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Metabolic syndrome: मेटाबोलिक सिंड्रोम क्या है?

परिचय|लक्षण|कारण|जोखिम|निदान|उपचार
    Metabolic syndrome: मेटाबोलिक सिंड्रोम क्या है?

    परिचय

    मेटाबोलिक सिंड्रोम (Metabolic syndrome) क्या है?

    मेटाबोलिक सिंड्रोम (Metabolic syndrome) क्लस्टर संबंधी विकारों का एक समूह है। जब कोई मरीज इन स्थितियों से गुजरता है, तो भविष्य में हार्ट से संबंधित रोग की संभावना अधिक हो जाती है।

    हाई ब्लड प्रेशर बहुत ही गंभीर बीमारी है। जिस रोगी को हाई ब्लड प्रेशर कि समस्या होती है उनका फास्टिंग ग्लूकोज लेवल बढ़ जाता है। जिस कारण ओबेसिटी और ब्लीडिंग की समस्या होती है। जिसे मेटाबोलिक सिंड्रोम (Metabolic syndrome) कहा जाता है। अधिक संभावना है इस रोगी को हृदय संबंधी खतरा हो सकता है।

    मेटाबोलिक सिंड्रोम (Metabolic syndrome) ज्यादातर 23 प्रतिशत वयस्कों को प्रभावित करता है जिसमें फैटी बिल्डअप (fatty buildups) से संबंधित बीमारी हृदय रोग, मधुमेह, स्ट्रोक जैसी बीमारी को जोखिम में रखता है। मेटाबोलिक सिंड्रोम न में अधिक वजन और मोटापा, शारीरिक निष्क्रियता, आनुवांशिक कारक और बूढ़े होने जैसे कारण शामिल हैं।

    मेटाबोलिक सिंड्रोम तब होता है जब किसी व्यक्ति में निम्नलिखित चीजें होती हैं:

    1-पेट का मोटापा (पुरुषों में 40 इंच से अधिक और महिलाओं में 35 इंच से अधिक कमर का मोटापा है)

    2- खून के प्रति डेसीलीटर (मिलीग्राम/डीएल) या अधिक से अधिक 150 मिलीग्राम का ट्राइग्लिसराइड (Triglyceride) स्तर।

    3- पुरुषों में 40 मिलीग्राम/डीएल से कम HDL कोलेस्ट्रॉल या महिलाओं में 50 मिलीग्राम/डीएल से कम

    4- 130 मिलीमीटर पारा (मिमी एचजी) या अधिक, या डायस्टोलिक ब्लड प्रेसर (नीचे की संख्या) 85 मिमी एचजी या उससे अधिक के सिस्टोलिक ब्लड प्रेसर (शीर्ष संख्या)

    5- 100 मिलीग्राम / डीएल या उससे अधिक का फास्टिंग ग्लूकोज

    हालांकि मेटाबोलिक सिंड्रोम (Metabolic syndrome) एक गंभीर स्थिति में होता है, इसमें अपने वजन को कम करके होने वाले जोखिम को काफी कम कर सकते हैं, अपने शारीरिक गतिविधि को बढ़ाना, पूरे अनाज, फल, सब्जियों और मछलियों से भरपूर खाने का सेवन करें ताकि आपके स्वस्थ्य हार्ट के लिए आहार पहुंचे और ब्लड ग्लोकोज, ब्लड कोलेस्ट्रॉल और ब्लड प्रेसर के प्रबंध के लिए अपने स्वास्थ्य सेवा प्रदाता के साथ काम करें।

    लक्षण

    मेटाबोलिक सिंड्रोम के लक्षण (Symptoms of Metabolic Syndrome)

    मेटाबोलिक सिंड्रोम (Metabolic syndrome)

    से जुड़े अधिकांश विकारों में संकेत या लक्षण नहीं होते हैं। एक संकेत जो दिखाई देता है वह बड़ा कमर परिधि (large waist circumference) है। और यदि आपका ब्लड शुगर अधिक है, तो आप डायब्टीज के शिकार हो सकते हैं- जैसे कि प्यास लगना और जल्दी पेशाब का आना, थकान, धुंधली दृष्टि ये सारे लक्षण हैं।

    डॉक्टर को कब दिखाएं-

    यदि आपको लगता मेटाबोलिक सिंड्रोम (Metabolic syndrome) का एक भी लक्षण है तो डॉक्टर से जरुर पूछें कि क्या आपको सिंड्रोम के लिए परीक्षण की आवश्यकता है।

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    कारण

    मेटाबोलिक सिंड्रोम के कारण (Cause of metabolic syndrome)

    मेटाबोलिक सिंड्रोम में अधिक वजन या मोटापा इसका कारण है। ये इंसुलिन प्रतिरोध नामक एक स्थिति से जुड़ा हुआ है। आम तौर पर, जब आप चीनी खाते हैं तब आपका पाचन तंत्र उन खाद्य पदार्थों को खत्म कर देता है। इंसुलिन आपके पेनक्रियाश द्वारा बनाया गया एक हार्मोन है जो सेल को फ्यूल के रूप में इस्तेमाल करने के लिए शूगर में प्रवेश करने में मदद करता है।

    इंसुलिन प्रतिरोध वाले लोगों सेल इंसुलिन के लिए सामान्य रूप से ग्लूकोज सेल में आसानी से प्रवेश नहीं कर सकती है। जिसका परिणाम, आपका ब्लड शुगर लेवल में वृद्धि होती है जब तक कि आपका शरीर अधिक इंसुलिन को अपने ब्लड शुगर में कम करने की कोशिश करता है।

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    जोखिम

    मेटाबोलिक सिंड्रोम के जोखिम क्या हैं?

    मेटाबोलिक सिंड्रोम के लिए जोखिम मोटापे से संबंधित हैं जिसमें सबसे महत्वपूर्ण जोखिम कारक नेशनल हार्ट, लंग्स, और ब्लड इंस्टीट्यूट ट्रस्टैड के रूप में परिभाषित किए गए हैं:

    1-मोटापा, या शरीर के मध्य और ऊपरी हिस्सों के आसपास अतिरिक्त मोटापा

    2-इंसुलिन प्रतिरोध, जो शरीर के लिए शूगर का बनाना मुश्किल हो जाता है

    ऐसे अन्य कारक हैं जो मेटाबोलिक सिंड्रोम के लिए जोखिम को बढ़ा सकते हैं। इसमें शामिल है:

    1-आयु

    2-मेटाबोलिक सिंड्रोम का पारिवारिक इतिहास

    3-व्यायाम नहीं करना

    4-जिन महिलाओं को पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम हुआ है

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    निदान

    मेटाबोलिक सिंड्रोम का निदान कैसे किया जाता है? (Diagnosis of Metabolic syndrome)

    मेटाबोलिक सिंड्रोम का निदान करने के लिए डॉक्टर को दिखाएं जिसका वे परीक्षण करेंगे। इन परीक्षणों के परिणाम का उपयोग तीन या अधिक लक्षणों को देखने के लिए किया जाएगा। आपका डॉक्टर निम्नलिखित में से जांच कर सकता है:

    1-कमर की परिधि (waist circumference)

    3-कोलेस्ट्रॉल का स्तर

    4-ब्लड प्रेशर

    5- फास्थ्टिंग ब्डल शुगर का लैवल कम होना

    इन परीक्षणों में से उल्लेखित असामान्यताएं। मेटाबोलिक सिंड्रोम (Metabolic syndrome)

    होने का लक्षण हो सकता है।

    मेटाबोलिक सिंड्रोम में किस प्रकार का कॉम्प्लीकेशन होता हैं?

    मेटाबोलिक सिंड्रोम के परिणामस्वरूप होने वाली कॉम्प्लीकेशन अक्सर गंभीर और लांग-टर्म (क्रोनिक) होती हैं। उनमें शामिल है:

    1- धमनियों का सख्त होना (एथेरोस्क्लेरोसिस)

    2-मधुमेह

    3-दिल का दौरा

    4-किडनी की बीमारी

    5-आघात (stroke)

    6-गैर अल्कोहल फैटी लीवर रोग

    7-परिधीय धमनी रोग (peripheral artery disease)

    8-हृदय रोग (cardiovascular disease)

    यदि डायबिटीज होता है तो आपको कॉम्प्लीकेशन का खतरा जिसमें शामिल हैं:

    1-आंखों की क्षति (रेटिनोपैथी)

    2-नर्व डेमेज (न्यूरोपैथी)

    3-किडनी की बीमारी

    4-अंगों का विच्छेदन (amputation of limbs)

    और पढें : Chronic Kidney Disease: क्रोनिक किडनी डिजीज क्या है?

    उपचार

    मेटाबोलिक सिंड्रोम (Metabolic syndrome) के उपचार क्या हैं?

    मेटाबोलिक सिंड्रोम जोखिम कारकों का एक समूह है जिसमें पेट की चर्बी, उच्च ब्लड प्रेसर, उच्च ब्लड शुगर और अस्वास्थ्यकर कोलेस्ट्रॉल के स्तर शामिल हैं। उपचार इन स्थितियों में निपटने पर ज्यादा फोकस करता है। लक्ष्य आपके ब्लड वेजल रोग और हार्ट रोग के साथ-साथ मधुमेह के रोगों को भी रोकना है।

    ज्यादातर मामलों में, मेटाबोलिक सिंड्रोम (Metabolic syndrome) का सबसे अच्छा उपचार आपके पास ही है। आपके व्यवहार में बदलाव – जैसे कि स्वस्थ भोजन करना और अधिक व्यायाम करना – जो आपके डॉक्टर भी बताएंगे। कुछ स्वस्थ आदतों को अपनाकर आप अपने जोखिम कारकों को पूरी तरह से खत्म करने में सफल हो सकते हैं।

    अपने जीवनशैली में बदलाव लाएं-

    1-व्यायाम करें- वजन कम करने का सबसे आसान तरीका व्यायाम है, लेकिन अगर बदलाव नजर नहीं आ रहा है तो हार न माने। व्यायाम करने से ब्लड प्रेशर कम होता है, कोलेस्ट्रॉल के स्तर में भी सुधार होता है और इंसुलिन प्रतिरोध में भी सुधार होता है। यदि आप से व्यायाम नही हो पा हैं, तो अधिक चलने की कोशिश करें। अपने दिन में अधिक शारीरिक गतिविधि करें। जब आप पैदल है, तो कदमों को बढ़ाने के लिए थोड़ा अतिरिक्त समय लें। ट्रैक रखने के लिए, एक पेडोमीटर (स्टेप काउंटर) का इस्तेमाल करें। अपनी शारीरिक गतिविधि को धीरे-धीरे बढ़ाएं जब तक कि आप इसे हफ्ते में नहीं कर रहे हों। आप कसरत करने की कोशिश करते रहें हालांकि कसरत कठिन है लेकिन आप हार नहीं मान सकते हैं। आपका फिट रहना बहुत जरुरी है।

    2-स्वस्थ आहार लें- एक स्वस्थ आहार खाने से आपके कोलेस्ट्रॉल, इंसुलिन प्रतिरोध और ब्लड प्रेसर में सुधार हो सकता है – भले ही आपका वजन एक जैसा हो। स्वस्थ खाने के लिए अपने डॉक्टर की सलाह जरुर लें। यदि आपको हार्ट संबंधी रोग या मधुमेह है, तो आपको विशेष भोजन की आवश्यकता हो सकती है। सामान्य तौर पर, एक आहार जो कम सेजूरेटेड फैट (low in saturated fats), ट्रांस फैट, कोलेस्ट्रॉल और नमक, फलों, सब्जियों, लो प्रोटीन, सेम, और साबुत अनाज में हाई ब्लड प्रेशर वाले लोगों की मदद करने के लिए दिखाया गया है। हार्ट संबंधित रोग का एक उच्च जोखिम जैसे कई डॉक्टर “भूमध्यसागरीय” (“Mediterranean) आहार या DASH आहार का सुझाव देते हैं। ये भोजन “अच्छे” फैट (जैसे जैतून के तेल में मोनोअनसैचुरेटेड फैट) और कार्बोहाइड्रेट और प्रोटीन के संतुलन पर जोर देता है।

    3-थोड़ा वजन घटाना- जाहिर है, व्यायाम करके वजन घटाना भी एक अच्छी तरह से खाने का एक उप-उत्पाद है। यदि आप मोटे हैं तो यह अपने आप में एक महत्वपूर्ण लक्ष्य है। वजन घटाने मेटाबोलिक सिंड्रोम के हर पहलू में सुधार कर सकता हैं।

    4- धूम्रपान करना छोड़े- यदि आप धूम्रपान करते हैं तो छोड़ दें। हालांकि इससे मेटाबॉलिक सिंड्रोम में जोखिम तो नही होता फिर भी धूम्रपान करने से आपके ब्लड वेजल और हार्ट से संबंधित रोग का खतरा बढ़ सकता है।

    हैलो स्वास्थ्य किसी भी तरह की कोई भी मेडिकल सलाह नहीं दे रहा है, अधिक जानकारी के लिए आप डॉक्टर से संपर्क कर सकते हैं।

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    Nidhi Sinha द्वारा लिखित आखिरी अपडेट 20/05/2022 को
    डॉ. पूजा दाफळ के द्वारा एक्स्पर्टली रिव्यूड
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