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जानिए ओसीडी (OCD) का दिमाग पर क्या असर पड़ता है

के द्वारा मेडिकली रिव्यूड डॉ. हेमाक्षी जत्तानी · डेंटिस्ट्री · Consultant Orthodontist


Smrit Singh द्वारा लिखित · अपडेटेड 03/02/2020

जानिए ओसीडी (OCD) का दिमाग पर क्या असर पड़ता है

ऑब्सेसिव कंपल्सिव डिसऑर्डर (ओसीडी), क्या आप इस डिसऑर्डर के शिकार है? क्या आपका अपने दिमाग पर नियंत्रण नहीं बन पा रहा है? यदि हां तो, यहां आपको अपने सभी सवालों के उत्तर मिल जाएंगे। यहां आपको ओसीडी यानी ऑब्सेसिव कंपल्सिव डिसऑर्डर (OCD) किस तरह आपके दिमाग को प्रभावित करता है उसके बारे में बताया गया है।

ऑब्सेसिव कंपल्सिव डिसऑर्डर (ओसीडी) क्या है?

ऑब्सेसिव कंपल्सिव डिसऑर्डर (OCD) यह एक चिंता विकार है, जो आपके दिमाग में उत्पन्न विचारों से होती है। यह वो विचार हैं, जिनके बारे में लगातार सोचते रहने से या तो यह आपकी आदत बन जाती है या फिर आपके डर का रूप ले लेती है। इस विकार से ग्रस्त व्यक्ति को समझ में नहीं आता है कि उसके दिमाग में जो विचार आ रहें हैं वो सही भी हैं या नहीं। इस दौरान दिमाग में आने वाले विचारों को अनदेखा करने और रोकने के लिए आप प्रयास कर सकते है, लेकिन यह प्रयास केवल आपके तनाव व चिंता को और बढ़ा देते हैं। ऐसा होने पर आप खुद को तनाव पूर्ण महसूस करते हुए एक ही कार्य को बार-बार करने के लिए बाध्य हो जाते हैं।

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ओसीडी (मनोग्रसित बाध्यता विकार) के लक्षण क्या हैं?

ओसीडी के लक्षण हर इंसान में अलग-अलग दिखते हैं। इस बीमारी से ग्रसित व्यक्ति में प्रायः दिखने वाले लक्षण-

  • शरीर की गंदगी या कीटाणुओं का डर
  • अपने आप को या किसी और को नुकसान पहुंचाने का डर होना
  • बार-बार नहाना, हाथ धोना या दांतों को साफ करना
  • शरीर की दुर्गन्ध को छिपाने के लिए वस्तुओं का अधिक इस्तेमाल करना
  • चीजों को बार-बार साफ करना, सीधा करना या क्रम में लगाना
  • लगातार कुछ ध्वनियों, शब्दों या संख्याओं को सोचना
  • बार-बार गिनती करना
  • इस डर के साथ रहना कि कुछ भयानक होगा
  • बॉडी की दुर्गन्ध/स्राव
  • किसी विशिष्ट कार्य के प्रति अतिसंवेदनशीलता
  • बुरे विचारों को सोचने या कुछ शर्मिंदगी वाला कार्य करने का डर
  • कपड़ों की बार-बार जिप या बटन को बार चेक करना
  • लाइट, अलमारी या दरवाजों को बार-बार चेक करना की वे बंद हैं या नहीं
  • कुछ शारीरिक गतिविधियों को दोहराना, जैसे कुर्सी पर बैठकर उठना आदि।

ऊपर बताए गए लक्षणों के अलावा भी ओसीडी के के अन्य लक्षण भी दिख सकते हैं।

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ओसीडी (मनोग्रसित बाध्यता विकार) के कारण

यह मानसिक विकार (ओसीडी) क्यों होता है? इसके बारे में अभी पूरी तरह से पता नहीं लग पाया है। लेकिन, ऐसा माना जाता है कि ओसीडी होने के निम्नलिखित कारण हो सकते हैं-

  • ओसीडी आपके शरीर में प्राकृतिक रासायनिक प्रक्रिया या मस्तिष्क के कार्यों में बदलाव का परिणाम हो सकता है।
  • ओसीडी होने का एक कारक अनुवांशिकता हो सकती है। लेकिन अभी तक ऐसा कोई विशिष्ट जीन (gene) की पहचान नहीं की गई है जिससे ओसीडी का सीधा सम्बन्ध हो।
  • संक्रमण जैसे कुछ पर्यावरणीय कारक भी ओसीडी की वजह माने जाते हैं लेकिन अभी अधिक शोध की आवश्यकता है।

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ओसीडी का दिमाग पर क्या असर होता है?

ऑब्सेसिव कंपल्सिव डिसऑर्डर का असर व्यक्ति के दिमाग पर होता है। जैसे कोई व्यक्ति सोने से पहले अपने घर के दरवाजे को अच्छे से बंद करके उसमें ताला लगा कर सोता है, इस भय से कि कहीं कोई चोर उसके घर में न आ जाए। यह एक आम चिंता है लेकिन, यदि वही व्यक्ति चोरों के भय से रात भर यह सोचता रहे कि कहीं उसने ताला ठीक तरह से लगाया या नहीं और कई बार उठकर चेक करे, तो यह एक विकार है, जिसे हम ओसीडी बोलते हैं।

इस बीमारी में आप वही करते हैं, जो आपका दिमाग उस वक्त आपको करने को कहता है। जैसे, यदि आपके मन में एक बार इस बात का भय बैठ जाए कि आपके हाथ में छुपे हुए जर्म्स होते हैं, तो आपका दिमाग आपको हर काम के बाद हाथ धोने के लिए मजबूर करता है और आप करते हैं।

हर व्यक्ति को चिंता या बुरे ख्याल आते हैं पर ऑब्सेसिव विचार आपके दिमाग को एक जगह रोक देते हैं, मतलब आपका दिमाग उस विचार से आगे नहीं बढ़ पाता। इससे होती है एंग्जायटी, स्ट्रेस। इसके बाद फिर वही ख्याल आपके दिमाग में बार-बार आने लगते हैं। ऐसे विचारों को आप जितना दबाने की कोशिश करते हैं, यह उतने ही बढ़ते हैं।

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ओसीडी से कैसे करें बचाव?

  • ऐसे विचारों को दूर करने के लिए आपको अपने मन को स्ट्रॉन्ग बनाना होता है। आपको बार-बार उस काम को करने से खुद को रोकना होता है, जिससे आपका दिमाग दूसरी ओर जाने लगता है और आप धीरे-धीरे इस से बाहर निकल सकते हैं।
  • ओसीडी से ग्रस्त होने की वजह से आपको अपने विचारों से एंग्जायटी (anxiety) और स्ट्रेस (stress) होने लगता है, जो आपके दिमाग पर दुष्प्रभाव डालते हैं। व्यक्ति हताश और निराश भी महसूस करने लगता है। व्यक्ति इतनी बार एक ही काम को सोचता और करता है कि वो खुद पर से अपना नियंत्रण खो देता है।
  • यह आपके लिए बहुत ही निराशाजनक और थकावट भरा हो सकता है। आपको खुद पर गुस्सा भी आता है, पर आपको अपना धैर्य नहीं खोना है।
  • यदि आप इस डिसऑर्डर से खुद को मुक्त करना चाहते हैं, तो सबसे पहले आपको अपने दिमाग और मन दोनों को यह विश्वास दिलाना होगा कि यह कोई कलंकित बीमारी नहीं है। यह एक आम बीमारी है, जिसके बारे में बात करने से आपकी निंदा नहीं होगी। तभी आप इसके बारे में खुल के बात कर पाएंगे।

जब आप इस डिसऑर्डर से खुद को बाहर निकाल लें, तो आप अपनी इस जानकारी को दूसरों के साथ सांझा करें, ताकि दूसरे व्यक्तियों को आपके एक्सपीरिएंस से लाभ मिल सके।

हमारे द्वारा दी गई जानकारी को ध्यान से पढ़ें और समझें, क्योंकि कई बार हम अपनी परेशानियों को नजरंदाज कर देते हैं या उन्हें छुपाने की कोशिश करते हैं। पर आपको यह समझना होगा कि जो भी परेशानी आपको दिमागी या शारीरिक रूप से परेशान कर रही हो, उससे दूर न भागें, बल्कि उसका सामना करें। उम्मीद करते हैं कि आपको यह आर्टिकल पसंद आया होगा। हमें कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं इस लेख में ओसीडी से संबंधित सभी जानकारी देने की कोशिश की गई है। अगर आपका इस विषय से संबंधित कोई भी सवाल या सुझाव है तो वो भी हमारे साथ शेयर करें।

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