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ओसीडी एंग्जायटी डिसऑर्डर के कारण क्या हैं?

ओसीडी एंग्जायटी डिसऑर्डर के कारण क्या हैं?

ऑब्सेसिव कम्पल्सिव डिसऑर्डर (Obsessive Compulsive Disorder) एक एंग्जायटी डिसऑर्डर है। जिसमें इंसान वही सब चीजें दोहराने की कोशिश करता है, जिसमें उसको संतुष्टि न मिली हो। पीड़ित इंसान एक बार नहीं बल्कि बार-बार उसी काम को दोहराता है। यह मानसिक बीमारी उन लोगों को ज्यादा होती है, जिन्हें स्ट्रेस और हर समय चिंता (Anxiety) सताती है। इससे उनकी प्रोफेशनल और पर्सनल लाइफ बर्बाद हो सकती है। यहां तक कि इसका इलाज समय पर न किया जाए, तो रोगी की सेक्शुअल लाइफ भी प्रभावित हो सकती है। जानते हैं ओसीडी एंग्जायटी डिसऑर्डर क्या है?

ओसीडी एंग्जायटी डिसऑर्डर में व्यक्ति का व्यक्तित्व कैसा हो जाता है?

बता दें कि ओसीडी एंग्जायटी डिसऑर्डर किसी भी तरह से हो सकता है। रोगी को खुद को साफ रखने की लत लग सकती है, इसके अलावा इसमें इंसान गैस के नॉब को बार-बार चेक कर सकता है। जब तक वह पूरी तरह से संतुष्ट नहीं हो जाता है। इस मेंटल डिसऑर्डर (मानसिक विकार) में इंसान बार-बार वही चीज करता है, जो वह पहले कर चुका है। आमतौर पर लोगों को एक बार में किसी काम या चीज से संतुष्टि हो जाती है, लेकिन ओसीडी के मरीज (Patient) एक बार में किसी काम या चीज से संतुष्ट नहीं हो पाते हैं। जिसके लिए वे बार-बार उसी काम को दौहराते हैं। इसके अलावा कुछ पीड़ित व्यक्ति ऐसा भी करने लगते हैं –

  • चीजों को बार-बार चेक करने की लत लग जाती है, जैसे- ताले, गैस, उपकरण, स्विच आदि।
  • साफ-सफाई में अधिक से अधिक समय लगाना।
  • बेकार चीजों को इकट्ठा करना जैसे पुरानी रद्दी, खाने के डिब्बे या फिर बॉटल आदि।
  • धर्म के डर से ज्यादा से ज्यादा समय पूजा में लगाना।
  • बेवजह की चीजों को क्रम से लगाना या उनको अरेंज करना।

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ओसीडी के लक्षण क्या हैं?

  • इस समस्या के दौरान इंसान का दिमाग एक जगह काम नहीं करता है और हर पल चिंता सताने लगती है।
  • ये लोग गंदगी से डरते हैं। हर बार अपने आप को साफ सुथरा रखने की कोशिश करते हैं।
  • कुछ लोग बार-बार चीजों की जांच करते हैं, जैसे-अवन बंद किया या नहीं, दरवाजा बंद किया या नहीं आदि।
  • धर्म और पाप से डरने वाले लोग यह सोचते हैं कि अगर कुछ गलत हो गया हो, तो भगवान हमें श्राप दे देंगे या फिर कुछ अनर्थ हो जाएगा।
  • गिनती करने वाले और चीजों को व्यवस्थित करने वाले क्रम और समानता से ऑब्सेस्ड होते हैं। उनमें से कुछ निश्चित संख्याओं, रंगों और अरेंजमेंट को लेकर अंधविश्वास हो सकता है।
  • चीजों को संभालकर रखने वाले इस चीज से डरते हैं कि अगर उन्होंने कुछ बाहर फेंका तो उनके साथ गलत हो जाएगा और अपने इसी डर की वजह से वे गैर जरूरी चीजों को भी संभालकर रखते हैं।

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ओसीडी एंग्जायटी डिसऑर्डर की वजह

इस बीमारी से ग्रसित लोगों में पाया गया है कि मस्तिष्क के बाहरी भाग और भीतरी भाग के बीच तालमेल का अभाव होता है। ऐसा पाया गया है कि न्यूरोट्रांसमीटर सिरोटोनिन के असंतुलित फॉरमेशन के कारण OCD ( Obsessive Compulsive Disorder) जैसी बीमारी लोगों में पाई जाती है। इस ओसीडी एंग्जायटी डिसऑर्डर की वजह अनुवांशिक (Genetic ) भी हो सकती हैं। साथ ही मस्तिष्क में खराबी और स्ट्रेस (Stress) मतलब जीवन में असंतुलन भी वह वजह है, जिनकी वजह से ऑब्सेसिव कंपल्सिव डिसऑर्डर ( Obsessive Compulsive Disorder) की बीमारी से लोग पीड़ित हो सकते हैं। फिलहाल इस पर शोध जारी है और इसको लेकर कई और जानकारियां जुटाने के लिए मेडिकल साइंस लगातार प्रयासरत है।

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ऑब्सेसिव कंपल्सिव डिसऑर्डर (Obsessive Compulsive Disorder) क्या एक चिंता विकार है?

यह बिल्कुल जरूरी नहीं कि अगर आप एक हरकत को दोहराते हैं या किसी बात की बहुत चिंता करते हैं या फिर किसी चीज से डरते हैं, तो आप ओसीडी के शिकार हैं। ओसीडी के लक्षणों को समझने के लिए आपको यहां कुछ निर्देश और लक्षण बताए गए हैं, जिन्हें पढ़कर आप इस बात की पुष्टि कर सकते हैं। चिंता करना बुरा नहीं है, लेकिन चिंता को खुद पर हावी होने देना और फिर उससे प्रभावित होकर अपने जीवन को कष्ट देना बुरा है। ओसीडी एंग्जायटी डिसऑर्डर से पीड़ित व्यक्ति जुनूनी और अनवांटेड थिंकिंग से घिरा होता है। उसका अपने दिमाग और अपनी हरकतों पर कोई नियंत्रण नहीं होता। पर यह बिल्कुल जरूरी नहीं कि व्यक्ति ऑब्सेसिव हो और वह कंपल्सिव डिसऑर्डर से भी पीड़ित हो।

जनरलाइज्ड एंग्जायटी (जीएडी) और ओसीडी अलग हैं। ओसीडी में चिंता काफी हद तक तर्कहीन होती हैं। ओसीडी एंग्जायटी डिसऑर्डर में यह निश्चित रूप से तुलना में थोड़ा अधिक होता है। जीएडी वाले लोग बहुत चिंता करते हैं, वे आमतौर पर अपनी चिंता से निपटने के लिए बाध्यकारी, अनुष्ठानिक व्यवहार में संलग्न नहीं होते हैं। हालांकि, ओसीडी एंग्जायटी डिसऑर्डर वाले लोग आमतौर पर दोहराए जाने वाले व्यवहारों का उपयोग करते हैं।

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ओसीडी एंग्जायटी डिसऑर्डर का उपचार

ओसीडी एंग्जायटी डिसऑर्डर के निदान होने के बाद मनोचिकित्सक दवाइयां देते हैं, जिनकी मात्रा में फेर बदल करने की जरूरत पड़ सकती है। एक दवाई काम न करे, तो दूसरी बदल कर देनी पड़ सकती है, इसलिए मानसिक रोगों का इलाज कराते समय धैर्य रखें।

केवल दवाइयां ही कारगर नहीं होती व्यावाहरिक चिकित्सा भी दी जाती है। बाध्यता को रोकने और उससे उत्पन्न व्याकुलता को सहने के लिए प्रशिक्षित किया जाता है। उदाहरण के लिए जो व्यक्ति 15-15 मिनट में हाथ धोता हो, उसे कहा जाएगा कि आधे घंटे तक हाथ नहीं धोने हैं। पीड़ित व्यक्ति बेचैन होगा पर उसे बार-बार कहना पड़ेगा कि हाथ न धोने से कुछ नुकसान नहीं हुआ, तुम ठीक हो, कुछ गलत नहीं हो रहा। सायकोथेरिपी के अन्य तरीके भी हैं, जो पीड़ित व्यक्ति की आवश्यकता के अनुरूप मनोवैज्ञानिक प्रयोग करते हैं ।

ज्यादातर रोगियों को दवाइयों और व्यावहारिक चिकित्सा से लाभ मिलता है। यदि ये प्रयास विफल हों, तब इलेक्ट्रो कन्वल्सिवथेरेपी काम आ सकती है। बहुत कम रोगी होते हैं, जिन्हें इससे भी लाभ न हो। तब अंतिम विकल्प के रूप में मस्तिष्क की शल्य-मनोचिकित्सा की भी विधियां हैं, जिनसे बहुत से रोगियों को लाभ मिला है।

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ओसीडी एंग्जायटी डिसऑर्डर से बचाव में मदद कर सकते हैं ये बदलाव

ओसीडी एंग्जायटी डिसऑर्डर से बचाव के लिए आप अपनी जीवनशैली में कुछ बदलाव कर सकते हैं, जो कि आपको स्ट्रेस व एंग्जायटी से दूर रखने में मदद करेंगे। चूंकि यह डिसऑर्डर मानसिक तनाव के शिकार व्यक्ति में देखा जाता है, इसलिए इन बदलावों के जरिए इससे बचाव में मदद मिल सकती है।

  • रोजाना 30 मिनट एक्सरसाइज करने से आपके दिमाग में स्ट्रेस हॉर्मोन का स्तर कम होता है। इससे आप मानसिक रूप से स्वस्थ रह पाते हैं।
  • शरीर के लिए जरूरी विटामिन और मिनरल्स का पर्याप्त सेवन करें। डॉक्टर से सलाह लेकर आप इसके लिए सप्लिमेंट्स भी इस्तेमाल कर सकते हैं।
  • अपने आहार में कैफीन की मात्रा बिल्कुल कम और एल्कोहॉल का सेवन बिल्कुल बंद कर दें। इससे दिमाग को आराम मिलने में दिक्कत होती हैं और वह खुद को रिलैक्स नहीं कर पाता।
  • अगर आपको किसी भी चीज के लिए ओसीडी एंग्जायटी डिसऑर्डर होता है, तो उसे एक कागज पर लिख लें। इसके बाद आपको खुद को यह समझाना है कि ऐसा करने से कोई लाभ नहीं होता।
  • अपने दोस्तों और परिवार वालों के साथ समय बिताएं। इससे आपका दिमाग थोड़ी देर व्यस्त रहेगा और आपको अनवॉन्टेड थिंकिंग से बचने में मदद मिलेगी। आप दोस्तों और परिवारवालों की मदद से अपनी उन आदतों के बारे में भी जान सकते हैं, जो कि ओसीडी के लक्षणों कहे जा सकते हैं।
  • नींद हमारे शरीर और दिमाग के लिए बहुत जरूरी है। इससे दिमाग खुद को रिलैक्स करके अनचाहे विचारों से खुद को मुक्त कर सकता है।

यदि आपने इस ओसीडी एंग्जायटी डिसऑर्डर को समझने में देर कर दी, तो यह आपके लिए और आपके प्रियजनों के लिए घातक साबित हो सकता है। इसलिए हमेशा याद रखिए कि किसी भी मेंटल डिसऑर्डर के शिकार, आप तभी होते हैं। जब आप खुद पर अपने विचारों को हावी होने देते हैं। यदि आप समझ-बूझ से काम लेंगे और खुद को स्ट्रेस मुक्त, खुशहाल रखेंगे तो आपका जीवन बहुत सुखमय होगा। इसलिए खुद को स्वस्थ रखिए। चिंता सिर्फ उतनी करिए जितनी जरूरी हो। अत्यधिक चिंता हानिकारक होती है। ओसीडी का एक भी लक्षण नजर आए, तो फौरन चिकित्सक की सलाह लेनी चाहिए। परेशानी का शुरूआती दौर में ही समाधान निकालना बेहद सरल होता है। वहीं दिमाग जैसे कंप्लेक्स ऑर्गन का इलाज गंभीर बीमारी से ग्रसित हो जाने के बाद उतना ही मुश्किल होता है।

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Smrit Singh द्वारा लिखित आखिरी अपडेट 26/10/2020 को
डॉ. हेमाक्षी जत्तानी के द्वारा मेडिकली रिव्यूड
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