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कहीं आपके बच्चे को तो नहीं है चाइल्ड अल्जाइमर!

कहीं आपके बच्चे को तो नहीं है चाइल्ड अल्जाइमर!

कहीं आपका बच्चा अल्जाइमर से ग्रसित तो नहीं है? ऐसा सोचना गलत है कि भूलने की बीमारी सिर्फ बुजुर्गों को होती है। बच्चों में भी यह बीमारी होने लगी है। बच्चों और किशोरों को होने वाली बीमारी निमेंन पिक डिजीज-टाइप सी (NPC) को ही ‘चाइल्ड अल्जाइमर‘ (Child Alzheimer) कहते हैं। बच्चों में होने वाली इस डिजीज के बारे में चिल्ड्रेन फर्स्ट की हेड और मनोवैज्ञानिक अंकिता खन्ना ने हैलो स्वास्थ्य को बताया कि बच्चों का अल्जाइमर क्या है? ये कैसे होता है और इसके लक्षण क्या हैं?

क्या है चाइल्ड अल्जाइमर? (Child Alzheimer)

निमेंन पिक डिजीज-टाइप सी एक आनुवंशिक बीमारी है। जो लिपिड के उपापचयी क्रिया को प्रभावित करती है। हमारी कोशिकाओं (Cells) में एक थैली होती है, जिसे लाइसोसोम (Lysosome) कहते हैं। लाइसोसोम का काम कोलेस्ट्रॉल और शुगर को तोड़कर हमारे शरीर के लिए तैयार करना है। इस बीमारी में लाइसोसोम अपना काम नहीं कर पाता है तो पोषक तत्व कोशिकाओं में इकठ्ठा होने लगते हैं। बाद में कोलेस्ट्रॉल और दूसरे फैटी पदार्थ लिवर, प्लीहा (Spleen), बोन मैरो, और मस्तिष्क (Brain) में बनने लगते हैं। जिसके बाद ब्रेन की कोशिकाओं के बीच का जुड़ाव कम होने लगता है। जिससे व्यक्ति का शरीर और ब्रेन आपस में सामंजस्य नहीं बैठा पाता है। ऐसे में याददाश्त कमजोर होने लगती है। इन्हीं सबको बच्चों का अल्जाइमर कहते हैं। जिसके बाद पीड़ित बच्चा मात्र दस से पंद्रह साल ही जिंदा रह पाते हैं।

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चाइल्ड अल्जाइमर के लक्षण क्या हैं? (Child Alzheimer Symptoms)

निमेंन पिक डिजीज-टाइप सी यानी कि बच्चों का अल्जाइमर डेढ़ लाख में से किसी एक बच्चे में देखने को मिलता है। इस लोग के लक्षण बच्चे में लगभग पांच साल की उम्र से नजर आने लगते हैं।

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चाइल्ड अल्जाइमर का कारण क्या है? (Child Alzheimer Causes)

लगभग 95 % से ज्यादा मामलों में बच्चों को अल्जाइमर आनुवंशिक कारणों से होता है। यह माता-पिता में से किसी एक को भी हो सकता है। दो विशेष जीन्स निमेंन पिक डिजीज से प्रभावित होते हैं। ये गुणसूत्र (Chromosome) कोशिकाओं के अंदर महत्वपूर्ण कार्यों को करने के लिए जाने जाते हैं। जिनका लाइसोसम काम न करने से बच्चे में अल्जाइमर के लक्षण नजर आते हैं।

बीमारी का पता लगाने के लिए क्या करते हैं डॉक्टर (Diagnosis of Child Alzheimer)

चिकित्सकों के लिए भी एल्जाइमर बीमारी का पता लगाना काफी मुश्किल होता है। क्योंकि इससे जुड़े कई लक्षण जैसे मेमोरी प्रॉब्लम दिमाग को प्रभावित करता है। ऐसे में चिकित्सक मरीज से बात कर मेडिकल प्रॉब्लम के बारे में जानकारी हासिल करता है और उसी के अनुसार बीमारी का पता लगाता है।

बीमारी का पता लगाने के लिए संभव है कि डॉक्टर कुछ प्रश्न पूछने के साथ लिखित परीक्षा की ही तरह एक खास टेस्ट ले सकता है, ऐसा वो इसलिए करते हैं ताकि मरीज की मेमोरी पावर को जान सकें। इसके अतिरिक्त डॉक्टर चाहें तो कुछ मेडिकल टेस्ट भी कर सकते हैं, इसके तहत सीटी स्कैन, एमआरआई टेस्ट कर दिमाग के डिटेल्ड पिक्चर लेकर उसको देख बीमारी का पता लगाते हैं।

डॉक्टर इन तस्वीरों के जरिए यह देखने की कोशिश करते हैं कि कहीं मरीज को एल्जाइमर डिजीज है या नहीं। एक बार यदि कोई बच्चा या फिर बड़ा अल्जाइमर डिजीज से ग्रसित हो जाता है तो ऐसे में डॉक्टर उसे दवा का सुझाव देते हैं, ताकि उसका दिमाग सुचारू रूप से काम करने लगे और वो सामान्य लोगों के ही समान सोच सके। इसके अलावा डॉक्टर मरीज को कुछ बीमारियों से निपटने के लिए जैसे डिप्रेशन आदि से बचाव के लिए भी दवा दे सकते हैं। यह तमाम दवाइयां एल्जाइमर डिजीज को ठीक नहीं करती बल्कि उसे धीमा जरूर करती हैं। ऐसे में जरूरी है कि बिना डॉक्टरी सलाह लिए इस बीमारी से ग्रसित लोग दवा आदि का सेवन न करें, लक्षण दिखाई देते ही एक्सपर्ट की सलाह लें।

चाइल्ड अल्जाइमर का इलाज कैसे करें? (Child Alzheimer Treatment)

चाइल्ड अल्जाइमर का पता अमूमन चार से पांच साल की उम्र में होता है। जिसके लक्षण सामने आने के बाद पेरेंट्स को मानसिक रोग विशेषज्ञ से मिलना चाहिए । डॉक्टर द्वारा बताए गए टेस्ट और संज्ञानात्मक मूल्याकंन (cognitive assessment) से ही बच्चे में अल्जाइमर का पता चल पाता है। जिसके बाद डॉक्टर दवाओं के साथ स्टैंडर्ड थेरेपी का प्रयोग कर के बच्चे का इलाज करते हैं। लेकिन, दुखद बात यह है कि इस बीमारी का कोई भी सटीक इलाज नहीं है। पीड़ित बच्चा ठीक नहीं हो पाता है।

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चाइल्ड अल्जाइमर (Child Alzheimer) की नई दवा से बढ़ी है उम्मीद

एडुकैनुमैब (Aducanumab) एमीलॉयड (amyloid) नाम के एक प्रोटीन को टारगेट करता है, जो असामान्य रूप से अल्जाइमर के रोगियों के दिमाग में जमा होता जाता है। वैज्ञानिकों का मानना है कि ये मस्तिष्क की कोशिकाओं के लिए विषैले होते हैं और उन्हें साफ करने के लिए दवाओं का उपयोग करना डिमेंशिया के उपचार में बड़ी कामयाबी होगी। पिछले एक दशक से डिमेंशिया के लिए कोई नई दवा विकसित नहीं हुई है। बायोजेन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी माइकल वाउनाटोस ने अल्जाइमर की नई दवा को लेकर कहा कि हम अल्जाइमर रोग के प्रभाव को धीमा करने के लिए रोगियों को पहली थेरेपी देने के लिए आशान्वित हैं।

चाइल्ड अल्जाइमर (Child Alzheimer) होने पर क्या करना चाहिए?

यदि आपको लगता है कि आपके किसी बच्चे को चाइल्ड अल्जाइमर या उससे जुड़ी परेशानी है, तो सबसे बेहतर होगा कि डॉक्टर से बात करें। वह आपको बता सकते हैं कि इन लक्षणों का क्या मतलब है और उनके उपचार के लिए आपके पास क्या विकल्प हैं। चाइल्ड अल्जाइमर के लिए डॉक्टर आपको सही सलाद देता है। कई बार डॉक्टर चाइल्ड अल्जाइमर के लिए थेरेपी देने की बात करते हैं लेकिन इसका इलाज हर किसी के लिए अलग-अलग है। चाइल्ड अल्जाइमर होने पर परेशान होने से बेहतर है कि परिवार से व्यक्ति को सहानूभुति मिले ताकि चाइल्ड अल्जाइमर से पीड़ित बच्चा खुद को अकेला ना समझें।

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चाइल्ड अल्जाइमर में क्या खाएं? (Child Alzheimer Diet)

शुगर (Sugar)

Diabetes

शुगर का नाम लेते ही सबसे पहले मन में मिठास का एहसास होता है। लेकिन, अगर आपके बच्चे को चाइल्ड अल्जाइमर है तो वहीं मिठास आपकी जिंदगी में तकलीफ ला सकता है। फ्रंटियर ऑफ इम्यूनोलॉजी की एक रिसर्च में ये बात सामने आई है कि अगर आप शुगर की अनियमित मात्रा लेते हैं तो बचपन में ही डायबिटीज होने का जोखिम बढ़ जाएगा। साथ ही, शरीर पर शुगर का नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।

वहीं, अमेरिकन जॉर्नल ऑफ क्लीनिकल न्यूट्रिशन के अनुसार ग्लूकोज और सुक्रोज इम्यून सिस्टम को खराब कर देता है। जिससे व्हाइट ब्लड सेल्स को ही इम्यून सिस्टम नष्ट करने लगता है। इसलिए अपने डायट में शुगर की मात्रा को कम करें या बंद करें। उसकी जगह पर आप नेचुरल शुगर ले सकते हैं।

ग्लूटेन

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ग्लूटेन ज्यादातर स्टार्च युक्त भोजन में पाया जाता है। ग्लूटेन गेंहू, जौ, बाजरे आदि में पाया जाता है। ग्लूटेन सेलिएक डिजीज को बढ़ावा देने में अव्वल होता है। इसलिए चाइल्ड अल्जाइमर में ग्लूटेन का सेवन करने से आपको समस्या होगी।

क्लिनिकल गैस्ट्रोएंटेरोलॉजी की एक रिसर्च में पाया गया है कि शरीर में ग्लूटेन की ज्यादा मात्रा होने से चाइल्ड अल्जाइमर होता है। जिसका सेवन न करने से आपको अपने अंदर होने वाले बदलाव नजर आने लगेंगे। साथ ही चाइल्ड अल्जाइमर के लक्षणों में भी कमी आएगी।

समय रहते लें एक्सपर्ट की सलाह

2016 में शोधकर्ताओं ने पाया कि अल्जाइमर के लक्षण शुरुआती दिनों में ही दिखने लगते हैं। वहीं लंबे समय के विराम के बाद फिर से उभरते हैं। चाइल्ड अल्जाइमर के लक्षण सामने आने के बाद पेरेंट्स को घबराना नहीं चाहिए, बल्कि हिम्मत से काम लेते हुए बच्चे को सामान्य महसूस कराना चाहिए। जिससे बच्चा मानसिक रूप से अच्छा महसूस कर सके। वहीं कोशिश करना चाहिए कि जल्द से जल्द डॉक्टरी सलाह ली जाए, वहीं इलाज कराया जाए ताकि बीमारी से जल्द से जल्द निजात पाया जा सके।

हैलो हेल्थ ग्रुप हेल्थ सलाह, निदान और इलाज इत्यादि सेवाएं नहीं देता।

सूत्र

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Shayali Rekha द्वारा लिखित आखिरी अपडेट 3 weeks ago को
और Admin Writer द्वारा फैक्ट चेक्ड
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