डायबिटिक कीटोएसिडोसिस: जानिए इसके लक्षण, कारण और उपचार

चिकित्सक द्वारा समीक्षित | द्वारा

प्रकाशित हुआ जुलाई 15, 2020 . 4 मिनट में पढ़ें
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 डायबिटिक कीटोएसिडोसिस (DKA) डायबिटीज की गंभीर समस्या है। यह समस्या तब होती है, जब किसी के शरीर में ब्लड शुगर बहुत अधिक होता है और कीटोन्स नामक एसिडिक तत्व उनके शरीर में खतरनाक स्तर तक इनका निर्माण करते हैं। यह स्थिति तब पैदा होती है जब हमारा शरीर पर्याप्त मात्रा में इंसुलिन नहीं बना पाता। डायबिटिक कीटोएसिडोसिस की समस्या अधिकतर टाइप 1 डायबिटीज से प्रभावित लोगों को होती है। लेकिन, यह टाइप 2 का शिकार और जेस्टेशनल डायबिटीज से पीड़ित लोगों को भी हो सकती है। हालांकि, इसका इलाज संभव है, लेकिन समय रहते अगर इस समस्या का इलाज न हो तो रोगी की मृत्यु भी हो सकती है। जानिए इसके बारे में विस्तार से ताकि अवस्था जटिल होने के पहले संभाला जा सके।

डायबिटिक कीटोएसिडोसिस के कारण

शुगर हमारे शरीर की कोशिकाओं के लिए ऊर्जा का मुख्य स्त्रोत है, जो हमारे शरीर में मांसपेशियों और अन्य टिश्यू को बनाता है। समान्यतया, इंसुलिन शुगर को कोशिकाओं तक जाने में मदद करता है। इंसुलिन के बिना, हमारा शरीर ऊर्जा के लिए शुगर का सही से प्रयोग नहीं कर पाता। इससे हार्मोन अधिक मात्रा में निकलते हैं, जिससे वसा ईंधन के रूप में टूटती है और किटोन्स नामक एसिड का उत्पादन अधिक होता है। इससे बहुत अधिक कीटोन्स खून में बनते हैं और उसके बाद मूत्र में फैल जाते हैं।

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डायबिटिक कीटोएसिडोसिस इन कारणों से बढ़ती है:

कोई बीमारी  – संक्रमण या कोई और बीमारी के कारण हमारे शरीर में कुछ हार्मोन उच्च स्तर में पैदा हो सकते हैं जैसे एड्रेनालाईन या कोर्टिसोल। यह हार्मोन्स डायबिटिक कीटोएसिडोसिस समस्या को बढ़ा देते हैं। निमोनिया और यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन भी इसका कारण हो सकते हैं।

इंसुलिन थेरेपी की समस्या- इंसुलिन उपचार का न मिलना या अपर्याप्त इंसुलिन थेरेपी के कारण हमारे सिस्टम में बहुत कम इंसुलिन रह जाती है, इससे डायबिटिक कीटोएसिडोसिस की समस्या बढ़ सकती है।

इसके अन्य कारण इस प्रकार हैं 

  • शारीरिक या भावनात्मक आघात
  • हार्ट अटैक
  • अल्कोहल या ड्रग का सेवन खासतौर पर कोकीन 
  • खास दवाईयां जैसे कॉर्टिकोस्टेरॉइड और कुछ मूत्रवर्धक (diuretics)

डायबिटिक कीटोएसिडोसिस के लक्षण

डायबिटिक कीटोएसिडोसिस (DKA)आमतौर पर धीरे-धीरे बढ़ती है लेकिन इस रोग में अगर रोगी को उल्टी हो जाए तो यह उसके जीवन के लिए जोखिम भरी समस्या हो सकती है। इसके शुरुआती लक्षण इस प्रकार हैं-

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इसके बाद इसके अन्य लक्षण इस प्रकार हैं :

  • लगातार थकावट होना
  • रूखी त्वचा
  • सांस लेने में समस्या 
  • सांस से फूलों जैसी खुशबु आना
  • ध्यान न लगना या बेचैनी 
  • मतली, उल्टी या पेट में दर्द हालांकि उल्टी अन्य बीमारियों के कारण भी हो सकती है। लेकिन ,अगर यह उल्टी दो घंटे से अधिक समय तक रहे तो तुरंत डॉक्टर की सलाह लें।

डायबिटिक कीटोएसिडोसिस खतरनाक है। अगर आपको ऊपर में से कोई भी लक्षण दिखाई दे तो तुरंत डॉक्टर की सलाह लें।

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डायबिटिक कीटोएसिडोसिस का निदान 

आपके डॉक्टर डायबिटिक कीटोएसिडोसिस के निदान के लिए आपसे हेल्थ हिस्ट्री और इसके लक्षणों के बारे में जानेंगे। वो आपको कुछ टेस्ट करने के लिए भी कह सकते हैं।

ब्लड टेस्ट

डायबिटिक कीटोएसिडोसिस के निदान के लिए आपके कीटोन्स  और ग्लूकोज लेवल को जांचने के लिए ब्लड टेस्ट कराने के लिए कहा जाता है। इसके लिए आपके मूत्र का टेस्ट भी कराया जा सकता है। 

ब्लड टेस्ट इन स्थितियों को जानने के लिए भी कराया जा सकता है:

  • आपके रक्त में घुले कणों की संख्या (प्लाज्मा ऑस्मोलारिटी)
  • आपके रक्त में सोडियम और पोटेशियम और बाइकार्बोनेट जैसे कुछ इलेक्ट्रोलाइट्स की कंसंट्रेशन
  • आपके रक्त में लाल और सफेद रक्त कोशिकाओं की संख्या
  • किडनी फंक्शन
  • ब्लड एसिडिटी : अगर रोगी के खून में कीटोन्स की मात्रा बहुत अधिक होती है, तो खून एसिडिक बन जाता है। इसके कारण रोगी के पूरे शरीर में अंग अपना सामान्य कार्य नहीं कर पाते।

इलेक्ट्रोकार्डियोग्राम

आपको दिल की जांच के लिए इलेक्ट्रोकार्डियोग्राम (EKG ) कराने के लिए कहा जा सकता है ऐसा इसलिए क्योंकि खून में इलेक्ट्रोलाइट में बदलाव दिल को नुकसान पहुंचा सकता है।

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उपचार

इस रोग के उपचार का उद्देश्य इन्सुलिन से हाई ब्लड शुगर को नियंत्रित करना है। इस समस्या के कारण पेशाब, भूख में कमी और उल्टी के माध्यम से तरल पदार्थ शरीर से बाहर निकल जाता है। इसलिए इस रोग के उपचार का दूसरा लक्षण इस क्षति को पूरा करना भी है।

  • अगर आपको डायबिटीज है, तो आपअपने डॉक्टर को तुरंत डायबिटिक कीटोएसिडोसिस के लक्षणों के बारे में बताएं। अगर आपको लगता है कि आपको डायबिटिक कीटोएसिडोसिस है, तो आप यूरिन स्ट्रिप का प्रयोग कर के कैटोन्स का टेस्ट खुद भी कर सकते हैं। इसके साथ ही ग्लूकोज मीटर से भी ब्लड कैटोन्स को माप सकता है। अगर कैटोन्स मौजूद हैं तो तुरंत डॉक्टर से उपचार कराएं। इसमें बिलकुल भी देरी उचित नहीं है।
  • अस्पताल में आपको इंसुलिन, तरल पदार्थ दिए जाएंगे और अन्य उपचार कराने के लिए भी कहा जा सकता है। इंसुलिन देने से हमारी कोशिकाएं फिर से ग्लूकोज का प्रयोग करना शुरू कर देंगी। इससे कैटोन्स और शुगर का खून में स्तर कम होने में मदद मिलेगी। आपको (electrolytes) भी दिए जा सकते हैं। 
  • यदि आपको कोई बीमारी है, जो आपके डायबिटिक कीटोएसिडोसिस का कारण है, तो आपके डॉक्टर सबसे पहले उसका उपचार करेंगे। उदाहरण के लिए, आपको संक्रमण के लिए एंटीबायोटिक्स दिए जा सकते हैं
  • आपको अपने उपचार के दौरान अधिक ब्लड टेस्ट की आवश्यकता हो सकते हैं। ऐसा इसलिए है क्योंकि आपके डॉक्टर आपकी स्थिति को जांचेंगे और आवश्यकतानुसार  उपचार बदल सकते हैं।

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डायबिटिक कीटोएसिडोसिस की रोकथाम 

डायबिटिक कीटोएसिडोसिस के बचने और अन्य डायबिटीज की जटिलताओं को रोकने के लिए आप यह उपाय अपना सकते हैं:

  • डायबिटीज को संतुलत रखने की कोशिश करें। संतुलित खाएं और शारीरिक गतिविधियों को अपने जीवन का हिस्सा बना लें। डॉक्टर के बताएं अनुसार इन्सुलिन या ओरल दवाईयां लें।
  • अपने ब्लड शुगर लेवल को जांचते रहें। आपको दिन से कम से कम तीन बार अपनी ब्लड शुगर की जांच करनी चाहिए। इस बात का ध्यान रहे कि आपकी ब्लड शुगर सही रेंज के बीच में रहे।
  • इन्सुलिन डोज को आवश्यकता अनुसार समायोजित करें। इस बारे में डॉक्टर से बात करें अपने डॉक्टर से ब्लड शुगर, आप क्या खाते हैं, आपको क्या बीमारी है, आप कितना एक्टिव रहते हैं यह सब बताएं वो उसके अनुसार ही आपको सलाह देंगे।
  • अपने कीटोन लेवल को जांचें। अगर आप बीमार या तनाव में हैं, तब आप अपने यूरिन की जांच कराएं ताकि कैटोन्स की मात्रा का पता चल सके। अगर आपका कैटोन्स लेवल अधिक है, तो अपने डॉक्टर से बात करें और तुरंत इसका उपचार कराएं।

अगर इससे जुड़ा आपका कोई सवाल है, तो अधिक जानकारी के लिए आप अपने डॉक्टर से संपर्क कर सकते हैं।

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