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मेटाबॉलिज्म और वजन बढ़ने के बीच क्या है कनेक्शन?

मेटाबॉलिज्म और वजन बढ़ने के बीच क्या है कनेक्शन?

कुछ लोग कितना भी खालें, उनका वजन नहीं बढ़ता है। वहीं कुछ लोग थोड़ा-सा भी खाते हैं, तो उनका वेट गेन हो जाता है। आपने शायद सुना होगा कि लोग वेट गेन के लिए अपने स्लो मेटाबॉलिज्म (Metabolism) को दोषी ठहराते हैं, लेकिन इसका क्या मतलब है? क्या वास्तव में मेटाबॉलिज्म और वजन बढ़ने के बीच कुछ कनेक्शन है? तो चलिए जानते हैं हैलो स्वास्थ्य के इस लेख में कि आखिर यह मेटाबॉलिज्म क्या है और इसका वजन से क्या कनेक्शन है?

चयापचय क्या है?

मेटाबॉलिज्म (Metabolism) शरीर के अंदर होने वाला केमिकल प्रोसेस है, जो भोजन को एनर्जी में बदलता है। यह शरीर के सुचारु रूप से काम करने के लिए जरूरी है। बॉडी पार्ट्स सामान्य रूप से काम कर सकें, जैसे कि सांस लेना, हॉर्मोन के स्तर को बनाएं रखना, कोशिकाओं की मरम्मत करना और भोजन को पचाना इन सभी रासायनिक प्रक्रियाओं के लिए ऊर्जा की आवश्यकता होती है। शरीर की इन रासायनिक प्रक्रियाओं को करने के लिए जरूरी न्यूनतम ऊर्जा को बेसल मेटाबॉलिक रेट (BMR) कहा जाता है। आपकी उम्र और जीवनशैली के आधार पर आपका बीएमआर शरीर की दैनिक ऊर्जा आवश्यकताओं के 40 से 70 प्रतिशत के बीच कुछ भी होता है।

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मेटाबॉलिज्म और वजन के बीच कनेक्शन

यह सच है कि मेटाबॉलिज्म और वजन एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। लेकिन जैसा आमतौर पर लोग मानते हैं कि स्लो मेटाबॉलिज्म वजन बढ़ने का एक कारण है। यह गलत है। सिर्फ धीमी चयापचय प्रक्रिया को वजन बढ़ने के पीछे दोषी नहीं माना जा सकता है। आप कितना खाते हैं और पीते हैं, इसके साथ ही फिजिकल एक्टिविटी कितना करते हैं, ये सारी बाते भी आपके वजन को निर्धारित करती हैं। भले ही आपका मेटाबॉलिज्म तेज या धीमा हो, शरीर में वसा कोशिकाओं में एक्स्ट्रा एनर्जी स्टोर होती है। इसलिए यदि आप शरीर की “आउटपुट एनर्जी” की तुलना में ज्यादा कैलोरी लेते हैं तो आपका वजन बढ़ सकता है। दूसरी ओर, अगर आप रोजमर्रा की एक्टिविटीज से कम कैलोरी लेते हैं, तो आपका वजन कम होगा।

केवल दुर्लभ मामलों में ही कुछ एक ऐसी मेडिकल प्रॉब्लम्स होती है, जिससे आपका मेटाबॉलिज्म (Metabolism) धीमे हो जाता है और आपको अतिरिक्त वजन का सामना करना पड़ सकता है। कुशिंग सिंड्रोम (Cushing’s syndrome) या अंडरएक्टिव थायरॉयड ग्रंथि (हायपोथायरायडिज्म) ऐसी ही स्वास्थ्य स्थितियां हैं, जिससे पीड़ित इंसान का मेटाबॉलिज्म कम हो सकता है, जिसकी वजह से उसका वेट गेन होने लगता है। यह आनुवंशिक, हॉर्मोन असंतुलन (hormonal balance), आहार संरचना, नींद, शारीरिक गतिविधि, स्ट्रेस सहित आपकी जीवनशैली पर भी निर्भर करता है। मेटाबॉल्जिम को बढ़ाने के लिए आहार में हेल्दी फूड को शामिल करें।

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मेटाबॉलिज्म और वजन से जुड़े मिथ्स और फैक्ट्स

मिथः मेटाबॉलिज्म रेट बदल नहीं सकता है।

फैक्ट : यह सच है कि आनुवंशिकी हमारी चयापचय दर को निर्धारित करने में मदद करती है। लीन मसल्स मास को बढ़ाकर मेटाबॉलिज्म को बढ़ाया जा सकता है। मांसपेशी, चयापचय रूप से सक्रिय है, जिसका मतलब है कि दुबले मांसपेशियों वाले लोगों में शरीर को काम करने के लिए एनर्जी मस्कुलर लोगों की तुलना में अधिक आवश्यक होती है। जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है, मसल्स मास कम होता जाता है और मेटाबॉलिज्म रेट कम होने लगता है। लेकिन आप इस कम होते मेटाबॉलिज्म रेट को कुछ वेट लिफ्ट करके कम कर सकते हैं।

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मिथः ग्रीन टी और चिली पेपर से मेटाबॉलिज्म बढ़ता है।

फैक्ट : सच यह है कि कोई भी ऐसा मैजिक फूड नहीं है, जो मेटाबॉलिज्म को स्थाई रूप से तेज करता है। कुछ अध्ययनों से पता चला है कि ग्रीन टी और चिली पेपर अस्थायी रूप से चयापचय दर को बढ़ावा दे सकते हैं। मेटाबॉलिज्म के लिए एक स्वस्थ जीवन शैली के लिए पोषक तत्वों से भरपूर खाद्य पदार्थों से युक्त ईटिंग पैटर्न का होना जरूरी है न कि चिली पेपर से भरा हुआ आहार।

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मिथः देर रात भोजन करने से मेटाबॉलिज्म धीमा हो जाता है।

फैक्ट : रात 8 बजे के बाद खाना वजन बढ़ने का कारण बनता है। इस बात को सही साबित करने के लिए बहुत कम ही शोध मौजूद हैं। हालांकि शाम के समय टीवी देखते वक्त बिना सोचे-समझे स्नैक्स खाने की अधिक संभावना हो सकती है। बेवजह भूख को रोकने के लिए पूरे दिन नियमित अंतराल पर छोटी-छोटी मील्स और हेल्दी स्नैक्स खाएं।

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मिथः बहुत कम कैलोरी वाली डायट और मील्स को स्किप करने से वेट लॉस होता है।

फैक्ट : वजन कम करने के लिए कैलोरी की बड़ी मात्रा को हटाना आपकी सेहत पर उल्टा ही असर डाल सकता है। आपका शरीर प्रतिबंधित कैलोरी का सेवन करने लगता है और समान काम करने के लिए कम कैलोरी का उपयोग करता है। डायट को स्किप करने के बजाय हेल्दी खाद्य पदार्थों को प्राथमिकता दें। आहार में साबुत अनाज, बीन्स, हरी सब्जियां और फलों को शामिल करें। साथ ही एक हेल्दी लाइफस्टाइल को अपनाएं।

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मिथः दिन के दौरान छोटी मील्स लेने से आपके चयापचय में वृद्धि होती है।

फैक्ट : इस बात के बहुत कम वैज्ञानिक प्रमाण हैं कि छोटी-छोटी मील्स खाने से मेटाबॉलिज्म को बढ़ावा मिलता है। पूरे दिन खाने की छोटी-छोटी खुराक लेने से आपको बहुत अधिक खाने से बचा सकता है। एथलीट जब मील्स की थोड़ी-थोड़ी मात्रा दिनभर लेते हैं तो वे बेहतर प्रदर्शन करते हैं। यदि आप ऐसी कैटेगरी में आते हैं, जो एक बार खाना शुरू करने के बाद खुद को रोक नहीं पाते हैं, तो दिन में तीन मील्स लेना आपके लिए सही रहेगा। अपने दैनिक आहार का ध्यान रखें और हाई शुगर और फैट वाले स्नैक्स को खाने से बचें।

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मिथः उम्र बढ़ने के साथ कम मेटाबॉलिज्म और वजन बढ़ने की समस्या बढ़ती है।

फैक्ट : यह सच है कि जब हम छोटे होते हैं, तो हमारा मेटाबॉलिज्म तेज होता है। मिड-लाइफ में हम कम सक्रिय होते हैं जिससे वेट गेन होता है। जॉब और फैमिली के चक्कर में एक्सरसाइज कम करने से मसल्स कम होती हैं और फैट ज्यादा होता है। जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है, आपको उम्र के साथ अपने भोजन को विनियमित करने में भी परेशानी हो सकती है। इसके लिए एक्सरसाइज को अपनी डेली रूटीन में शामिल करें। स्वस्थ खाद्य पदार्थों के छोटे-छोटे पोर्शन को खाने में शामिल करें।

जब बात वजन की आती है, तो मेटाबॉलिज्म एक महत्वपूर्ण जेनेटिक कम्पोनेंट साबित होता है। 40 से 50 वर्ष की उम्र के बाद मेटाबॉलिज्म रेट कम होने लगता है जिसके चलते वजन बढ़ सकता है। इससे व्यक्ति को मेटाबॉलिक रोगों के साथ-साथ मस्कुलोस्केलेटल संबंधित समस्याएं भी हो सकती हैं।

मिथः एक्सरसाइज करना बंद करने के बाद चयापचय तेजी से बढ़ सकता है।

फैक्ट : यह सच है कि व्यायाम करते समय हमारे शरीर में सबसे तेजी से अधिक मात्रा में कैलोरी बर्न होती है। यह प्रक्रिया खासकर तब भी हो सकती है, जब आप स्विंग करने या रनिंग करने जैसी गतिविधियों को करते हैं। इस दौरान दिल के धड़कने की दर भी तेज हो सकती है। ऐसी गतिविधियां शरीर को फोर्स करती हैं जिससे शरीर अधिक से अधिक एनर्जी का इस्तेमाल करता है। वहीं, जैसे ही आप इस तरह की गतिविधियां बंद करते हैं, तो दोबारा से आपका चयापचय आराम की दर पर वापस चला जाता है। हालांकि इसका यह मतलब नहीं है कि आपको एक्सरसाइज नहीं करनी चाहिए या एक बार एक्सरसाइज शुरू करने के बाद उसे बंद नहीं करना चाहिए।

आप अपने चयापचय की दर सामान्य रखने के लिए अगर एक्सरसाइज करते थें, तो बाद में कभी भी आप इसे बंद भी कर सकते हैं। हालांकि ऐसा करने के बाद आपको अपनी डायट और अन्य शारीरिक कार्यों का बेहद ध्यान रखना पड़ सकता है। अचानक से एक्सरासइज की प्रक्रिया बंद होने के कारण आपके शरीर में फैट के जमा होने की प्रक्रिया तेज हो सकती है। जिससे बचे रहने के लिए आपके पास एक हेल्दी डायट ही सबसे अच्छा उपाय हो सकता है।

मिथः मांसपेशियों बनाने से आपको वजन कम करने में मदद मिलेगी।

फैक्ट : जैसा की ऊपर भी बताया गया है कि एक्सरसाइज करना शरीर से सबसे तेजी फैट बर्न करने में मदद करता है। वहीं मांसपेशियां बनाने के दौरान फैट की तुलना में कैलोरी अधिक बर्न होती है। लेकिन अगर मेटाबॉलिज्म को बढ़ाने के लिए कैलोरी बर्न करने की जरूरत होती है। ऐसे में मांसपेशियों के निर्माण के दौरान आपके चयापचय को बढ़ावा नहीं मिलता है। हां, लेकिन इसका कुछ प्रभाव जरूर होता है। कैलोरी बर्न करने में आपका ब्रेन, हृदय, लिवर, किडनी और लंग्स सबसे ज्यादा सहयोगी हो सकते हैं। जिनका प्रभाव आपके वजन को भी प्रभावित कर सकता है।

हेल्दी मेटाबॉलिज्म के क्या हैं टिप्स?

मेटाबॉलिज्म (Metabolism) को हेल्दी रखने के लिए निम्नलिखित टिप्स अपनाएं। जैसे:

  • समय पर सोने-जागने और खाने-पीने की आदत डालें।
  • हेल्दी नाश्ता रोजाना करें।
  • खाली पेट चाय-कॉफी का सेवन न करें। बेहतर होगा की दिन की शुरुआत गुनगुने पानी, गुनगुने पानी में नींबू और शहद मिलाकर सेवन करें।
  • तेल-मसाले वाले खाने से दूरी बनाएं।
  • एक बार ज्यादा खाने की आदत न डालें।

उम्मीद है मेटाबॉलिज्म और वजन के बीच के कनेक्शन को आप इस लेख से अच्छी तरह से समझ गए होंगे। अधिक जानकारी के लिए आप अपने डॉक्टर से भी संपर्क कर सकते हैं।

मेटाबॉलिज्म को हेल्दी बनाने के लिए यह जानना बेहद जरूरी है की क्या खाएं और कब खाएं। जानिए इस वीडियो लिंक में संपूर्ण जानकारी

हैलो हेल्थ ग्रुप हेल्थ सलाह, निदान और इलाज इत्यादि सेवाएं नहीं देता।

सूत्र

Can You Boost Your Metabolism for Weight Loss?. https://health.clevelandclinic.org/can-you-boost-your-metabolism-for-weight-loss/. Accessed On 12 May 2020

Does Metabolism Matter in Weight Loss?. https://www.health.harvard.edu/diet-and-weight-loss/does-metabolism-matter-in-weight-loss. Accessed On 12 May 2020

Can you boost your metabolism?. https://medlineplus.gov/ency/patientinstructions/000893.htm. Accessed On 12 May 2020

Metabolic Determinants of Weight Gain in Humans. https://www.ncbi.nlm.nih.gov/pubmed/31012296. Accessed On 12 May 2020

Metabolism. https://www.healthdirect.gov.au/metabolism. Accessed on 02 November, 2020.

लेखक की तस्वीर
Dr. Pranali Patil के द्वारा मेडिकल समीक्षा
Shikha Patel द्वारा लिखित
अपडेटेड 13/05/2020
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