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हार्ट फेलियर और सीओपीडी : एक-दूसरे से जुड़ी हुई हैं ये समस्याएं!

हार्ट फेलियर और सीओपीडी : एक-दूसरे से जुड़ी हुई हैं ये समस्याएं!

ह्रदय संबंधित समस्याओं में हर व्यक्ति को खास ध्यान रखने की जरूरत पड़ती है। जब तकलीफ हार्ट से जुड़ी हो, तो यह व्यक्ति की जिंदगी पर भारी पड़ सकती है। खास तौर पर जब समस्या हार्ट फेलियर (Heart failure) की हो, तो यह व्यक्ति के लिए जानलेवा साबित होती है। आज हम बात करने जा रहे हैं हार्ट फेलियर के साथ जुड़ी एक ऐसी समस्या की जो व्यक्ति के लिए जान का जोखिम खड़ी कर सकती है हम बात करने जा रहे हैं हार्ट फेलियर और सीओपीडी (COPD) की। हार्ट फेलियर और सीओपीडी (Heart failure and COPD) का क्या ताल्लुक है, यह जानना आपके लिए बेहद जरूरी है। कई बार हार्ट फेलियर की समस्या के साथ सीओपीडी की तकलीफ होना व्यक्ति के लिए चुनौतीपूर्ण साबित हो सकता है। लेकिन ऐसा क्यों है ,आइए जानते हैं इस आर्टिकल में। लेकिन सबसे पहले जानते हैं हार्ट फेलियर से जुड़ी यह जरूरी जानकारी।

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क्या है हार्ट फेलियर (Heart failure) की तकलीफ?

हार्ट फेलियर सिस्टोलिक या डायस्टोलिक (Systolic or diastolic) दोनों प्रकार का हो सकता है। सिस्टोलिक हार्ट फेलियर तब होता है, जब हार्ट वेंट्रीकल ठीक तरह से कॉन्ट्रैक्ट नहीं कर पाता। वहीं डिस्टोलिक हार्ट फेलियर तब होता है, जब हार्ट वेंट्रीकल (Heart ventricle) ठीक ढंग से रिलैक्स नहीं कर पाता। इस तरह हार्ट फेलियर (Heart failure) की समस्या एक तरह की हार्ट कंडिशन (Heart condition) कहलाती है, जिसमें हार्ट की मसल्स ठीक ढंग से काम नहीं कर पाती और ब्लड पंप करने में अक्षम हो जाती है। हार्ट फेलियर की समस्या समय के साथ गंभीर बन सकती है, खास तौर पर तब, जब हार्ट फेलियर और सीओपीडी की तकलीफ एक साथ हो जाए। इसलिए इसे पहचानना बेहद जरूरी माना जाता है। हार्ट फेलियर और सीओपीडी (Heart failure and COPD) की तकलीफ को पहचानने का एक आसान तरीका है इसके लक्षण। आइए जानते हैं हार्ट फेलियर और सीओपीडी के लक्षणों के बारे में।

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हार्ट फेलियर के क्या हैं लक्षण? (Symptoms of heart failure)

हालांकि शुरुआती समय में हार्ट फेलियर (Heart failure) और सीओपीडी के लक्षणों को समझ पाना मुश्किल हो सकता है, लेकिन समय के साथ ये लक्षण दिखाई देते हैं। जो इस प्रकार हैं –

  • रात में सांस की तकलीफ के कारण जागना (shortness of breath)
  • एक्सरसाइज के दौरान ब्रीदिंग प्रॉब्लम (Shortness of breath during exercise)
  • लंबे समय से खांसी की समस्या (Chronic coughing)
  • कॉन्संट्रेट करने में दिक्कत (Difficulty in concentration)
  • थकान (Fatigue)
  • भूख न लगना (Lack of appetite)
  • अनियमित हार्ट बीट ( irregular heartbeat)
  • अचानक से वजन बढ़ना (Sudden weight gain)
  • एन्लार्ज्ड हार्ट (Enlarged heart)
  • हाय ब्लड प्रेशर (High blood pressure)
  • हाथ और पैरों में लो ब्लड फ्लो (Less blood flow)

यदि आप हार्ट फेलियर और सीओपीडी (Heart failure and COPD) के ये लक्षण देखते हैं, तो आपको तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। यदि इसका समय पर इलाज न किया जाए, तो आगे चलकर ये समस्या किडनी, लीवर डिजीज (Liver disease) और हार्ट अटैक (Heart attack) के खतरे को बढ़ा सकती है। आइए अब जानते हैं हार्ट फेलियर और सीओपीडी की तकलीफ के बीच क्या सम्बंध है। जैसा कि आपने जाना हार्ट फेलियर अपने आप में एक बड़ी समस्या साबित हो सकती है। आइए अब जानते हैं हार्ट फेलियर और सीओपीडी के बीच क्या ताल्लुक है और किस तरह हार्ट फेलियर और सीओपीडी (COPD) की समस्या आपकी परेशानी को दुगना बना सकती है।

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हार्ट फेलियर और सीओपीडी : क्या है दोनों में संबंध? (Heart failure and COPD)

हार्ट फेलियर और सीओपीडी (Heart failure and COPD)

आमतौर पर हार्ट फेलियर और सीओपीडी (COPD) दो अलग-अलग तरह की समस्याएं मानी जाती है। लेकिन इन दोनों की वजह से आपकी सांस लेने की क्षमता पर सीधा प्रभाव पड़ता है। इन दोनों की ही वजह से आपको सांस लेने में दिक्कत हो सकती है। खासतौर पर तब, जब आप किसी तरह की फिजिकल एक्सरसाइज करते हैं। इसे ब्रीदिंग प्रॉब्लम के नाम से भी जाना जा सकता है। हार्ट फेलियर और सीओपीडी (Heart failure and COPD) दोनों ही ब्रीदिंग प्रॉब्लम के लिए जिम्मेदार मानी जाती है। सीओपीडी की समस्या में आपको सांस छोड़ने में तकलीफ होती है, क्योंकि लंग में सीओपीडी की वजह से डैमेज हो सकता है। लंग्स के डैमेज के चलते आपको सांस छोड़ने में परेशानी का सामना करना पड़ता है। इस स्थिति को शार्टनेस ऑफ ब्रेथ का नाम दिया गया है।

साथ ही यदि आप हार्ट फेलियर की समस्या से जूझ रहे हैं, तो इस स्थिति में हार्ट ठीक ढंग से ब्लड पंप नहीं कर पाता और इसका सीधा प्रभाव आपकी सांस लेने की क्षमता पर पड़ता है। हालांकि हार्ट फेलियर की समस्या में आपको सिर्फ फिजिकल एक्टिविटी के दौरान ही समस्याओं का सामना करना पड़ता है। फिजिकल एक्टिविटी के दौरान जब आपका ब्लड फ्लो बढ़ता है, तो हार्ट को ब्लड पंप करने में मुश्किल पैदा होती है और इसकी वजह से सांस लेने में समस्या हो सकती है। यही वजह है कि सीओपीडी और हार्ट फेलियर दोनों ही सांस से जुड़ी परेशानियों का कारण बनते हैं। साथ ही यदि आप हार्ट फेलियर और सीओपीडी (Heart failure and COPD) दोनों से ग्रसित हैं, तो आपके लिए समस्या और भी गंभीर बन सकती हैं। हालांकि हार्ट फेलियर और सीओपीडी (COPD) के दो अलग-अलग प्रकार माने जाते हैं, आइए अब जानते हैं कि हार्ट फेलियर और सीओपीडी के इन प्रकारों के बारे में।

हार्ट फेलियर और सीओपीडी की समस्या के होते हैं ये प्रकार (Types of Heart failure and COPD)

सीओपीडी और लेफ्ट साइडेड हार्ट फेलियर (COPD and Left Sided Heart Failure) : लेफ्ट साइडेड हार्ट फेलियर आमतौर पर हाय ब्लड प्रेशर और कोरोनरी आर्टरी डिजीज के कारण होता है। यह सीधे तौर पर सीओपीडी से रिलेटेड नहीं होता, लेकिन हार्ट फेलियर और सीओपीडी (Heart failure and COPD) दोनों ही समस्याएं एक दूसरे को प्रभावित कर सकती हैं। सीओपीडी (COPD)की वजह से जब ब्लड में ऑक्सीजन की कमी होती है, तो हार्ट पर इसका दबाव बढ़ता है, जिसकी वजह से लेफ्ट साइडेड हार्ट फेलियर की समस्या गंभीर बनती है। जिसकी वजह से आप को सांस लेने में दिक्कत पैदा होती हैं।

सीओपीडी और राइट साइडेड हार्ट फेलियर (COPD and Right Sided Heart Failure) : सीओपीडी की वजह से आपको हार्ट फेलियर की समस्या हो सकती है। यह हार्ट फेलियर, राइट साइडेड हार्ट फेलियर के नाम से जाना जाता है। राइट साइडेड हाइट हार्ट फेलियर के कारण आपके शरीर में फ्लूइड जमा होने लगता है। खास तौर पर पैरों और पेट के हिस्से में यह फ्लुइड जमा होता है, जिसकी वजह से सांस लेने में दिक्कत पैदा होती है। सीओपीडी (COPD) भी कई बार राइट साइडेड हार्ट फेलियर का कारण बनता है। सीओपीडी और हार्ट फेलियर दोनों एक दूसरे से जुड़े हुए माने जाते हैं, जिसके कारण व्यक्ति की स्वास्थ्य समस्या बढ़ सकती है।

यदि आपको सांस लेने में दिक्कत हो रही है, तो आपको सीओपीडी (COPD) और हार्ट फेलियर दोनों की समस्या हो सकती है। हालांकि इसे समझने के लिए आपको डॉक्टर से मदद लेने की जरूरत पड़ सकती है। हार्ट फेलियर की समस्या को समझने के लिए आपको कुछ तरीकों को अपनाना पड़ता है, इसलिए इसके निदान से जुड़ी जानकारी आपको होनी चाहिए।

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ऐसे होता है हार्ट फेलियर की समस्या का निदान! (Heart failure diagnosis)

हार्ट फेलियर का डायग्नोज करने के लिए डॉक्टर आपके लक्षणों पर ध्यान देकर आपको कुछ टेस्ट करवाने की सलाह दे सकते हैं। इन टेस्ट्स में –

  • चेस्ट एक्स-रे (Chest X-ray)
  • इकोकार्डियोग्राम (Echocardiogram)
  • इलेक्ट्रोकार्डियोग्राम (Electrocardiogram)
  • रेडियोन्यूक्लाइड इमेजिंग (Radionuclide imaging)
  • ट्रेडमिल एक्सरसाइज टेस्ट

इनका समावेश होता है। इन टेस्ट के बाद डॉक्टर हार्ट फेलियर (Heart failure) से जुड़ी तकलीफों के बारे में पता लगा सकते हैं। इसके अलावा हार्ट रिदम प्रॉब्लम और उससे संबंधित ट्रीटमेंट के बारे में आपको जानकारी भी दे सकते हैं।

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हार्ट फेलियर और सीओपीडी की स्थिति में हार्ट को संभालना है जरूरी! (Heart failure and COPD)

हार्ट फेलियर के लक्षण दिखाई देने के बाद डॉक्टर कुछ टेस्ट के जरिए इस समस्या का निदान कर सकते हैं और इसके बाद बारी आती है हार्ट फेलियर (Heart failure) के ट्रीटमेंट की। इस स्थिति में डॉक्टर न सिर्फ मेडिकेशन शुरू करते हैं, बल्कि कोलेस्ट्रॉल (Cholesterol) को कम करने के लिए दवाओं के साथ ही डायट में कोलेस्ट्रॉल युक्त खाना खाने से परहेज की सलाह भी देते हैं। इसके साथ-साथ आपको आपके लाइफस्टाइल में बड़े बदलाव करने की जरूरत पड़ती है, जिसमें सही खानपान के साथ-साथ रोजाना एक्सरसाइज़ की भी जरूरत पड़ती है। यदि इसके बाद भी आपको इस समस्या में राहत नहीं मिलती, तो आपको सर्जरी करवाने की जरूरत पड़ सकती है।

इन सर्जरी में डिवाइज इंप्लांट, हार्ट रिपेयर या फिर हार्ट ट्रांसप्लांट (Device implant, heart repair or heart transplant) जैसी सर्जरीज का समावेश होता है। इसके अलावा कुछ केस में पेसमेकर का भी इस्तेमाल किया जा सकता है, जिससे हार्ट वेंट्रीकल सामान्य रूप से कॉन्ट्रैक्ट हो सके। इस तरह हार्ट फेलियर की समस्या का निदान करके आप बेहतर महसूस कर सकते हैं। हार्ट फेलियर और सीओपीडी (Heart failure and COPD) की समस्या में आपको खास तौर पर अपने हार्ट का ख्याल रखने की जरूरत पड़ती है। ऐसे में डॉक्टर द्वारा प्रिस्क्राइब दवाओं के साथ-साथ लाइफ़स्टाइल में बदलाव भी लाएं।

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यदि आप अपने शरीर में हो रहे बदलावों पर ध्यान दें, तो आप हार्ट फेलियर और सीओपीडी (Heart failure and COPD) की समस्या के लक्षणों को पहचान सकते हैं। जल्द से जल्द इन लक्षणों को पहचान कर यदि इसका ट्रीटमेंट शुरू करवाया जाए, तो व्यक्ति गंभीर रूप से बीमार होने से बच सकता है। इ

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Toshini Rathod द्वारा लिखित आखिरी अपडेट कुछ हफ्ते पहले को
Sayali Chaudhari के द्वारा मेडिकली रिव्यूड