हॉर्ट एक मस्कुलर ऑर्गन है। जिसका काम पूरे शरीर को ब्लड पंप करना होता है। हार्ट के कारण ही पूरे शरीर के ऑर्गन और उनके टिश्यू को ऑक्सीजन के साथ अन्य न्यूट्रिएंट्स मिलते हैं। हार्ट का शरीर में बहुत महत्वपूर्ण रोल होता है। हार्ट डिजीज के कारण हार्ट सही से काम नहीं कर पाता है, जिसके कारण गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ता है। खराब लाइफस्टाइल के कारण हार्ट संबंधी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। अगर सीडीसी (CDC) की माने, तो 4 में से 1 मौत का कारण हार्ट संबंधी बीमारियों से जुड़ा होता है। हार्ट अटैक और हार्ट फेलियर (Heart Attack and Heart Failure) दो विभिन्न प्रकार की कंडीशन है, जिसे लोग अक्सर एक जैसा ही समझते हैं। लेकिन दोनों ही कंडीशन अलग होती हैं। हार्ट अटैक और हार्ट फेलियर (Heart Attack and Heart Failure) क्या होता है और कैसे यह शरीर को प्रभावित करता है। आज हम आपको इस आर्टिकल के माध्यम से बताएंगे।
हार्ट अटैक और हार्ट फेलियर (Heart Attack and Heart Failure)
जैसे कि हमने आपको पहले ही बताया कि हार्टअटैक और हार्टफेलिया दो विभिन्न कंडीशन है। इन दोनों के बारे में जानने के लिए आपको बीमारियों के कारण लक्षण और ट्रीटमेंट के बारे में जानना जरूरी है। हार्ट अटैक और हार्ट फेलियर, दोनों की जानकारी जाने से पहले आइए जानते हैं कि हार्ट अटैक क्या होता है।
हार्ट अटैक की क्यों होती है समस्या?
हार्ट अटैक या फिर दिल का दौरा तब होता है जब हार्ट के किसी एरिया में ब्लड फ्लो ब्लॉक हो जाता है। इसका मतलब है कि इस एरिया के टिश्यू को जीवित रहने के लिए आवश्यक ऑक्सीजन नहीं मिल रही है। अगर हार्ट अटैक का सही समय पर ट्रीटमेंट न हो पाए, तो हार्ट के टिश्यू डैमेज होना शुरू हो जाते हैं। इसके लिए मायोकार्डियल इंफार्क्शन (Myocardial infarction) के नाम से भी जाना जाता है।
दिल के दौरे का एक कम आम कारण यानी कि कोरोनरी धमनियों में ऐंठन के कारण भी पैदा हो सकता है, जिसके कारण ब्लड फ्लो में दिक्कत पैदा हो जाती है। ये समस्या यह गंभीर शारीरिक या भावनात्मक तनाव, अत्यधिक ठंड या कोकीन जैसी दवाओं के उपयोग के कारण हो सकता है।
कोरोनरी आर्टरी डिजीज हार्ट अटैक का प्रमुख कारण माना जाता है। इस कंडीशन में आर्टरीज में प्लाक जमने की समस्या हो जाती है। इस कारण से ब्लड क्लॉट की समस्या हो जाती है। इस कारण से हार्ट अटैक की समस्या हो जाती है।
हार्ट अटैक और हार्ट फेलियर (Heart Attack and Heart Failure) के लक्षण अलग हो सकते हैं। हार्ट अटैक होने पर हल्के से ज्यादा सीने में दर्द महसूस होना, हार्ट अटैक के कारण शरीर के विभिन्न हिस्सों जैसे कि कंधों में दर्द, जबड़ों और गर्दन के बाद ही बैक पेन, सांस लेने में समस्या होना, पसीना आना, चक्कर आना, वॉमिटिंग आना, थकान का एहसास आदि लक्षण दिखाई देते हैं।
हार्ट अटैक और हार्ट फेलियर : हार्ट फेलियर के कारण (Heart failure causes)
हार्ट फेलियर की समस्या तब होती है, जब हार्ट पूरी तरह से शरीर के विभिन्न अंगो में रक्त पहुंचाने में सफल नहीं हो पाता है। हार्ट फेलियर के लिए निम्नलिखित कारण जिम्मेदार हो सकते हैं।
वही हार्ट फेल होने पर सांस लेने में तकलीफ मुख्य समस्या के रूप में सामने दिखता है। शरीर में पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन की आपूर्ति न होने के कारण सांस लेने में मेहनत करनी पड़ती है। इसके साथ ही खांसी आना, ध्यान केंद्रित करने में परेशानी होना, नाखूनों का रंग नीला हो जाना, नींद ना आना, पेट में दर्द, जी मिचलाना, बार-बार यूरिन आदि समस्याओं का सामना करना पड़ता है।
हार्ट अटैक और हार्ट फेलियर का ट्रीटमेंट
हार्ट अटैक और हार्ट फेलियर (Heart Attack and Heart Failure) की कंडीशन से बचा जा सकता है लेकिन इसके लिए लाइफस्टाइल में सुधार करना बहुत जरूरी है। हार्ट अटैक के ट्रीटमेंट के दौरान ब्लड फ्लो को रिस्टोर करने पर फोकस किया जाता है और साथ ही एडिशनल डैमेज से बचा जाता है। हार्ट अटैक के ट्रीटमेंट के दौरान मेडिकेशन में क्लॉट-बस्टिंग मेडिकेशन का इस्तेमाल ब्लड क्लॉट से बचने के लिए, नाइट्रोग्लिसरीन, जो धमनियों को खोलने और रक्त प्रवाह में सुधार करने में मदद कर सकता है, ब्लड थिनर्स (blood thinners), दर्द से छुटकारा दिलाने वाली दवाएं और बीटा ब्लॉकर्स या एसीई इनहिबिटर, जो ब्लड प्रेशर को कम करने का काम करते हैं और स्टैटिन, जो कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम करने में मदद करते हैं आदि का इस्तेमाल किया जाता है।
परक्यूटेनियस कोरोनरी इंटरवेंशन (PCI) प्रोसेस में ब्लॉक कोरोनरी आर्टरी को ओपन करने का काम किया जाता है और साथ ही ब्लड फ्लो को रीस्टोर किया जाता है। धमनी को खुला रखने में मदद के लिए एक स्टेंट भी लगाया जा सकता है।
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कोरोनरी आर्टरी बायपास सर्जरी (Coronary artery bypass surgery) शरीर के एक क्षेत्र से एक स्वस्थ धमनी या नस को हटा दिया जाता है और फिर कोरोनरी धमनी के ब्लॉक एरिया में बाईपास के लिए लगा दिया जाता है।
डॉक्टर इन सभी ट्रीटमेंट के साथ ही आपको लाइफ स्टाइल में सुधार करने की सलाह भी दे सकते हैं। इसमें रोजाना एक्सरसाइज करने के साथी हेल्दी फूड्स का सेवन शामिल हो सकता है। आपको हार्ट अटैक और हार्ट फेलियर के बारे में डॉक्टर से अधिक जानकारी लेनी चाहिए।
हार्ट फेलियर का ट्रीटमेंट
डॉक्टर हार्ट फेलियर का ट्रीटमेंट करते समय ये देखते हैं कि आखिर क्यों हार्ट फेलियर की समस्या हुई है। हार्ट फेलियर से छुटकारे के लिए डॉक्टर विभिन्न दवाओं का उपयोग करने की सलाह दे सकते हैं। मेडिसिंस में डाययूरेटिक्स और एल्डोस्टेरोन इनहिबिटर्स, स्लो हार्ट रेट जैसे कि जैसे बीटा ब्लॉकर्स और आइवाब्रैडिन ( beta blockers and ivabradine),रक्त वाहिकाओं की दीवारों को आराम देने के लिए एसीई इनहिबिटर्स ( ACE inhibitors) आदि।
हार्ट फेलियर के लिए कुछ मेडिकल डिवाइस का इस्तेमाल भी किया जाता है जैसे कि पेसमेकर, जो आपके दिल की लय को सामान्य करने में मदद कर सकते हैं, वेंट्रिकुलर एसिस्ट डिवाइस, जो आपके निलय को अधिक प्रभावी ढंग से रक्त पंप करने में मदद कर सकते हैं।
वहीं ब्लॉक्ड आर्टरीज के लिए सर्जिकल प्रोसीजर की जरूरत पड़ सकती है। कई परिस्थितियों में हार्ट ट्रांसप्लांट की भी सलाह दी जाती है।
हार्ट से संबंधित बीमारियों से दूर रहने के लिए बहुत जरूरी है कि आप एक हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाएं। अगर आपको किसी भी प्रकार की समस्या महसूस हो तो बिना देरी किए डॉक्टर को दिखाएं। आपको हेल्दी लाइफस्टाइल में अनहेल्दी फूड को बाहर कर देना चाहिए साथ ही आपको रेग्युलर एक्सरसाइज करनी चाहिए। आप चाहे तो 30 मिनट वॉक भी कर सकते हैं। साथ ही एल्कोहॉल और स्मोकिंग को पूरी तरह से छोड़ दें। यह हार्ट हेल्थ के लिए खतरनाक साबित हो सकता है।
इस आर्टिकल में हमने आपको हार्ट अटैक और हार्ट फेलियर (Heart Attack and Heart Failure) को लेकर जानकारी दी है। उम्मीद है आपको हैलो हेल्थ की ओर से दी हुई जानकारियां पसंद आई होंगी। अगर आपको इस संबंध में अधिक जानकारी चाहिए, तो हमसे जरूर पूछें। हम आपके सवालों के जवाब मेडिकल एक्स्पर्ट्स द्वारा दिलाने की कोशिश करेंगे।