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जैस्मिन की खुशबू कर सकती है अवसाद का इलाज

जैस्मिन की खुशबू कर सकती है अवसाद का इलाज

हम में से कई लोग अवसाद (Depression) की समस्या से गुजरते हैं। इससे बचने के लिए लोग दवाइयां खाते हैं, डॉक्टर से सलाह लेते हैं तथा और भी बहुत से तरीके अपनाते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि एक जैस्मिन का पौधा आपकी इस समस्या को चुटकियों में हल कर सकता है। जैस्मिन बहुत ही सुंदर पौधा है, लेकिन शायद आप यह नहीं जानते कि इससे अवसाद को भी कम किया जा सकता है।

साल 2018 की एक रिपोर्ट के अनुसार पूरे विश्व में 300 मिलियन लोग डिप्रेशन के शिकार हैं। डिप्रेशन और मेंटल हेल्थ से जुड़ी परेशानियों को आज नहीं पहले भी लोगों ने नजरअंदाज किया है। भारत जैसे देशों में लोग डिप्रेशन के बारे में खुलकर बातचीत करने से भी कतराते हैं। जबकि मनोचिकित्सकों की मानें तो डिप्रेशन को बीमारी समझना सही नहीं है, लेकिन यह समझना बेहद जरूरी है कि अवसाद की समस्या से पीड़ित व्यक्ति की जान भी जा सकती है। इसलिए इस बारें में खुलकर बात करना चाहिए।

और पढ़ें: डिप्रेशन ही नहीं ये भी बन सकते हैं आत्महत्या के कारण, ऐसे बचाएं किसी को आत्महत्या करने से

इस आर्टिकल में समझेंगे कि अवसाद की समस्या को जैस्मिन की खुशबू कैसे दूर कर सकती है। दरअसल जैस्मिन अपनी मीठी खुशबू के लिए मशहूर है। साथ ही इसके कई स्वास्थ्यवर्धक फायदे भी हो सकते हैं। बता दें कि घर के अंदर पौधे रखने से ऑक्सिजन की मात्रा सही रहती है साथ ही आपकी आंखों को भी सुकून मिलता है।

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आखिर कैसे जैस्मिन कर सकता है अवसाद को दूर?

एक प्रयोग के दौरान कुछ चूहों को एक साथ केज में रखकर जैस्मिन के प्लांट को उस केज के पास रखा गया। जर्नल ऑफ बायोलॉजिकल केमिस्ट्री (Journal of Biological Chemistry) में प्रकाशित हुए एक लेख में सामने आया है कि जैस्मिन के पौधे से गामा एमिनो ब्यूटीरिक एसिडएसिड (GABA) निकलता है। इस एसिड के प्रभाव की वजह से चूहे अधिक शांत रहे। इस प्रयोग से ये साबित हुआ कि जैस्मिन के पौधे को अगर आप किसी के आसपास रखते हैं तो वह अधिक शांत रहेगा और साथ ही अवसाद या फिर बेचैनी की समस्या नहीं होगी।

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किस जगह पर रखने से जैस्मिन होगा सबसे अधिक फायदेमंद!

अपने बेडरूम में जैस्मिन यानी चमेली के पौधे को खिड़की के पास रखें। इससे उसे हल्की रोशनी मिलती रहेगी और पौधा दीवार के सहारे बड़ा हो सकता है। साथ ही इस पौधे को बहुत ज्यादा पानी देने की भी जरूरत नहीं है। अगर आप बहुत ज्यादा पानी देंगे तो ये पौधा खराब हो सकता है। कुछ दिनों के बाद आप पाएंगे कि आपकी नींद पहले से अधिक सुकून भरी हो गई है। साथ ही सुबह उठने पर अच्छी महक और खूबसूरत फूलों की वजह से आपका दिन भी अच्छा जाएगा।

डॉक्टर्स कहते हैं कि अगर आप सुबह उठकर या फिर रात को सोने से पहले किसी प्राकृतिक जगह पर जाते हैं तो आपका मन शांत रहता है और शरीर भी स्वस्थ रहता है। जैसे कि रात के खाने के बाद टहलने जाना या फिर सुबह उठकर जैस्मिन या किसी भी और फूल या पौधे को देखना। इससे सुबह उठते ही आपको राहत का अहसास होगा और दिन की शुरुआत अच्छी होगी।

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अवसाद की परेशानी को दूर करने के लिए जैस्मिन का फ्लाॅवर मददगार साबित हो सकता है लेकिन, डिप्रेशन के लक्षणों को समझना भी जरूरी है। इसलिए सझने की कोशिश करते हैं कि क्या हैं अवसाद के लक्षण?

  • डिप्रेशन के शिकार हुए व्यक्ति में सबसे ज्यादा नजर आने वाली परेशानी है नींद न आना। नींद न आने की स्थिति कई शारीरिक परेशानी भी शुरू कर सकती है और ऐसी परिस्थिति में डिप्रेशन की समस्या बढ़ भी सकती है।
  • वैसे तो कई बार अवसाद से पीड़ित व्यक्ति खाने-पीने में लापरवाही बरतते हैं, लेकिन कई बार संतुलित आहार लेने के बाद भी हमेशा कमजोरी महसूस करना इन परेशानियों में शामिल हो सकती है। यह भी ध्यान रखें कि डिप्रेशन की वजह से भूख नहीं लगती है या फिर ज्यादा भूख भी लग सकती है। इसके साथ ही दिमाग और शरीर का सुस्त रहना। किसी से बात नहीं करना और लोगों से मिलना जुलना पसंद नहीं करना।
  • अवसाद की समस्या झेल रहे लोग चिड़चिड़ाहट, घबराहट या फिर किसी न किसी बात को लेकर अक्सर चिंता में रह सकते हैं। दरअसल इस तरह की चिंता डिप्रेशन के लक्षणों में से एक है।
  • ऑफिस, घर या किसी अन्य काम में फोकस नहीं कर पाना। डिप्रेशन के शिकार व्यक्ति किसी भी काम को करने में असमर्थ होते हैं।
  • डिप्रेशन की वजह से व्यक्ति में नकारात्मक सोच का घर कर लेना भी हो सकता है। परिस्थिति कैसी भी हो लेकिन, हर वक्त नेगेटिव सोचना और अपने आपको अकेला महसूस करना इनके स्वभाव में शामिल हो जाता है।
  • कई बार ऐसा भी देखा गया है कि महिलाएं अगर अवसाद की शिकार होती हैं, तो वे ज्यादा नशा करने लगती हैं।
  • अगर इन लक्षणों के साथ-साथ अन्य लक्षण अगर आपके किसी करीबी में हैं तो उनसे बात करें और उनकी परेशानी समझने की कोशिश करें। अगर अवसाद के लक्षण नजर आ रहे हैं तो इस नजरअंदाज करना ठीक नहीं होता है। क्योंकि डिप्रेशन को नजरअंदाज करना घातक हो सकता है। इसकी वजह यह है कि कभी-कभी लोग इतने डिप्रेस्ड हो जाते हैं कि वे आत्महत्या भी कर लेते हैं।

और पढ़ें: महिलाओं में डिप्रेशन क्यों होता है, जानिए कारण और लक्षण

अवसाद से कैसे बचें?

निम्नलिखित टिप्स अपनाकर अवसाद से बचा जा सकता है। जैसे:-

  • किसी भी परेशानी के बारे में खुलकर बाते करें। आप जिन्हें पसंद करते हैं या जिन पर भरोसा करते हैं उनसे बात करें। किसी भी बात को अपने मन में छुपाकर न रखें। अगर आप किसी से खुलकर बात नहीं करेंगे तो आपकी परेशानी कम होने की बजाय और बढ़ सकती है।
  • रोजाना 7 से 8 घंटे की नींद लें। दरअसल साउंड स्लीप कोई भी मानसिक या शारीरिक परेशानी को दूर करने के लिए सबसे बेहतर तरीका है। अगर आपको नींद आने में परेशानी होती है, तो इस परेशानी को दूर करें और नियमित रूप से सोने का समय तय करें और उसी वक्त पर रोजाना सोने की आदत डालें।
  • ऐसे काम जरूर करें जो आपको पसंद हो। डिप्रेशन जैसे परेशानी तब शुरू होती है जब आप बिना वजह किसी बारे में ज्यादा सोचते हैं। इसलिए अपने आपको व्यस्त रखें और खुश रहें। किसी की बातों पर ध्यान न दें जिसका आप पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता हो। ऐसे लोगों से भी दूरी बनाएं जो नकारात्मक विचारधारा ज्यादा रखते हों।
  • पौष्टिक आहार विशेष रूप से खाने की आदत डालें।
  • अपने आपको फि​ट रखने के लिए सबसे जरूरी है कि आप अपनी समस्या या अपने आप में हो रहे बदलाव के बारे में मनोचिकित्सक को बताएं।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार कई बार व्यक्ति नकारात्मक सोच की वजह से भी डिप्रेशन का शिकार हो जाता है। इसलिए स्टूडेंट, वर्किंग मेन, वर्किंग वीमेन, हाउस वाइफ या कोई भी व्यक्ति क्यों न हो हर परिस्थिति में अपनी सोच सही रखें और मन में नेगेटिव विचार न आने दें। अगर आप अवसाद से जुड़े किसी तरह के कोई सवाल का जवाब जानना चाहते हैं तो विशेषज्ञों से समझना बेहतर होगा। हैलो हेल्थ ग्रुप किसी भी तरह की मेडिकल एडवाइस, इलाज और जांच की सलाह नहीं देता है।

 

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सूत्र

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The Complex Relationship Between Sleep, Depression & Anxiety: https://www.sleepfoundation.org/excessive-sleepiness/health-impact/complex-relationship-between-sleep-depression-anxiety Accessed July 14, 2020

Substance Use Disorders: https://adaa.org/understanding-anxiety/related-illnesses/substance-abuse Accessed July 14, 2020

Fatigue in Patients with Major Depressive Disorder: https://link.springer.com/article/10.1007/s40263-018-0490-z Accessed July 14, 2020

लेखक की तस्वीर
Suniti Tripathy द्वारा लिखित आखिरी अपडेट 14/07/2020 को
Dr Sharayu Maknikar के द्वारा एक्स्पर्टली रिव्यूड