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मेनोपॉज और हृदय रोग: बढ़ती उम्र के साथ संभालें अपने दिल को

मेनोपॉज और हृदय रोग: बढ़ती उम्र के साथ संभालें अपने दिल को

दिल बहुत मजबूत योद्धा है, लेकिन बढ़ती उम्र के साथ इसके इसके कमजोर होने का खतरा भी रहता है। तो इस मजबूत योद्धा को हमेशा मजबूत बनाए रखना जरूरी है। अगर हम हृदय रोग की बात करें तो मेनोपॉज और हृदय रोग का बहुत गहरा संबंध है। मुंबई के मुलुंड स्थित फोर्टिस हॉस्पिटल के सीनियर इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजिस्‍ट डॉ. हसमुख रावत ने इस विश्व हृदय दिवस (World Heart Day) पर हैलो स्वास्थ्य को बताया कि अपने दिल का ख्याल किस तरह रखें। इस बार हमने वर्ल्ड हार्ट डे की थीम रखी है ‘मेरा दिल, तुम्हारा दिल’ (My Heart, Your Heart)। अपने करियर में मैंने दिल से जुड़े कई तरह के मामले देखें हैं। जिसमें महिलाओं को सबसे ज्यादा दिल की बीमारी (Heart Diseases) 45 के बाद शुरू होती हैं। यही वक्त महिलाओं में मेनोपॉज (Menopause) का होता है। मेनोपॉज और हृदय दोनों का ध्यान रखना चाहिए।

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मेनोपॉज क्या होता है?

मेनोपॉज एक ऐसा दौर है जिसका सामना हर महिला को अपनी बढ़ती उम्र के साथ करना पड़ता है। ज्यादातर महिलाओं को यह 49 से 52 वर्ष की उम्र में होता है। लगातार 12-24 महीने तक पीरियड्स का न आना ही मेनोपॉज कहा जाता है। मेनोपॉज में महिला के शरीर में एस्ट्रोजेन और प्रोजेस्टेरॉन हॉर्मोन बनना बंद हो जाता है। इस दौरान अनेक महिलाएं शारीरिक और भावनात्मक लक्षणों को भी महसूस करती हैं –

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मेनोपॉज किस तरह से हृदय रोग से जुड़ा है?

मेरे पास आने वाली मरीजों में ये बात बिल्कुल सामान्य होती है कि उनके शरीर में एस्ट्रोजेन हॉर्मोन कम होता है। ऐसा इसलिए होता है कि मेनोपॉज के दौरान एस्ट्रोजेन हॉर्मोन बनना बंद हो जाता है। एस्ट्रोजेन हॉर्मोन महिलाओं को हृदय रोगों से बचाता है। एस्ट्रोजेन हॉर्मोन की कमी से महिलाओं के रक्त में वसा (Fat) की मात्रा बढ़ने की आशंका रहती है। ये बदलाव महिला में दिल की बीमारी और परिसंचरण प्रणाली के कारण होने वाली गड़बड़ियां पैदा करता है। जैसे- हाई ब्लड प्रेशर, हाई कोलेस्ट्रॉल, स्ट्रोक और हृदय रोग आदि के बढ़ने की आशंका अधिक हो जाती है।

मेनोपॉज में भी दिल का कैसे रखें ध्यान?

मेरे पास आने वाले मेनोपॉज की समस्याओं से ग्रसित मरीजों को मैं सिर्फ अपनी जीवनशैली बदलने की सलाह देता हूं। मेरा मानना है कि अगर इंसान अपनी लाइफस्टाइल बदल ले तो आधी से ज्यादा समस्या खत्म हो जाएगी। मेनोपॉज के दौरान आप अपने दिल का ख्याल इन कुछ टिप्स को अपना कर रख सकती हैं-

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सेहत को दें प्राथमिकता

अपनी सेहत को ध्यान आपको सबसे पहले रखना चाहिए। इसलिए आपको अपनी वार्षिक जांच करवानी चाहिए। ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल जांच निरंतर कराती रहें। अगर आप डायबिटीज या हाई ब्लड प्रेशर आदि से पीड़ित हैं तो इसका इलाज शुरुआती दौर में ही करें, ताकि आपका शरीर बेहतर तरीके से लड़ सके।

धूम्रपान छोड़ दें, जानलेवा है

धूम्रपान (Smoking) पुरुषों के मुकाबले महिलाओं के लिए अधिक घातक होता है। जो महिलाएं धूम्रपान करती हैं उन्हें हृदय रोगों का खतरा अधिक होता है। ऐसी महिलाएं धूम्रपान नहीं करने वाली महिलाओं के मुकाबले दिल की बीमारी के लक्षणों को जल्दी अनुभव करती हैं। इसलिए अगर आप धूम्रपान कर रही हैं तो छोड़ दें। ऐसे रास्ते खोजें जो आपको धूम्रपान छोड़ने में मदद करे। अपने संकल्पों पर अडिग रहें।

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खानपान पर ध्यान दें और व्यायाम करें

अपने खानपान पर आपको हमेशा ध्यान रखना चाहिए। कम वसा वाले आहार लेने से हृदय रोगों का खतरा कम हो जाता है। इसके अलावा आप अपनी नियमित एक्सरसाइज पर ध्यान दें। ऐसी एक्सरसाइज करें जो आपके दिल को हेल्दी रखे।

टेंशन को कहें ‘न’

तनाव (Tension) और अवसाद (Depression) आपके दिल के लिए घातक होते हैं। इसलिए अपने तनाव और मूड स्विंग पर काम करना आपके फायदेमंद है। अपने दिल का ख्याल रखते हुए अपनी जीवनशैली से टेंशन को बाय कह दें।

पारिवारिक इतिहास से सबक लें

हृदय रोग, डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर आदि जैसे बीमारियों के बारे में अपने परिवार का इतिहास जानना जरूरी है। ये आपके लिए मददगार साबित हो सकता है। क्योंकि कई बार दिल की बीमारीआनुवंशिक होती है। डॉक्टर आपके पारिवारिक इतिहास के अनुसार आपका इलाज करेंगे।

ये तो हो गई रोकथाम की, लेकिन सबसे ज्यादा जरूरी है आपका खानपान। उसके लिए हमारी साथी सीनियर न्‍यूट्रीशन थेरेपिस्‍ट मीनल शाह आपको बताएंगी कि मेनोपॉज के दौरान आप कैसा आहार ले सकती हैं।

मेनोपॉज में महिलाएं कैसा आहार लें?

मीनल शाह कहती हैं कि “सबसे पहले आप ‘मेनोपॉज डायट’ लेना शुरू करें। मेनोपॉज डायट लेने से आपको मेनोपॉज के लक्षणों को कम करने या खत्म करने में मदद मिलेगी। इसके साथ ही आप दिल की बीमारी से सुरक्षित रहेंगी। आप जितनी जल्दी मेरे द्वारा बताए गए आहार को आपकी थाली का हिस्सा बनाएंगी, उतना ही भविष्य में आपके लिए अच्छा रहेगा।”

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कैल्शियम (Calcium)

आप अपने आहार में दूध से बने उत्पादों की भरपूर मात्रा शामिल करें। इसके अलावा कैल्शियम से भरपूर खाद्य पदार्थों जैसे – तिल, सोयाबीन, रागी और पोषण युक्त पदार्थ जैसे- जूस, साबूत अनाज आदि का सेवन करें।

आयरन (Iron)

आयरन गार्डेन क्रेस बीज (हलिम), काली किशमिश, पत्तेदार हरी सब्जियां, और मुर्गे के लीवर में मिलता है। मैं यह सलाह हमेशा देती हूं कि खाने में आयरन से भरपूर खाद्य पदार्थ जरूर लें। आयरन के बेहतर अवशोषण के लिए विटामिन सी से भरपूर पदार्थ जैसे- नींबू और संतरे का रस जरूर लें। आयरन युक्त भोजन के साथ कैल्शियम और फाइबर युक्त भोजन लेने से बचें, क्योंकि ये आयरन के अवशोषण को कम कर देता है।

फाइबर (Fiber)

अपने आहार में रेशों (फाइबर) से भरपूर खाद्य पदार्थों जैसे कच्ची या पकी हुई सब्जियां, छिलकों समेत कटे फल, नट्स और बीज को शामिल कर सकती हैं। ये मेनोपॉज के दौरान आपके दिल का ख्याल रखेगा। फाइबर दिल की बीमारी के लिए रामबाण है।

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फल और सब्जियां खाएं (Fruits and Vegetables)

आपको अपने आहार में कम से कम 3 से 5 भाग फल और 2 से 4 कप सब्जियों को शामिल करना चाहिए। फल और सब्जियों का सेवन रोज करें।

पानी (Water)

हर बीमारी की एक दवा पानी है। सर्वश्रेष्‍ठ परिणामों के लिए दिन भर में लगभग 5 लीटर पानी पीना जरूरी है। इसके अलावा आपको कोई अन्‍य स्वस्थ पेय पदार्थ पीते रहना चाहिए। दिल की बीमारी की दवा भी पानी ही है। आप जितना पानी पिएंगी उतनी स्वस्थ्य रहेंगी।

डॉ. हसमुख रावत कहते हैं कि मेनोपॉज कोई हौवा नहीं है। इसे आप दिल से न लगाएं, बल्कि अपनी दिल का ख्याल रखें। अगर दिल तंदरुस्त रहेगा तो जीवन का आनंद आप अच्छे से ले सकती हैं।

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अपने बॉडी मास इंडेक्स (बीएमआई) की जांच करने के लिए इस कैलक्युलेटर का उपयोग करें और पता करें कि क्या आपका वजन हेल्दी है। आप इस उपकरण का उपयोग अपने बच्चे के बीएमआई की जांच के लिए भी कर सकते हैं।

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महिला

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सूत्र

Cardiovascular Disease and Menopause/https://www.ncbi.nlm.nih.gov/Accessed on 22/01/2020

Menopause and your health/https://www.womenshealth.gov/Accessed on 22/01/2020

Menopause and Heart Disease/https://www.heart.org/Accessed on 22/01/2020

Heart disease and women/https://medlineplus.gov/ency/article/007188.htm/Accessed on 22/01/2020

Women and Heart Disease/https://www.cdc.gov/heartdisease/women.htm/Accessed on 22/01/2020

लेखक की तस्वीर
Shayali Rekha द्वारा लिखित आखिरी अपडेट 17/07/2020 को
Dr. Shruthi Shridhar के द्वारा एक्स्पर्टली रिव्यूड