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कार्डियोवैस्कुल बीमारी में डायटरी फैट्स का सेवन करना है सही?

कार्डियोवैस्कुल बीमारी में डायटरी फैट्स का सेवन करना है सही?

खाने में हेल्दी फूड्स खाना हर कोई चाहता है, लेकिन कुछ लोगों के साथ ऐसा संभव नहीं हो पाता है। आसानी से उपलब्ध होने वाले फूड्स में फैट्स के साथ ही सोडियम या फिर शुगर अधिक मात्रा में होता है। ऐसे फूड्स हार्ट्स पेशेंट्स के लिए हानिकारक हो सकते हैं। खाने में वह स्वादिष्ट होने के कारण अक्सर फैट और सोडियम या शुगर युक्त फूड्स तेजी से लोगों की पसंद भी बन जाते हैं। यह सच है कि कुछ फैट्स शरीर को नुकसान पहुंचाने का काम करता है लेकिन कुछ फैट्स शरीर के लिए फायदेमंद होते हैं। कार्डियोवैस्कुल बीमारी में डायटरी फैट्स (Dietary Fats and Cardiovascular Disease) को अपनाया जा सकता है लेकिन आपको इसके बारे में सही जानकारी होना बहुत जरूरी है। अगर आपको हेल्दी फैट्स के बारे में जानकारी नहीं है, तो आपको हेल्दी फैट्स के बारे में जरूर जाना चाहिए। आज इस आर्टिकल के माध्यम से हम आपको डाइटरी फैट्स के बारे में जानकारी देंगे और साथ ही अहम जानकारी भी देंगे।

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कार्डियोवैस्कुल बीमारी में डायटरी फैट्स (Dietary Fats and Cardiovascular Disease)

कार्डियोवैस्कुलर डिजीज (Cardiovascular disease) मौत का प्रमुख वैश्विक कारण है, जो प्रति वर्ष 17.3 मिलियन मौतों का कारण बनता है। कार्डियोवैस्कुलर डिजीज (Cardiovascular disease) बीमारी के प्रति यदि सावधानी रखी जाए, तो देश के साथ ही विश्व में भी देखभाल की लागत को काफी हद तक कम कर सकता है। अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन के अध्यक्षीय परामर्श के दौरान कार्डियोवैस्कुल बीमारी में डायटरी फैट्स (Dietary Fats and Cardiovascular Disease) के बारे में चर्चा भी की गई।सीवीडी के दौरान सैचुरेटेड फैट्स के सेवन के साथ ही इनके अन्य प्रकार के वसा और कार्बोहाइड्रेट द्वारा इसके रिप्लेसमेंट के प्रभावों के बारे में भी चर्चा की गई, जो स्टडी का हिस्सा थी।

समरी में ये बात सामने आई कि डायटरी सैचुरेचटेड फैट्स के इनटेक को कम करके और इन्हें पॉलीसैचुरेटेड वेजीटेबल्स ऑयल से रिप्लेस करके सीवीडी यानी कार्डियोवैस्कुलर डिजीज (Cardiovascular disease) के खतरे को करीब 30% तक कम किया जा सकता है। सैचुरेटेड फैट (saturated fat) से अनसैचुरेटेड फैट (saturated fat) में बदलाव उच्च रक्तचाप यानी हाय ब्लड प्रेशर (High blood pressure) को रोकने में अहम भूमिका निभाता है। 2013 अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन / अमेरिकन कॉलेज ऑफ कार्डियोलॉजी लाइफस्टाइल दिशानिर्देशों में इस बात को भी शामिल किया गया। डायट में सैचुरेटेड फैट (saturated fat) को कम करने का वैज्ञानिक तर्क लो डेंसिटी लिपोप्रोटीन (एलडीएल) कोलेस्ट्रॉल को बढ़ाने पर आधारित रहता है। शरीर में गुड कोलेस्ट्रॉल यानी एलडीएल (LDL) की मात्रा बढ़ाने पर बुरे कोलेस्ट्ऱॉल यानी एचडीए (HDL) की मात्रा कम हो जाती है। अब जानिए कार्डियोवैस्कुल बीमारी में डायटरी फैट्स (Dietary Fats and Cardiovascular Disease) प्राप्त करना हो, तो किन फूड्स को अपनाना चाहिए।

और पढ़ें: अल्ट्रा प्रोसेस्ड डायट और टीन्स में हार्ट रिस्क के क्या रहते हैं चांसेज?

कार्डियोवैस्कुल बीमारी में डायटरी फैट्स अपनाना सही है?

डायटरी सैचुरेटेड फैट्स (Dietary Fats) किसी भी मैक्रोन्यूट्रिएंट की तरह, आहार को ऊर्जा में बदलने का काम करता है। रैंडम क्लीनिकल ट्रायल में सैचुरेटेड फैट्स को मैक्रोन्यूट्रिएंट रिप्लेस किया गया। इसमें कार्बोहाइड्रेट और अनसैचुरेटेड फैट को शामिल किया गया। सैचुरेटेड फैट से रिप्लेस किए गए कार्बोहाइट्रेट, खासतौरपर साबुत अनाज से प्राप्त कार्बोहाइट्रेट कार्डियोवैस्कुलर डिजीज (Cardiovascular disease) के खतरे को कम करने का काम करते हैं। यानी स्टडी में ये बात सामने आ चुकी है कि अगर आप हेल्दी फैट लेते हैं, तो हार्ट डिजीज का खतरा बढ़ता नहीं है। जानिए कैसे फैट्स को खाने में शामिल किया जा सकता है।

अधिकांश खाद्य पदार्थों में विभिन्न प्रकार के फैट का मिश्रण होता है। उदाहरण के लिए, कैनोला तेल (canola oil) में कुछ सैचुरेटेड फैट होता है लेकिन ज्यादातर मोनोअनसैचुरेटेड वसा होता है। इसके विपरीत, मक्खन में कुछ अनसैचुरेटेड फैट होता है लेकिन ज्यादातर सैचुरेटेड फैट होता है। सैचुरेटेड फैट कमरे के तापमान पर ठोस होता है। यह फैट मक्खन, लार्ड, फुल फैट मिल्क और दही, पूर्ण वसा वाले पनीर और हाय फैट मीट में पाया जाता है। जबकि अनसैचुरेटेड फैट कमरे के तापमान पर तरल हो जाता है। यह वनस्पति तेलों, मछली और नट्स में पाया जाता है।

और पढ़ें: अल्ट्रा प्रोसेस्ड डायट और टीन्स में हार्ट रिस्क के क्या रहते हैं चांसेज?

खाने में शामिल करें ये फूड्स

कार्डियोवैस्कुल बीमारी में डायटरी फैट्स में क्या अपनाना चाहिए और क्या नहीं, ये प्रश्न आपके मन में आ सकता है। अधिकांश खाद्य पदार्थों में विभिन्न प्रकार के फैट का मिश्रण होता है। उदाहरण के लिए, कैनोला तेल (canola oil) में कुछ सैचुरेटेड फैट होता है लेकिन ज्यादातर मोनोअनसैचुरेटेड वसा होता है। इसके विपरीत, मक्खन में कुछ अनसैचुरेटेड फैट होता है लेकिन ज्यादातर सैचुरेटेड फैट होता है। सैचुरेटेड फैट कमरे के तापमान पर ठोस होता है। यह फैट मक्खन, लार्ड, फुल फैट मिल्क और दही, पूर्ण वसा वाले पनीर और हाय फैट मीट में पाया जाता है। जबकि अनसैचुरेटेड फैट कमरे के तापमान पर तरल हो जाता है। यह वनस्पति तेलों, मछली और नट्स में पाया जाता है।

जैसा कि आपको पहले ही बताया कि आपको हेल्दी फैट को खाने में शामिल करना चाहिए। आहार में अनहेल्दी फैट्स को हटाएं और मक्खन की जगह तेल का इस्तेमाल करें। आप मक्खन के बजाय जैतून के तेल से डीप फ्राय कर सकते हैं और खाना पकाते समय कैनोला तेल का इस्तेमाल कर सकते हैं।

सप्ताह में कम से कम दो बार मीट के बजाय ओमेगा -3 फैटी एसिड से भरपूर मछली सैल्मन (salmon) का सेवन कर सकते हैं। प्रोसेस्ड फूड्स (Processed foods) की मात्रा को कम करें क्योंकि इनमें सैचुरेटेड फैट होता है। आप भूख लगने पर वेजीटेबल्स और फ्रूट्स को बेहतर विकल्प के रूप में चुन सकते हैं। कार्डियोवैस्कुल बीमारी में डायटरी फैट्स में क्या चुनना है, डॉक्टर से पूछें।

और पढ़ें: हार्ट हेल्थ के लिए बीन्स और दालें हो सकती हैं बेहद फायदेमंद, जान लीजिए इनके नाम

स्टडी में ये बात सामने आई कि हार्ट संबंधी डिजीज के खतरे को कम करने के लिए संतृप्त वसा को पॉलीअनसेचुरेटेड या मोनोअनसैचुरेटेड वसा से बदल सकते हैं।

सैचुरेटेड फैट को कार्बोहायड्रेट जैसे कि रिफाइंड ग्रेंस या एडेड शुगर से रिप्लेस करके हार्ट संबंधी रिस्क को कम नहीं किया जा सकता है। जब सैचुरेटेड फैट को कार्बोहायड्रेट जैसे कि साबुत अनाज से रिप्लेस किया जाता है, तो कार्डियोवैस्कुलर डिजीज (Cardiovascular disease) के खतरे को कम किया जा सकता है।

हार्ट संबंधी बीमारियों के खतरे को कम करने के लिए खानपान में ध्यान देने के साथ ही आपको अपनी लाइफस्टाइल (Lifestyle) यानी दिनचर्या पर भी ध्यान देने की जरूरत है। आपको रोजाना फ्रेश फूड फ्रेश वेजिटेबल आदि का सेवन करना चाहिए और हेल्दी फैट्स को भी खाने में शामिल करना चाहिए। आप रोजाना पर्याप्त मात्रा में नींद लें। अगर आपको स्ट्रेस की समस्या हो रही है, तो मेडिटेशन की हेल्प ले सकते हैं। ऐसा करने से आप तनाव से बच सकते हैं।

हाय ब्लड प्रेशर की समस्या हो रही है, तो आप इसे हल्के में ना लें। हाय ब्लड प्रेशर की समस्या हार्ट की बीमारियों का कारण बन सकती है।आपको तुरंत डॉक्टर से जांच करानी चाहिए और सावधानियों को भी बरतना चाहिए। कार्डियोवैस्कुल बीमारी में डायटरी फैट्स (Dietary Fats and Cardiovascular Disease) के बारे में डॉक्टर से अधिक जानकारी लें।

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इस आर्टिकल में हमने कार्डियोवैस्कुल बीमारी में डायटरी फैट्स (Dietary Fats and Cardiovascular Disease) आपको के बारे में जानकारी दी है। उम्मीद है आपको हैलो हेल्थ की दी हुई जानकारियां पसंद आई होंगी। अगर आपको इस संबंध में अधिक जानकारी चाहिए, तो हमसे जरूर पूछें। हम आपके सवालों के जवाब मेडिकल एक्स्पर्ट्स द्वारा दिलाने की कोशिश करेंगे।

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Bhawana Awasthi द्वारा लिखित आखिरी अपडेट 03/12/2021 को
Sayali Chaudhari के द्वारा मेडिकली रिव्यूड