पल्मोनरी फाइब्रोसिस (Pulmonary Fibrosis) एक गंभीर बीमारी है जिसमें फेफड़े के टिशू (ऊतक) क्षतिग्रस्त हो जाते हैं। फेफड़े के आंतरिक टिशू के मोटा या सख्त होने की वजह से व्यक्ति को सांस लेने में परेशानी होती है और रक्त में पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन नहीं पहुंच जाता है। यह स्थिति बहुत गंभीर हो सकती है। पल्मोनरी फाइब्रोसिस के कारण, लक्षण और उपचार के बारे में जानिए यहां।


पल्मोनरी फाइब्रोसिस (Pulmonary Fibrosis) फेफड़ों की बीमारी है, जो फेफड़ों के ऊतकों के क्षतिग्रस्त या चोट के निशान होने पर होती है। इसमें फेफड़े के ऊतक मोटे और सख्त हो जाते हैं जिससे फेफड़े सही तरह से काम नहीं कर पाते और मरीज को सांस लेने में परेशानी होने लगती है। पल्मोनरी फाइब्रोसिस या फेफड़ों की बीमारी के गंभीर होने पर सांस छोटी होने लगती है। यानी मरीज ठीक तरह से सांस नहीं ले पाता है।
फेफड़ों के ऊतकों पर चोट के निशान कई कारणों से बन सकते हैं, लेकिन अधिकांश मामलों में डॉक्टर इसके कारणों का पता नहीं लगा पाते है और जब कारण का पता नहीं चलता है तो इसे इडियोपैथिक पल्मोनरी फाइब्रोसिस कहा जाता है। पल्मोनरी फाइब्रोसिस के कारण फेफड़ों को होने वाली क्षति को ठीक नहीं किया जा सकता, लेकिन दवाएं और कुछ थेरेपी की मदद से इसके लक्षणों को कम करके मरीज को बेहतर जिंदगी जीने में मदद मिलती है। कुछ लोगों को लंग ट्रांसप्लांट की जरूरत पड़ सकती है।
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पल्मोनरी फाइब्रोसिस या फेफड़ों की बीमारी कई कारणों से हो सकता है, इसमें शामिल हैः
ऑटोइम्यून डिसीज- ऑटोइम्यून डिसीज में इम्यून सिस्टम ही शरीर पर हमला कर देता है। पल्मोनरी फाइब्रोसिस के लिए जिम्मेदार ऑटोइम्यून डिसीज में शामिल हैः
इडियोपैथिक- बहुत से मामलों में पल्मोनरी फाइब्रोसिस का कारण पता नहीं चल पाता है। जब ऐसा होता है तो इस स्थिति को इडियोपैथिक पल्मोनरी फाइब्रोसिस कहते हैं।
दवाएं- कुछ दवाएं भी पल्मोनरी फाइब्रोसिस का खतरा बढ़ा दैती है। यदि आप इनमें से कोई भी दवा नियमित रूप से लेते हैं, तो यह आपके खतरे को बढ़ा देती है। ऐसे में आपको डॉक्टर की निगरानी में रहने की जरूरत है।
पर्यावरणीय कारक- अपने आसपास और ऑफिस में कई चीज़ों के संपर्क में आने पर भी पल्मोनरी फाइब्रोसिस का खतरा बढ़ जाता है। जैसे- सिगरेट पीने से आपके फेफड़ों को नुकसान पहुंचता है, क्योंकि इसमें कई केमिकल होते हैं। इसके अलावा कुछ अन्य चीजों से भी आपके फेफड़ों को नुकसान पहुंच सकता है।
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पल्मोनरी फाइब्रोसिस में कई बार कोई लक्षण नहीं दिखते है। वैसे सांसें उखड़ना या सांसे छोटी होना इसका सबसे आम लक्षण है। अन्य लक्षणों में शामिल हैः
यह समस्या आमतौर पर बुजुर्गों को होती है, इसलिए पल्मोनरी फाइब्रोसिस (Pulmonary Fibrosis) के शुरुआती लक्षणों को उम्र संबंधी समस्या समझकर नजरअंदाज कर दिया जाता है। शुरुआत में लक्षण बहुत कम दिखते हैं, लेकिन धीरे-धीरे बढ़ने लगते हैं। यह भी जरूरी नहीं है कि हर इंसान में एक जैसे ही लक्षण दिखे।
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पल्मोनरी फाइब्रोसिस (Pulmonary Fibrosis) कई तरह के लंग डिसीज में से एक है। चूकि फेफड़ों की बीमारी कई तरह की होती है, इसलिए डॉक्टर के लिए पल्मोनरी फाइब्रोसिस (Pulmonary Fibrosis) की पहचान कर पाना मुश्किल हो जाता है। कई बार पल्मोनरी फाइब्रोसिस के लक्षणों को अस्थमा, निमोनिया और ब्रोनकाइटिस समझ लिया जाता है। आमतौर पर पल्मोनरी फाइब्रोसिस के निदान के लिए डॉक्टर आपके लक्षणों के आधार पर कई तरह के टेस्ट की सलाह दे सकता हैः
सीने का एक्स-रे- इसमें सीने के अंदर की छवि दिखती है जिससे डॉक्टर को निदान में आसानी होती है।
एक्साइज टेस्ट- आपको ट्रेडमील या स्टेशनरी बाइक चलाने के लिए कहा जाता है और इस दौरान आपके ब्लड में ऑक्सीजन फ्लो की जांच की जाती है।
हाई रेज्यूलोशन चेस्ट सीटी- यह पावरफुल एक्स-रे फेफड़ों की साफ तस्वीर लेता है, जिससे बीमारी का पता करने में डॉक्टर को मदद मिलती है।
बायोप्सी- डॉक्टर फेफड़े के छोटे से टिशू को निकालकर बयोप्सी टेस्ट करता है। जिससे फेफड़े की स्थिति के बारे में सटीक जानकारी मिलती है।
प्लस ऑक्सिमेट्री और आर्टेरियल ब्लड गैस टेस्ट- यह रक्त में मौजूद ऑक्सीजन की मात्रा को मापता है।
स्पिरोमेट्री- स्पिरोमेट्री एक उपकरण है जिससे जुड़े माउथपीस में आपको जोर से फूंक मारनी होती है। ऐसा इसलिए किया जाता है ताकि इस बात की जांच की जा सके कि आपके फेफड़े कितनी अच्छी तरह काम कर रहे हैं।
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फेफड़ों को हुई क्षति को तो ठीक नहीं किया जा सकता, लेकिन उपचार से आपको ठीक तरह से सांस लेने में मदद मिलेगी और इस बीमारी के विकास को धीमा किया जा सकता है।
पल्मोनरी फाइब्रोसिस (Pulmonary Fibrosis) को मैनेज करने के लिए किए जाने वाले उपचार में शामिल हैः
डॉक्टर आपको पल्मोनरी रिहैब्लिटेशन की भी सलाह दे सकता है। उपचार के इस तरीके में शामिल है एक्सरसाइज प्रोग्राम, शिक्षा और किस तरह से आसानी से सांस लेना है यह सिखाने में मदद करना।
डॉक्टर आपको अपनी जीनवशैली में बदलाव की भी सलाह दे सकता है जिसमें शामिल हैः
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