गुड न्यूज निमोनिया की पहली स्वदेशी वैक्सीन हो गई है तैयार, डीसीजीआई ने दिया ग्रीन सिग्नल

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अपडेट डेट जुलाई 16, 2020 . 4 मिनट में पढ़ें
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केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने बुधवार को कहा कि निमोनिया के खिलाफ देश के पहले पूरी तरह से विकसित वैक्सीन को ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DCGI) से मंजूरी मिल गई है। निमोनिया की वैक्सीन के लिए स्पेशल एक्सपर्ट कमेटी (एसईसी) की मदद से, ड्रग रेगुलेटर ने पुणे स्थित फर्म सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (Serum Institute of India) द्वारा प्रस्तुत फेज I, II और III के क्लीनिकल ट्रायल डेटा की समीक्षा की। फिर न्यूमोकोकल पॉलीसैकराइड कंजुगेट वैक्सीन (Pneumococcal Polysaccharide Conjugate Vaccine) के लिए मंजूरी दी। यह कंपनी विश्वभर में वैक्सीन उत्पादन के क्षेत्र में काम कर रही कंपनियों में गिनी जाती है। मंत्रालय ने कहा कि टीके का इस्तेमाल शिशुओं के बीच ‘स्ट्रेप्टोकोकस न्यूमोनिया (Streptococcus pneumonia)” के कारण होने वाली आक्रामक बीमारी और निमोनिया के खिलाफ सक्रिय इम्युनिसैटियोन के लिए किया जाएगा।

निमोनिया की वैक्सीन के सारे ट्रायल देश के अंदर पहली बार हुए

सीरम इंस्टीट्यूट ने इस न्यूमोकॉकल पॉलीसैकराइड कंजुगेट वैक्सीन का पहले, दूसरे और तीसरे फेज के नैदानिक परीक्षण यानी क्लीनिकल (clinical trail) ट्रायल सारे भारत में ही किए गए हैं। ऐसा माना जाता है कि यह पहली बार हुआ है, जब देश के अंदर ही सारे ट्रायल हुए हैं। इसके साथ ही कंपनी ने गांबिया में भी निमोनिया वैक्सीन का ट्रायल कर चुकी है।

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पहली बार बनेगी देश में निमोनिया की वैक्सीन (vaccine for pneumonia)

केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार मंत्रालय ने बताया कि अभी तक निमोनिया के लिए वैक्सीन की मैन्युफैक्चरिंग कंपनियां विदेश की रही हैं जिसकी वजह से वैक्सीन की आपूर्ति देश से बाहर से होती रही है। यह पहली बार है जब देश में ही निमोनिया वैक्सीन बनाई जाएगी और डीसीजीआई ने इसकी मैन्युफैक्चरिंग के लिए सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया प्राइवेट लिमिटेड को मंजूरी दी है। इस कंपनी ने पहली स्वदेश निर्मित निमोनिया के लिए वैक्सीन बनाई है।

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निमोनिया की वजह से जाती है लाखों बच्चों की जान

विश्व स्वास्थ्य संगठन की माने तो 5 साल से कम उम्र के 15% बच्चों की मौत का कारण निमोनिया है। आपको जानकर हैरानी होगी कि 2017 में दुनियाभर में आठ लाख से भी ज्यादा बच्चों की मौत निमोनिया की वजह से हुई थी। वहीं, 2015 में निमोनिया की वजह से मौत का यही आंकड़ा विश्वभर में नौ लाख से ऊपर था जिसमें पांच साल से कम उम्र के बच्चे शामिल थे। यूनिसेफ के अनुसार, भारत में 2018 में निमोनिया के कारण पांच साल से कम उम्र की बच्चों की मृत्यु का आंकड़ा डेढ़ लाख से ऊपर था। निमोनिया के जोखिम वाले लोगों में 65 वर्ष से अधिक उम्र के वयस्क और पूर्व स्वास्थ्य समस्याओं वाले लोग भी शामिल हैं।

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निमोनिया की स्वदेशी वैक्सीन सबके लिए वरदान

एनआईटीआई के हेल्थ मेंबर डॉ वी के पॉल का कहना है कि “निमोनिया के लिए यह वैक्सीन शिशुओं में “स्ट्रेप्टोकोकस न्यूमोनिया” के कारण होने वाले आक्रामक रोग और निमोनिया के खिलाफ एक्टिव इम्यूनाइजेशन के लिए उपयोग किया जाएगा। स्वदेशी न्यूमोकोकल वैक्सीन होने से बाल मृत्यु दर कम करने के हमारे प्रयास में एक गेम-चेंजर होगा। निमोनिया बच्चे की मौत का सबसे महत्वपूर्ण कारण है, और आधे से ज्यादा गंभीर निमोनिया के मामले में न्युमोकोकल जिम्मेदार है। भारत का टीका हमारे देश और दुनिया के लिए एक वरदान साबित होगा।

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सीरम इंस्टिट्यूट कोरोना वैक्सीन बनाने में भी अग्रसर

पुणे स्थित सीरम संस्थान ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के साथ COVID-19 वैक्सीन के लिए उत्पादन शुरू करने के लिए सख्ती से काम कर रहा है। उम्मीद करते हैं कि संभावित कोरोना वैक्सीन नोवल कोरोना वायरस को खत्म करने में सहायक होगी। SII(WRITE FULLFORM) के सीईओ अदार पूनावाला ने बताया कि उत्पादित वैक्सीन का 50 प्रतिशत भारत के लिए रिजर्व रहेगा और बाकी का 50 प्रतिशत विश्व के लिए होगा।

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खतरनाक है ये बीमारी

निमोनिया एक खतरनाक बीमारी है जो ज्यादातर छोटे उम्र के बच्चों को प्रभावित करती है। यह फेफड़ों को प्रभावित करने वाला एक्यूट रेस्पिरेटरी इंफेक्शन है। आम तौर पर एल्वियोली (फेफड़ों में छोटी थैलियां) सांस लेने के दौरान हवा से भर जाती हैं, लेकिन निमोनिया होने पर एल्वियोली मवाद और तरल पदार्थ से भर जाती है। इसकी वजह से सांस लेने में समस्या होने लगती है। निमोनिया वायरस, बैक्टीरिया और फंगी सहित कई संक्रामक एजेंटों के कारण होता है। भारत में निमोनिया, 2018 में पांच साल से कम उम्र के बच्चों की मौत का दूसरा बड़ा कारण था।

जबकि भारत में सरकार की पहल और जागरूकता कार्यक्रमों के कारण इस बीमारी के खिलाफ टीकाकरण में सुधार हुआ है। फिर भी कई बच्चे मुख्य रूप से फीमेल चाइल्ड आज भी इसकी पहुंच से दूर हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि स्थानीय स्तर पर बनी निमोनिया के लिए वैक्सीन की पहुंच अधिक सुलभ और सस्ती साबित हो सकती है।

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5 वर्ष से कम आयु के बच्चों में निमोनिया के लक्षण

  • बुखार के साथ या बिना खांसी और / या सांस लेने में तकलीफ,
  • तेजी से साँस लेना (ब्रीदिंग के दौरान चेस्ट का हिलना या पीछे हटना; जबकि एक स्वस्थ व्यक्ति में, सांस लेने के चेस्ट एक्सपेंड होता है)।
  • बहुत गंभीर रूप से बीमार शिशुओं को ब्रेस्टफीडिंग या कुछ भी पीने में परेशानी हो सकती है। ये शिशु बेहोशी और हाइपोथर्मिया (hypothermia) का भी अनुभव कर सकते हैं।

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निमोनिया का जोखिम किन बच्चों में ज्यादा रहता है?

  • एक कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली वाले बच्चे में इसका खतरा ज्यादा रहता है। यदि कोई शिशु अल्पपोषित है, तो रिस्क फैक्टर बढ़ जाता है।
  • अगर शिशु में पहले से ही एचआईवी या खसर की समस्या है, तो ऐसा बच्चा निमोनिया के प्रति ज्यादा संवेदनशील हो सकता है।
  • इसके अलावा बच्चों में निमोनिया के पर्यावरणीय कारक भी जिम्मेदार होते हैं। जैसे-
    -इनडोर एयर पॉल्यूशन (ईंधन के रूप में लकड़ी या गोबर का उपयोग करने वाले घर)
    -भीड़-भाड़ वाले घर
    -पेरेंट्स के द्वारा धूम्रपान करने पर बच्चे का सेकंड हैंड स्मोक के संपर्क में आने से।

निमोनिया कैसे फैलता है?

निमोनिया को कई तरीकों से प्रेषित किया जा सकता है-

  • आमतौर पर बच्चे के नाक या गले में पाए जाने वाले वायरस और बैक्टीरिया फेफड़े को संक्रमित कर सकते हैं।
  • जीव (organism) खांसी या छींक से वायु-जनित ड्रॉप्लेट्स के माध्यम से भी फैल सकता है।
  • निमोनिया ब्लड के माध्यम से भी फैल सकता है, विशेष रूप से जन्म के समय और उसके तुरंत बाद।

ऊपर दी गई जानकारी किसी भी तरह की डॉक्टरी सलाह का विकल्प नहीं है। इस विषय से जुड़ी अधिक जानकारी के लिए अपने डाॅक्टर से संपर्क करें।

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