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जानिए कैसे ब्रेस्ट कैंसर के खतरे को कम कर सकता है अखरोट

जानिए कैसे ब्रेस्ट कैंसर के खतरे को कम कर सकता है अखरोट

महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर के लिए अखरोट का सेवन है जरूरी

भारत में महिलाओं में को होने वाले कैंसर में सबसे आम है ब्रेस्ट कैंसर। यूनियन हेल्थ मिनिस्ट्री की ओर से जारी की गई एक रिपोर्ट में तो ये भी कहा गया है की साल 2020 तक भारत में 17,97,900 महिलाएंब्रेस्ट कैंसर से पीड़ित हो सकती हैं। नेशनल सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी इंफॉर्मेशन के अनुसार अखरोट में मौजूद खनिज तत्व ब्रेस्ट कैंसर से लड़ने में सहायक होते हैं।

अखरोट में विटामिन-ए, विटामिन-के, विटामिन-सी, विटामिन-ई, विटामिन-बी 6, मैग्नेशियम, पोटेशियम, फॉस्फोरस, कॉपर, मैंगनीज जैसे अन्य तत्व सेहत को संपूर्ण पोषण प्रदान करने के साथ-साथ ब्रेस्ट कैंसर से लड़ने में मदद करता है।

और पढ़ें: Breast Cancer Genetic Testing : ब्रेस्ट कैंसर जेनेटिक टेस्टिंग क्या है?

कैसे करें अखरोट का सेवन जिससे होगा ब्रेस्ट कैंसर की समस्या में फायदा

एक्सपर्ट्स के अनुसार सुबह खाली पेट में नियमित रूप से 2 अखरोट खाने से लाभ मिलता है। खाली पेट में अखरोट खाने से अखरोट में मौजूद पोषक तत्व शरीर को पूर्ण पोषण देने में सहायक होते हैं। अखरोट में मौजूद फाइटोस्टेरॉल ट्यूमर के खतरे को भी कम करने में मददगार होता है। अमेरिका के मार्शल विश्वविद्यालय के एक रिपोर्ट के अनुसार अगर ब्रेस्ट कैंसर पीड़ित महिला को लगातार दो सप्ताह तक सही मात्रा में अखरोट खिलाया जाता है, तो कैंसर के जीन में बदलाव आता है और ये बदलाव सकारात्म होता है। अमेरिकी मार्शल विश्वविद्यालय में सबसे पहले ये रिसर्च चूहे पर किया गया और ब्रेस्ट कैंसर पीड़ित महिलाओं के लिए गुड न्यूज बनकर सामने आई।

अन्य फायदे

  • दूध या दही के साथ अखरोट को कुछ देर तक रखने के बाद सेवन करने से भी लाभ मिलता है।
  • अखरोट का पाउडर बनाकर सलाद में मिक्स कर के खाने से भी लाभ मिलता है।
  • ओट्स और दलिया में अखरोट डालकर खाने से सेहत को लाभ मिलता है और साथ ही स्वाद भी बढ़ता है।

और पढ़ें: क्या ब्रेस्ट सकिंग ब्रेस्ट कैंसर का कारण बन सकता है ?

कैंसर के प्रति बढ़ाएं जागरुकता

थोड़ी सी जागरुकता अपना कर कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी से लड़ने में मदद कर सकती है। कैंसर या ब्रेस्ट कैंसर का नाम सुनते ही ये कल्पना करना कि अब तो जिंदगी खत्म हो गई ये गलत है क्योंकि हमारे सामने ऐसे कई लोग (महिला और पुरुष) हैं, जिन्होंने कैंसर को मात देकर आज हमारे करीब सेहतमंद हैं। लेकिन महिलाओं को खासकर 18 साल से अधिक उम्र की महिलाओं को अपने स्तन के जांच करनी चाहिए।

आप खुद से अपने स्तन की जांच कर समझ सकती हैं की आपकी स्तन या स्तन के बगल हिस्से में कोई गांठ या स्तन के आकर में किसी तरह का बदलाव तो नहीं हो रहा। स्तन में किसी भी तरह के हो रहे बदलाव को नजरअंदाज न करें। कैंसर से जुड़े एक्सपर्ट्स का कहना है कि किसी भी कैंसर का इलाज फर्स्ट या सेकंड स्टेज में करने की वजह से इस बीमारी से निकलने में आसानी होती है। साथ ही एक्सपर्ट्स का ये भी कहना है कि अक्सर महिलाएं डरतीं भी हैं क्यूंकि कभी-कभी कैंसर के ज्यादा फैल जाने की वजह से स्तन हटा दिए जाते हैं और इस दौरान कीमोथेरेपी होने की वजह से बाल भी झड़ जाते हैं। वैसे महिलाओं को इससे डरने की जरूरत नहीं है क्योंकि झड़े हुए बाल कुछ समय बाद फिर पहले जैसे हो जाते हैं। बाजार में इनदिनों स्तन के आकर की बनावटी स्तन भी आसानी से उपलब्ध हैं। इसलिए इस समस्या का भी हल मौजूद है। सिर्फ डरें नहीं और सकारात्मक सोच के साथ ट्रीटमेंट करवाए।

और पढ़ें: अगर आपके परिवार में है किसी को ब्रेस्ट कैंसर है, तो आपको है इस हद तक खतरा

ब्रेस्ट कैंसर पेशेंट का ऐसे रखें ख्याल

डॉक्टर के अपॉइंटमेंट का रखें ख्याल

ब्रेस्ट कैंसर से जूझ रहे पेशेंट के साथ-साथ उनके परिजनों को भी उनके लिए काफी मशक्कत करनी पड़ सकती है। साथ ही परिजन इस बात का भी ख्याल रखें कि डॉक्टर के साथ अपॉइंटमेंट होने पर परिजन भी साथ जरूर जाएं। ऐसे में परिजन या पेशेंट ब्रेस्ट कैंसर से जुड़ी कोई भी जानकारी चाहते हों, तो डॉक्टर से जरूर बात करें और यदि इलाज के बावजूद कोई भी परेशानी महसूस होती है, तो उसे भी डॉक्टर को जरूर बताएं। इसके अलावा इस बात की भी ध्यान रखें बीमारी से जुड़ी कोई भी जानकारी अपने डॉक्टर से छुपाए नहीं।

ब्रेस्ट कैंसर में रखें आहार और दवाइयों का ख्याल

ब्रेस्ट कैंसर से पीड़ित महिला को इस दौरान किस तरह का आहार देना ठीक रहेगा और साथ ही उनका डायट चार्ट क्या होना चाहिए ये जानने के लिए अपने डॉक्टर से बात जरूर कर लें। साथ ही परिजनों को जरूरत है कि वे पेशेंट को भी यह जरूर और प्यार से समझाएं की उन्हें किस तरह के आहार लेने की जरूरत है, जिससे कि उनके इलाज के दौरान आसानी हो सके और कोई नई परेशानी खड़ी न हो।

ब्रेस्ट कैंसर के पेशेंट को समझने की भी होगी जरूरत

कैंसर को लेकर इस तरह की धारणा बनी हुई है कि इसका नाम सुनते ही लोगों को इस बात की चिंता होने लग जाती है कि अब इंसान का बचना मुश्किल है। ऐसे में वास्तव में ऐसा नहीं है ठीक समय मे इसका डायग्नोस करके इससे पीछा छुड़ाया जा सकता है। ऐसे में कैंसर या ब्रेस्ट कैंसर से डरे नहीं बल्कि इससे पीड़ित महिला की भावनाओं को समझें। उनके मन में नकारात्मक प्रभाव घर करने न दें। हो सकता है इस दौरान पेशेंट परेशान रहें और वो ठीक तरह से बात नहीं करें। ऐसी स्थिति में उन्हें समझाएं को वो इस बीमारी से लड़ सकती हैं और स्वस्थ भी हो सकती हैं। अगर फिर भी आप देखते हैं कि पीड़ित इस बीमारी को लेकर ज्यादा सोच रहा है, तो आप इसके लिए साइकोलॉजिकल मदद भी दिला सकते हैं।

और पढ़ें: कैंसर को हराकर असल जिंदगी में भी ‘ हीरोइन ‘ बनीं ये अभिनेत्रियां

केयर टेकर तनाव न लें-

अपने प्रियजन (पेशेंट) के व्यवहार और मनोदशा में बदलाव के लिए तैयार रहें। इलाज के दौरान दवाओं का साइड इफेक्ट भी होता है। ऐसे में पेशेंट उदास, गुस्सा या थका हुआ भी महसूस कर सकती हैं।

पेशेंट को व्यस्त रखें-

घर के हल्के-फुल्के कामों में उनसे मदद लें ऐसे में पेशेंट भी अपने आपको बीमार नहीं समझेंगे। कोशिश करें की पेशेंट सुबह-शाम वॉक और योग करें, घर और आस-पास के लोगों से बातचीत करें।

और पढ़ें: रेड मीट बन सकता है ब्रेस्ट कैंसर का कारण, इन बातों का रखें ख्याल

पेशेंट भी ध्यान रखें

पेशेंट को मदद लेने से घबराना या डरना नहीं चाहिए। इसलिए ध्यान रखने वाले व्यक्ति को यह आराम से पेशेंट को समझाना चाहिए।

अगर आप ब्रेस्ट कैंसर के पेशेंट हैं तो इससे डरे नहीं बल्कि इसका जल्द से जल्द शुरू करें। कैंसर से जुड़े किसी तरह के कोई सवाल का जवाब जानना चाहते हैं तो विशेषज्ञों से समझना बेहतर होगा। हमें उम्मीद है आपको हमारा यह लेख पसंद आया होगा। हैलो हेल्थ के इस आर्टिकल में ब्रेस्ट कैंसर का इलाज से जुड़ी जानकारी दी गई है। यदि आपका इस लेख से जुड़ा प्रश्न है तो आप कमेंट सेक्शन में पूछ सकते हैं।

हैलो हेल्थ ग्रुप हेल्थ सलाह, निदान और इलाज इत्यादि सेवाएं नहीं देता।

सूत्र

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https://www.cdc.gov/cancer/breast/basic_info/what-is-breast-cancer.htm Accessed on 20/01/2020

लेखक की तस्वीर
Dr. Shruthi Shridhar के द्वारा मेडिकल समीक्षा
Nidhi Sinha द्वारा लिखित
अपडेटेड 28/08/2019
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