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फाइब्रोमायल्जिया के लिए वर्कआउट रूटीन आपको पहुंचा सकता है इतने सारे फायदे

    फाइब्रोमायल्जिया के लिए वर्कआउट रूटीन आपको पहुंचा सकता है इतने सारे फायदे

    फाइब्रोमायल्जिया (Fibromyalgia) हेल्थ कंडीशन है, जो शरीर में दर्द और थकान का कारण बनती है। फाइब्रोमायल्जिया के कारण स्लीप प्रॉब्लम (sleep problems), इमोशनल और मेन्टल डिस्ट्रेस( mental distress) की समस्या हो सकती है। जिन लोगों को फाइब्रोमायल्जिया की समस्या होती है,वो लोग दर्द के प्रति बहुत संवेदनशील होते हैं। इस स्थिति को एब्नॉर्मल पेन परसेप्शन प्रोसेसिंग (abnormal pain perception processing) कहते हैं। फाइब्रोमायल्जिया किन कारणों से होता है, इस बारे में अभी तक जानकारी नहीं हो पाई है लेकिन इस समस्या का उपचार उपलब्ध है और इसे ठीक किया जा सकता है। फाइब्रोमायल्जिया के लिए वर्कआउट रूटीन दर्द में प्रभावी असर दिखाता है। यदि फाइब्रोमायल्जिया के लिए वर्कआउट रूटीन को फॉलो किया जाए, तो दर्द से छुटकारा मिल सकता है। आज हम आपको इस आर्टिकल के माध्यम से फाइब्रोमायल्जिया के लिए एक्सरसाइज के बारे में जानकारी देने जा रहे हैं। जानिए फाइब्रोमायल्जिया के लिए वर्कआउट रूटीन से जुड़ी कुछ मुख्य बातें।

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    फाइब्रोमायल्जिया के लिए वर्कआउट रूटीन (workout routine for fibromyalgia)

    अगर आप पेनफुल टेंडर के साथ थकान और मांसपेशियों के दर्द से जूझ रहे हैं, तो एक्सरसाइज आपको इनसे निजात दिलाने में मदद कर सकती है। आप डेली वॉक(daily walks), स्ट्रेचिंग(stretching), तैराकी(swimming), योग( yoga), ताई ची(tai chi) और पिलाटे (Pilates) जैसी लो-इम्पेक्ट एक्सरसाइज के माध्यम से शरीर में होने वाले दर्द को कम कर सकते हैं। मांसपेशियों को मजबूत और लचीला बनाए रखने के लिए वेट कंट्रोल करना बहुत जरूरी है। एक्सरसाइज के माध्यम से बॉडी एक्टिव रहती है और वेट भी कंट्रोल में रहता है, जिसका फायदा मसल्स को पहुंचता है। फाइब्रोमायल्जिया के पेशेंट्स के लिए कुछ व्यायाम सुरक्षित माने जाते हैं। अक्सर लोगों के मन में ये डर रहता है कि दर्द को ठीक करने के लिए आराम की जरूरत होती है न कि एक्सरसाइज है। ये गलत धारणा है। दर्द को नियंत्रण में रखने के लिए कुछ लो इम्पेक्ट एक्सरसाइज फायदा पहुंचा सकती हैं।

    दर्द से राहत के लिए करें ये एक्सरसाइज

    फाइब्रोमायल्जिया की समस्या के कारण ज्वाइंट्स में दर्द की समस्या से गुजरना पड़ता है। इस बीमारी से राहत के लिए एक्सरसाइज के साथ ही लाइफस्टाइल में सुधार की अधिक जरूरत होती है। स्ट्रेस इस बीमारी को अधिक गंभीर बना सकता है। आपको इस समस्या से राहत के लिए स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज, कंडीशनिंग एक्सरसाइज और स्ट्रेथनिंग एक्सरसाइज करनी चाहिए। जानिए इन एक्सरसाइज के बारे में।

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    स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज (stretching exercises)

    स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज (stretching exercises) या रेंज ऑफ मोशन (Range-of-motion ) एक्सरसाइज मसल्स की फ्लेक्सिबिलिटी को मेंटेन करती है। स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज में स्टैंडिंग हैमस्ट्रिंग स्ट्रेच (Standing Hamstring Stretch), पिरिफॉर्मिस स्ट्रेच (Piriformis Stretch), लंग्स विद स्पाइनल ट्विस्ट (Lunge With Spinal Twist) आदि कर सकते हैं। अगर आपने पहले कभी भी स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज नहीं की है, तो बेहतर होगा कि एक्सपर्ट की देखरेख में ही एक्सरसाइज करें। स्टैंडिंग हैमस्ट्रिंग स्ट्रेच (Standing Hamstring Stretch) करने के दौरान निम्न स्टेप्स फॉलो करें।

    • सबसे पहले सीधा खड़े हो जाएं। अब हिप को धीरे-धीरे आगे की ओर झुकाएं।
    • हाथों को किनारे सीधा रखें।
    • अब सांस को छोड़ते हुए आगे की ओर झुकें और सिर को जमीन की ओर ले जाएं।
    • अब हाथों से पैर के पीछे की ओर पकड़ें और कुछ समय तक इसी अवस्था में रहें। आप ऐसा 45 सेकंड के लिए कर सकते हैं।

    कंडीशनिंग एक्सरसाइज (conditioning exercises)

    कंडीशनिंग एक्सरसाइज में कुछ व्यायाम जैसे कि वॉकिंग, बाइकिंग या स्विमिंग आदि आते हैं। आप एक्सरसाइज के दौरान मसल्स को टोन कर सकते हैं और साथ ही कॉर्डिनेशन भी बना सकते हैं। इस एक्सरसाइज की हेल्प से आप वजन भी कम कर सकते हैं। कार्डियोवस्कुलर सिस्टम परफॉर्मेंस को बढ़ाने के लिए कंडीशनिंग एक्सरसाइज महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। आप स्क्वाट्स (Squats), रिवर्स लंग्स (Reverse lungs), बल्गेरियन स्क्वाट्स (bulgarian squat), (glute bridge), लेटरल लंग्स(lateral lunge), पुशअप्स आदि एक्सरसाइज कर सकते हैं। अगर आपने ये एक्सरसाइज कभी नहीं की हैं, तो बेहतर होगा कि आप एक्सपर्ट की देखरेख में ये एक्सरसाइज करें।

    स्ट्रेथनिंग एक्सरसाइज (Strengthening exercises)

    जोड़ों को मजबूत बनाने के लिए स्ट्रेथनिंग एक्सरसाइज की जाती है। अगर आप रोजाना स्ट्रेथनिंग एक्सरसाइज करते हैं, तो टेंडन की मसल्स को सपोर्ट मिलता है। रोजाना स्ट्रेथनिंग एक्सरसाइज फाइब्रोमायल्जिया के लक्षणों में राहत प्रदान करती है। आप एक्सरसाइज करते समय विशेष सावधानी रखें। अगर आपने ध्यान न दिया, तो एक्सरसाइज के दौरान चोट भी लग सकती है। स्ट्रेथनिंग एक्सरसाइज में आप निम्न एक्सरसाइज को शामिल कर सकते हैं।

    • लिफ्टिंग वेट (lifting weights)
    • रसिस्टेंस बैंड (working with resistance bands)
    • गार्डनिंग में खुदाई या फावड़े का उपयोग (heavy gardening)
    • सीढ़ियां चढ़ना (climbing stairs)
    • साइकलिंग (cycling)
    • डांस (dance)
    • पुश-अप्स (push-ups)
    • सिट-अप्स(sit-ups)

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    फाइब्रोमायल्जिया के लक्षणों में राहत के लिए लो इम्पेक्ट एक्सरसाइज (Low-Impact Exercises )

    लो इम्पेक्ट एरोबिक्स एक्सरसाइज फाइब्रोमायल्जिया के लक्षणों से राहत दिलाने का काम करते हैं। अगर आपने पहले कभी भी एक्सरसाइज नहीं की है, तो आप लो इम्पेक्ट एक्सरसाइज से भी शुरुआत कर सकते हैं। आप योग से शुरुआत करें। योग करने से स्ट्रेस कम होता है और मसल्स टेंशन से राहत मिलती है। फाइब्रोमायल्जिया के कारण परेशानी या चिंता होना आम बात होती है। ऐसे में योग स्ट्रेस को दूर करने के लिए बहुत जरूरी हो जाता है। इससे इंजुरी का रिस्क भी कम हो जाता है।

    अच्छे वर्कआउट और स्ट्रेचिंग के लिए ताई ची (Tai chi) की प्रैक्टिस की जा सकती है।स्टडी में ये बात सामने आई है कि जो लोग ताई ची का नियमित अभ्यास करते हैं उनका सेंस ऑफ बैलेंस बढ़ता है। साथ ही ऐसे लोग घर के कामों को भी आसानी से करने में सक्षम होते हैं। फाइब्रोमायल्जिया की बीमारी में ताई ची की प्रैक्टिस आपको अधिक फ्लेक्सिबल और मजबूत बनाती है।

    पिलाटे (Pilates) एक्सरसाइज में ब्रीथिंग और स्ट्रेंथनिंग पर फोकस किया जाता है। आपको एक्सरसाइज के दौरान पॉस्चुरल मसल्स पर काम करना होगा। ये मसल्स स्पाइन को सपोर्ट करने में हेल्प करती हैं। आप पेट के बल लेट जाएं। अब आपने हाथों और पैरों के सहारे शरीर को ऊपर की ओर उठाएं। अब एक घुटने को मोड़कर अंदर की ओर लाएं और फिर वापस उसी पुजिशन में ले जाएं। आप दूसरे पैर के साथ ही ऐसा ही करें। ये मसल्स का वर्कआउट होता है, जो आपकी मांसपेशियों को मजबूत बनाने के साथ ही दर्द से राहत भी प्रदान करता है। आप पिलाटे एक्सरसाइज के बारे में एक्सपर्ट से राय जरूर लें।

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    फाइब्रोमायल्जिया (fibromyalgia) के लिए वर्कआउट रूटीन अपनाने से मिल सकते हैं ये फायदे

    फाइब्रोमायल्जिया के जो पेशेंट्स रेग्युलर एक्सरसाइज करते हैं, उनमें कई तरह के फायदे नजर आ सकते हैं। जानिए एक्सरसाइज से होने वाले फायदे के बारे में।

    • कैलोरी बर्न करने से वजन कंट्रोल में रहता है।
    • पेनफुल मसल्स को मोशन मिलता है।
    • नींद की गुणवत्ता (quality of sleep) में सुधार होता है।
    • एरोबिक क्षमता (aerobic capacity) बढ़ती है।
    • हार्ट हेल्थ में सुधार होता है।
    • एक्सरसाइज एनर्जी बढ़ाने का काम करता है।
    • स्ट्रेस और डिप्रेशन को कम करने का काम करता है।
    • क्रॉनिक डिजीज ( chronic disease) से जुड़े स्ट्रेस को कम करता है।
    • एंडोर्फिन हॉर्मोन का सिकरीशन बढ़ाता है।
    • हड्डियों को मजबूत बनाता है।
    • मांसपेशियों को मजबूत बनाता है।
    • दर्द से राहत (Relieving pain) दिलाने का काम करता है।

    आप बीमारी के दौरान स्लो एक्सरसाइज करें। आप स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज से शुरुआत कर सकते हैं। साथ ही लो-इम्पेक्ट एक्टिविटी भी आपकी परेशानी को कम कर सकती है। अगर आपको एक्सरसाइज के दौरान दर्द हो रहा हो, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। आपको फाइब्रोमायल्जिया की बीमारी में कुछ एक्सरसाइज इग्नोर करनी चाहिए, जो अपको अधिक दर्द पहुंचाती हो। बेहतर होगा कि आप पहले इस बारे में डॉक्टर से जरूर राय लें।

    हम उम्मीद करते हैं कि आपको इस आर्टिकल के माध्यम से फाइब्रोमायल्जिया के लिए वर्कआउट रूटीन के बारे में जानकारी मिल गई होगी। आपको एक्सरसाइज के साथ ही सावधानी की भी जरूरत है। कई बार गलत एक्सरसाइज करने से शरीर को नुकसान भी पहुंचता है। बेहतर होगा कि आप एक्सपर्ट की सलाह के बाद ही एक्सरसाइज करें। फाइब्रोमायल्जिया के लिए एक्सरसाइज आपको बीमारी के लक्षणों में राहत पहुंचाने का काम करेगी। आप स्वास्थ्य संबंधी अधिक जानकारी के लिए हैलो स्वास्थ्य की वेबसाइट विजिट कर सकते हैं। अगर आपके मन में कोई प्रश्न है, तो हैलो स्वास्थ्य के फेसबुक पेज में आप कमेंट बॉक्स में प्रश्न पूछ सकते हैं।

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    सूत्र

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    Bhawana Awasthi द्वारा लिखित आखिरी अपडेट 05/01/2022 को
    डॉ. प्रणाली पाटील के द्वारा मेडिकली रिव्यूड