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शिशु की सुरक्षा चाहते हैं तो इन छोटी-छोटी बातों को न करें इग्नोर

शिशु की सुरक्षा चाहते हैं तो इन छोटी-छोटी बातों को न करें इग्नोर

शिशु की सुरक्षा एक चुनौतीपूर्ण कार्य है। उसे गोद में लेते वक्त लोग कुछ महत्वपूर्ण बातों को भूल जाते हैं। जिसमें शिशु को किस करना, बिना हाथ धोए उसे गोद में लेना और खिलाते वक्त नाखूनों का बड़ा और साफ न होना। ये लापरवाही इंफेक्शन का कारण बन सकती हैं। कुछ मामले इतने गंभीर हो सकते हैं कि इंफेक्शन होने पर शिशु की मृत्यु तक हो जाती है। हम इस आर्टिकल में आपको कुछ ऐसी बातों के बारे में बताने जा रहे हैं। जिनका आपको शिशु की सुरक्षा को देखते हुए विशेष ध्यान रखना चाहिए।

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शिशु की सुरक्षा के लिए उसे होंठ पर किस ना करें

ये बात जरूर याद रखें कि शिशु की सुरक्षा के लिए उसके होंठ या इसके आसपास हिस्से पर किस न करें क्योंकि किस करने से उन्हें हर्पीस हो सकता है। यह दो प्रकार का होता है। पहला ओरल हर्पीस वायरस (HSV-1) दूसरा जेनेटल हर्पीस वायरस (HSV-2)। सेंटर्स फोर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (सीडीसी) के मुताबिक, आधी से ज्यादा आबादी को ओरल हर्पीस वायरस का इंफेक्शन होता है।

वहीं, तीन महीने से कम आयु के शिशु का इम्यून सिस्टम इस वायरस से लड़ने में सक्षम नहीं होता है। शिशु के होंठ या इसके आसपास के हिस्से पर किस करने से उन्हें इंफेक्शन हो सकता है, जिससे उन्हें कोल्ड सॉर (छाले) हो सकते हैं।

अमेरिकन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स (एएपी) के मुताबिक, बड़े बच्चे और व्यस्कों की बॉडी में हर्पीस से लड़ने की क्षमता होती है। इनमें हर्पीस का इंफेक्शन समय के साथ ठीक हो जाता है लेकिन, शिशु और विशेषकर नवजात शिशु को हर्पीस होने की स्थिति में अस्पताल में भर्ती करना पड़ता है।

ओरल हर्पीस (HSV-1) का वायरस शिशु को किस करते वक्त उसकी बॉडी में फैल सकता है। हर्पीस का वायरस एक बार बॉडी में जाने पर यह आजीवन रहता है। यह मौत का कारण भी बन सकता है। इस बात को शिशु की सुरक्षा को देखते हुए गांठ बांध लें।

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शिशु की सुरक्षा के लिए उसे गोद में लेने या उसके साथ खेलने से पहले नाखून काटें

सीडीसी के मुताबिक, हांथों की उंगलियों के नाखून के नीचे बैक्टीरिया और गंदगी जमा हो जाती है। इससे पिनवॉर्म जैसे इंफेक्शन फैलते हैं। इस स्थिति को देखते हुए आपको उंगलियों के नाखून छोटे रखने चाहिए। नाखून के नीचे के हिस्से को नियमित रूप से साफ किया जाना चाहिए। नाखून के लंबे रहने से इनमें पैदा होने वाले बैक्टीरिया शिशु तक पहुंच सकते हैं। शिशु की सुरक्षा को देखते हुए आपको इस बात को इग्नोर नहीं करना चाहिए।

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शिशु की सुरक्षा के लिए हाथ साफ करें

सेंटर्स फोर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन के मुताबिक, लोगों या जानवर के पूप से सालमोनेला, ई- कोली 0157 और नोरोवायरस फैलते हैं। यह वायरस आपके हांथों में संपर्क में आने के बाद शिशु तक पहुंच सकते हैं। इन वायरस से शिशु को डायरिया हो सकता है। इन वायरस से शिशु में रेस्पिरेटरी इंफेक्शन्स जैसे एडीनोवायरस और हाथ और पैर की बीमारियां फैल सकती हैं। अक्सर यह वायरस डायपर बदलने या टॉयलेट से फैलता है। इसलिए शिशु को कभी भी गोद में उठाने से पहले अपने हाथों को साफ कर लें। ऐसा करके आप शिशु की सुरक्षा का घेरा मजबूत कर रहे हैं।

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शिशु की सुरक्षा के लिए स्मोकिंग ना करें

शिशु को गोद में लेते वक्त या गोद में लेने के बाद स्मोकिंग न करें। नवजात शिशु का प्रतिरक्षा तंत्र बहुत ही कमजोर होता है। यहां तक कि आपको शिशु के आसपास स्मोकिंग नहीं करनी है। इससे शिशु को रेस्पिरेटरी वायरस से संबंधित समस्याएं हो सकती हैं।

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शिशु की सुरक्षा के लिए परफ्यूम का इस्तेमाल ना करें

शिशु की सुरक्षा के लिए इस बात का विशेष ध्यान रखना चाहिए। शिशु को गोद में लेते वक्त यह सुनिश्चित करें कि आपने परफ्यूम का इस्तेमाल नहीं किया है। नवजात शिशु की त्वचा और प्रतिरक्षा तंत्र बेहद ही संवेदनशील होता है। परफ्यूम के संपर्क में आने पर उसकी स्किन में एलर्जी हो सकती है। यहां तक कि उसे रैशेस भी हो सकते हैं। यह अतिसंवेदनशील नवजात शिशुओं में श्वसन संबंधी समस्याएं भी पैदा कर सकता है, जैसे कि एटोपिक अस्थमा।

शिशु की सुरक्षा के लिए स्लीपिंग पुजिशन का ध्यान रखें

शिशु का पीठ के बल सोना सबसे सुरक्षित माना जाता है। बच्चे को इस पुजिशन में नींद तो अच्छी आती ही है, साथ ही वह आरामदायक भी महसूस करता है। यूएस के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ चाइल्ड हेल्थ एंड ह्यूमन डेवलपमेंट के अनुसार ने पीठ के बल सोने को सबसे बेहतरीन पुजिशन बताया है। छोटे नैप या गहरी नींद के लिए यह पुजिशन ठीक है। सेफ बेबी स्लीप के लिए पेट के बल सोना सही नहीं होता है। ऐसे में बच्चे का शरीर नीचे की ओर दबता है। मुख्य रूप से जबड़ा दबता है। इससे नवजात को सांस लेने में परेशानी हो सकती है और घुटन महसूस हो सकती है। अगर बच्चा गैस्ट्रोएसोफेगल रिफ्लक्स (gastroesophageal reflux) या अन्य पेट की परेशानी से ग्रस्त है तो बच्चे को पेट के बल न सुलाएं।

शिशु की सुरक्षा के लिए बच्चे के साथ में सोएं

अमेरिकन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स के अनुसार सेफ बेबी स्लीप के लिए शिशुओं को जन्म के करीब एक से दो साल तक माता-पिता के साथ सोना चाहिए। आकड़ों के अनुसार ऐसा करने से बच्चों में इंफेंट डेथ सिंड्रोम (SIDS) के चांस 50 प्रतिशत तक कम हो जाते हैं। साथ ही एक बात और बता दें कि बच्चे को सोने के लिए अपने स्पेस की जरूरत होती है। अगर पेरेंट्स में कोई भी ध्रूमपान करता है तो बेबी सेफ स्लीप पॉसिबल नहीं हो पाता है। ऐसे में बच्चों को सोते समय खतरा हो सकता है। सांस लेने में जोखिम बढ़ जाता है। अगर आप शिशु की सुरक्षा चाहते हैं तो स्मोकिंग से दूरी बना लें।

शिशु की देखभाल में इन छोटी सी बातों की अनदेखी कई बार गंभीर समस्याएं पैदा कर देती हैं। ऐसे में बेहतर होगा कि आप अपने स्तर पर इन बातों का पालन करें। इससे शिशु की सुरक्षा की संभावना और बढ़ेगी और वह स्वस्थ और मस्त रहेगा। हम उम्मीद करते हैं कि शिशु की सुरक्षा से संबंधित यह आर्टिकल आपके लिए उपयोगी साबित होगा। किसी प्रकार की शंका होने पर डॉक्टर या पिड्रियाटिक से संपर्क करें। हैलो हेल्थ ग्रुप किसी प्रकार की चिकित्सा सलाह, निदान और उपचार प्रदान नहीं करता।

हैलो हेल्थ ग्रुप हेल्थ सलाह, निदान और इलाज इत्यादि सेवाएं नहीं देता।

सूत्र

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लेखक की तस्वीर
Sunil Kumar द्वारा लिखित आखिरी अपडेट 17/08/2020 को
Mayank Khandelwal के द्वारा एक्स्पर्टली रिव्यूड