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Ectopic Pregnancy : एक्टोपिक प्रेग्नेंसी क्या है? जानें इसके कारण, लक्षण और उपाय

परिचय|लक्षण| कारण|जोखिम|उपचार|घरेलू उपाय
Ectopic Pregnancy : एक्टोपिक प्रेग्नेंसी क्या है? जानें इसके कारण, लक्षण और उपाय

परिचय

एक्टोपिक प्रेग्नेंसी क्या है?

हर महिला ने एक्टोपिक प्रेग्नेंसी के बारे में सुना ही होगा। अगर कोई महिला मां बनना चाहती हो तो प्रेग्नेंसी टेस्ट के दौरान वो दो गुलाबी लाइनें देखना किसी भी अन्य खुशी से बढ़ कर है। लेकिन, कभी-कभी यह झूठी पिंक लाइनें निराशा का कारण भी बन सकती हैं। इसीलिए, एक्टोपिक प्रेग्नेंसी को फेक प्रेग्नेंसी (Fake Pregnancy) भी कहा जाता है।
गर्भावस्था तब शुरू होती है जब अंडाणु निषेचित होता है। आमतौर पर निषेचित हुआ अंडाणु गर्भाशय की परत से जुड़ा होता है। लेकिन इस फेक प्रेगनेंसी की स्थिति में भ्रूण गर्भ के बाहर होता है। अधिकांश मामलों में, यह गर्भावस्था फैलोपियन ट्यूब के अंदर होती है। सही समय पर इस समस्या का निदान या उपचार किया जाए तो इससे भविष्य में सामान्य गर्भावस्था की संभावना बढ़ जाती है।

फेक प्रेग्नेंसी में अंडाणु जीवित नहीं रह पाता और अगर इसका सही समय पर उपचार न किया जाए तो टिश्यू के बढ़ने के कारण जानलेवा ब्लीडिंग हो सकती है। ऐसे में, एक्टोपिक प्रेग्नेंसी को निकालना पड़ता है क्योंकि यह मां के लिए घातक हो सकती है।

और पढ़ें : Termination Of Pregnancy : टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी (अबॉर्शन) क्या है?

लक्षण

एक्टोपिक प्रेग्नेंसी के लक्षण क्या हैं?

अधिकतर मामलों में, एक्टोपिक प्रेग्नेंसी गर्भावस्था के शुरुआती कुछ हफ़्तों के अंदर होती है। इसमें आप यह भी नहीं जान पाएंगी कि आप गर्भवती हैं या आपको किसी तरह की कोई समस्या भी नहीं होगी।
एक्टोपिक प्रेग्नेंसी के शुरुआती लक्षण इस प्रकार हैं:

  • हल्की वेजाइनल ब्लीडिंग और पेल्विक यानी पेडू में दर्द होना
  • पेट का खराब होना या उलटी
  • पेट में तेज ऐंठन
  • शरीर के एक भाग में दर्द
  • चक्कर आना या कमजोरी
  • कंधे, गर्दन या मलाशय में दर्द
  • पीरियड न आना
  • लौ ब्लड प्रेशर

एक्टोपिक प्रेग्नेंसी फैलोपियन ट्यूब को फटने का कारण बन सकती है। अगर आपको अधिक दर्द या ब्लीडिंग हो तो यह इस स्थिति के गंभीर लक्षण हो सकते हैं। अगर आपको अधिक ब्लीडिंग, चक्कर आते हैं या कंधे में दर्द हो तो तुरंत डॉक्टर की सलाह लें।

और पढ़ें : अनचाही प्रेग्नेंसी (Pregnancy) से कैसे डील करें?

कारण

एक्टोपिक प्रेग्नेंसी के कारण क्या है?

प्रेग्नेंसी के अधिकतर मामलों में, निषेचित अंडाणु फैलोपियन ट्यूब से होकर गर्भाशय तक जाता है। यदि अंडाणु की गति रुक जाती है या ट्यूबों के माध्यम से धीमी हो जाती है, तो यह एक एक्टोपिक प्रेग्नेंसी का कारण बन सकता है। इस समस्या का कारण बनने वाले कुछ कारण इस प्रकार हैं:

  • फैलोपियन ट्यूब में जन्म दोष
  • अपेंडिक्स के बाद निशान
  • एंडोमेट्रिओसिस
  • अगर पहले भी आप एक्टोपिक प्रेग्नेंसी से गुजर चुकी हों
  • पिछले संक्रमण या महिला अंगों की सर्जरी से स्कारिंग
  • एक्टोपिक प्रेग्नेंसी के कारण स्पष्ट नहीं है, अधिक धूम्रपान करना भी इसका कारण हो सकता है
  • गर्भाधान से पहले प्रजनन दवाओं का प्रयोग
  • पहले भी ट्यूबल प्रेग्नेंसी होना
  • जो महिलाएं 35 की उम्र के बाद गर्भधारण के बारे में सोचती है , उन्हें भी यह समस्या हो सकती है
  • अगर किसी व्यक्ति की पेल्विक इंफ्लेमेटरी डिजीज(PID) की हिस्ट्री हो तो यह रोग भी सेक्सुअली ट्रांसमिटेड डिजीज (STDs) का कारण बन सकते हैं, जो एक्टोपिक प्रेग्नेंसी का कारण भी हो सकती हैं।
  • अपेंडिक्स या सिजेरियन जैसी सर्जरी भी गर्भावस्था में जटिलताएं पैदा कर सकती है।
  • फॉलोपियन ट्यूब में होने वाला इंफेक्शन या सूजन गर्भाशय की तरफ बढ़ते निषेचित अंडे में बाधा बन सकता है। इस तरह से निषेचित अंडाणु फैलोपियन ट्यूब में ही प्रत्यारोपित हो सकता है जो एक्टोपिक प्रेग्नेंसी का कारण बन सकता है।
  • ओरल गर्भ निरोधकों का प्रयोग करना, फॉलोपियन ट्यूब का असामान्य आकार, पहले एबॉर्शन होना आदि भी एक्टोपिक प्रेग्नेंसी का जोखिम भी बढ़ा सकते हैं।
  • कई बार कारण का पता नहीं होता, हॉर्मोन्स की वजह से समस्या हो सकती है।

और पढ़ें : क्या ब्रेस्टफीडिंग से अनवॉन्टेड प्रेग्नेंसी (Unwanted Pregnancy) रुक सकती है?

जोखिम

एक्टोपिक प्रेग्नेंसी के जोखिम क्या है?

इन स्थितियों में भी एक्टोपिक प्रेग्नेंसी जोखिम भरी हो सकती है,अगर:

और पढ़ें : प्रेग्नेंसी टेस्ट किट (pregnancy test kit) से मिले नतीजे कितने सही या गलत?

उपचार

एक्टोपिक प्रेग्नेंसी का उपचार क्या है?

अगर आपको एक्टोपिक प्रेग्नेंसी के लक्षण नजर आते हैं तो तुरंत डॉक्टर के पास जाएं। एक्टोपिक प्रेग्नेंसी का शारीरिक जांच से शुरुआत में निदान नहीं किया जा सकता है।

एक्टोपिक प्रेग्नेंसी के लिए टेस्ट

आपके लक्षण जानने के बाद डॉक्टर आपको कुछ टेस्ट कराने के लिए कह सकते हैं, जैसे:

  • ट्रांसवजाइनल अल्ट्रासाउंड : ट्रांसवजाइनल अल्ट्रासाउंड में डॉक्टर वजाइना में वेंड की तरह का एक उपकरण को डालेंगे। इससे डॉक्टर यह जान पाएंगे कि जेस्टेशनल सैक गर्भाशय में है या नहीं।
  • ब्लड टेस्ट : आपके डॉक्टर hCG और प्रोजेस्टेरोन के स्तर को निर्धारित करने के लिए ब्लड टेस्ट करा सकते हैं। यदि कुछ दिनों के दौरान ये हार्मोन का स्तर कम हो जाएं या समान रहें औरअल्ट्रासाउंड में एक जेस्टेशनल सैक मौजूद नहीं है, तो गर्भावस्था संभावित रूप से एक्टोपिक है।

यदि आपको गंभीर लक्षण नजर आते हैं, जैसे कि बहुत अधिक दर्द या रक्तस्राव हो, तो समझ ले कि इन सभी चरणों को पूरा करने के लिए आपके पास पर्याप्त समय नहीं है। चरम मामलों में, फैलोपियन ट्यूब फट सकती है, जिससे गंभीर ब्लीडिंग हो सकती है। अगर ऐसा है तो आपके डॉक्टर तत्काल उपचार प्रदान करने के लिए आपकी आपातकालीन सर्जरी करेंगे।

एक्टोपिक प्रेग्नेंसी मां के लिए सुरखित नहीं है। इसके अलावा, इसके भ्रूण विकसित होने में सक्षम नहीं होगा। मां के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए तुरंत इस प्रेगनेंसी को निकालना आवश्यक है। उपचार के विकल्प एक्टोपिक गर्भावस्था के स्थान और उसके विकास पर निर्भर करते हैं।

दवाईयां

आपका डॉक्टर यह तय कर सकता है कि तत्काल जटिलताओं की संभावना है या नहीं। इस मामले में, डॉक्टर आपको कुछ दवाईयां दे सकते हैं, जैसे :

इस समस्या में जो दवाई सबसे सामान्य दी जाती है वो है मिथोट्रेक्सेट (methotrexate)। मिथोट्रेक्सेट वो दवा है जो तेजी से विभाजित कोशिकाओं के विकास को रोकती है, जैसे कि एक्टोपिक सेल्स। अगर आप इस दवा को लेते हैं तो डॉक्टर आपको इंजेक्शन भी दे सकते हैं। इस बात को सुनिश्चित करने के लिए कि दवाईयां प्रभाव डाल रही हैं कि नहीं, आपको नियमित रूप से ब्लड टेस्ट कराना चाहिए। अगर यह दवाईयां प्रभावी हैं, तो इसके लक्षण गर्भपात के समान होने चाहिए जो इस प्रकार हैं:

  • ऐंठन
  • ब्लीडिंग
  • टिश्यू निकलना

अगर ऐसा हो जाता है, तो सर्जरी की आवश्यकता भी कम ही पड़ती है। मिथोट्रेक्सेट लेने के कई महीने के तक आप गर्भवती नहीं हों सकती

सर्जरी

कई डॉक्टर आपको भ्रूण को निकालने और अंदरूनी नुकसान को पूरा करने की सलाह देंगे। इस प्रक्रिया को लैपरोटोमी कहा जाता है। आपके डॉक्टर एक छोटे से चीरे के माध्यम से एक छोटा कैमरा डालेंगे ताकि वो इस प्रक्रिया को देख सके। इसके बाद डॉक्टर भ्रूण को हटा देंगे और फॉलोपियन ट्यूब को हुए नुकसान को ठीक कर देंगे।

अगर सर्जन सफल नहीं होते तो वो बड़े चीरे के माध्यम से लैपरोटोमी को दोहरा सकते हैं। अगर फॉलोपियन ट्यूब को अधिक नुकसान हुआ है, तो सर्जरी के समय डॉक्टर उसे भी निकाल सकते हैं।

घरेलू उपाय

एक्टोपिक प्रेग्नेंसी का घरेलू उपाय क्या है?

एक्टोपिक प्रेग्नेंसी अधिकांश फैलोपियन ट्यूब के बाहर होती है, इसे रोका नहीं जा सकता। लेकिन, आप कुछ ऐसी परिस्थितियों से बचकर जोखिम को कम करने में सक्षम हो सकते हैं जो फैलोपियन ट्यूब को नुकसान पहुंचा सकती हैं। यह इस प्रकार हैं:

  • सभी सेक्सुअली ट्रांसमिटेड डिजीज का पहले ही निदान और उपचार।
  • धूम्रपान न करना
  • यौन पार्टनर अधिक न होना या शारीरिक सम्बन्ध बनाने हुए एहतियात बरतना

एक्टोपिक प्रेग्नेंसी के बाद क्या गर्भधारण करना सुरक्षित रहता है?

ऐसा नहीं है कि एक्टोपिक प्रेग्नेंसी होने पर फिर से गर्भधारण नहीं किया जा सकता है। इस दौरान सही ट्रीटमेंट की सख्त जरूरत होती है। यही नहीं गायनोकोलॉजिस्ट कपल्स को इस बारे में सही सलाह देते हैं। हेल्थ एक्सपर्ट महिला के हेल्थ के अनुसार फिर से हेल्दी गर्भवती होने की सही सलाह देते हैं।

एक्टोपिक प्रेग्नेंसी से जुड़ी अहम जानकारी।

  • 50 में से 1 महिला एक्टोपिक प्रेग्नेंसी से गुजरती हैं।
  • लगभग 6 से 16 प्रतिशत तक गर्भवती महिला पहले ट्राइमेस्टर में ब्लीडिंग और पेन जैसी समस्या से परेशान रहती हैं, जो एक्टोपिक प्रेग्नेंसी के कारण हो सकता है।
  • यूनाइटेड स्टेटस में साल 1980 से 2007 तक 876 गर्भवती महिलाओं की मौत एक्टोपिक प्रेग्नेंसी के कारण हुई थी।

गर्भावस्था की शुरुआत के साथ ही बिना देरी किए जल्द से जल्द डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। हेल्थ एक्सपर्ट अल्ट्रासाउंड और अन्य टेस्ट की मदद से मां और शिशु दोनों की सेहत की जानकारी लेते हैं। इस दौरान डॉक्टर भी जो सलाह देते हैं, उसे ठीक से फॉलो करना चाहिए।

हेल्थ एक्सपर्ट और रिसर्च के अनुसार एक्टोपिक प्रेग्नेंसी का खतरा उन महिलाओं को ज्यादा होता है, जो एक से ज्यादा लोगों के साथ शारीरिक संबंध बनाती हैं। एक से ज्यादा लोगों के साथ फिजिकली अटैच होने से इंफेक्शन का भी खतरा बढ़ जाता है।

क्या एक्टोपिक प्रेग्नेंसी का प्रजनन क्षमता पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ता है?

हां, इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। अगर महिला की फैलोपियन ट्यूब में कोई नुकसान पहुंचता है, तो गर्भधारण में परेशानी हो सकती है। इसलिए अगर कोई महिला एक्टोपिक प्रेग्नेंसी से गुजर चुकी हैं, तो दोबारा बेबी प्लानिंग के दौरान सतर्क रहने की आवश्यकता होती है। ऐसी स्थिति होने पर घबराएं नहीं सिर्फ अपने गायनेकोलॉजिस्ट के संपर्क में रहें और जो सलाह डॉक्टर आपको दें उसे ठीक से फॉलो करें।

और पढ़ें : प्रेग्नेंसी में हल्दी का सेवन करने के फायदे और नुकसान

अगर एक्टोपिक प्रेग्नेंसी की जानकारी जल्द मिल जाए तो यह गर्भवती महिला की सेहत के अच्छा माना जाता है। क्योंकि अगर भ्रूण फैलोपियन ट्यूब में ज्यादा वक्त तक रह जाता है, तो इससे फैलोपियन ट्यूब को नुकसान पहुंचता है। इसलिए प्रेग्नेंसी के दौरान अगर परेशानी ज्यादा हो या वजायनल ब्लीडिंग हो, तो इसे जरा भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। गर्भावस्था के शुरुआत से ही या अगर आपने प्लानिंग के साथ कंसीव किया है, तो पौष्टिक आहार लेना शुरू कर दें। सिगरेट और एल्कोहॉल जैसे पेय पदार्थों से दूरी भी बनाना भी हेल्दी प्रेग्नेंसी के लिए आवश्यक होता है।

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28 दिन

हैलो हेल्थ ग्रुप हेल्थ सलाह, निदान और इलाज इत्यादि सेवाएं नहीं देता।

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Anu sharma द्वारा लिखित आखिरी अपडेट 05/10/2020 को
डॉ. पूजा दाफळ के द्वारा एक्स्पर्टली रिव्यूड
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