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दांत दर्द की दवा खाने के बाद महिला का खून हुआ नीला, जानिए क्या है एनेस्थीसिया

के द्वारा मेडिकली रिव्यूड Dr. Shruthi Shridhar


Ankita mishra द्वारा लिखित · अपडेटेड 04/09/2020

दांत दर्द की दवा खाने के बाद महिला का खून हुआ नीला, जानिए क्या है एनेस्थीसिया

आमतौर पर छोटे-मोटे दर्द से राहत पाने के लिए हम मेडिकल स्टोर से सीधे दर्द की दवा खरीद लेते हैं। लेकिन, ऐसा करना एक महिला को बहुत भारी पड़ गया है। अब उसके शरीर के खून का रंग पूरी तरह से नीला हो चुका है। जानकारी के मुताबिक, रोड आइलैंड की एक महिला ने दांत दर्द से राहत पाने के लिए मेडिकल स्टोर से एनेस्थीसिया की दवा खरीदी थी, जिसे खाने के बाद उसके शरीर का खून नीला हो गया।

इस बात की पुष्टि जर्नल न्यू इंग्लैंड जर्नल द्वारा चिकित्सकों ने की है। महिला की उम्र 25 साल है। डॉक्टरों के मुताबिक, महिला ने दांत दर्द से राहत पाने के लिए काउंटर से एनेस्थीसिया खरीदा था। जब वह अस्पताल में इलाज के लिए आई, तो उसे थकान और सांस की तकलीफ थी। जहां जांच में डॉक्टरों ने बताया कि यह दवा के प्रभाव के कारण हुआ है।

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जानिए पूरा मामला

यह महिला रोड आइलैंड की रहने वाली हैं। न्यू इंग्लैंड जर्नल ऑफ मेडिसिन में मामले की रिपोर्ट करने वाले डॉक्टर्स के मुताबिक 25 साल की महिला जब उनके पास उपचार के लिए आई, तो उन्हें थकान, मांसपेशियों की कमजोरी और त्वचा का रंग नीले रंग होने की समस्या थी। उन्हें आपातकालीन चिकित्सा के तहत उपचार दिया गया और दो दिनों बाद उनके स्वास्थ्य में सुधार होने के बाद उन्हें घर जाने के लिए कहा गया। डॉक्टर्स के मुताबिक, महिला के खून में ऑक्सीजन का स्तर भी काफी कम था, लेकिन जब उनके खून में ऑक्सीजन बढ़ाया गया तो, इससे भी उनके लक्षणों में कोई कमी नहीं देखी गई। इसके बाद जब महिला का ब्लड टेस्ट किया गया तो उसके खून का रंग नीला पाया गया।

महिला का खून नीला होने के पीछ की वजह

डॉक्टरों को अपनी जांच में मिला है कि महिला को मेथेमोग्लोबिनेमिया की समस्या थी। यह एक स्थिति होती है, जो खून में पाई जाती है। अगर खून में इसकी मात्रा अधिक हो, तो यह खतरे का कारण बन सकता है। डॉक्टर से पूछताछ में महिला ने बताया कि उसने दांत दर्द को कम करने के लिए मेजिकल स्टोर से दर्द निवारक दवा का सेवन किया था। अपनी जांच में डॉक्टर्स का कहना है कि ब्लड टेस्ट के दौरान उन्हें महिला खून से पता चला कि महिला को मेथेमोग्लोबिनेमिया की समस्या है। यह एक ऐसी स्थिति जिसमें बहुत अधिक मात्रा में मेथेमोग्लोबिन खून में मौजूद होता है। मेथेमोग्लोबिन हीमोग्लोबिन का ही एक रूप होता है, जो रक्त कोशिकाओं में आयरन और लाल प्रोटीन के तौर पर होता है और यह शरीर के चारों ओर ऑक्सीजन पहुंचाने का कार्य करता है।

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क्या है मेथेमोग्लोबिनेमिया?

मेथेमोग्लोबिन हीमोग्लोबिन का एक रूप है, जो खून की कोशिकाओं में होता है। यह शरीर में ऑक्सिजन पहुंचाने का कार्य करता है। मेथेमोग्लोबिन कोशिकाओं में ही होता है लेकिन, यह ऑक्सिजन नहीं ले पाता है। अगर खून में इसकी मात्रा बढ़ जाए, तो यह घुटन का कारण बन सकता है। मेथेमोग्लोबिन गहरे भूरे रंग का होता है, जिसके कारण खून का रंग नीला हो सकता है।

हालांकि, मेथेमोग्लोबिन खून में ऑक्सीजन की मात्रा में किसी तरह का रूकावट नहीं करता है। लेकिन अगर खून में मेथेमोग्लोबिन की मात्रा बढ़ने लगे तो यह ऊतकों तक ऑक्सीजन पहुंचने में बाधा खड़ा कर सकता है और कोशिकाओं को ऑक्सीजन देने के लिए विशिष्ट हीमोग्लोबिन का निर्माण करने में भी परेशानी हो सकती है। इसके अलावा, शरीर में इस पदार्थ की बहुत अधिक मात्रा घुटन का भी कारण बन सकती है, इसलिए शरीर एंजाइमों का उत्पादन करता है जो मेथेमोग्लोबिन को वापस हीमोग्लोबिन में परिवर्तित करते हैं। इसके अलावा, यह स्थिति दुर्लभ होती है और आनुवंशिक उत्परिवर्तन वाले लोगों को प्रभावित कर सकती है। मेथेमोग्लोबिन गहरे भूरे रंग का होता है, जिसकी मात्रा अधिक होने के कारण खून का रंग नीला हो सकता है।

क्या है एनेस्थीसिया?

एनेस्थीसिया शब्द ग्रीक भाषा के दो शब्दों ‘an’ और ‘aethesis’ से मिलकर बना है, जिसमें An का अर्थ है ‘बिना’ और aethesis का अर्थ है ‘संवेदना’, जिसका मतलब हुआ ‘संवेदना के बिना’। एनेस्थीसिया का इस्तेमला चिकित्सा की दुनिया में बेहोशी या किसी अंग को सुन्न करने के लिए किया जाता है।

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कब किया जाता है एनेस्थीसिया का इस्तेमाल?

एनेस्थीसिया का इस्तेमाल सर्जरी या ऑपरेशन के दौरान किया जाता है ताकि, मरीज को दर्द के अनुभव न हो। इस प्रक्रिया में मरीज होश में रहकर ऑपरेशन देख भी सकता है, वो भी बिना दर्द का एहसास किए। एनेस्थीसिया के कई प्रकार होते हैं, जिनमें से कुछ को सीधा कांउटर से भी खरीदा जा सकता है।

जानिए एनेस्थीसिया के प्रकार

एनेस्थीसिया के तीन प्रकार होते हैं : पहला, लोकल एनेस्थीसिया, दूसरा रीजनल एनेस्थीसिया और तीसरा जनरल एनेस्थीसिया होता है। जिनके उपयोग अलग-अलग होते हैं।

लोकल एनेस्थीसियाः लोकल एनेस्थीसिया का इस्तेमाल किसी भी व्यक्ति के शरीर के सिर्फ थोड़े से अंग को सुन्न करने के लिए किया जाता है। जैसे, कान, नाक, गले, हाथ या पैर के एक थोड़े से हिस्से जिसका उपचार होना हो सिर्फ उसे ही सुन्न करने के लिए लोकल एनेस्थीसिया का इस्तेमाल किया जाता है। इसका इस्तेमाल आमतौर पर डेंटिस्ट या क्लीनिकल डॉक्टर्स करते हैं।

रीजनल एनेस्थीसियाः रीजनल एनेस्थीसिया का इस्तेमाल तब किया जाता है, जब मरीज के शरीर के किसी एक भाग को पूरी तरह से सुन्न करने की जरूरत होती है। ताकि मरीज को दर्द का एहसास न हो। आमतौर पर छोटी सर्जरी के दौरान रीजनल एनेस्थीसिया का इस्तेमाल किया जाता है। इसके अलावा, इसका इस्तेमाल मरीज के शरीर के आधे हिस्से या निचले भाग को सुन्न करने के लिए उपयोग किया जाता है। उदाहरण के लिए, बच्चे के जन्म के समय किया जा सकता है। इसका इस्तेमाल सिर्फ सर्जन ही कर सकते हैं।

जनरल एनेस्थीसियाः जनरल एनेस्थीसिया का इस्तेमाल भी सिर्फ सर्जन ही कर सकते हैं। इसका इस्तेमाल सिर्फ बड़े ऑपरेशन के दौरान ही किया जाता है। ऐसे ऑपरेशन जिसमें व्यक्ति को बेहोश करने के जरूरत होती है। जनरल एनेस्थीसिया की खुराक व्यक्ति को इंजेक्शन, दवा या IV के माध्यम से दिया जा सकता है। ऑपरेशन के बाद मरीज को दवाएं देकर जनरल एनेस्थीसिया के प्रभाव से मुक्त कर होश में लाया जाता है।

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एनेस्थीसिया का इस्तेमाल के साइड इफेक्ट्स क्या हैं?

अगर आपको किसी भी तरह की समस्या हो तो आप अपने डॉक्टर से जरूर पूछ लें।

डिस्क्लेमर

हैलो हेल्थ ग्रुप हेल्थ सलाह, निदान और इलाज इत्यादि सेवाएं नहीं देता।

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