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बेबी फूड प्रोडक्ट खरीदने से पहले रखें इन बातों का ध्यान

बेबी फूड प्रोडक्ट खरीदने से पहले रखें इन बातों का ध्यान

जब बात बच्चों के स्वास्थ्य की आती है तो माता-पिता के लिए उसकी सुरक्षा सबसे बड़ी चिंता होती है। बाहर के खाने से बच्चाें को किसी भी तरह का संक्रमण होने का खतरा रहता है। खाने में जरा सी भी लापरवाही फूड पॉइजनिंग की स्थिती बना सकती है, जिसके गंभीर परिणाम भी हो सकते हैं। बच्चे को कब क्या खिलाएं इसके लिए माता-पिता को बहुत सतर्क रहने की जरूरत होती है। खासतौर पर बेबी फूड प्रोडक्ट खरीदते समय। आइए जानते हैं कुछ टिप्स जो बच्चों को सुरक्षित खाना खिलाने में आपकी मदद कर सकते हैं।

छोटे बच्चों में वयस्कों की तुलना में कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली (Immune System) होती है, जो उनके लिए फूड पॉइजनिंग को खतरनाक बनाती है। रोग नियंत्रण और रोकथाम केंद्र रिपोर्ट के अनुसार, पांच साल से कम उम्र के बच्चों को संक्रमण जैसे किडनी का फेल होने का खतरा ज्यादा रहता है। ऐसी किसी भी परिस्थिति का सामना न करना पड़े इसके लिए खाद्य सुरक्षा दिशानिर्देश को ध्यान में रखना चाहिए।

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शिशुओं एवं छोटे बच्चों हेतु उपयुक्त आहार पद्धतियां (Baby Food)

विश्व स्वास्थ्य संगठन 2002 के अनुसार, बच्चे के स्वस्थ विकास के लिए स्तनपान उचित माध्यम है। महिलाओं के लिए यह रिप्रोडक्टिव प्रोसेस का ही ये हिस्सा है जो उनके स्वास्थ्य के लिए भी महत्वपूर्ण है। हर मां को अपने बच्चे को पैदा होने के छह महीने तक अपना दूध उसे पीलाना चाहिए। इससे उनमें विकास होता है साथ ही उनके स्वास्थ्य के लिए भी ये फायदेमंद होता है। बच्चों की न्यूट्रिशनल आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए उन्हें दो साल या उससे अधिक आयु तक स्तनपान के साथ पोषण युक्त भोजन का सेवन कराना चाहिए।

खाद्य सुरक्षा के दिशानिर्देश का उपयोग करके, आप खाद्य विषाक्तता (Food Poisoning) फैलाने के जोखिम को कम करने में मदद कर सकते हैं।

खाद्य सुरक्षा दिशानिर्देश: छोटे बच्चों को खिलाते समय इनसे बचें(When feeding young children, avoid) :

  • सभी खाद्य और पेय पदार्थ जिसमें कच्चा दूध और जूस भी शामिल हैं
  • कच्चे और अधपके अंडे
  • कच्चा या अधपका नॉन वेज
  • कच्ची और अधपकी मछली
  • शहद

बच्चे के पहले जन्मदिन तक ये सब चीजें उसे न दें क्योंकि ये विषैले बैक्टीरिया को परेशान कर बोटुलिज्म(botulism) का कारण बन सकते हैं। ये खाने पीने से होने वाली एक गंभीर बीमारी है, जो मिट्टी में होने वाले जीवाणु से होती है।

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बेबी फूड से हो सकता है चोकिंग का खतरा

कई बार खाने के कारण छोटे बच्चों को भी चोक होने का खतरा होता है। घुटन से बचने के लिए, इन खाद्य पदार्थों को चार साल से छोटे बच्चों को न दें:

नोट: सब्जियां, जैसे कि गाजर और मकई, पकाया और काटा जा सकता है। आप इनका उपयोग बच्चों को खिलाने में कर सकते हैं।

बेबी फूड बनाने वाली कई बड़ी कंपनियां इन्हें बनाने के लिए सभी तरह के हाइजीन और सुरक्षा मापदंडों का ख्याल रखती हैं लेकिन बेबी फूड के बनने के बाद फैक्ट्री से बाहर आने के बाद इन कंपनियों का इन बेबी फूड पर कोई नियत्रंण नहीं होता है। मतलब कि इन्हें कहां स्टॉक किया गया है या इन्हें इन बेबी फूड को ट्रांस्पोर्ट करने समय टेम्परेचर का ख्याल रखा गया है कि नहीं। ऐसे में बेबी फूड खरीदते समय आपको कुछ सावधानियां बरतने की जरूरत होती है।

  • बेबी फूड प्रोडक्ट के लेबल को अच्छे से पढ़ें और यह सुनिश्चित कर लें कि इस बेबी फूड को कब मेन्युफेक्चर किया गया था।
  • इसके अलावा यह भी पढ़ लें कि बेबी फूड की एक्सपायरी डेट क्या है
  • इसके अलावा लेबल पर यह भी देखें कि इस बेबी फूड को बनाते समय किस कृत्रिम रंग या आर्टिफिशियल फ्लेवर्स का इस्तेमाल किया गया है।
  • बेबी फूड खरीदने से पहले देख लें कि कहीं उसका पैकेट डैमेज तो नहीं हैं मतलब कहीं से लीक या फूला हुआ तो नहीं है। ऐसा होने का मतलब है कि बेबी फूड दूषित हो चुका होगा।

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होममेड बेबी फूड भी है विकल्प (Homemade bay food option)

बच्चे को स्तनपान या फॉर्मूला से सॉलिड फूड पर सिफ्ट करने के दौरान नए पेरेंट्स की परेशानी और बढ़ जाती हैं। ऐसे में उनके पास एक विकल्प होता है कि वे बच्चों को बाजार में उपलब्ध बेबी फूड खिलाएं या फिर उनके लिए होममेड बेबी फूड घर पर ही तैयार करें। लेकिन घर पर बेबी फूड तैयार करने में काफी समय जाता है। लेकिन इसमें आप अपने लाडले के लिए पोषण के साथ-साथ हाइजीन का भी पूरा ध्यान रख सकते हैं। होममेड बेबी फूड के कई फायदे भी हैं:

घर पर बना बेबी फूड होता है कैमिकल फ्री

घर पर बनाए गए बेबी फूड मेंं ज्यादातर फल, सब्जियां का इस्तेमाल और अनाज का इस्तेमाल किया जाता है। साथ ही इस बेबी फूड को रिफाईन नहीं किया जाता जैसे कि रेडीमेड फूड को किया जाता है। यही कारण है कि इसमें कैमिकल्स नहीं होते हैं।

घर पर तैयार किए बेबी फूड में मिलती है वेरायटी (Best Organic Baby Foods)

पैकेज फूड में अलग-अलग टेक्चर और फ्लेवर उपलब्ध होते हैं, इसके बावजूद इसके ऑप्शन लिमिटेड होते हैं। इस कारण बच्चों को दूध और फॉर्मूला मिल्क से सॉलिड फूड पर शिफ्ट करने के लिए पैकेज फूड में कम ही ऑप्शन बचते हैं। जबकि, होममेड बेबी फूड में बहुत से ऑप्शन होते हैं और ये हर बार अलग-अलग टेस्ट का हो सकता है।

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इस बेबी फूड (Babyfood) से बच्चे को मिलता है भरपूर पोषण

होममेड फूड हमेशा बाहर के पैकेज फूड से अधिक पोषण देता है। अपने बच्चे को होममेड बेबी फूड देने के लिए आप सही समय के अनुसार पोषण वाला खाना दे सकते हैं। पैकेज फूड को हर बार गरम करना पड़ता है, जिससे कीटाणुओं को खत्म किया जा सकता है। लेकिन, ऐसा करने से खाने के पोषक तत्व कम हो जाते हैं।

बेबी फूड की जगह क्या हैं विकल्प

बेबी राइस सारीयल का उपयोग अक्सर बच्चे के पहले ठोस भोजन के रुप में किया जाता है क्योंकि यह स्वाद में हल्का, पचाने में आसान होता है और इसमें आयरन भी भी प्रचुर मात्रा होती है। रिपोर्ट के लेखकों ने ऐसे विकल्पों का सुझाव दिया, जिनमें आर्सेनिक की मात्रा कम हो जैसे ओटमील और मल्टीग्रेन सीरीयल। उन्होंने पफ स्नैक्स के बजाए चावल-मुक्त स्नैक्स इस्तेमाल करने का सुझाव दिया। फ्रूट जूस, जिसमें आर्सेनिक और शीशा होता है उसके बदले शोधकर्ताओं ने दूध और पानी के विकल्प बेहतर बताया।

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फ्रूट्स (Fruits) से करें शुरूआत

बेबी फूड या बच्चे का खाना आसानी से आप घर में भी तैयार कर सकती हैं। जब बच्चा छह माह का हो जाता है तो उसे दाल का पानी और चावल का माड़ दिया जा सकता है। आप धीमे-धीमे ही फूड देने की शुरुआत करें। आप बच्चे को खाने में फल में केला दे सकते हैं। केले तो अच्छे से मैश करने के बाद आप उसे थोड़ा-थोड़ा करके चम्मच से दे सकते हैं। बच्चे मैश केले को बड़े चाव से खाते हैं। अगर आप बच्चे को सेब खिलाना चाहते हैं तो पहले सेब का छिलका निकाल लें और फिर उसे थोड़ा उबाल लें ताकि सेब अच्छी तरह से मैश हो जाए। बच्चे को जबरदस्ती खिलाने का प्रयास न करें। छह माह के बाद बच्चा धीरे-धीरे ही फूड खाना शुरू करता है। जब बच्चा एक से दो साल का हो जाए तो आप बच्चे के लिए घर में ही हेल्दी बेबी फूड तैयार कर सकती हैं।

सभी न्यूट्रिएंट्स को करें शामिल (Nutrients and the role)

एक से दो साल के बच्चे दूध के साथ ही फूड लेना भी शुरू कर देते हैं। जब बच्चे खाना शुरू करते हैं तो दूध की मात्रा कम लेते हैं। यानी बच्चों को दिनभर ऐसे फूड देना चाहिए जो कि उन्हें पोषक तत्वों से भरपूर हो। आप खाने में बच्चे के लिए दाल की खिचड़ी (अच्छी तरह से पकी हुई), गाजर उबला और मैश किया हुआ, अच्छ तरह से पकी हुई मीठी या नमकीन दलिया आदि शामिल कर सकते हैं। एक बात का ध्यान रखें कि बाहर से बेबी फूड तभी खरीदें, जब आपको घर में बनाने में किसी प्रकार की समस्या हो। घर का खाना बच्चे के लिए बेहतर होता है। अगर आप किसी जर्नी में जा रही हैं तो बेबी फूड का इस्तेमाल आपके लिए सुविधाजनक हो सकता है। आप इस बारे में अधिक जानकारी के लिए डॉक्टर से जानकारी ले सकते हैं।

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हैलो हेल्थ ग्रुप हेल्थ सलाह, निदान और इलाज इत्यादि सेवाएं नहीं देता।

सूत्र

Baby food https://www.cdc.gov/nutrition/infantandtoddlernutrition/foods-and-drinks/index.html/Accessed on 12/12/2019

Healthy Baby Food/ https://www.fhs.gov.hk/english/health_info/child/14727.html/Accessed on 12/12/2019

Food Safety Tips for Young Children/https://www.eatright.org/homefoodsafety/safety-tips/food-poisoning/food-safety-tips-for-young-children/Accessed on 12/12/2019

Food Safety for Your Family/https://kidshealth.org/en/parents/food-safety.html/Accessed on 12/12/2019

FAQ: Introducing Your Baby to Solid Foods/https://www.ucsfbenioffchildrens.org/education/feeding_your_baby_solid_foods//Accessed on 12/12/2019

 

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Nikhil Kumar द्वारा लिखित आखिरी अपडेट 25/02/2021 को
डॉ. प्रणाली पाटील के द्वारा मेडिकली रिव्यूड
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