फोबियाः आखिर क्यों लगता है ऊंचाई, पानी और अंधेरे से डर?

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Update Date मई 28, 2020 . 4 मिनट में पढ़ें
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हम सब किसी न किसी चीज से अवश्य ही डरते हैं। भय हमारे जीवन की अन्य भावनाओं की तरह ही एक अहसास है। भय कई और किसी भी तरह के हो सकते हैं। जब यह भय जरूरत से अधिक बढ़ जाए तो इसे इंग्लिश में फोबिया कहा जाता है। ऐसा भी माना जाता है कि पुरुषों की तुलना में महिलाएं इसका सामना अधिक करती हैं।

इसके भी कई प्रकार होते हैं जैसे सोशल फोबिया, भीड़ से डर लगना या किसी खास चीज से डरना। जब लोग ऐसा कहते हैं कि उन्हें सांप, मकड़ी, कॉकरोच आदि से डर लगता है तो यह एक किसी खास चीज से डर लगना है। जानिए इस तरह के फोबिया के बारे में और अधिक विस्तार से।

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जानिए अलग-अलग तरह के डर और फोबिया

अंधेरे का डर या फोबिया- निक्टोफोबिया

अंधेरे के डर को निक्टोफोबिया कहा जाता है यानी रात या अंधेरे में भय लगना। यह डर तब फोबिया बन जाता है, जब यह बहुत अधिक बढ़ जाए या आपके रोजाना के जीवन को प्रभावित करें। छोटी उम्र में इनसे डरना बहुत सामान्य है। लेकिन अगर बड़े होने पर भी आप इनसे डरें और आपको इसका फोबिया हो, तो यह आपके लिए खतरनाक हो सकता है। कई बार यह भी अनिद्रा जैसी समस्या से भी जुड़ा हुआ हो सकता है। एक अध्ययन के अनुसार, भी अगर आपको नींद अच्छे से नहीं आती या आपकी नींद पूरी नहीं होती है, तो अंधेरे से डरने की समस्या होने की संभावना बढ़ जाती है। अगर आपको भी यह समस्या है, तो इसे नजरअंदाज न करते हुए तुरंत डॉक्टर से मिले और उचित उपचार कराएं।

पानी का डर- अक्वाफोबिया

हम में से बहुत-से लोग पानी से भी डरते हैं जिसे अक्वाफोबिया कहा जाता है। अन्य किसी भी तरह का भय समय के साथ दूर हो जाता है या हम उससे समझौता कर लेते हैं, लेकिन जो लोग पानी से डरते हैं उन्हें पानी के पास जाना तक पसंद नहीं होता। यानी वो पानी के टब के पास भी नहीं जाते। यह भय या फोबिया एक खास तरह का भी होता है। पानी से भय की तुलना हाइड्रोफोबिया से कभी भी नहीं करनी चाहिए, क्योंकि यह एक समान नहीं होते। इस स्थिति में कुछ खास थेरेपी से इस रोग का उपचार किया जाता है।

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अकेले रहने से डर- ऑटोफोबिया

अकेले रहने के डर को ऑटोफोबिया भी कहा जाता है। यह वो विकार है जिसमें आप को अकेले रहने के नाम से भी डर लगता है। इस डर के भी मनुष्य के शरीर और मन में बहुत नकारात्मक प्रभाव पड़ते हैं। यही नहीं, अगर इसका इलाज न कराया जाए तो परिणाम भयंकर हो सकते हैं।

इसके कुछ लक्षण इस प्रकार हैं:

  • ऐसा महसूस होना जैसे आप असुरक्षित हो
  • आपको सांस नहीं आ रही
  • आप बेहोश हो रहे या मर रहे हो
  • आप सही से सोच नहीं पा रहे हो आदि।

यह समस्या बढ़ने पर स्थिति गंभीर हो सकती है। अगर आपको इनमें से कोई भी लक्षण दिखाई दे रहे हों तो तुरंत डॉक्टर से मिलें। आपकी स्थिति जान कर डॉक्टर आपको कॉग्निटिव बिहेवियरल थेरेपी (CBT) या एक्सपोजर थेरेपी की सलाह दे सकते हैं और मेडिटेशन करने ले लिए भी कह सकते हैं।

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तेज आवाज से डर- फोनोफोबिया

इस तरह के भय को फोनोफोबिया कहा जाता है, जो अधिकतर छोटे बच्चों में देखने को मिलता है। ऐसे लोग अचानक तेज आवाज से डर जाते हैं। तेज आवाज से डरने वाले लोगों को घर से बाहर निकलने या सोशल होने में समय लगता है। बच्चों का यह भय उम्र के बढ़ने के साथ-साथ ठीक हो जाता है लेकिन अगर बड़ो में यह समस्या हो तो ऐसे लोग किसी भी पार्टी, फंक्शन या घर से बाहर तक जाने में घबराते हैं। इस समस्या का उपचार इस बात पर निर्भर करता है कि आपकी परेशानी कितनी बड़ी है। इसके उपचार में एक्सपोजर और टॉक थेरिपी दी जाती है, ताकि रोगी इस समस्या से जल्दी बाहर आ सके।

ऊंचाई से डर- एक्रोफोबिया

ऊंचाई से डर एक्रोफोबिया भी कहा जाता है। कई लोगों को ऊंचाई से इतना अधिक भय होता है कि वो मॉल में एस्केलेटर्स का प्रयोग भी नहीं करते। हालांकि, इस भय को वर्टिगो से जोड़ कर देखा जाता है, लेकिन ऐसा नहीं है यह दोनों अलग-अलग हैं। (वर्टिगो का पता लगाने के लिए डॉक्टर इलेक्ट्रोनिस्टेग्मोग्राफी रिकमेंड करते हैं )

उड़ने का डर- एरोफोबिया

उड़ने के डर को एविओफोबिया या एरोफोबिया भी कहा जाता है, इसमें रोगी को जहाज में बैठने से डर लगता है। उन्हें लगता है कि कहीं उनका प्लेन क्रैश न हो जाए और उनकी मृत्यु न हो जाए।

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रेंगने वाले कीड़ों का डर- एंटोमोफोबिया

रेंगने वाले कीड़ों के डर को एंटोमोफोबिया कहा जाता है दरअसल यह कीड़े जैसे मकड़ी, छिपकली आदि छोटे होते हैं और अधिकतर काटते हैं। इसलिए, अधिकतर लोग इन्हें पसंद नहीं करते और इनसे डरते हैं।

सांप का डर- ओफिडीओफोबिया

सांपों से डर को ओफिडीओफोबिया कहा जाता है। सांप देखने में भयंकर होते हैं और काटते भी हैं। इनके काटने से मृत्यु भी हो सकती है, इसलिए लोग इनसे डरते हैं।

कुत्तों से डर- साइनोफोबिया

कई लोगों को अक्सर कुत्तों से डर लगता है जिसे साइनोफोबिया कहा जाता है। इस मानसिक अवस्था में व्यक्ति कुत्तों के भौंकने या कुत्तों के आसपास होने से भी डर महसूस होता है। साइनोफोबिया वाले लोग कुत्तों से जितना भी संभव हो दूर रहने की कोशिश करते हैं। इसके लक्षण आमतौर पर 10 से 13 साल की उम्र के बीच दिखाई देती है।

फोबिया होने के लक्षण कैसे पहचानें?

फोबिया के लक्षणों को पहचानने के लिए आप इसे दो भागों में बांट सकते हैं। पहला स्पेस्फिक फोबिया और दूसरा सोशल फोबिया। फोबिया का दौरा पड़ने पर लोगों में तनाव, बेचैनी, बहुत ज्यादा पसीना आना, सांस फूलना, परिस्थिति से दूर भागने की कोशिश करना, सिर में भारीपन महसूस करना, कानों में अलग-अलग तेज आवाजें सुनाई देना, दिल की धड़कन बढ़ जाना, डायरिया होना, चक्कर आना, शरीर में कहीं भी दर्द महसूस करना, पेट खराब हो जाना, ब्लड प्रेशर बढ़ना या कम हो जाना जैसी स्वास्थ्य समस्याएं होने लगती है।

ऐसे ही कुछ लोगों को तूफान यहां तक कि कुछ लोग एक सुई से भी डरते हैं। दरअसल, डर केवल हमारे मन में होता है। कोई चीज हमें तब तक डरा सकती है, जब तक हम उससे डरना चाहते हैं। इसलिए, अपने मन से हर तरह का डर निकाल दें। लेकिन, अगर यह डर आपके मन में घर कर चुका है, जिससे आपका रोजाना का जीवन प्रभावित हो रहा है, तो डॉक्टर से मिले और इस फोबिया का सही इलाज कराना न भूलें।

हैलो स्वास्थ्य किसी भी तरह की मेडिकल सलाह नहीं दे रहा है। अगर आपको किसी भी तरह की समस्या हो तो आप अपने डॉक्टर से जरूर पूछ लें।

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