Pseudogout: स्यूडोगाउट क्या है?

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अपडेट डेट May 22, 2020 . 4 मिनट में पढ़ें
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परिचय

स्यूडोगाउट क्या है?

स्यूडोगाउट एक प्रकार का अर्थराइटिस है जो अचानक होता है। स्यूडोगाउट के कारण जोड़ों में सूजन और दर्द होता है। यह बीमारी तब होती है जब जोड़ों को ल्यूब्रिकेट करने वाली सिनोवियल फ्लुइड में क्रिस्टल बन जाता है। यह आमतौर पर घुटनों और जोड़ों को प्रभावित करता है। स्यूडोगाउट को कैल्शियम पाइरोफास्फेड डिपोजिशन डिजीज भी कहा जाता है।

स्यूडोगाउट के लक्षण कुछ दिनों से कुछ हफ्तों तक नजर आते हैं और आमतौर पर 60 साल से अधिक उम्र के लोगों को यह बीमारी प्रभावित करती है। अगर समस्या की जद बढ़ जाती है तो आपके लिए गंभीर स्थिति बन सकती है । इसलिए इसका समय रहते इलाज जरूरी है। इसके भी कुछ लक्षण होते हैं ,जिसे ध्यान देने पर आप इसकी शुरूआती स्थिति को समझ सकते हैं।

कितना सामान्य है स्यूडोगाउट होना?

स्यूडोगाउट एक क्रोनिक कंडीशन है। ये महिला और पुरुष दोनों में सामान प्रभाव डालता है। पूरी दुनिया में लगभग लाखों लोग स्यूडोगाउट से पीड़ित हैं। उम्र बढ़ने पर यह बीमारी अटैक करती है। ज्यादा जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से संपर्क करें।

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लक्षण

स्यूडोगाउट के क्या लक्षण है?

यह आमतौर पर घुटनों को प्रभावित करता है लेकिन यह टखनों, कलाई और कोहनी को भी प्रभावित कर सकता है। स्यूडोगाउट से पीड़ित व्यक्ति में प्रायः गाउट के जैसे लक्षण नजर आते हैं। यह बीमारी ऑस्टियो अर्थराइटिस और रुमेटॉयड अर्थराइटिस के मरीजों पर भी असर डालती है जिसके कारण ये लक्षण सामने आने लगते हैं :

  • जोड़ों में दर्द और सूजन
  • जोड़ों में फ्लुइड जमना
  • सूजन
  • जोड़ों में ऐंठन
  • गर्माहट
  • त्वचा लाल होना

कभी-कभी कुछ लोगों में इसमें से कोई भी लक्षण सामने नहीं आते हैं और जोड़ों पर दबाव पड़ने पर अचानक से तेज दर्द होने लगता है। स्यूडोगाउड के अधिकांश लक्षण 5 दिनों या कुछ हफ्ते में अपने आप खत्म हो जाते हैं।

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मुझे डॉक्टर को कब दिखाना चाहिए?

ऊपर बताएं गए लक्षणों में किसी भी लक्षम के सामने आने के बाद आप डॉक्टर से मिलें। हर किसी के शरीर पर स्यूडोगाउट अलग प्रभाव डाल सकता है। इसलिए किसी भी परिस्थिति के लिए आप डॉक्टर से बात कर लें। यदि जोड़ों में अचानक दर्द, सूजन और ऐंठन महसूस हो तो तुरंत डॉक्टर के पास जाएं।

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कारण

स्यूडोगाउट होने के कारण क्या है?

स्यूडोगाउट तब होता है जब जोड़ों के सिनोवियल फ्लुइड में कैल्शियम पायरोफॉस्फेट का क्रिस्टल जमा हो जाता है। क्रिस्टल कार्टिलेज में भी जमा होता है और इसे डैमेज कर देता है। जोड़ों के फ्लुइड में क्रिस्टल बनने के कारण जोड़ों में सूजन और तेज दर्द होता है। 85 साल की उम्र के लोगों के जोड़ों में अधिक मात्रा में क्रिस्टल बनता है। स्यूडोगाउट आनुवांशिक कारणों से भी होता है। इसके अलावा हाइपोथायरॉयडिज्म, रक्त में आयरन की मात्रा अधिक होने, हाइपर कैल्सिमिया और मैग्नीशियम की कमी के कारण भी स्यूडोगाउट का जोखिम बढ़ सकता है।

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जोखिम

स्यूडोगाउट के साथ मुझे क्या समस्याएं हो सकती हैं?

स्यूडोगाउट एक आम बीमारी है जो अर्थराइटिस और गाउट के ज्यादातर मरीजों को प्रभावित करती है। कुछ मामलों में सिनोवियल फ्लुइड में क्रिस्टल जमा होने के कारण ज्वाइंड स्थायी रुप से डैमेज हो सकता है। स्यूडोगाउट के कारण ज्वाइंट प्रभावित होने पर सिस्ट बन सकता है या पीड़ित व्यक्ति को बोन स्पर्स हो सकता है। इससे हड्डियां कमजोर हो जाती हैं और व्यक्ति को चलने फिरने में कठिनाई होती है।

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उपचार

यहां प्रदान की गई जानकारी को किसी भी मेडिकल सलाह के रूप ना समझें। अधिक जानकारी के लिए हमेशा अपने डॉक्टर से परामर्श करें।

स्यूडोगाउट का निदान कैसे किया जाता है?

स्यूडोगाउट का पता लगाने के लिए डॉक्टर शरीर की जांच करते हैं और मरीज का पारिवारिक इतिहास भी देखते हैं। इस बीमारी को जानने के लिए कुछ टेस्ट कराए जाते हैं :

  • जोड़ों से फ्लुइड का सैंपल लेकर कैल्शियम पायरोफॉस्फेट क्रिस्टल की जांच की जाती है।
  • ज्वाइंट का एक्सरे करके जोड़ों के डैमेज होने, कार्टिलेज में कैल्शियम का पता लगाया जाता है।
  • एमआरआई और सीटी स्कैन- जोड़ों में कैल्शियम जमा होने की जांच के लिए एमआरआई और सीटी स्कैन किया जाता है।
  • अल्ट्रासाउंड- जोड़ों की स्थिति जानने के लिए किया जाता है।

कुछ मरीजों में ब्लड टेस्ट से भी स्यूडोगाउट का पता लगाया जाता है। ज्वाइंट कैविटी में क्रिस्टल पाये जाने पर डॉक्टर को इस बीमारी का निदान करना आसान हो जाता है। आमतौर पर ऑस्टियोअर्थराइटिस, रुमेटॉयड अर्थराइटिस और गाउट के लक्षण मिलते जुलते होते हैं इसलिए स्यूडोगाउट के उचित निदान के बाद ही उपचार शुरु किया जाता है।

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स्यूडोगाउट का इलाज कैसे होता है?

स्यूडोगाउट का कोई सटीक इलाज नहीं है। लेकिन, कुछ थेरिपी और दवाओं से व्यक्ति में स्यूडोगाउट के असर को कम किया जाता है। स्यूडोगाउट के लिए कई तरह की मेडिकेशन की जाती है :

  1. जोड़ों में दर्द और सूजन को कम करने के लिए इबुप्रोफेन, नेप्रोक्सेन और इंडोमेथासिन दवा दी जाती है।
  2. गाउट की दवा कोल्किसिन भी स्यूडोगाउट के इलाज में बहुत प्रभावी है। मरीज को इस दवा की कम खुराक दी जाती है।
  3. हाइड्रॉक्सी क्लोरोक्विन और मेथोट्रेक्सेट दवा भी स्यूडो गाउट के असर को कम करती है।
  4. यदि आप कोल्किसिन का सेवन नहीं कर पा रहे हैं तो डॉक्टर कॉर्टिकोस्टीरॉयड पिल्स जैसे प्रेडनिसोन का सेवन करने की सलाह देंगे। यग जोड़ों में सूजन और दर्द को कम करता है।

इसके अलावा कुछ मरीजों के जोड़ों में सुई डालकर कुछ फ्लुइड को बाहर निकाला जाता है इससे जोड़ों में जमा क्रिस्टल भी बाहर निकल आते हैं। इलाज के बावजूद राहत न मिलने पर डॉक्टर सर्जरी करके जोड़ों को रिपेयर करते हैं या उन्हें बदल देते हैं। एंटी इंफ्लेमेटरी दवाओं का सेवन तब तक करना चाहिए जब तक कि स्यूडोगाउट अटैक कम नहीं हो जाता। इलाज शुरु होने के 24 घंटे के भीरत लक्षण हल्के हो जाते हैं।

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घरेलू उपचार

जीवनशैली में होने वाले बदलाव क्या हैं, जो मुझे स्यूडोगाउट को ठीक करने में मदद कर सकते हैं?

अगर आपको स्यूडोगाउट है तो आपके डॉक्टर आपको विटामिन डी और कैल्शियम का अधिक मात्रा में सेवन करने के लिए बताएंगे। इसके साथ ही पोषक तत्वों से भरपूर आहार लेने के लिए कहेंगे। स्यूडोगाउट से बचने के लिए जोड़ों पर अधिक दबाव नहीं पड़ने देना चाहिए और स्यूडोगाउट के लक्षणों को कम करने के लिए बर्फ से सिंकाई करनी चाहिए। इसके अलावा नियमित एक्सरसाइज करने से भी दर्द और सूजन से राहत मिलती है। निम्न फूड्स में कैल्शिय की अधिक मात्रा पाई जाती है:

  • दूध
  • सेब
  • सोयाबीन
  • ब्रोकली

इस संबंध में आप अपने डॉक्टर से संपर्क करें। क्योंकि आपके स्वास्थ्य की स्थिति देख कर ही डॉक्टर आपको उपचार बता सकते हैं।

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