे क्या पता होना चाहिए?

कोलॉनोस्कोपी हर किसी के लिए नहीं होती है। कुछ मामलों में टेस्ट की इस प्रक्रिया को नहीं किया जाता है : 

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कोलॉनोस्कोपी के क्या साइड इफेक्ट्स और समस्याएं हो सकती हैं?

कोलॉनोस्कोपी साइड इफेक्ट की बात करें तो टेस्ट को कराने के कुछ घंटे के बाद गैस पास होती है, आपको अपने कोलन से हवा निकलते हुए महसूस होगा। इस दौरान हो सकता है कि थोड़े मात्रा में ब्लड निकल सकता है। ये एक आम बात है, आपको घबराने की जरूरत नहीं है। लेकिन, अगर रक्त स्राव या खून के थक्के ज्यादा मात्रा में निकलने लगे तो अपने डॉक्टर से बात जरूर करें। इसके अलावा अगर आपको बुखार या पेट में दर्द महसूस हो तो आप डॉक्टर से बात करें। आपको बता दें कि अगर ये समस्याएं होनी होती है तो आपको टेस्ट कराने के पहले हफ्ते में ही होती है। लेकिन, कुछ मामलों में कुछ समय बाद समस्याएं सामने आती हैं। कोलॉनोस्कोपी साइड इफेक्ट के बारे में अधिक जानकारी आप डॉक्टर से भी ले सकते हैं।

कोलॉनोस्कोपी में कुछ रिस्क भी है, जो शायद ही कभी हो। लेकिन, फिर भी आपका जानना जरूरी भी है:

  • टेस्ट के दौरान नींद की दवाओं का इस्तेमाल किया जाए तो हानिकारक रिएक्शन होते हैं।
  • उस स्थान से ब्लीडिंग होने लगती है जहां से पॉलिप (मस्से जैसा उभार) को हटाया जाता है।
  • टेस्ट के समय कोलन या मलाशय की दीवार फट सकती है। 

इन सभी रिस्क के बारे में टेस्ट कराने से पहले अपने डॉक्टर से बात जरूर कर लें। टेस्ट करने से पहले डॉक्टर आपसे सहमति फॉर्म (consent form) भरवाता है। जिसके बाद प्रक्रिया शुरू की जाती है। इसलिए आपको अपने डॉक्टर से सभी तरह के साइड इफेक्ट्स और समस्याओं के बारे में जान लेना चाहिए। ताकि बाद में आपको कोई दिक्कत न हो।

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प्रक्रिया

कोलॉनोस्कोपी के लिए मुझे खुद को कैसे तैयार करना चाहिए?

कोलॉनोस्कोपी कराने से पहले आपको अपने कोलन को पूरी तरह से साफ करना होगा। अगर किसी भी तरह का अवशेष कोलन में बच जाता है तो टेस्ट के दौरान अस्पष्ट परिणाम दिखाई देते है।

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अपने कोलन को साफ करने के लिए डॉक्टर आपको देंगे कुछ निर्देश :

  • कोलॉनोस्कोपी कराने से पहले स्पेशल डायट लें। जिसमें आपको टेस्ट के एक दिन पहले से ही ठोस चीजें नहीं खाना चाहिए। इसके अलावा तरल में आपको पानी, चाय, कॉफी, दूध, क्रीम आदि लिक्विड लेना चाहिए। रेड लिक्विड लेने से परहेज करें। क्योंकि वह टेस्ट के दौरान ब्लड के साथ भ्रम पैदा करेगा। वहीं, टेस्ट कराने से लगभग छह से आठ घंटे पहले से आपको कुछ भी नहीं खाना चाहिए।
  • टेस्ट कराने से पहले डॉक्टर आपको पेट साफ करने की दवा देगा। जिससे आपको साफ रूप से मल त्याग होगा। ऐसा दवाओं को लैक्जेटिव कहा जाता है। इसे आपको टेस्ट के एक रात पहले लेने को कहा जाएगा। ताकि टेस्ट वाली सुबह आपका कोलन और रेक्टम साफ हो जाए।
  • कुछ मामलों में डॉक्टर एनीमा के इस्तेमाल की सलाह देते हैं। जो आसानी से बाजार में उपलब्ध है। ये आपके कोलन और रेक्टम को साफ करने में मददगार साबित होता है। 
  • आप जो भी दवाएं ले रहे हैं, टेस्ट कराने से एक हफ्ते पहले आप उन दवाओं के बारे में डॉक्टर से परामर्श कर लें। ये डायबिटीज के मामले में और भी ज्यादा जरूरी हो जाता है। इसके अलावा हृदय संबंधी या हाई ब्लड प्रेशर संबंधी बीमारियों में आपको अपनी दवाएं जरूर से डॉक्टर के साथ डिसकस कर लेनी चाहिए।
  • अगर आप खून को पतला करने जैसी दवाएं ले रहे हैं तो अपने डॉक्टर को जरूर बताएं। जैसे- एस्पीरिन, वॉरफैरिन आदि दवाएं आपको कोलोनोस्कोपी टेस्ट में समस्या पैदा कर सकती है। इसलिए अपने दवाओं के बारे में अपने डॉक्टर से जरूर बात कर लें। 

कोलॉनोस्कोपी में होने वाली प्रक्रिया क्या है?

कोलॉनोस्कोपी को करने में लगभग 30 से 60 मिनट का समय लगता है। परीक्षण के लगभग एक घंटे बाद तक आप बेहोशी की हालत में रहते हैं। परीक्षण के दौरान आपको सिर्फ एक गाउन पहनाया जाता है। इसके बाद आपको बेहोशी की दवा दी जाती है। ताकि परीक्षण के दौरान किसी भी तरह की परेशानी न हो। फिर आपको डॉक्टर एक करवट लेटने को कहेगा। जिसमें से एक पैर का घुटना आपके सीने से चिपका रहेगा। ताकि डॉक्टर आसानी से कोलॉनोस्कोप को आपके रेक्टम के अंदर डाल सके। 

स्कोप इतना लंबा होता है कि वो आपके कोलन के अंदर तक पहुंच सके। स्कोप में एक लाइट, एक कैमरा और एक ट्यूब लगा होता है। इसके बाद डॉक्टर कोलन में हवा (कार्बन डाईऑक्साइड) भरता है। जो कोलन को फूला देता है और उसके अंदर के लाइनिंग को साफ तौर से देखने में मदद करता है। जैसे स्कोप अंदर मूव करेगा वैसे आपको पेट में मरोड़ या आंत में हलचल महसूस हो सकती है। कोलॉनोस्कोप पर लगा हुआ कैमरा बाहर लगे मॉनिटर पर कोलन की तस्वीरें भेजता है। जिसे देख कर डॉक्टर बड़ी आंत, कोलन और रेक्टम की स्थिति पता करते हैं। इसके साथ ही डॉक्टर उसी जगह से एक उपकरण स्कोप के जरिए अंदर डालता है जिससे वो टीशू सैंपल्स (Biopsies)  या पॉलिप्स और अन्य असाधारण टीशू को बाहर निकालता है।

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कोलॉनोस्कोपी के बाद क्या होता है?

  • कोलॉनोस्कोपी के बाद डॉक्टर आपकी जांच करेगा और आपके साथ रिजल्ट यानी की टेस्ट रिपोर्ट को साझा करेगा। 
  • आपके परीक्षण का रिजल्ट अगर निगेटिव आता है तो इसका मतलब ये है कि आपके कोलन में किसी भी तरह की कोई समस्या नहीं है। 

डॉक्टर आपको एक और कोलॉनोस्कोपी कराने के लिए कह सकते हैं, अगर :

  • अगर आपको कोलन कैंसर होने का रिस्क है तो आपको हर 10 साल पर ये टेस्ट कराना होगा। 
  • अगर आपके पिछले टेस्ट में पॉलिप्स निकले थे तो आपको पांचवे साल में टेस्ट कराना होगा।
  • अगर कोलन में अवशिष्ट मल (residual stool) होता है और सही से परीक्षण नहीं हो पाता है तो आपको एक साल में दोबारा कोलॉनोस्कोपी करानी पड़ सकती है। 

अगर आपके टेस्ट की रिपोर्ट पॉजिटिव आती है तो इसका मतलब ये है कि डॉक्टर को पॉलिप्स या असामान्य टीशू आपके कोलन में मिले हैं। ये पॉलिप्स कैंसर के हो सकते है। इसलिए डॉक्टर पॉलिप्स के सैंपल को लैब में परीक्षण के लिए भेजता है। लेकिन, ऐसा जरूरी नहीं है कि हर पॉलिप कैंसर ही पैदा करे। कुछ पॉलिप ऐसे होते है जो आगे चल कर कैंसर का रूप ले सकते हैं। कोलन का कैंसर पॉलिप्स की संख्या और आकार पर निर्भर करता है। अगर डॉक्टर को कोई भी संदेह होता है तो वो आपको अपनी कड़ी निगरानी में रखता है। 

डॉक्टर आपको दूसरी कोलॉनोस्कोपी जल्द कराने के लिए कह सकता है, जब :

  • दो से ज्यादा पॉलिप हो
  • 0.4 इंच (1cm) से ज्यादा बड़ा पॉलिप हो
  • पॉलिप और अवशिष्ट मल (residual stool) के कारण टेस्ट पूरा न हुआ हो।
  • टेस्ट में ऐसे पॉलिप्स का मिलना जिनसे कैंसर होने का खतरा है।
  • कैंसर पॉलिप का मिलना।

अगर कोलॉनोस्कोपी के दौरान पॉलिप या असामान्य टिशू नहीं निकाला जाता है तो डॉक्टर गैस्ट्रोएंट्रोलॉजिस्ट के पास जाने को कहता है। जो बड़े पॉलिप्स को निकाल सके। 

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रिकवरी

कोलॉनोस्कोपी के बाद मुझे खुद का ख्याल कैसे रखना चाहिए?

  • अपने साथ आए परिजन के साथ ही आप घर जाएं। क्योंकि टेस्ट के बाद आपको डॉक्टर डिसचार्ज कर देंगे। लेकिन, आप पर बेहोशी की दवा का असर रहेगा। इसलिए आप अकेले घर नहीं जा पाएंगे।
  • टेस्ट के बाद ऑफिस या काम पर न जाएं और ड्राइव तो बिल्कुल न करें।
  • अगर डॉक्टर ने आपके कोलन से टेस्ट के दौरान पॉलिप निकाला है तो आपको कुछ समय के लिए एक स्पेशल लिक्विड डायट पर रखेंगे। 
  • वॉकिंग करने से आपको राहत मिलेगी।

हैलो स्वास्थ्य किसी भी तरह की मेडिकल सलाह नहीं दे रहा है। अगर आपको किसी भी तरह की समस्या हो तो आप अपने सर्जन से जरूर पूछ लें।

हैलो हेल्थ ग्रुप चिकित्सा सलाह, निदान या उपचार प्रदान नहीं करता है

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