home

आपकी क्या चिंताएं हैं?

close
गलत
समझना मुश्किल है
अन्य

लिंक कॉपी करें

बच्चों में मैक्रोसेफली की समस्या को पहचाने ऐसे!

बच्चों में मैक्रोसेफली की समस्या को पहचाने ऐसे!

बच्चों के विकास के शुरुआती सालों में कई बार उन्हें अलग-अलग स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ता है। इन्हीं स्वास्थ्य समस्याओं में से एक गंभीर समस्या है न्यूरोलॉजिकल डिजीज। बच्चों में न्यूरोलॉजिकल डिजीज गंभीर समस्या मानी जाती है, जिसकी वजह से बच्चे के शारीरिक और मानसिक विकास पर सीधा प्रभाव पड़ता है। इन समस्याओं में बच्चे को कई तरह की तकलीफ उठानी पड़ती है। आज हम बात करने जा रहे हैं एक ऐसी ही गंभीर स्थिति के बारे में, जिसका नाम है मैक्रोसेफली (Macrocephaly)। मैक्रोसेफली की समस्या में बच्चे मस्तिष्क पर प्रभाव पड़ता है और इसका सीधा असर बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास पर पड़ता है। आइए जानते हैं बच्चों में मैक्रोसेफली से जुड़ी यह जरूरी जानकारी।

और पढ़ें: म्यूजिक थेरेपी से दूर हो सकती है कोई भी परेशानी?

मैक्रोसेफली (Macrocephaly) क्या है?

मैक्रोसेफली की समस्या कई समस्याओं के लक्षण के तौर पर नज़र आ सकती है, जिसमें बच्चे के शरीर की तुलना में उसका सिर बड़ी साइज का होता है। यह आमतौर पर मस्तिष्क में हो रही कॉन्प्लिकेशन या कंडिशन के लक्षण के तौर पर दिखाई देता है। मैक्रोसेफली (Macrocephaly) को पहचानने के लिए एक स्टैंडर्ड का इस्तेमाल किया जाता है। इस स्टैंडर्ड के मुताबिक मैक्रोसेफली की स्थिति में बच्चे का सिर उसकी एज के मुताबिक 2 गुना बड़ा होता है। यानी उसकी एज के मुताबिक उसके सिर का साइज 98% बड़ा होता है। इस स्थिति की वजह से बच्चे का सिर उसके धड़के तुलना में बेहद बड़ा दिखाई देता है। मैक्रोसेफली की समस्या बच्चे के लिए बेहद तकलीफदेह मानी जाती है, लेकिन इसके होने के पीछे कई कारण जिम्मेदार होते हैं। आइए जानते हैं मैक्रोसेफली की समस्या के क्या कारण हो सकते हैं।

और पढ़ें: गेट ट्रेनिंग: जानिए मांसपेशियों को मजबूत बनाने वाली इस फिजिकल थेरेपी के बारे में

बच्चों में मैक्रोसेफली की समस्या के क्या कारण हो सकते हैं? (Cuases of Macrocephaly)

मैक्रोसेफली की स्थिति आमतौर पर कई स्वास्थ्य समस्याओं के लक्षण के तौर पर देखी जाती है। यह आमतौर पर इन्हेरीटेड कंडिशन मानी जाती है। जब परिवार में सदस्यों का सिर धड़ के मुकाबले बड़ा हो, तो बच्चों के साथ भी भविष्य में यह समस्या हो सकती है। कई बार मैक्रोसेफली (Macrocephaly) की वजह ब्रेन में हो रही कॉम्प्लिकेशन को माना जाता है। जब ब्रेन में जरूरत से ज्यादा फ़्लूइड के जमा होता है, तब ये स्थिति हो सकती है। यह एक अंडर लाइन कंडिशन होती है, जिसका इलाज जल्द से जल्द कराना जरूरी होता है। कई बार एक से अधिक कॉम्प्लिकेशन के चलते भी ब्रेन में जरूरत से ज्यादा फ्लूइड जमा होने लगता है, जिसे तुरंत डॉक्टर द्वारा ठीक कराया जाना चाहिए। इसके अलावा मैक्रोसेफली के कई अन्य कारण भी हो सकते हैं, जैसे –

  • ब्रेन ट्यूमर
  • कुछ प्रकार के इंफेक्शन
  • जेनेटिक सिंड्रोम या मेटाबॉलिक कंडिशन
  • क्रॉनिक हेमेटोमस

और पढ़ें: यदि आपके बच्चे को होती है बोलने में समस्या तो जरूर कराएं स्पीच थेरेपी

इन सभी समस्याओं के चलते बच्चों में मैक्रोसेफली (Macrocephaly) की समस्या देखी जा सकती है। लेकिन बच्चों में मैक्रोसेफली की समस्या को पहचानने के लिए इसके लक्षणों पर ध्यान देना बेहद जरूरी माना जाता है, आइए जानते हैं मैक्रोसेफली के क्या लक्षण बच्चों में दिखाई दे सकते हैं।

बच्चों में मैक्रोसेफली के क्या लक्षण हो सकते हैं? (Symptoms of Macrocephaly)

मैक्रोसेफली की समस्या को समझने के लिए उसके लक्षणों पर ध्यान देना बेहद जरूरी है। कुछ लक्षण आपको तब दिखाई देते हैं, जब मैक्रोसेफली (Macrocephaly) की समस्या की शुरुआत होती है। इसमें आम तौर पर बच्चे का सिर बड़ा दिखाई देने लगता है। लेकिन इसे पहचानना बेहद जरूरी होता है। कुछ अन्य केसेस में बच्चों में डेवलपमेंटल डीले दिखाई देता है या नहीं बच्चा समय के साथ सही तरह से चीजें नहीं सीख पाता। इसमें मेंटल डिसेबिलिटी, रैपिड हेड ग्रोथ, शरीर का धीमा विकास, ऑटिज्म, एपिलेप्सी (Mental Disability, Rapid Head Growth, Slow Body Growth, Autism, Epilepsy) इन सभी समस्याओं से जुड़े हुए लक्षण भी दिखाई दे सकते हैं। इन लक्षणों को पहचानने के बाद आपको तुरंत डॉक्टर से मदद लेनी चाहिए। जितनी जल्दी आप इस समस्या का इलाज शुरू करेंगे, उतनी जल्दी बच्चे की सेहत में सुधार आएगा।

और पढ़ें: क्या सचमुच शारीरिक मेहनत हमारी नींद तय करता है?

क्योंकि मैक्रोसेफली (Macrocephaly) की समस्या अपने साथ कई तरह के रिस्क्स भी लेकर आती है, इसलिए इसके बारे में जानकारी होना बेहद जरूरी है। आइए जानते हैं मैक्रोसेफली के क्या रिस्क हो सकते हैं।

बच्चों में मैक्रोसेफली से जुड़े रिस्क्स कौन से हैं? (Risks of Macrocephaly)

बच्चों में मैक्रोसेफली की समस्या तब होती है जब बच्चे के साथ यह संभावनाएं हो – बच्चे के परिवार में यदि बड़ों को मैक्रोसेफली की समस्या हो, तो जेनेटिकली बच्चों को भी यह समस्या हो सकती है। यह एक इन्हेरीटेड कंडीशन मानी जाती है। साथ ही यदि बच्चा ऑटिज्म से ग्रसित हो, तो उसे मैक्रोसेफली होने की संभावना होती है। इन रिस्क्स को जानने के बाद यह जानना जरूरी है कि मैक्रोसेफली (Macrocephaly) की समस्या का निदान कैसे किया जा सकता है। आइए जानते हैं मैक्रोसेफली की समस्या के निदान के तौर पर आप क्या कर सकते हैं।

कैसे किया जाता है मैक्रोसेफली का निदान? (Diagnosis of Macrocephaly)

मैक्रोसेफली (Macrocephaly) की समस्या को पहचानने का काम पीडियाट्रिशियन कर सकते हैं। यह बच्चे के सिर का मेजरमेंट लेकर इसका एक चार्ट तैयार कर सकते हैं और साथ ही कुछ न्यूरोलॉजिकल टेस्ट भी कर सकते हैं। इसमें आमतौर पर सिटी स्कैन, अल्ट्रासाउंड या एमआरआइ (CT scan, ultrasound, MRI) जैसे टेस्ट किए जाते हैं। क्योंकि मैक्रोसेफली की समस्या एक लक्षण मानी जाती है, इसलिए डॉक्टर सिर पर पड़ रहे दबा की वजह जानने के लिए कुछ लक्षणों पर ध्यान दे सकते हैं, जिसमें, उल्टी, इरिटेशन और सर दर्द इत्यादि शामिल है। डॉक्टर बच्चों में आय प्रॉब्लम पर भी ध्यान दे सकते हैं। इसके लिए बच्चे का न्यूरोलॉजिकल इवैल्यूएशन करने की जरूरत पड़ती है, जो डॉक्टर जरूरत के मुताबिक कर सकते हैं। मैक्रोसेफली की समस्या के निदान के बाद जरूरत पड़ती है इसके ट्रीटमेंट की। यदि समय पर इसका निदान करके ट्रीटमेंट शुरू कर दिया जाए, तो बच्चे की सेहत में सुधार हो सकता है।

मैक्रोसेफली (Macrocephaly)

और पढ़ें: मनोविकृति क्या है? जानिए इसके कारण और उपचार

मैक्रोसेफली की समस्या में क्या ट्रीटमेंट दिया जा सकता है? (Treatment of Macrocephaly)

जैसा कि हमने पहले बताया मैक्रोसेफली की समस्या एक लक्षण है इसलिए इसके पीछे हो रही कॉम्प्लिकेशन को पहचानना बेहद जरूरी है। मैक्रोसेफली का ट्रीटमेंट इसके निदान पर आधारित होता है। अलग-अलग तरह के टेस्ट के जरिए मैक्रोसेफली (Macrocephaly) के पीछे कि कॉम्प्लिकेशन को डॉक्टर पहचान सकते हैं। जिसके बाद बच्चे को हो रही कॉम्प्लिकेशन के आधार पर उसका ट्रीटमेंट शुरू किया जा सकता है। यदि यह कोई न्यूरोलॉजिकल समस्या है, तो इसका इलाज अलग हो सकता है। इस तरह डॉक्टर ही बच्चे की स्थिति को परखने के बाद सही इलाज बता सकते हैं। आपको जानकर हैरानी होगी कि मैक्रोसेफली की समस्या अपने साथ कई तरह के कॉन्प्लिकेशन लेकर आती है, जो बच्चे के स्वास्थ्य को बेहद नुकसान पहुंचा सकती है। इसलिए इसके कॉम्प्लिकेशन के बारे में समझना बेहद जरूरी है।

और पढ़ें : कहीं आप भी तो नहीं कर रहे हैं पैनिक अटैक और एंग्जायटी अटैक को एक समझने की गलती?

क्या हैं बच्चों में मैक्रोसेफली से जुड़ी कॉम्प्लिकेशन? (Complication of Macrocephaly)

मैक्रोसेफली से जुड़े कॉम्प्लिकेशन अलग-अलग तरह के हो सकते हैं। कुछ बच्चों में इससे जुड़े कॉम्प्लिकेशन दिखाई देते हैं, तो वहीं कुछ बच्चों में यह नजर नहीं आते। आमतौर पर मैक्रोसेफली (Macrocephaly) की समस्या में बच्चों में ब्रेन में मौजूद स्टेम्स के संकरे होने की समस्या देखी जाती है, जिसे ठीक करने के लिए डॉक्टर को सर्जरी की जरूरत पड़ सकती है। इसके अलावा मैक्रोसेफली से जुड़ी कॉम्प्लिकेशन में यह समस्या भी देखी जा सकती है, एपिलेप्सी, पेरिनेटल रिस्क फैक्टर, न्यूरोलॉजिकल कोमोरबिडिटी (Epilepsy, Perinatal Risk Factor, Neurological Comorbidity) । यह सभी समस्याएं मैक्रोसेफली की स्थिति में बच्चे को हो सकती है। इसलिए समय रहते मैक्रोसेफली से जुड़े लक्षणों को पहचान कर इस समस्या को सुलझाया जा सकता है।

और पढ़ें : पुरुषों के मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित करने वाले कारणों के बारे में जान लें, ताकि देखभाल करना हो जाए आसान

मैक्रोसेफली की समस्या आम तौर पर शिशु से लेकर बड़े बच्चों में भी दिखाई दे सकती है। यहां तक कि कुछ मामलों में यह बड़ों में भी नजर आती है। यही वजह है कि इसका निदान करना आपके लिए जरूरी माना जाता है। समय पर इस समस्या को पहचान कर इसका इलाज शुरू कराना आपके लिए बेहतर साबित हो सकता है।

हैलो हेल्थ ग्रुप हेल्थ सलाह, निदान और इलाज इत्यादि सेवाएं नहीं देता।

लेखक की तस्वीर badge
Toshini Rathod द्वारा लिखित आखिरी अपडेट कुछ हफ्ते पहले को
Sayali Chaudhari के द्वारा मेडिकली रिव्यूड