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आपकी मुस्कुराहट में कहीं दाग न बन जाएं आपके दांत, ऐसे रखें ख्याल!

के द्वारा मेडिकली रिव्यूड डॉ. प्रणाली पाटील · फार्मेसी · Hello Swasthya


Bhawana Awasthi द्वारा लिखित · अपडेटेड 19/03/2021

आपकी मुस्कुराहट में कहीं दाग न बन जाएं आपके दांत, ऐसे रखें ख्याल!

चमकते मोती जैसे सफेद दांत आखिर किसे पसंद नहीं आते हैं। खूबसूरत दांत जहां आपकी मुस्कान को खूबसूरत बना देते हैं वहीं हेल्दी टीथ (Healthy teeth) खाने-पीने के दौरान होने वाली सेंसिटीविटी से आपको बचाते हैं। अगर दांतों की देखभाल ठीक तरह से न की जाए, तो दांतों के रोग आपको परेशान कर सकते हैं। डेंटल कंडीशन न सिर्फ आपके खानपान के दौरान समस्या पैदा करती है, बल्कि ये शरीर के दूसरे अंगों को भी नुकसान पहुंचा सकती है। आमतौर पर लोग दांतों की बीमारी (Dental Conditions) को बहुत हल्के में लेते हैं लेकिन यहीं बीमारी आपके शरीर को संक्रमित कर सकती है। दांतों को देखभाल उम्र बढ़ने के साथ नहीं बल्कि बचपन से ही करनी चाहिए। इस आर्टिकल के माध्यम से हम आपको दांतों के रोग (Dental Conditions) के बारे में जानकारी देंगे और बताएंगे कि कौन-से रोग आपके दांतों को बीमार बना सकते हैं।

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दांतों के रोग (Dental Conditions) किस कारण से होते हैं?

दांतों के रोग के बारे में जानने से पहले आपको दांतों की संरचना के बारे में जानना भी बेहत जरूरी है। दांत हार्ड, बोनलाइक मटीरियल से मिलकर बने होते हैं। टीथ के चार भाग होते हैं। पहला भाग इनेमल होता है, जो दातों का हार्ड सर्फिस होता है। डेंटिन इनेमल के अंदर का पीला भाग होता है। सीमेंटम हार्ड टिशू होते हैं, जो रूट को कवर करते हैं और दांतों को एक स्थान में रखने का काम करते हैं। वहीं पल्प टूथ के सेंटर के कनेक्टिव टिशू होते हैं जिनमें नर्व सेल्स और ब्लड वैसल्स होती है। खाने में, बोलने के दौरान और मुस्कराने के दौरान दांत अहम भूमिका निभाते हैं। दांतों में होने वाली समस्याओं के कारण दांत अस्वस्थ्य हो जाते हैं और बीमारी का कारण बन सकते हैं। जानिए दातों को कौन-सी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।

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दांतों की क्षति (Tooth decay)

दांतों के रोग

जब दांतों की इनेमल खराब होने लगती है, तो ये बच्चों से लेकर बुजुर्गों में समस्या खड़ी कर देती है। दांतों की क्षति बैक्टीरिया के कारण बनी परत होती है। मीठा खाने पर बैक्टीरिया प्लाक में एसिड बनाता है, जो दांतों के इनेमल पर हमला करता है। प्लाक का चिपचिपापन एसिड को दांतों से चिपकाएं रखता है। इस कारण दांतों का इनेमल कमजोर पड़ने लगता है और टूट जाता है। इस कारण से कैविटी (Cavity) बन जाती है। बच्चों में कैविटी की समस्या (Cavity problem in children) आम होती है। फिलिंग की हेल्प से कैविटी से छुटकारा पाया जा सकता है। समय के साथ ही फिलिंग कमजोर हो जाती है। इस कारण से फैक्चर और लीक हो सकता है। फिर दरारों में बैक्टीरिया जमा होकर दांतों को सड़ाने का काम करते हैं। दांतों में सड़न से बचने के लिए दांतों की सफाई  बहुत जरूरी है। दांतों की क्षति से बचने के लिए आपको निम्नलिखित बातों पर ध्यान देने की जरूरत है।

  • दांतों को साफ करने में फ्लोराइड युक्त टूथपेस्ट (Fluoride-rich toothpaste) का इस्तेमाल करें।
  • आप इंटरडेंटल क्लीनर से दांत साफ करवा सकते हैं।
  • खाने में स्नैक कम मात्रा में लें और पौष्टिक आहार का सेवन करें।
  • आप डॉक्टर से सप्लीमेंटल फ्लोराइड के बारे में बात करें।
  • ओरल एक्जामिनेशन (Oral examination) के लिए रेग्युलर बेस पर डेंटिस्ट के पास जरूर जाएं।

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टूथ एब्सेस (Tooth abscess)

टूथ एब्सेस पस पॉकेट को कहते हैं, जो दांतों में बैक्टीरियल इंफेक्शन की वजह से पैदा होता है। दांतों में विभिन्न कारणों से पस जमा हो सकता है। पेरियापिकल टूथ एब्सेस (Periapical abscess) दांतों की जड़ के किनारे मसूड़ों में होता है। जब डेंटल कैविटी का इलाज नहीं कराया जाता है, तो पेरियापिकल टूथ एब्सेस की संभावना बढ़ जाती है। डॉक्टर रूट कैनाल के जरिए दांत को ठीक करने की कोशिश करते हैं। बैक्टीरिया इंफेक्शन को खत्म करने के लिए ये प्रोसेस जरूरी होती है। अगर टूथ एब्सेस का इलाज न कराया जाए, तो ये जिंदगी भर के लिए परेशानी खड़ी कर सकता है।

टूथ एब्सेस होने पर दांत, जबड़े, कान और गर्दन में दर्द हो सकता है। ठंडा या फिर गर्म खाने पर दांतों में सेंसिटीविटी की समस्या हो सकती है। ऐसा खाने के दौरान भी महसूस हो सकता है। चेहरे आ गालों में सूजन, मुंह से बदबू आना (Bad smell), खट्टी डकारें आना आदि टूथ एब्सेस ( Tooth abscess) के लक्षण हो सकते हैं। अगर आपको इन लक्षणों का आभास हो, तो डेंटिस्ट से चेकअप कराना चाहिए। दातों की रोजाना सफाई रखने से आप डेंटल प्रॉब्लम से बच सकते हैं। अगर फिर भी कोई परेशानी हो, तो जांच जरूर कराएं। अगर टूथ एब्सेस की समस्या है, तो डॉक्टर एंटीबायोटिक्स दवाओं का सेवन करने की सलाह देते हैं। ये जैल, ओरल टैबलेट या कैप्सूल के रूप में लिया जाता है। टॉपिकल एंटीबायोटिक जैल सर्जिकल प्रोसेस के बाद लगाने की सलाह दी जाती है।

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इम्पैक्टेड टीथ (impacted teeth)

इम्पैक्टेड टूथ (Impacted teeth) उन दांतों को कहते हैं, जो गम से टूट गए हो। कभी-कभी दांत आंशिक रूप से ही प्रभावित होते हैं। आंशिक रूप से टूटे दांत भी समस्या पैदा कर सकते हैं। एक्स-रे की हेल्प से इम्पैक्टेड टूथ के बारे में आसानी से पता चल जाता है। वैसे तो इम्पैक्टेड टूथ के कारण किसी समस्या का सामना नहीं करना पड़ता है लेकिन कुछ केसेज में गम से ब्लीडिंग होना, सांसों से बदबू आना (Bad breath), खाने में स्वाद अच्छा न लगना, मुंह खोलने में दिक्कत लगना (Difficulty opening your mouth) आदि लक्षण दिख सकते हैं। जब मुंह में दांतों के लिए पर्याप्त जगह नहीं होती है, तो इम्पैक्टेड टूथ की समस्या हो सकती है। इम्पैक्टेड टूथ की समस्या जेनेटिक या फिर ऑर्थोडॉन्टिंक ट्रीटमेंट (Orthodontic treatment) के कारण भी हो सकता है। विसडम टीथ (Wisdom teeth) के इम्पैक्टेड होने के चांसेज अधिक होते हैं।

मैलोक्लूजन टीथ (Malocclusion of the Teeth)

दांतों के रोग

आपने देखा होगा कि कुछ बच्चों या वयस्कों के दांत टेढ़े होते हैं। मैलोक्लूजन टीथ के कारण दाढ़ एक दूसरे में सही से फिट नहीं होती है और साथ ही दांतों से संबंधित समस्याएं भी पैदा होती हैं। ऑर्थोडोन्टिस्ट टेढ़े-मेढ़े दांतों को एक सीध में लाने के लिए ब्रेसेस (Braces) का इस्तेमाल करने की सलाह देते हैं। दांतों की रिशेपिंग की मदद से भी दातों को एक सीध में लाने की कोशिश की जाती है। अगर किसी को साधारण मैलोक्लूजन की समस्या है, तो उसे ट्रीटमेंट की जरूरत नहीं होती है। अधिक टेढ़े-मेढ़े दांत मुंह में घाव का कारण बन सकते हैं। जबड़े का आकार ठीक करना आसान नहीं होता है, इसलिए सर्जरी की जरूरत पड़ सकती है। डॉक्टर एक्स-रे के माध्यम से तय करते हैं कि पेशेंट को कैसा ट्रीटमेंट देना है।

टूथ इंज्युरी (Tooth injuries)

जिस तरह से शरीर में चोट लग जाती है, ठीक उसी प्रकार से दांतों में भी इंज्युरी हो सकती है। बच्चों या वयस्कों में खेलने के दौरान या फिर अचानक से गिर जाने पर दांत टूट सकते हैं या इंज्युरी हो सकती है। जब दांतों में दरार पड़ जाती है या फिर दांत क्रेक हो जाते हैं, तो उनमें सेंसिटिविटी की समस्या हो जाती है। दांतों से ब्लीडिंग भी हो सकती है। ऐसे में तुरंत दांतों में फोल्डेड गॉज लगाने की जरूरत पड़ती है। सूजन (Swelling) और दर्द को कम करने के लिए ठंडा पानी पीना चाहिए। अगर दांत को हटाने की जरूरत पड़ती है, तो डॉक्टर बच्चे के दांत हटा सकते हैं। वयस्कों में भी यहीं प्रोसेस अपनायी जाती है। अगर ट्रीटमेंट न किया जाए, तो इंफेक्शन की समस्या हो सकती है।

डेंटल कंडीशंस (Dental Conditions) को कैसे डायग्नोज किया जाता है?

दांतों में किसी प्रकार की समस्या होने पर डॉक्टर पेशेंट से लक्षणों के बारे में जानकारी लेते हैं। दांतों में दर्द, मूंह से बदबू आना, मुंह में सूजन, दांतों से खून आना आदि दांतों से संबंधित बीमारियों के लक्षण हैं। डॉक्टर डेंटल इंस्ट्रूमेंट की हेल्प से दांतों की जांच करते हैं और विभिन्न स्थान में दातों की जांच करते हैं। कुछ केसेज में डेंटल एक्स-रे की जरूरत पड़ती है। डेंटल एक्स-रे की हेल्प से बैक्टीरिया के इंफेक्शन के बारे में जानकारी मिलती है। इंफेक्शन दांतों में कितना फैल चुका है, ये डेंटल एक्स-रे से पता चल जाता है। डॉक्टर जांच के दौरान निम्न भागों की भी जांच कर सकते हैं।

  • दांत (Teeth)
  • मुंह (Mouth)
  • गले की जांच ( Throat)
  • जीभ (Tongue)
  • गाल (Cheeks)
  • जबड़े की जांच (Jaw)
  • और पढ़ें: दांतों से टार्टर की सफाई के आसान 6 घरेलू उपाय

    दांतों के रोग (Dental Conditions) से रहना है दूर, तो इन बातों का रखें हमेशा ध्यान

    दांतों के रोग (Dental Conditions) से आप बच सकते हैं। आपको अपने दांतों की अच्छी सेहत के लिए ओरल हाइजीन का ख्याल रखना होगा, तभी आपके दांत स्वस्थ्य रह सकते हैं। जानिए दांतों के अच्छे स्वास्थ्य के लिए किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।

    • दिन में दो बार फ्लोराइड युक्त टूथपेस्ट (Fluoride Toothpaste) का इस्तेमाल दांत साफ करने के लिए करें।
    • आपको हर छह माह में डेंटिस्ट से दांतों की सफाई करानी चाहिए।
    • तंम्बाकू युक्त प्रोडक्ट का सेवन बंद कर दें। ये दांतों को नुकसान पहुंचाते हैं।
    • खाने में हाय फाइबर युक्त भोजन (Fiber rich food) का सेवन करें। लो शुगर डायट दांतों के लिए अच्छी होती है।
    • स्वीटनर्स और मीठे स्नैक्स का सेवन अधिक न करें।
    • फ्लेवर्ड योगर्ट, पास्ता सॉस, सोडा, मफिन्स, स्पोर्ट्स ड्रिंक्स (Sports drinks) आदि दांतों के स्वास्थ्य के लिए अच्छे नहीं होते हैं।
    • हॉर्मोनल चेंजेस भीओरल हेल्थ (Oral health) को नुकसान पहुंचा सकते हैं। महिलाओं को समय-समय पर दांतों की जांच जरूर करानी चाहिए।
    • प्रेग्नेंसी के दौरान भी आपको दांतों की समस्या का तुरंत इलाज कराना चाहिए।
    • जिन लोगों को डायबिटीज (Diabetes) है, उन्हें ओरल इंफेक्शन की अधिक संभावना रहती है। ऐसे में डेंटिस्ट (Dentist) से बात जरूर करें।

    दांतों की अच्छी सेहत के लिए रोजाना दांतों की सफाई, खानपान के दौरान सावधानी आदि बातों का ध्यान रख इन्हें स्वस्थ्य रखा जा सकता है। अगर आप कुछ बातों का ध्यान रखेंगे, तो आप डेंटन कंडीशन से बच सकते हैं। आप दांतों के रोग के बारे में अधिक जानकारी के लिए डेंटिस्ट से संपर्क कर सकते हैं। आप स्वास्थ्य संबंधी अधिक जानकारी के लिए हैलो स्वास्थ्य की वेबसाइट विजिट कर सकते हैं। अगर आपके मन में कोई प्रश्न है, तो हैलो स्वास्थ्य के फेसबुक पेज में आप कमेंट बॉक्स में प्रश्न पूछ सकते हैं और अन्य लोगों के साथ साझा कर सकते हैं।

    डिस्क्लेमर

    हैलो हेल्थ ग्रुप हेल्थ सलाह, निदान और इलाज इत्यादि सेवाएं नहीं देता।

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