छोटे बच्चे का ज्यादा रोना हो सकता है कॉलिक, ऐसे करें हैंडल

By Medically reviewed by Mayank Khandelwal

 रोना नवजात शिशुओं के लिए बात करने का एक महत्वपूर्ण तरीका है लेकिन, बच्चे का ज्यादा रोना किसी परेशानी का संकेत भी हो सकता है। आमतौर पर शिशु दिन में लगभग एक से तीन घंटे रोते हैं। लेकिन, शिशु रोजाना या हफ्ते में तीन दिन, तीन घंटे या फिर इससे ज्यादा समय तक रोए तो हो सकता है कि शिशु को कॉलिक (Colic) की समस्या हो सकती है। 

मॉम्सप्रेसो से बात करते हुए दृष्टि बिजलानी ने बताया कि “कॉलिक की समस्या हर तीन में से एक शिशु को हो सकती है। यह सामान्य तौर पर जन्म के दो से चार सप्ताह बाद तक शिशुओं में देखी जा सकती है जो धीरे-धीरे खुद ही खत्म हो जाती है।” “हैलो स्वास्थ्य” के इस आर्टिकल में जानते हैं कि बच्चे का ज्यादा रोना (excessive crying) कब समस्या बन जाता है? इसके लिए क्या करना चाहिए?

कैसे पहचानें कि बच्चे का ज्यादा रोना, कॉलिक है?

मां के लिए यह पहचानना मुश्किल हो जाता है कि यह नवजात शिशु का ज्यादा रोना है, सामान्य रोना है या कॉलिक है। यह समस्या लड़कों और लड़कियों में एक ही उम्र पर होती है। इसके लिए इन लक्षणों पर ध्यान दें जिससे पता लग सके कि यह नॉर्मल रोना नहीं है बल्कि, कॉलिक है।

  • दिन में तीन घंटे से ज्यादा रोना (अक्सर शाम के समय)
  • मां के द्वारा शिशु को चुप कराने पर भी शांत न होना 
  • रोने के दौरान बीच-बीच में सामान्य व्यवहार करना (खुश रहना) 
  • शिशु बीमार न हो, फिर भी उसका ज्यादा रोना 
  • हाई पिच पर शिशु का रोना

कॉलिक के क्या कारण हैं?

कॉलिक का सटीक कारण अभी तक पता नहीं चल पाया है। कुछ शिशुओं में देखा गया है कि किसी अंदरूनी समस्या जैसे कब्ज, एसिड रिफ्लक्स (Acid reflux), लाइट, शोर आदि के प्रति संवेदनशीलता या ओवरस्टिम्यूलेशन के कारणों की वजह से कॉलिक की समस्या हो जाती है, हालांकि अभी तक इसकी पुष्टि नहीं हो पाई है।

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शिशु को शांत करने के लिए क्या करें?

कॉलिक की समस्या 10 से 40 प्रतिशत शिशुओं को प्रभावित करती है। यह समस्या डेढ़ महीने के बच्चे से शुरू होकर छह महीने की उम्र तक भी रह सकती है। बच्चे का ज्यादा रोना (कॉलिक) फिलहाल किसी तरह की दवाओं से कम नहीं किया जा सकता है। पेरेंट्स को इसके लिए इतना परेशान होने की भी जरुरत नहीं होती है क्योंकि यह किसी तरह के दर्द की वजह से नहीं होता है। शिशु को चुप कराने के लिए शिशु को अपनी गोद में उठाएं, उसकी पीठ थपथपाएं या गाना सुनाएं, शिशु से बात करें। ये सब छोटे-छोटे उपाय उसे शांत करने के लिए पर्याप्त होंगे। 

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डॉक्टर से कब संपर्क करना चाहिए?

  • वैसे तो एक शिशु का रोना सामान्य है लेकिन, जब शिशु तीन घंटे से ज्यादा एक हाई पिच पर रोए और उसका कारण भी समझ न आए तो डॉक्टर से सलाह लें। 
  • शिशु का अत्यधिक रोना एक दिन में कम न हो, तो ऐसी स्थिति में चिकित्सीय परामर्श जरूरी है। 
  • अत्यधिक रोने के साथ शिशु में बुखार जैसे अन्य लक्षण भी दिखें तो तुरंत डॉक्टर को दिखाएं। 

बच्चे का ज्यादा रोना पेरेंट्स को परेशान कर सकता है। हालांकि,अक्सर बिना किसी बात के भी नवजात शिशु नियमित रूप से दिन में एक से चार घंटे रोते हैं। हो सकता है पेरेंट्स को उनके चुप न होने पर गुस्सा आए। ऐसी स्थिति में खुद को थोड़ा शांत रखें। अगर फिर भी शिशु शांत न हो डॉक्टर से संपर्क करें। 

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रिव्यू की तारीख सितम्बर 12, 2019 | आखिरी बार संशोधित किया गया सितम्बर 13, 2019

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