हमारी टांगों की नसें दिल तक खून को वापस ले जाती हैं। टांगों में एकतरफ़ा वाल्व होते हैं जो यह काम करते हैं। अगर आपको शिरापरक अपर्याप्तता (Venous Insufficiency) की शिकायत है तो यह वाल्व अच्छे से काम नहीं करते। जिससे खून कुछ मात्रा में वापस टांगों में चला जा सकता है। इससे टांगों की नसों में यह खून जमा हो जाता है। शिरापरक अपर्याप्तता का अर्थ है वाल्व सही तरीके से या पूरी तरह से बंद नहीं हुए हैं।
शिरापरक अपर्याप्तता में दर्द और अन्य लक्षण इस प्रकार हैं:
- टांगों में हलकी दर्द, भारीपन, या पैरों में ऐंठन
- टांगों में खुजली और झुनझुनी
- खड़े होने पर दर्द होना जो समय के साथ बढ़ती जाती है
- जब पैरों को उठाया जाता है तो दर्द से कुछ हद तक राहत मिलती है
- इस रोग में टांगों में त्वचा का रंग बदल जाता है
- टांगों में सूजन होना
- अगर आप टांगों में खुजली करते हैं तो त्वचा फट जाती है
- लाल या सूजी हुई, पपड़ीदार त्वचा
- सतह पर वैरिकाज़ नसें
- पैरों और टखनों पर त्वचा का मोटा और सख्त होना (लिपोडर्माटोस्केलेरोसिस)
- घाव या अल्सर जो पैरों या टखनों पर होता है, यह घाव धीरे-धीरे ठीक होता है
- टांगों में मौजूद नस में ब्लड क्लॉट वाल्व को नुकसान पहुंचा सकता है।
- अगर आप व्यायाम नहीं करते हैं, तो यह भी शिरापरक अपर्याप्तता का एक कारण हो सकता है।
- अधिक देर तक खड़े या बैठे रहने से भी टांगों की नसों पर दबाव पड़ता है जिससे वाल्व कमजोर हो सकता है।
[mc4wp_form id=’183492″]
- अधिकतर मामलों में शिरापरक अपर्याप्तता का कारण पुराने ब्लड क्लॉट और वैरिकाज नसें (Blood clots and varicose veins) होती हैं। जब नसों के माध्यम से आगे की तरफ बहने वाला खून बाधित होता है तो ब्लड क्लॉट हो जाता है। जो शिरापरक अपर्याप्तता (Venous Insufficiency) का कारण बन सकता है।
- वैरिकाज़ नसों में, वाल्व अक्सर गायब या बिगड़ा हुआ होता है, और क्षतिग्रस्त वाल्व के माध्यम से रक्त वापस लीक होता है।
- कुछ मामलों में, पैर की मांसपेशियों में कमजोरी भी शिरापरक अपर्याप्तता का कारण बन सकती है।
इन स्थितियों में इस रोग के जोखिम बढ़ सकते हैं:
- बढ़ती उम्र
- इस स्थिति का पारिवारिक इतिहास होना
- पुरुषों की स्थितियों में महिलाओं को यह समस्या अधिक होती है
- पैरों में गहरी शिरा घनास्त्रता (Vein thrombosis) का इतिहास
- मोटापा
- प्रेगनेंसी
- अधिक समय तक बैठना या खड़े रहना
- ऊंचाई अधिक होना
शिरापरक अपर्याप्तता (Venous Insufficiency) का निदान किस तरह से किया जाता है?
शिरापरक अपर्याप्तता के निदान के लिए डॉक्टर सबसे पहले आपसे इसके लक्षणों के बारे में जानेगे। इसके बाद डॉक्टर आपकी शारीरिक जांच करेंगे और आपसे पारिवारिक हिस्ट्री के बारे में पूछेंगे।

रोगी को कुछ इमेजिंग टेस्ट कराने के लिए भी कहा जा सकता है। यह टेस्ट इस प्रकार हैं:
- वेनोग्राम: वेनोग्राम के दौरान डॉक्टर रोगी की नसों में एक इंट्रावेनस (IV) कंट्रास्ट डाई डालेंगे। यह डाई डॉक्टर को रोगी के ब्लड वेसेल्स की एक स्पष्ट एक्स-रे तस्वीर प्रदान करेगी।
- डुप्लेक्स अल्ट्रासाउंड: यह टेस्ट नसों में खून के प्रवाह की गति और दिशा को टेस्ट करने के लिए प्रयोग में लाया जाता है।
शिरापरक अपर्याप्तता का उपचार किस तरह से किया जाता है? (Treatment of Venous Insufficiency)
शिरापरक अपर्याप्तता का उपचार कई कारकों पर निर्भर करता है, जिसमें रोगी की स्थिति, स्वास्थ्य और इतिहास भी शामिल हैं। इसके अलावा निम्नलिखित कारकों को भी ध्यान में रखा जाता है, जैसे:
- रोगी के खास लक्षण
- उम्र
- स्थिति की गंभीरता
- रोगी कितनी अच्छी तरह दवाओं या प्रक्रियाओं को सहन कर सकता है।
शिरापरक अपर्याप्तता (Venous Insufficiency) के लिए सबसे आम उपचार कम्प्रेशन स्टॉकिंग्स है। ये खास स्टॉकिंग्स होते हैं जो टखने और निचले पैर पर दबाव डालते हैं। यह रक्त प्रवाह को बेहतर बनाने में मदद करते हैं और पैर की सूजन को कम कर सकते हैं।
शिरापरक अपर्याप्तता के लिए उपचार में कई अलग-अलग स्ट्रेटेजीज शामिल हो सकती हैं:
1) रक्त प्रवाह में सुधार (Improve blood flow)
रोगी के रक्त प्रवाह को बेहतर बनाने के लिए यहां कुछ सुझाव दिए गए हैं:
- जब भी संभव हो अपने पैरों को सीधा रखें।
- अपने निचले पैरों पर दबाव डालने के लिए कम्प्रेशन स्टॉकिंग्स पहनें।
- बैठने पर अपने पैरों को बिना मोड़े रखें।
- नियमित रूप से व्यायाम करें।
2) दवाइयां
शिरापरक अपर्याप्तता के उपचार के लिए कई दवाइयों का प्रयोग किया जाता है, जैसे:
- ड्यूरेटिक्स
- एंटीकौयगुलांटस (Anticoagulants) : दवाइयां जो खून को पतला कर देती है।
- पेंटॉक्सिफिलिन (ट्रेंटल): दवा जो रक्त प्रवाह को बेहतर बनाने में मदद करती है।
3) सर्जरी
कभी-कभी शिरापरक अपर्याप्तता के अधिक गंभीर मामलों में सर्जरी की आवश्यकता होती है। डॉक्टर इसमें निम्नलिखित तरीकों का सुझाव दे सकते हैं
- नसों या वाल्व्स की सर्जिकल रिपेयर
- ख़राब हुई नसों को हटाना
- न्यूनतम इनवेसिव एंडोस्कोपिक सर्जरी
- वेंन बाईपास
- लेज़र सर्जरी
4) एंबुलेटरी फेल्बेक्टॉमी
इस प्रक्रिया में डॉक्टर रोगी के पैर पर कुछ जगहों को सुन्न करेंगे, और फिर छोटी चुभने वाली चीज के साथ छोटे वैरिकाज़ नसों को निकाल देंगे।
5) स्क्लेरोथेरपी (Sclerotherapy)
इस तरीके का प्रयोग अधिक शिरापरक अपर्याप्तता की स्थिति में किया जाता है। स्क्लेरोथेरेपी का उपयोग छोटी से मध्यम नसों को निकालने के लिए किया जाता है। क्षतिग्रस्त नसों में एक रसायन इंजेक्ट किया जाता है ताकि यह खून को ले जाने में सक्षम न हो।
6) कैथेटर प्रक्रियाएं
गंभीर स्थितियों में, बड़ी नसों के लिए कैथेटर प्रक्रियाओं का प्रयोग किया जाता है। डॉक्टर नस में एक कैथेटर (एक पतली ट्यूब) डालेंगे, इसके दूसरे सिरे को गर्म करेंगे, और फिर इसे हटा देंगे। कैथेटर के बाहर निकल जाने के कारण गर्मी नसों को बंद करने और सील करने का कारण बनेगी।
यह भी पढ़ें:
कितना सामान्य है गर्भावस्था में नसों की सूजन की समस्या? कब कराना चाहिए इसका ट्रीटमेंट
- कम्प्रेशन स्टॉकिंग्स : कम्प्रेशन स्टॉकिंग्स (Compression stockings) से टांगों पर दबाव पड़ता है जिससे खून का प्रवाह अच्छे से होता है। ऐसे में इसका प्रयोग करें।
- गतिविधियां : अधिक समय तक न तो खड़े रहें, न ही बैठें। अगर आप अधिक देर तक बैठते या खड़े होते हैं तो खून अच्छे से प्रवाह नहीं होता।
- व्यायाम: शरीर का व्यायाम करने से खून का प्रवाह अच्छे से होता है जिससे टांगे मजबूत होती हैं।
- त्वचा का ध्यान रखें: शिरापरक अपर्याप्तता से पीड़ित लोगों में त्वचा सम्बन्धी समस्याएं हो सकती हैं। ऐसे में अपनी त्वचा की सफाई का खास ध्यान रखें।
- धूम्रपान से बचें : अगर आप धूम्रपान करते हैं तो उसे छोड़ दें।
- शरीर का वजन सही रखें : अगर आप इस समस्या से बचना चाहते हैं तो अपने शरीर का वजन संतुलित बनाये रखें।
हैलो स्वास्थ्य किसी भी तरह की कोई भी मेडिकल सलाह नहीं दे रहा है, अधिक जानकारी के लिए आप डॉक्टर से संपर्क कर सकते हैं।