शिशु में विजन डेवलपमेंट से जुड़ी इन बातों को हर पेरेंट्स को जानना है जरूरी

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अपडेट डेट मार्च 26, 2020 . 4 मिनट में पढ़ें
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शिशु में विजन डेवलपमेंट का अर्थ है कि नवजात बच्चा कब से देख सकता है? शिशु गर्भ में रहे या जन्म हो चुका हो दोनों ही स्थिति में ध्यान रखना बेहद आवश्यक होता है। नवजात के विजन के विकास से जुड़ी बातों को जब हमने एक न्यू मॉम बनी 31 साल की प्रिया वर्मा से जानने की कोशिश की तो उन्होंने बताया कि “शिशु के जन्म के बाद उसके शारीरिक विकास पर ध्यान देना आवश्यक होता है। उसकी बॉडी लैंग्वेज को ठीक तरह से समझने की जरूरत पड़ती है क्योंकि वह बोल नहीं सकता है। मुझे शिशु में विजन डेवलपमेंट की जानकारी नहीं थी, लेकिन मुझे मेरे डॉक्टर से जानकारी मिली कि जन्म लेने बाद बच्चे तुरंत ठीक तरह से देख नहीं सकते।

उसके बाद मैंने अपने बच्चे को कब-कब दूध पिलाना चाहिए, उसे कैसे ठीक तरह से सुलाना चाहिए और वह आवाज  को ठीक से सुनता है या नहीं इन सभी महत्वपूर्ण बातों को ध्यान में रखने के साथ-साथ शिशु में विजन डेवलपमेंट हो रहा है या नहीं यह बात भी समझी।” आज इस आर्टिकल के जरिए समझने की कोशिश करेंगे की शिशु में विजन डेवलपमेंट कैसे होता है?

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शिशु में विजन डेवलपमेंट कब शुरू होता है?

ऐसा नहीं है कि शिशु जन्म के बाद नहीं देख सकता है बल्कि शिशु में विजन डेवलपमेंट अन्य शारीरिक विकास की तरह ही होता है। नेशनल सेंटर फॉर बायोटक्नोलॉजी इनफॉर्मेशन (NCBI) के अनुसार शिशु जन्म के बाद आसानी से देख सकता है और अगर आंखों से जुड़ी कोई परेशानी होती है, तो उसे छह महीने के शिशु को देखकर आसानी से समझा जा सकता है।

इसके साथ ही यह भी पेरेंट्स को समझना बेहद जरूरी है कि शिशु में विजन डेवलपमेंट जन्म लेने के कुछ महीने बाद तक होता है। कुछ शोध और शिशु के स्वास्थ्य से जुड़े एक्सपर्ट के अनुसार जन्म लेने के बाद शिशु अपनी आंखों की दूरी से आठ से दस इंच की वस्तु को देख सकते हैं, लेकिन वह एक समय पर अन्य वस्तुओं पर ध्यान केंद्रित करने में सक्षम नहीं हो पाता है। अगर इसे आसान शब्दों में समझा जाए तो शिशु के जन्म के बाद उनके मस्तिष्क का विकास होता है ठीक उसी तरह शिशु में विजन डेवलपमेंट भी होता है।

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शिशु जन्म के बाद किन-किन रंगों को देख सकता है?

शिशु में विजन डेवलपमेंट जन्म के बाद से कुछ महीनों तक लगातार होता रहता है और शुरुआती दिनों में वह सिर्फ तीन रंगों को ही देख सकता है। रिसर्च के अनुसार जन्म लेने वाला शिशु सिर्फ सफेद, भूरे और काले रंग को देख पाता है। दरअसल जैसे-जैसे शिशु के आंखों की रेटिना विकसित होती है वैसे-वैसे ही आंखों की देखने की क्षमता विकसित होने लगती है और शिशु आसानी से देखने लगता है। इस दौरान अगर शिशु को आंखों से जुड़ी कोई परेशानी समझ आती है, तो जल्द से जल्द डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

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शिशु में विजन डेवलपमेंट क्या जन्म के बाद ही शुरू होता है?

ऐसा नहीं है कि शिशु में विजन डेवलपमेंट जन्म के बाद ही शुरू हो। दरअसल गर्भ ठहरने के छठे हफ्ते के बाद ही आंख की संरचना बन जाती है। गर्भावस्था के 27वें हफ्ते में पहुंचने के बाद शिशु में देखने की क्षमता विकसित हो जाती है। अगर गर्भ पर रोशनी पड़ती है, तो गर्भ में पल रहे शिशु में मूवमेंट हो सकते हैं या उनकी पलकें झपक सकती हैं।

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शिशु में विजन डेवलपमेंट कैसे होता है?

पहले चार महीने के शिशु में विजन डेवलपमेंट:-

यह जानकार आपको हैरानी भी हो सकती है कि जन्म के बाद शुरुआती दो महीने में शिशु की दोनों आंखें एक साथ ठीक तरह से काम नहीं कर सकती हैं। कई बार क्रॉस्ड आई जैसे लक्षण भी समझ आ सकते हैं। ऐसी स्थिति में पेरेंट्स को परेशान नहीं होना चाहिए क्योंकि यह आने वाले कुछ महीनों में ठीक हो जाते हैं। हालांकि, अगर आपके शिशु की एक आंख अक्सर नाक की ओर आ जाती है, तो शिशु रोग विशेषज्ञ से संपर्क करना चाहिए। वहीं जन्म के दो महीने बाद शिशु किसी भी वस्तु की ओर आसानी से अपनी नजरें डाल सकता है। तीन महीने का शिशु हाथों के मूवमेंट के अनुसार अपनी आंखें इधर-उधर करने में सक्षम होने लगते हैं। तीन महीने का शिशु किसी भी वस्तु पर ध्यान केंद्रित करने लगता है। चौथे महीने पूरे होने के साथ-साथ दोनों आंखों से ठीक तरह से देख पाता है।

पांच से आठ महीने के शिशु में विजन डेवलपमेंट:-

पांच से आठ महीने के शिशु दूर की वस्तुओं को आराम से देख पाते हैं और हर रंग पर भी वह ध्यान केंद्रित कर लेते हैं। पांच से आठ महीने का शिशु वस्तुओं को पहचान सकते हैं और उसे चीजें या खिलौना भी याद रहता है। पांच से आठ महीने का शिशु चेहरे को भी पहचानने लगता है। आठ महीने का शिशु सफेद, भूरा और काले रंग के साथ-साथ अन्य रंगों को भी अच्छी तरह से पहचानता है। आठ महीना का शिशु घुटने के बल भी चलने लगता है, जो शिशु में विजन डेवलपमेंट को और बेहतर करने में मददगार होता है। चलने के साथ-साथ बच्चा वस्तुओं पर भी ध्यान केंद्रित करने लगता है।

नौ से बारह महीने के शिशु में विजन डेवलपमेंट:-

नौ महीने के बच्चे या नौ महीने के शिशु में विजन डेवलपमेंट ठीक तरह से होने पर यह बच्चे दूरी (डिस्टेंस) को भी समझने लगते हैं (कौन सी वस्तु उनसे कितनी दूर है)। इसका सबसे अच्छा उदाहरण है कि बच्चे किसी भी वस्तु के सहारे खड़े होने की कोशिश करने लगते हैं। 10 महीने का शिशु बेहतर होती आंखों से देखने की क्षमता के कारण ही किसी भी वस्तु को पकड़ने लगता है। 12 महीने तक पहुंचते-पहुंचते मस्तिष्क के विकास के साथ ही आंखें ठीक तरह से काम करने लगती हैं।

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इन बातों का भी रखें ध्यान

  • अगर शिशु की आंखें सामान्य से ज्यादा अंदर या बाहर की ओर होती हैं।
  • किसी भी वस्तु को वह पकड़ने में सक्षम नहीं हो पा रहा है।
  • कोई भी वस्तु जो आप उसे दिखा रहें हैं, वह उसे नहीं देख पा रहा है।
  • इन ऊपर बताई गई स्थितियों के साथ-साथ अगर कोई परेशानी समझ आती है, तो डॉक्टर से सलाह लें।

अगर आप शिशु में विजन डेवलपमेंट जुड़े किसी तरह के कोई सवाल का जवाब जानना चाहते हैं तो विशेषज्ञों से समझना बेहतर होगा। हैलो हेल्थ ग्रुप किसी भी तरह की मेडिकल एडवाइस, इलाज और जांच की सलाह नहीं देता है।

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