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ब्रेस्ट कैंसर के खतरे (Tips to reduce breast cancer) को कैसे करें कम?

ब्रेस्ट कैंसर के खतरे (Tips to reduce breast cancer) को कैसे करें कम?

ब्रेस्ट में गांठ, स्किन में बदलाव, निप्पल के आकार में बदलाव, स्तन का सख्त होना, स्तन के आस-पास (अंडर आर्म्स) गांठ होना, निप्पल से रक्त या तरल पदार्थ का आना या स्तन में दर्द महसूस होना ब्रेस्ट कैंसर हो सकता है। ऐसा एल्कोहॉल या सिगरेट का सेवन करना, पहले गर्भ धारण में देरी होना, बच्चों को स्तनपान न करवाना, शरीर का वजन अत्यधिक बढ़ना, बदलती लाइफस्टाइल, गर्भनिरोधक दवाईयों का सेवन करना या जेनेटिकल (परिवार में अगर किसी को ब्रेस्ट कैंसर हुआ हो) कारणों की वजह से भी कैंसर का खतरा बढ़ सकता है। जानिए यहां कि ब्रेस्ट कैंसर के खतरे (Breast cancer risks) क्या है? इसी के साथ, ब्रेस्ट कैंसर के खतरे (Breast cancer risks) को कम करने के लिए किन बातों का ध्यान रखना आवश्यक हैद्ध।

और पढ़ें: ब्रेस्ट कैंसर के खतरे को कम कर सकता है अखरोट

ब्रेस्ट कैंसर के खतरे से बचने के लिए क्या करें? (Tips to reduce breast cancer)

स्तन कैंसर

ब्रेस्ट कैंसर के साथ ही अन्य कैंसर से बचाव के लिए आपको बुरी आदतों को छोड़ने के साथ ही अच्छी आदतों को अपनाना होगा। जीवनशैली में बदलाव कर ब्रेस्ट कैंसर के खतरे (Breast cancer risk) को कम किया जा सकता है। इनमें शामिल हैं:

वजन संतुलित रखें (Balance weight)

जरूरत से ज्यादा बढ़ता वजन स्तन कैंसर के साथ-साथ अन्य बीमारियों को दस्तक देने के लिए काफी है। इसलिए वजन संतुलित बनाए रखें (वजन कम करने में योग है सहायक)। यह कहना आसान है की वजन संतुलित रखना चाहिए और यह अक्सर कहा भी जाता है लेकिन, संतुलित वजन बनाए रखना सभी के लिए एक महत्वपूर्ण लक्ष्य होता है। वजन बढ़ने की वजह से स्तन कैंसर सहित कई विभिन्न कैंसर का खतरा बढ़ सकता है। इसलिए बॉडी वेट मेंटेन रखने के लिए नियमित वर्कआउट करें। अगर किसी कारण एक्सरसाइज करना संभव नहीं हो पा रहा है या आप जिम नहीं जा पा रहीं हैं, तो आप नियमित वॉकिंग कर सकती हैं या स्विमिंग कर सकती हैं। नियमित वर्कआउट ब्रेस्ट कैंसर के खतरे (Breast cancer risk) को कम करने में मददगार होता है।

शारीरिक गतिविधियों (Physical activities) में शामिल हों

रिसर्च के अनुसार जो महिलाओं को शारीरिक गतिविधियों में शामिल होती हैं, उनमें ब्रेस्ट कैंसर होने की संभावना 30 प्रतिशत तक कम होती है। इसलिए शारीरिक गतिविधियों को नियमित अपने दिनचर्या में शामिल करें।

हरी सब्जी और फलों का सेवन करें

पौष्टिक आहार स्तन कैंसर के खतरे को कम करने में मदद कर सकता है। रोजाना फल और हरी सब्जियों का सेवन करें।

एल्कोहॉल का सेवन न करें (Do not consume alcohol)

एल्कोहॉल के सेवन से ब्रेस्ट कैंसर समेत अन्य बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए एल्कोहॉल का सेवन न करें। रिसर्च के अनुसार एल्कोहॉल की वजह से महिला और पुरुष दोनों में इनफर्टिलिटी का कारण भी बन सकता है।

और पढ़ें: नजरअंदाज न करें ये 7 लक्षण हो सकती है ब्रेस्ट इंगोर्जमेंट की समस्या!

स्मोकिंग नहीं करें (Don’t smoke)

स्मोकिंग नहीं करना चाहिए ये हमसभी जानते हैं। स्मोकिंग से हृदय रोग, स्ट्रोक, स्तन कैंसर समेत अन्य कैंसर का खतरा बढ़ जाता है। यही नहीं स्मोकिंग के कारण मुंह से स्मेल, दांतों का खराब होना और चेहरे पर झुर्रियां भी आ जाती हैं। इसलिए ब्रेस्ट कैंसर के खतरे (Breast cancer risk) से बचने के लिए स्मोकिंग या तंबाकू का सेवन न करें।

स्तनपान करवाएं (Breastfeed)

स्तनपान से सिर्फ नवजात को पौष्टिक आहार ही नहीं मिलता है बल्कि एक साल या इससे अधिक स्तनपान करवाने से स्तन कैंसर का खतरा कम हो जाता है।

गर्भनिरोधक दवाइयों का सेवन नहीं करें (Contraceptive medicines)

35 साल से ज्यादा उम्र की महिलाओं को गर्भनिरोधक गोलियों का सेवन नहीं करना चाहिए। इससे ब्रेस्ट कैंसर का खतरा बढ़ सकता है। हालांकि, स्वास्थ्य से जुड़े जानकार मानते हैं की इससे ओवरी के कैंसर की संभावना कम हो सकती है। लेकिन, बेहतर होगा की गर्भनिरोधक दवाइयों (contraceptive medicines) का सेवन नहीं करें।

रेडिएशन और प्रदूषण से बचें (Avoid radiation and pollution)

एक्स-रे, माइक्रोवेव और गेजेट्स से होने वाले रेडिएशन से बचना चाहिए। इससे भी कैंसर का खतरा बढ़ सकता है। वहीं प्रदूषण से भी बचना चाहिए। इसलिए घर से बाहर निकलने के दौरान हमेशा मास्क का इस्तेमाल करना चाहिए।

जंक फूड का सेवन नहीं करें (Don’t eat junk food)

बदलती लाइफस्टाइल में लोग जंक फूड खाने के शौकीन होते जा रहें हैं। जंक फूड के साथ-साथ फ्रोजन फूड आइटम और पैक्ड जूस का भी सेवन नहीं करना चाहिए।

एक्सरसाइज या वॉक नियमित रूप से करें (Exercise or walk regularly)

नियमित रूप से एक्सरसाइज करने की आदत डालें और अगर आप एक्सरसाइज किसी कारण नहीं कर पाती हैं, तो कम से कम वॉक करने की आदत रोज डालें

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महिला का गर्भवती नहीं होना

वैसी महिलाएं जिनके बच्चे नहीं हुए हैं या 30 साल की उम्र के बाद उनका पहला बच्चा हुआ हो उनमें ब्रेस्ट कैंसर का खतरा बढ़ सकता है। गर्भावस्था ब्रेस्ट कैंसर के खतरे(Breast cancer risk) को कम करता है।

इन सभी स्थितियों के साथ-साथ परिवार (ब्लड रिलेशन) में अगर ब्रेस्ट कैंसर से कोई पीड़ित है, तो फिर आपको स्तन कैंसर होने की संभावना ज्यादा है।

ब्रेस्ट कैंसर के खतरे (Breast cancer risk) से बचने के लिए किन-किन बातों ध्यान आवश्यक रखें?

ब्रेस्ट कैंसर के खतरे (Breast cancer risk)से बचने के लिए निम्नलिखित बातों का ध्यान रखें। जैसे-

  • अगर आपकी उम्र 40 से 44 साल है, तो आपको प्रत्येक वर्ष मेमोग्राफी करवाना चाहिए। डॉक्टर से ब्रेस्ट कैंसर से जुड़ी बीमारी की जानकारी लें। अगर आपके ब्लड रिलेशन में या आपकी मां को ब्रेस्ट कैंसर है या हुआ था तो इसकी जानकारी डॉक्टर को दें।
  • अगर आपकी उम्र 45 से ज्यादा है और 55 से कम है तो आपको हर साल मेमोग्राफी करवाना चाहिए।
  • अगर आपकी उम्र 55 साल या इससे ज्यादा है तो मेमोग्रफी के साथ-साथ डॉक्टर द्वारा बताये गए चेकअप करवाते रहना चाहिए।
  • बढ़ती उम्र के साथ-साथ किसी भी उम्र में अगर आपको स्तन से जुड़ी कोई परेशानी महसूस होती है तो जल्द से जल्द डॉक्टर से संपर्क करें।क्योंकि ब्रेस्ट कैंसर की जानकारी अगर जल्दी मिल जाती है, तो इससे लड़ा जा सकता है और बचा जा सकता है।
  • ऊपर दी गई जानकारी के साथ-साथ निम्नलिखित बातों का भी ध्यान रखें। जैसे-
  • ब्रेस्ट कैंसर के खतरे (Breast cancer risk) में शामिल है महिला की उम्र। अगर महिला की उम्र 60 या इससे ज्यादा है तो ब्रेस्ट कैंसर की संभावना बनी रहती है।
  • ब्रेस्ट कैंसर के खतरे (Breast cancer risk) मेनोपॉज की स्थिति में भी हो सकती है। इसलिए 55 साल या इससे ज्यादा उम्र में मेनोपॉज होने की वजह से ब्रेस्ट कैंसर की संभावना बनी रहती है।
  • पहले शिशु का जन्म 35 साल की उम्र के बाद होने के कारण महिला को ब्रेस्ट कैंसर के खतरे (Breast cancer risk) हो सकते हैं।
  • अगर महिला गर्भवती न हुई हो, तो ऐसी स्थिति में भी ब्रेस्ट कैंसर के खतरे (Breast cancer risk) हो सकते हैं।
  • महिला की हाइट 5 फिट 8 इंच से ज्यादा होने की स्थिति में ब्रेस्ट कैंसर का खतरा बना रहता है।

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किसी भी महिला को 18 से 20 वर्ष के बाद अपने स्तनों की जांच खुद (ब्रेस्ट सेल्फ एग्जामिनेशन (BSE)) से करनी चाहिए। ध्यान रखें की स्तन में होने वाले गांठ हमेशा कैंसर ही नहीं होते हैं। लेकिन, स्तन या शरीर के किसी भी हिस्से में हो रही परेशानी को नजर अंदाज नहीं करें और जल्द से जल्द डॉक्टर से संपर्क करें। हैलो हेल्थ ग्रुप किसी भी प्रकार की चिकित्सा और उपचार प्रदान नहीं करता है। हम उम्मीद करते हैं कि आपको ये आर्टिकल पसंद आया होगा। आप स्वास्थ्य संबंधी अधिक जानकारी के लिए हैलो स्वास्थ्य की वेबसाइट विजिट कर सकते हैं। अगर आपके मन में कोई प्रश्न है, तो हैलो स्वास्थ्य के फेसबुक पेज में आप कमेंट बॉक्स में प्रश्न पूछ सकते हैं और अन्य लोगों के साथ साझा कर सकते हैं।

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सूत्र
लेखक की तस्वीर
Nidhi Sinha द्वारा लिखित आखिरी अपडेट 18/02/2022 को
Dr Sharayu Maknikar के द्वारा एक्स्पर्टली रिव्यूड