किडनी में ट्यूमर कितने प्रकार के होते हैं, जानिए यहां

    किडनी में ट्यूमर कितने प्रकार के होते हैं, जानिए यहां

    ज्यादातर मामलों में किडनी में ट्यूमर कैंसर का कारण बनता है। कुछ ट्यूमर धीमी गति से बढ़ते हैं, वहीं कुछ ट्यूमर तेज गति से बढ़ते हैं और कैंसर का कारण बनते हैं। किडनी में ट्यूमर होने का कोई ज्ञात कारण नहीं है। किडनी में ट्यूमर के डायग्नोस के बाद ये बात सामने आई है कि कुछ ट्यूमर अपने स्थान पर ही रहते हैं और दूसरी जगह नहीं फैलते हैं। करीब 40 प्रतिशत किडनी के ट्यूमर लोकलाइज्ड रीनल मासेस ( localized renal masses) के कारण होते हैं।

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    किडनी के बारे में क्या जानते हैं आप ?

    किडनी को हिंदी में वृक्क/गुर्दा भी कहते हैं। किडनी हमारे शरीर का महत्वपूर्ण हिस्सा होती है। हर व्यक्ति के शरीर में दो किडनी होती हैं। किडनी का शेप बीन्स की तरह होता है। किडनी हमारे एब्डॉमन एरिया यानी पेट के पीछे की ओर स्थित होती है। स्पाइन के दोनों तरफ रिब केज यानी पसलियों से चारों ओर से किडनी घिरी रहती है। ये बात समझनी जरूरी है कि किडनी ब्लड को फिल्टर करने का काम करती है। ब्लड में से पानी और अन्य गंदगी को बाहर कर यूरिन का निर्माण करती है। ब्लैडर के माध्यम से यूरिन हमारे शरीर से बाहर निकल जाता है। किडनी फिल्टर करने के दौरान

    ब्लड को डिटॉक्सीफाई करती है,

    • शरीर के तरल को बैलेंस करने का काम करती है
    • इलेक्ट्रोलाइट्स लेवल यानी सोडियम, पोटेशियम, कैल्शियम, मैग्नीशियम, एसिड आदि को मेंटेन करने का काम करती है।
    • वेस्ट को ब्लड से हटाकर यूरिन का निर्माण करती है।

    साथ ही किडनी हार्मोन बनाने का काम भी करती है जो

    किडनी में ट्युमर के प्रकार

    किडनी में ट्यूमर जिस स्थान में होता है, वहीं धीरे-धीरे बढ़ने लगता है। किडनी में ट्यूमर को तीन क्लास में बांटा जा सकता है।

    रीनल सेल कार्सिनोमास (Renal Cell Carcinomas)

    रीनल सेल कार्सिनोमास या RCC को मोस्ट कॉमन किडनी ट्यूमर माना जाता है। इस ट्यूमर में किडनी की स्मॉल ट्यूब की लाइनिंग में पाए जाते हैं। RCC किडनी में सिंगल ट्यूमर भी क्रिएट कर सकते हैं। RCC एक से अधिक ट्युमर भी किडनी में क्रिएट कर सकते हैं।

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    बेनाइंग रेनल ट्युमर (Benign renal tumors)

    इस प्रकार का ट्यूमर किडनी में नौ अलग तरीकों से पाया जा सकता है। किडनी में ट्यूमर आकार में कुछ बड़े भी हो सकते हैं। ये जरूरी नहीं है सभी ट्यूमर कैंसर का कारण बनें। कुछ ट्यूमर कैंसर का कारण भी बन सकते हैं और शरीर के दूसरे ऑर्गन में भी कैंसर सेल्स को फैला सकते हैं।

    विल्म्स ट्यूमर (Wilms tumor)

    विल्म्स ट्यूमर ज्यादातर बच्चों में पाए जाते हैं। एडल्ट्स में विल्म्स ट्यूमर पाए जाने की संभावना रेयर रहती है।

    रीनल सेल कार्सिनोमस ((Renal Cell Carcinomas)

    RCC किडनी में ट्यूमर का एक प्रकार है। RCC के कारण ज्यादातर ट्यूमर कैंसर का रूप ले लेते हैं। करीब 90 प्रतिशत कैंसर लोगों को RCC के कारण ही होता है। जब ट्यूमर की जांच माइक्रोस्कोप से की जाती है तो कैंसर सेल्स का अपीरेंस कुछ अलग हो सकता है। इस आधार पर RCC को कुछ हिस्सों में बांटा गया है। RCC के सबटाइप भी होते हैं।

    क्लियर सेल RCC (Clear cell RCC)

    ये सेल्स RCC के तहत आती हैं और बहुत ही कॉमन होती है। ये सेल्स क्लीयर और हल्के पीले रंग की होती हैं। करीब 70 परसेंट लोगों को जिन्हें किडनी कैंसर है, उनमे क्लियर सेल RCC पाई जाती है। अमेरिकन सोसाइटी ऑफ क्लीनिकल ऑन्कोलॉजी (ASCO) के अनुसार क्लीयर सेल आरसीसी इम्युनोथेरेपी और ट्रीटमेंट के दौरान आसानी से खत्म की जा सकती हैं।

    पैपिलरी आरसीसी (Papillary RCC)

    क्लियर सेल आरसीसी के बाद किडनी में कैंसर के लिए पैपिलरी आरसीसी जिम्मेदार होती हैं। माइक्रोस्कोप से देखने पर ये फिंगर की तरह दिखाई देती हैं। आरसीसी की समस्या से जूझ रहे करीब 10 प्रतिशत लोगों में ऐसी सेल्स पाई जाती हैं। इन्हें टाइप 1 और टाइप सेंकेंड में बांटा जा सकता है।पैपिलरी आरसीसी का ट्रीटमेंट भी क्लियर सेल आरसीसी की तरह ही किया जाता है। पैपिलरी आरसीसी के लिए टारगेट थेरेपी का यूज नहीं किया जा सकता है।

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    क्रोमोफोब आरसीसी (Chromophobe RCC)

    ट्यूमर की समस्या वाले करीब पांच प्रतिशत लोग क्रोमोफोब आरसीसी से ग्रस्त हो सकते हैं। इसमे भी सेल्स क्लीयर सेल आरसीसी जैसी ही दिखती हैं। साथ ही सेल्स बड़ी होती है और माइक्रोस्कोप से देखे पर कुछ अलग फीचर भी नजर आते हैं। ये सेल्स कैंसर डिजीज फॉम करने के लिए कुछ कम एग्रेसिव होती हैं। शरीर के विभिन्न भागों में फैलने से पहले ये ट्यूमर बड़े हो सकते हैं।

    किडनी ट्यूमर में पाए जाने वाले रेयर आरसीसी

    कई अन्य प्रकार के आरसीसी किडनी ट्यूमर में रेयर ही पाए जाते हैं।

    • कलेक्टिव डक्ट आरसीसी (Collecting duct RCC) बहुत एग्रेसिव होता है, ये तेजी से फैलता है।
    • मल्टीलोकुलर सिस्टिक आरसीसी ( multilocular cystic RCC) गुड प्रोग्नोसिस होता है।
    • अन्य आरसीसी जैसे मेडुलरी कार्सिनोमा, रीनल म्युसीनस ट्यूबलर और स्पिंडल सेल कार्सिनोमा और अन्य आरसीसी न्यूरोब्लास्टोमा से जुड़ा हुआ है। ये सभी केवल एक प्रतिशत आरसीसी को रिप्रेजेंट करते हैं।

    आरसीसी की समस्या क्यों होती है ?

    मेडिकल एक्सपर्ट आरसीसी के सटीक कारण को नहीं जानते हैं। यह समस्या 50 और 70 की उम्र के बीच पुरुषों में सबसे अधिक पाया जाती है। इस समस्या के कुछ रिस्क फैक्टर हो सकते हैं।

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    आरसीसी के रिस्क फैक्टर में शामिल है

    • आरसीसी की फैमिली हिस्ट्री
    • डायलिसिस ट्रीटमेंट के कारण
    • हाई ब्लड प्रेशर के कारण
    • मोटापा
    • सिगरेट पीने से
    • पॉलीसिस्टिक किडनी रोग के कारण ( ये एक वंशानुगत डिसऑर्डर है जो किडनी में अल्सर का कारण बनता है )
    • आनुवंशिक स्थिति वॉन हिप्पेल-लिंडौ रोग के कारण।इस स्थिति में विभिन्न अंगों में अल्सर और ट्यूमर की समस्या होने लगती है।
    • गठिया के इलाज के लिए उपयोग की जाने वाली कुछ दवाओं जैसे कि नॉनस्टेरॉइडल एंटी-इंफ्लेमेटरी दवाओं के यूज करने से और बुखारऔर दर्द से राहत के लिए ली जाने वाली दवाएं जैसे एसिटामिनोफेन आदि के कारण

    अगर किसी भी व्यक्ति को जांच के दौरान ये पता चलता है कि उसे किडनी में ट्यूमर है, तो घबराएं नहीं। किडनी में ट्यूमर का मतलब ये नहीं है कि वो कैंसर ही हो। डॉक्टर जांच के बाद ही तय करेगा कि किडनी में ट्यूमर कैंसर है या फिर नहीं। बेहतर होगा कि किसी भी तरह के लक्षण नजर आने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।

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    के द्वारा मेडिकली रिव्यूड

    Dr Sharayu Maknikar


    Bhawana Awasthi द्वारा लिखित · अपडेटेड 04/09/2020

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