सेक्स और जेंडर में अंतर क्या है जानते हैं आप?

    सेक्स और जेंडर में अंतर क्या है जानते हैं आप?

    सेक्स और जेंडर में अंतर! आप सोचेंगे कि ये कैसा सवाल है? सेक्स और जेंडर में अंतर नहीं है, ये दोनों एक ही चीज हैं। अगर आप अपने दिमाग पर हल्का जोर डालेंगे तो इतना ही बता सकते हैं कि सेक्स दो होते हैं – मेल और फीमेल। वहीं, जेंडर दो होते हैं – पुरुष और महिला।

    अगर जेंडर दो हैं तो ये ट्रांसजेंडर, जेंडर नॉट-कंफर्मिंग और नॉन बाइनरी फोक्स क्या हैं? इस आर्टिकल में जानेंगे कि सेक्स और जेंडर में क्या अंतर है?

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    सेक्स क्या है?

    सेक्स और जेंडर में अंतर समझने से पहले बता दें कि आपका जवाब सही था। सेक्स दो होते हैं – मेल और फीमेल। आपने इंटरसेक्स या डिफरेंस ऑफ सेक्शुअल डेवेलपमेंट (DSD) के बारे में भी सुना होगा।

    डिफरेंस ऑफ सेक्शुअल डेवेलपमेंट में क्रोमोसोम्स, एनाटॉमी या सेक्स के लक्षण शामिल हैं, लेकिन ये मेल या फीमेल की कैटेगरी में नहीं आ सकते हैं।

    कुछ रिसर्च में ये बात सामने आई है कि 100 में से 1 व्यक्ति डिफरेंस ऑफ सेक्शुअल डेवेलपमेंट के साथ पैदा होता है। कुछ जैव वैज्ञानिकों का मानना है कि पारंपरिक सेक्स यानी कि मेल और फीमेल से भी आगे कुछ और कॉम्प्लेक्स होते हैं। डिफरेंस ऑफ सेक्शुअल डेवेलपमेंट के सभी आयाम निम्न हैं :

    सेक्स और जेंडर में अंतर

    जननांग (Genitalia)

    जननांग के बारे में हर कोई जानता है कि मेल के पास पेनिस और फीमेल में वजाइना होता है। हालांकि, कुछ लोग जननांगों को डिफरेंस ऑफ सेक्शुअल डेवेलपमेंट के इतर देखते हैं। ऐसा होने के पीछे कारण यह दिया जाता है कि जो लोग ट्रांसजेंडर होते हैं, वे लोग भी अपने जननांगों की सर्जरी कराते हैं।

    उदाहरण के तौर पर अगर कोई ट्रांसजेंडर पुरुष है तो इसका मतलब यह नहीं है कि वह जन्मजात पुरुष था, हो सकता है कि वह फीमेल के रूप में पैदा हुआ था और उसने बाद में ऑपरेशन से अपना जननांग चेंज कराया हो।

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    गुणसूत्र (Chromosomes)

    आपने सुना होगा कि गर्भ में ही सेक्स डिटरमिनेशन यानी कि लिंग निर्धारण की एक प्रक्रिया होती है। जिसमें XX क्रोमोसोम होने से फीमेल सेक्स और XY होने से मेल सेक्स होता है, लेकिन डिफरेंस ऑफ सेक्शुअल डेवेलपमेंट के साथ पैदा होने वाले लोगों में क्रोमोसोमल कंफिगरेशन मेल फीमेल से अलग हो सकता है

    इसका कोई प्रमाण नहीं है लेकिन देखा गया है कि ट्रांस लोगों के पास ऐसे क्रोमोसोम होते हैं, जो उनके सेक्स से मेल नहीं करते हैं। उदाहरण के तौर पर ट्रांसजेंडर महिला सेक्स से फीमेल है, लेकिन उसके पास XY क्रोमोसोम है।

    प्राइमरी सेक्स की विशेषताएं

    हम जानते हैं कि कुछ सेक्स हॉर्मोन होते हैं, जो मेल फीमेल में अलग-अलग पाए जाते हैं। बस यही सेक्स और जेंडर में अंतर को दिखाता है। जैसे- फीमेल सेक्स में एस्ट्रोजन और मेल सेक्स में टेस्टोस्टेरॉन पाया जाता है, लेकिन सेक्स और जेंडर में अंतर किए बिना आपके लिए यह जानना जरूरी है कि हर व्यक्ति में, चाहे वह कोई भी हो सब में दोनों हार्मोन पाए जाते हैं।

    एक हॉर्मोन है एस्ट्रेडियल (estradiol), यह एस्ट्रोजन का प्रभावी रूप है। हालांकि, एस्ट्रोजन महिलाओं में पाया जाता है, लेकिन एस्ट्रोजन का प्रभावी रूप एस्ट्रेडियल पुरुषों में जन्म से पाया जाता है। एस्ट्रेडियल सेक्शुअल अराउजल, स्पर्म प्रोडक्शन और इरेक्टाइल फंक्शन में अपनी अहम भूमिका निभाता है।

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    सेकेंड्री सेक्स की विशेषताएं

    सेकेंड्री सेक्स की विशेषताएं आसानी से समझ में आ जाती हैं। इसमें चेहरे पर बाल यानी कि मेल में मूंछ-दाढ़ी, फीमेल में ब्रेस्ट और आवाजों में अंतर होना। इसी के आधार पर हम किसी भी व्यक्ति के सेक्स को पहचानते हैं, लेकिन कभी-कभी आपकी ये पहचान गलत भी हो सकती है।

    ये भी हो सकता है कि जो व्यक्ति जिस सेक्स में पैदा हुआ है, उसमें उस सेक्स के आधार पर सेकेंड्री सेक्स के लक्षण सामने आए ही ना। जैसे बहुत सारी फीमेल के फेस पर फेशियल हेयर पाए जाते हैं और कुछ मेल में नहीं।

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    जेंडर क्या है?

    सेक्स और जेंडर में अंतर

    सेक्स और जेंडर में अंतर को समझने के लिए आपको जेंडर के बारे में भी जानना होगा। सेक्स और जेंडर में अंतर के क्रम में अभी तक आपने जाना सेक्स के सभी आयामों के बारे में। अब जानते हैं कि जेंडर क्या है?

    हमारे समाज में सिखाया जाता है कि जेंडर दो तरह के होते हैं – महिला और पुरुष, लेकिन जेंडर की कई सीमा नहीं है, यह विस्तृत है। कुछ लोग नॉन बाइनरी के रूप में पहचाने जाते हैं। नॉन बाइनरी को सात रंगों के अम्ब्रेला से प्रदर्शित किया जाता है। इसका मतलब एक ऐसी पहचान से है जो महिला और पुरुष दोनों से परे हो।

    इसके अलावा जेंडर की कुछ और भी पहचान है, जैसे – बाइजेंडर। बाइजेंडर ऐसे लोग होते हैं, जिनमें महिला और पुरुष दोनों के जेंडर पाए जाते हैं। अजेंडर ऐसे लोग जिनमें किसी भी जेंडर की पहचान न की जा सके। जिसे आज हमारे समाज में थर्ड जेंडर के रूप में देखा जाता है।

    इसलिए जेंडर अब सिर्फ महिला और पुरुष की सीमा में नहीं बंधा है, बल्कि उससे कहीं परे हो गया है। हमारे समाज में ऐसे लोगों को किन्नर कहा जाता है।

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    जेंडर की पहचान क्‍या है

    आप अपने जेंडर के बारे में क्‍या सोचते हैं और इसे लेकर क्‍या समझते हैं और दुनिया को किस तरह देखते हैं, यही आपके जेंडर की पहचान है।

    जैसे कि पुरुष मानते हैं कि समाज उनके निर्णयों से चलता है। इसका मतलब है कि वो दुनिया को एक पुरुष की नजर से देखते हैं, यही जेंडर है।

    लड़कियों के लिए गुलाबी और लड़कों के लिए नीला

    कई देशों में गुलाबी रंग को लड़कियों और नीले रंग को लड़कों की पहचान माना जाता है। हालांकि, 19वीं शताब्‍दी से पहले बच्‍चों के लिए रंगीन कपड़े नहीं आए थे इसलिए सफेद रंग को शिशु की पहचान मानी गई।

    हालांकि, देखा जाए तो गुलाबी रंग मजबूती और प्रबल निर्णायक क्षमता को दर्शाता है जो पुरुषों से संबंधित है जबकि नीला रंग नाजुक और खूबसूरत है जो लड़कियों से संबंधित है।

    आने वाले सौ साल के बाद आपको मुश्किल से ही कोई पुरुष गुलाबी रंग के कपड़ों में दिखेगा क्‍योंकि इस रंग को पूरी तरह से लड़कियों के जेंडर से जोड़ दिया जाएगा।

    कई मायनों में जेंडर और सेक्‍स अलग होता है और इनका संबंध काफी हद तक इंसान की मानसिकता से है। आप अपने दिमाग में जेंडर और सेक्‍स को लेकर क्‍या सोचते हैं और कैसी प्रतिक्रिया देते हैं, ये सब चीजें आपके जेंडर और सेक्‍स से प्रभावित हो सकता है।

    सेक्स और जेंडर के बीच क्या संबंध है?

    सेक्स और जेंडर में अंतर होने के बावजूद इनमें संबंध है। सेक्स और जेंडर में अंतर होने के बाद भी इनमें कुछ समानताएं हैं। अगर कोई व्यक्ति मेल सेक्स के साथ पैदा हुआ है तो उसका जेंडर पुरुष होता है।

    अगर कोई फीमेल सेक्स के साथ पैदा हुई है तो उसका जेंडर महिला होगा, लेकिन जो लोग ट्रांस या नॉन-कन्फर्मिंग जेंडर के होते हैं, जन्म के समय उनका सेक्स भले से निर्धारित रहता है, उनका जेंडर कंफर्म नहीं रहता है। ऐसा भी हो सकता है कि वे जन्म के समय जिस सेक्स के साथ पैदा हुए हैं, भविष्य में उनका सेक्स अलग हो।

    जो लोग सेक्स और जेंडर में अंतर को नहीं समझते हैं, उन लोगों का मानना है कि जेंडर दिमाग में और सेक्स पैंट में होता है। ऐसा सोचने से ट्रांस लोगों को दुख होता है, लेकिन जो लोग समाज की इस हकीकत को अपना चुके होते हैं, वे लोग खुश रहते हैं। ट्रांस लोगों की सामाजिक तौर पर शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक सेहत प्रभावित होती है। हालांकि, हमारे देश की उच्च न्यायालय ने इन्हें समानता का दर्जा दे दिया है।

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    जेंडर सेक्शुअल ओरिएंटेशन से अलग होता है

    बहुत सारे लोगों को लगता है कि ट्रांस लोग हेट्रोसेक्सुअल होते हैं, लेकिन ये सच नहीं है। एक सर्वे में ये बात सामने आई है कि ट्रांस लोगों में से 15 फीसदी लोग ही हेट्रोसेक्सुअल होते हैं। ये लोग लेस्बियन, गे, क्वीर या बाइसेक्शुअल हो सकते हैं, लेकिन इनका हेट्रोसेक्शुअलिटी से सीधा संबंध नहीं होता है इसलिए सेक्स और जेंडर को तराजू के एक ही पलड़े पर न तोला जाए।

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    के द्वारा मेडिकली रिव्यूड

    डॉ. प्रणाली पाटील

    फार्मेसी · Hello Swasthya


    Shayali Rekha द्वारा लिखित · अपडेटेड 30/10/2020

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