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प्रेग्नेंसी में गोनोरिया बन सकता है बच्चे की मौत की वजह? बचने के हैं बस 2 तरीके

प्रेग्नेंसी में गोनोरिया बन सकता है बच्चे की मौत की वजह? बचने के हैं बस 2 तरीके

गोनोरिया एक सेक्शुअली ट्रांसमिटेड डिजीज (sexually transmitted disease) है। यह एक से दूसरे व्यक्ति में वजायनल (Vaginal), ओरल और एनल सेक्स (Anal sex) के जरिए फैलती है। अगर कोई एक पार्टनर नायसीरिया गोनोरियाय बैक्टीरियम (Neisseria gonorrhoeae bacterium) से संक्रमित होता है, तो दूसरे के इंफेक्टेड होने की आशंका बहुत बढ़ जाती है। हालांकि हर बार बैक्टीरिया का एक्सपोजर इंफेक्शन का कारण नहीं बनता है। गोनोरिया बैक्टीरिया के सरफेस पर प्रोटीन होते हैं जो कि सर्विक्स (cervix) और यूरेथ्रा (Urethra) की कोशिकाओं से अटैच हो जाते हैं। बैक्टीरिया के अटैच होने के बाद ये विभाजित होकर फैल जाते हैं। इससे पीड़ित की कोशिकाएं एवं टिशूज डैमेज हो सकते हैं। प्रेग्नेंसी में गोनोरिया बड़ी परेशानी खड़ी कर सकता है क्योंकि यह डिलिवरी के दौरान मां से बच्चे में ट्रांसफर हो सकता है। जिससे बच्चे की जान भी जा सकती है। प्रेग्नेंसी में गोनोरिया खतरनाक साबित ना हो इसके लिए इसका निदान और उपचार करना बेहद जरूरी है।

प्रेग्नेंसी में गोनोरिया (Gonorrhea in Pregnancy)

ज्यादातर प्रेग्नेंट महिलाएं जिन्हें गोनोरिया (Gonorrhea) होता है उनमें इसके लक्षण दिखाई नहीं देते। इसकी वजह से उन्हें पता नहीं चलता कि वे इस बीमारी से ग्रसित हैं। हालांकि प्रेग्नेंट महिला को कई प्रॉब्लस के प्रति प्रोटेक्शन होता है। उदाहरण के लिए फीटल टिशूज यूटेरस (Uterus) और फैलोपियन ट्यूब (Fallopian tube) को इंफेक्शन से बचाते हैं, लेकिन प्रेग्नेंसी में गोनोरिया होने पर इसके बच्चे में ट्रांसमिटेड होने की आशंका बढ़ जाती है क्योंकि वजायनल डिलिवरी में बच्चे का जन्म के साथ जेनिटल सीक्रेशन भी होता है जिससे बच्चे को यह बीमारी हो सकती है। बच्चे में गोनोरिया के लक्षण दो से पांच दिन बाद दिखाई देते हैं।

और पढ़ें: Trichomoniasis: प्रेग्नेंसी में सेक्शुअल ट्रांसमिटेड इन्फेक्शन होने पर दिखते हैं ये लक्षण

वजायनल बर्थ के बारे में जानने के लिए देखिए ये मॉडल

इंफेक्टेड बच्चे में दिखाई देते हैं ये लक्षण

यदि मां को प्रेग्नेंसी में गोनोरिया हो जाता है और यह डिलिवरी के दौरान बच्चे तक पहुंच जाता है तो बच्चे में निम्न लक्षण दिखाई देते हैं।

  • स्कैल्प इंफेक्शन (scalp infections)
  • अपर रेस्पिरेटरी इंफेक्शन (upper respiratory infections)
  • वजिनाइटिस (vaginitis)
  • यूरेथ्रिरिटिस (urethritis)
  • आई इंफेक्शन (ऐसा होने पर यह परमानेंट ब्लाइंडनेस का कारण भी बन सकता है)

हालांकि गोनोरिया के कारण आई इंफेक्शन होने और इसके कारण होने वाली ब्लाइंडनेस का इलाज संभव है। इसके लिए बच्चे को ऑइंटमेंट देना होता है। बच्चे को इंफेक्शन से बचाने के लिए बेबी के 28 दिन होने से पहले उसका स्क्रीनिंग टेस्ट और मां का लेबर से पहले ट्रीटमेंट होना चाहिए।

और पढ़ें: Chlamydia in Throat: कैसे गले तक पहुंच सकता है सेक्शुअली ट्रांसमिटेड इंफेक्शन?

अगर इंफेक्शन ब्लड तक पहुंच जाता है तो यह जेनरलाइज्ड इलनेस (Generalized illness) का कारण बन सकता है। वयस्कों में अगर यह बैक्टीरिया पूरी बॉडी में फैल जाता है तो यह जॉइंट में परेशानी का कारण बन सकता है। जिससे गठिया, ब्रेन और स्पाइनल कॉर्ड के टिशूज में सूजन आ सकती है।

प्रेग्नेंसी में गोनोरिया के लक्षण क्या हैं? (Gonorrhea symptoms in Pregnancy)

प्रेग्नेंसी में गोनोरिया होने पर इसका निदान करना बेहद मुश्किल होता है क्योंकि इसके पर्टिकुलर लक्षण दिखाई नहीं देते हैं। कुछ महिलाओं और पुरुषों में इसके लक्षण दिखाई दे सकते हैं वे निम्न हैं।

  • यूरिन पास करते वक्त जलन होना
  • पेनिस से डिस्चार्ज होना
  • टेस्टिकल्स (Testicles) में सूजन
  • वजायना से यलो म्यूकस डिस्चार्ज होना
  • वजायना में पस होना
  • असामान्य मेंस्ट्रुअल ब्लीडिंग
  • एनल (Anal) में खुजली
  • एनस (Anus) से ब्लीडिंग
  • बॉवेल मूवमेंट के समय दर्द

चूंकि कई महिलाओं में इसके लक्षण दिखाई नहीं देते इसलिए कई बार इसका इलाज नहीं हो पाता।

  • इसकी वजह से इंफेक्शन सर्विक्स और अपर जेनिटल ट्रैक्ट तक पहुंच जाता है।
  • इंफेक्शन की वजह से पेल्विक इंफ्लामेट्ररी डिजीज (pelvic inflammatory disease) भी हो सकती है।
  • गोनोरिया के कारण पीआईडी होने पर फीवर, एब्डोमिनल पेन और पेल्विक पेन होता है।
  • बैक्टीरिया जो पेल्विक पेन का कारण बनते हैं वे फैलोपियन ट्यूब्स को डैमेज कर सकते हैं जो इनफर्टिलिटी, एक्टोपिक प्रेग्नेंसी (ectopic pregnancy) और क्रोनिक पेल्विक पेन का कारण भी बन सकते हैं।
  • गोनोरिया स्किन को भी प्रभावित कर सकता है। जिसकी वजह से हाथ, कलाई, कोहनी और एड़ियों पर रैशेज भी आ सकते हैं।

और पढ़ें: प्रेग्नेंसी का दूसरा पड़ाव यानी दूसरी तिमाही में रखें इन बातों का ध्यान!

प्रेग्नेंसी में गोनोरिया का इलाज कैसे किया जाता है? (Gonorrhea treatments during pregnancy)

प्रेग्नेंसी में गोनोरिया से बचने का एक ही तरीका है वह है स्क्रीनिंग। महिलाओं को अपनी पहली प्रीनेटल विजिट (prenatal visit) के दौरान ही गोनोरिया के लिए स्क्रीनिंग करवाना चाहिए ताकि इसके लिए प्रॉपर ट्रीटमेंट किया जा सके। इससे जरिए बच्चे में इस बीमारी के ट्रांसफर होने का रिस्क भी बहुत कम हो जाता है। अगर प्रेग्नेंसी में गोनोरिया का इलाज ना किया जाए तो यह मिसकैरिज (miscarriage) और प्रीमैच्योर बर्थ (Premature birth) का कारण बन सकता है। अनकॉम्प्लिकेटेड गोनोरिया का इलाज एंटीबायोटिक व सेफट्रिआक्सोन (ceftriaxone) के जरिए किया जाता है, जिसे बच्चे को मां के लिए सुरक्षित बताया जाता है। हालांकि प्रेग्नेंसी के दौरान किसी भी दवा का उपयोग डॉक्टर की सलाह के बिना ना करें। क्योंकि हर मरीज की स्वास्थ स्थिति अलग होती है। डॉक्टर उम्र, हेल्थ कंडिशन को देखते हुए दवा रिकमंड करते हैं।

क्या गोनोरिया को होने से रोका जा सकता है? (Can Gonorrhea be prevented)

प्रेग्नेंसी में गोनोरिया

गोनोरिया को केवल दो तरीके से ही रोका जा सकता है। जिसमें पहला है सेक्शुअल कॉन्टैक्ट से दूरी और दूसरा है किसी एक साथ के ही सेक्शुअल रिलेशन रखना। कंडोम का उपयोग गोनोरिया की रिस्क को कम कर सकता है, लेकिन उसे पूरी तरह रोक नहीं सकता। 2002 में नेशनल एसटीडी प्रिवेंशन कॉन्फ्रेंस (National STD Prevention Conference) में प्रस्तुत की गई स्टडी के अनुसार कंडोम का यूज 50% रिस्क को कम कर सकता है।

निम्न टिप्स को फॉलो करके भी आप प्रेग्नेंसी में गोनोरिया से बच सकते हैं।

  • सीमित लोगों के साथ सेक्शुअल रिलेशन रखें
  • सेक्स के पहले एल्कोहॉल या ड्रग्स का उपयोग ना करें। ऐसा करने से सेफ सेक्स के चांसेज कम हो जाते हैं
  • एसटीडी के लक्षण और उनके बारे में जानकारी रखें। अपने पार्टनर को भी इस बारे में बताएं
  • नए पार्टनर के साथ सेक्स करते वक्त कंडोम का यूज जरूर करें
  • समय-समय पर एसटीडी के लिए जरूरी स्क्रीनिंग और टेस्ट करवाते रहें
  • अगर आप गोनोरिया से इंफेक्टेड पाए जाते हैं तो जब तक आपका ट्रीटमेंट चल रहा है किसी के साथ सेक्स ना करें

और पढ़ें: क्या प्रेग्नेंसी के दौरान हार्ट पैल्पिटेशन सामान्य है?

गोनोरिया का रिस्क किन लोगों को ज्यादा होता है? (Risk factors for gonorrehea)

गोनोरिया के हाय रिस्क फैक्टर्स में निम्न शामिल हैं।

  • 15-24 उम्र के लोग
  • नए सेक्स पार्टनर के साथ रिलेशन बनाना
  • कई लोगों के साथ सेक्शुअल रिलेशन रखना
  • पहले कभी गोनोरिया या कोई दूसरी सेक्शुअल ट्रांसमिटेड डिजीज से एनकाउंटर
  • एनल और ओरल सेक्स में ज्यादा इनवॉल्व होना

और पढ़ें: जानिए गर्भावस्था के बाद सेक्स कब करना चाहिए? प्रसव के बाद सेक्स के बारे में पाएं पूरी जानकारी

 

उम्मीद करते हैं कि आपको यह आर्टिकल पसंद आया होगा और प्रेग्नेंसी में गोनोरिया के इलाज से संबंधित जरूरी जानकारियां मिल गई होंगी। अधिक जानकारी के लिए एक्सपर्ट से सलाह जरूर लें। अगर आपके मन में अन्य कोई सवाल हैं तो आप हमारे फेसबुक पेज पर पूछ सकते हैं। हम आपके सभी सवालों के जवाब आपको कमेंट बॉक्स में देने की पूरी कोशिश करेंगे। अपने करीबियों को इस जानकारी से अवगत कराने के लिए आप ये आर्टिकल जरूर शेयर करें।

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Manjari Khare द्वारा लिखित आखिरी अपडेट 26/03/2021 को
डॉ. प्रणाली पाटील के द्वारा मेडिकली रिव्यूड
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